बाबा खेतानाथ जी महाराज

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बाबा खेतानाथ जी महाराज बाबा खेतानाथ जी के जीवन वृत्तांत व उन?

1. अहीरवाल क्षेत्र में अनेक महान संत हुए हैं जिन्होंने समाज में ज्ञान, चरित्र और शिक्षा के लिए अविस्मरणीय योगदान दिया है। ( Baba Khetanath ) बाबा गरीबनाथ, बाबा मोहनराम, स्वामी शरणानंद, बाबा जयराम नाथ, बाबा बस्तीनाथ, बाबा रामदेव जैसे अनेक संतों ने समाज को उचित दिशा प्रदान की है। इन संतों में एक महान संत बाबा खेतानाथ हुए हैं, जिन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन समाज के उत्थान में लगा दिया। बाबा खेतानाथ का जन्म अहीरवाल क्षेत्र के सीहमा ग्राम, नारनौल जिला महेन्द्रगढ़ के यदुकुल में रामसिंह यादव एवं मीना देवी के घर कार्तिक सुदी अष्टमी (गोपा अष्टमी) विक्रमी संवत् 1973 सन् 1916 में हुआ। सन् 1932 में वैराग्य भाव के चलते इन्होंने घर त्याग दिया। 1936 में बाबा मस्तनाथ आश्रम, अस्थल बोहर, रोहतक हरियाणा में संत जयलाल नाथ से दीक्षा लेकर संत पथ पर आगे बढ़े। बाबा खेतानाथ ने आजीवन आध्यात्म और समाजोत्थान के कार्य किए। बाबा ने सामाजिक सुधार और जागरूकता का काम आजादी के आंदोलन से शुरू कर दिया। 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन के बाद पूरे देश में स्वतंत्रता प्राप्ति की ललक तेज हो गई थी। ऐसे में बाबा खेतानाथ भी आंदोलन से जुड़ गए और अहीरवाल क्षेत्र में सक्रिय रहे। इसी दौरान कई बार नारनौल, नाभा, पटियाला, भटिंडा और फरीदकोट की जेलों में बंद रहे। आजादी के दिन 15 अगस्त 1947 को नारनौल चौक पर तिरंगा बाबा खेतानाथ ने ही फहराया था। आजादी के बाद भी आध्यात्मिक साधना और समाजोत्थान का काम अनवरत जारी रहा। हरियाणा और राजस्थान में विस्तृत अहीरवाल क्षेत्र महाराज की कर्मस्थली रहा। बाबा खेतानाथ का शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र में विशेष योगदान है। महाराज की प्रथम कर्मस्थली बीजवाड़ चौहान रहा, जहां 1956 में मिडिल स्कूल को उच्च माध्यमिक विद्यालय में क्रमोन्नत कराया और जन सहयोग से उसके भवन का निर्माण कराया। बाबा खेतानाथ ने अपने जीवन काल में अहीरवाल क्षेत्र में विद्यालय, कॉलेज, औषधालय, आश्रम, छात्रावास, प्याऊ, पोखर, मंदिर, कुएं और गोशालाओं का निर्माण कराया। इनमें विद्यालय सर्वाधिक हैं। इनके अतिरिक्त कितनी ही संस्थाओं के निर्माण में इनकी प्रेरणा, सलाह और योगदान रहा। बुराइयों के उन्मूलन के लिए किया कार्य बाबा खेतानाथ सामाजिक बुराइयों जैसे दहेज प्रथा, मृत्युभोज, व्यसन आदि के उन्मूलन के लिए जीवन भर कार्य करते रहे। वे भांग, गांजा और धूम्रपान आदि व्यसनों को पसंद नहीं करते थे और न ही इनका सेवन करते थे। झाड़-फूंक, गंडा-डोरी जैसे अंधविश्वासों से कोसो दूर थे। बाबा की प्रेरणा से अहीरवाल क्षेत्र में अपने बड़े बुजुर्गों की याद में धर्मशालाओं और विद्यालयों में कमरे बनवाने का प्रचलन शुरू हुआ जो आज तक जारी है। बाबा के निर्माण कार्यों को देख कर उन्हें ‘अहीरवाल क्षेत्र का कुम्भा’ कहा जाए तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। आध्यात्मिक क्षेत्र में भी उनका अपना अलग स्थान है, वे हठयोग, सहजयोग, समत्वयोग व अन्य योगिक क्रियाएं करते थे। बाबा खेतानाथ भक्तियोग, ज्ञानयोग और कर्मयोग की त्रिवेणी थे। अहीरवाल क्षेत्र की जनता की मांग पर बाबा ने राजनीतिक भूमिका भी अदा की। बाबा मुण्डावर पंचायत समिति, जिला-अलवर राजस्थान के प्रधान रहे। अंतिम दिनों में बाबा मस्तनाथ आश्रम, जोशीहोड़ा, नीमराणा, जिला-अलवर (राज.) में रहे और 28 दिसम्बर 1990 को ब्रह्मलीन हो गए।. 2. बाबा खेतानाथ एक सच्चे देशभक्त , क्रांतिकारी एव समाजसुधारक थे । जिन्होने जब देश आज़ाद हुआ था तब ऐतिहासिक नगर नारनौल के आजाद चौक में राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा लहराया था मिठाई बांटी थी । उन्होंने 1932 में बड़ी पचेरी के डाक बंगले से अंग्रजो का यूनियन जैक झंडा उतारकर उसे जलाया व अपना राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराया था ततपश्चात वे नेता जी सुभाष चन्द्र बोस की बॉयज रेजिमेंट में बर्मा में आजाद हिंद फौज के घायल सैनिकों को चाय व उनका उपचार करते थे । उसके बाद वे वहां से नेपाल चले गये जहाँ से वे सन्यास धारण कर गुप्त रूप से क्रांतिकारियों की सहायता करते थे । देश की स्वतंत्रता के पश्चात उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में राजस्थान के अलवर जिले व हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले में अपना अभूतपूर्व योगदान दिया उन्होंने अनेको सरकारी विद्यालयों एव कालेजों के निर्माण में अपना योगदान दिया उन्ही की प्रेरणा से स्थानीय लोग गाँवो में धर्मशालाओं के निर्माण कार्यों के लिए प्रेरित हुये वे कन्याओं की शिक्षा के लिये समुदाय को प्रेरित करते थे । इसी से प्रभावित होकर इस स्थान का जीर्णोद्धार एव नवनिर्माण बाबा खेतानाथ जी महाराज के परम शिष्य सिद्ध ब्रह्मलीन योगी अवधूत 1008 बाबा रविनाथ जी महाराज ( खड़ेश्वरी महाराज ) ने करवाया । यह स्थान भी ऐतिहासिक है नसीबपुर -नूनीअवल की प्रसिद्ध लालघाटी जहाँ 1857 का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम हुआ था यह वही स्थान है । आज बाबा जी की प्रेरणा से सभी अनुयायियों ने इस स्थान को शहर का सबसे रमणिक स्थान बना दिया है । प्रातः काल बाबा खेतानाथ पार्क में योगाभ्यास करवाया जाता है । विभिन्न प्रकार के वृक्ष , शक्ति माता मंदिर , शनि मंदिर , जीण माता मंदिर , हनुमान मंदिर ,शिव मंदिर , गुरू गोरखनाथ जी का धूणा , गोशाला और निर्माणाधीनभगवान परशुराम भवन आदि इस स्थान के दर्शनीय स्थल है । भविष्य में निर्धन कन्याओं के निःशुल्क या रियायती दरों पर वैवाहिक कार्यक्रमो के लिये समारोह स्थल प्रस्तावित है । आदेश महाराज जी आदेश । जाग मछेन्द्र गोरख आया । जय बाबा खेतानाथ जी महाराज ।

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