Shri Ram Sena

Shri Ram Sena जय श्री राम - सिर्फ राम भक्त ही इस पेज क?

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17/12/2020

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22/05/2020

#मंदिर_की_पैड़ी
बड़े बुजुर्ग कहते हैं कि जब भी किसी मंदिर में दर्शन के लिए जाएं तो दर्शन करने के बाद बाहर आकर मंदिर की पेडी या ऑटले पर थोड़ी देर बैठते हैं । क्या आप जानते हैं इस परंपरा का क्या कारण है?

आजकल तो लोग मंदिर की पैड़ी पर बैठकर अपने घर की व्यापार की राजनीति की चर्चा करते हैं परंतु यह प्राचीन परंपरा एक विशेष उद्देश्य के लिए बनाई गई । वास्तव में मंदिर की पैड़ी पर बैठ कर के हमें एक श्लोक बोलना चाहिए। यह श्लोक आजकल के लोग भूल गए हैं।
आप इस लोक को सुनें और आने वाली पीढ़ी को भी इसे बताएं।

यह श्लोक इस प्रकार है -

🚩अनायासेन मरणम् ,बिना देन्येन जीवनम्।
🚩देहान्त तव सानिध्यम्, देहि मे परमेश्वरम् ।।

इस श्लोक का अर्थ है-
🔱 अनायासेन मरणम्...... अर्थात बिना तकलीफ के हमारी मृत्यु हो और हम कभी भी बीमार होकर बिस्तर पर पड़े पड़े ,कष्ट उठाकर मृत्यु को प्राप्त ना हो चलते फिरते ही हमारे प्राण निकल जाएं ।

🔱 बिना देन्येन जीवनम्......... अर्थात परवशता का जीवन ना हो मतलब हमें कभी किसी के सहारे ना पड़े रहना पड़े। जैसे कि लकवा हो जाने पर व्यक्ति दूसरे पर आश्रित हो जाता है वैसे परवश या बेबस ना हो । ठाकुर जी की कृपा से बिना भीख के ही जीवन बसर हो सके ।

🔱 देहांते तव सानिध्यम ........अर्थात जब भी मृत्यु हो तब भगवान के सम्मुख हो। जैसे भीष्म पितामह की मृत्यु के समय स्वयं ठाकुर जी उनके सम्मुख जाकर खड़े हो गए। उनके दर्शन करते हुए प्राण निकले ।

🔱 देहि में परमेशवरम्..... हे परमेश्वर ऐसा वरदान हमें देना ।

यह प्रार्थना करें गाड़ी ,लाडी ,लड़का ,लड़की, पति, पत्नी ,घर धन यह नहीं मांगना है यह तो भगवान आप की पात्रता के हिसाब से खुद आपको देते हैं । इसीलिए दर्शन करने के बाद बैठकर यह प्रार्थना अवश्य करनी चाहिए ।
यह प्रार्थना है, याचना नहीं है । याचना सांसारिक पदार्थों के लिए होती है जैसे कि घर, व्यापार, नौकरी ,पुत्र ,पुत्री ,सांसारिक सुख, धन या अन्य बातों के लिए जो मांग की जाती है वह याचना है वह भीख है।

हम प्रार्थना करते हैं प्रार्थना का विशेष अर्थ होता है अर्थात विशिष्ट, श्रेष्ठ । अर्थना अर्थात निवेदन। ठाकुर जी से प्रार्थना करें और प्रार्थना क्या करना है ,यह श्लोक बोलना है।

े_जरूरी_बात
जब हम मंदिर में दर्शन करने जाते हैं तो खुली आंखों से भगवान को देखना चाहिए, निहारना चाहिए । उनके दर्शन करना चाहिए। कुछ लोग वहां आंखें बंद करके खड़े रहते हैं । आंखें बंद क्यों करना हम तो दर्शन करने आए हैं । भगवान के स्वरूप का, श्री चरणों का ,मुखारविंद का, श्रंगार का, संपूर्णानंद लें । आंखों में भर ले स्वरूप को । दर्शन करें और दर्शन के बाद जब बाहर आकर बैठे तब नेत्र बंद करके जो दर्शन किए हैं उस स्वरूप का ध्यान करें । मंदिर में नेत्र नहीं बंद करना । बाहर आने के बाद पैड़ी पर बैठकर जब ठाकुर जी का ध्यान करें तब नेत्र बंद करें और अगर ठाकुर जी का स्वरूप ध्यान में नहीं आए तो दोबारा मंदिर में जाएं और भगवान का दर्शन करें । नेत्रों को बंद करने के पश्चात उपरोक्त श्लोक का पाठ करें।

यहीं शास्त्र हैं यहीं बड़े बुजुर्गो का कहना हैं !
🚩🚩🚩 जय श्रीराम 🏹🏹🏹

✍️विकाश माली जी

--- #राज_सिंह---

22/05/2020

हिन्दू राजाओं के इस्लामिक ताकतों के विरुद्ध महान सैन्य गठबंधन | हिंदू धर्म अपने अनुयायियों द्वारा जीती गई जीत खून ...

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22/05/2020

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 #ज़ी न्यूज़ पर  एक डिबेट चल रहा था  जिसमें  श्री राम मंदिर पर गर्मा गर्म बहस चल रही थी।सपा का  एक नेता  जो नाम से तो हिन्...
13/08/2019

#ज़ी न्यूज़ पर एक डिबेट चल रहा था जिसमें श्री राम मंदिर पर गर्मा गर्म बहस चल रही थी।
सपा का एक नेता जो नाम से तो हिन्दू था, लेकिन........
बार-बार राम मंदिर के अस्तित्व पर सवाल उठा रहा था.
उसके अनुसार अगर श्री राम का मंदिर तोड़ा गया तो इसका जिक्र तुलसीदास ने क्यों नहीं किया...????

प्रश्न वाजिब था...... वास्तव में मुझे भी सोचने पर मजबूर कर दिया था उस बन्दे ने...

खैर तलाश, रिसर्च प्रारम्भ हुआ और मिल भी गया....

पढ़ें *_तुलसीदास जी ने भी बाबरी मस्जिद का उल्लेख किया है!_*

सच ये है कि कई लोग तुलसीदास जी की सभी रचनाओं से अनभिज्ञ हैं और अज्ञानतावश ऐसी बातें करते हैं l
वस्तुतः रामचरित मानस के अलावा तुलसीदास जी ने कई अन्य ग्रंथो की भी रचना की है .

तुलसीदास जी ने #तुलसी_शतक में इस घंटना का विस्तार से विवरण भी दिया है .

हमारे वामपंथी विचारकों तथा इतिहासकारों ने ये भ्रम की स्थिति उत्पन्न की , कि रामचरितमानस में ऐसी कोई घटना का वर्णन नहीं है .
श्री नित्यानंद मिश्रा ने जिज्ञासु के एक पत्र व्यवहार में _*"तुलसी दोहा शतक "*_ का अर्थ इलाहाबाद हाई कोर्ट में प्रस्तुत किया है | हमने भी उन अर्थों को आप तक पहुंचने का प्रयास किया है |
प्रत्येक दोहे का अर्थ उनके नीचे दिया गया है , ध्यान से पढ़ें |

*(1) _मन्त्र उपनिषद ब्राह्मनहुँ बहु पुरान इतिहास ।_*
*_जवन जराये रोष भरि करि तुलसी परिहास ॥_*

श्री तुलसीदास जी कहते हैं कि क्रोध से ओतप्रोत यवनों ने बहुत सारे मन्त्र (संहिता), उपनिषद, ब्राह्मणग्रन्थों (जो वेद के अंग होते हैं) तथा पुराण और इतिहास सम्बन्धी ग्रन्थों का उपहास करते हुये उन्हें जला दिया ।

*(2) _सिखा सूत्र से हीन करि बल ते हिन्दू लोग ।_*
*_भमरि भगाये देश ते तुलसी कठिन कुजोग ॥_*

श्री तुलसीदास जी कहते हैं कि ताकत से हिंदुओं की शिखा (चोटी) और यग्योपवीत से रहित करके उनको गृहविहीन कर अपने पैतृक देश से भगा दिया ।

*(3) _बाबर बर्बर आइके कर लीन्हे करवाल ।_*
*_हने पचारि पचारि जन तुलसी काल कराल ॥_*

श्री तुलसीदास जी कहते हैं कि हाँथ में तलवार लिये हुये बर्बर बाबर आया और लोगों को ललकार ललकार कर हत्या की । यह समय अत्यन्त भीषण था ।

*(4) _सम्बत सर वसु बान नभ ग्रीष्म ऋतु अनुमानि ।_*
*_तुलसी अवधहिं जड़ जवन अनरथ किये अनखानि ॥_*

(इस दोहा में ज्योतिषीय काल गणना में अंक दायें से बाईं ओर लिखे जाते थे, सर (शर) = 5, वसु = 8, बान (बाण) = 5, नभ = 1 अर्थात विक्रम सम्वत 1585 और विक्रम सम्वत में से 57 वर्ष घटा देने से ईस्वी सन 1528 आता है ।)
श्री तुलसीदास जी कहते हैं कि सम्वत् 1585 विक्रमी (सन 1528 ई) अनुमानतः ग्रीष्मकाल में जड़ यवनों अवध में वर्णनातीत अनर्थ किये । (वर्णन न करने योग्य) ।

*(5) _राम जनम महि मंदरहिं , तोरि मसीत बनाय ।_*
*_जवहिं बहुत हिन्दू हते , तुलसी कीन्ही हाय ॥_*

जन्मभूमि का मन्दिर नष्ट करके, उन्होंने एक मस्जिद बनाई । साथ ही तेज गति उन्होंने बहुत से हिंदुओं की हत्या की । इसे सोचकर तुलसीदास शोकाकुल हुये ।

*(6) _दल्यो मीरबाकी अवध मन्दिर रामसमाज ।_*
*_तुलसी रोवत ह्रदय हति त्राहि त्राहि रघुराज ॥_*

मीर बाकी ने मन्दिर तथा रामसमाज (राम दरबार की मूर्तियों) को नष्ट किया । राम से रक्षा की याचना करते हुए विदीर्ण ह्रदय तुलसी रोये ।

*(7) _राम जनम मन्दिर जहाँ तसत अवध के बीच ।_*
*_तुलसी रची मसीत तहँ मीरबाकी खाल नीच ॥_*

तुलसीदास जी कहते हैं कि अयोध्या के मध्य जहाँ राममन्दिर था वहाँ नीच मीर बाकी ने मस्जिद बनाई ।

*(8) _रामायन घरि घट जँह , श्रुति पुरान उपखान ।_*
*_तुलसी जवन अजान तँह , कइयों कुरान अज़ान ॥_*

श्री तुलसीदास जी कहते हैं कि जहाँ रामायण, श्रुति, वेद, पुराण से सम्बंधित प्रवचन होते थे, घण्टे, घड़ियाल बजते थे, वहाँ अज्ञानी यवनों की कुरआन और अज़ान होने लगे।

अब यह स्पष्ट हो गया कि गोस्वामी तुलसीदास जी की इस रचना में जन्मभूमि विध्वंस का विस्तृत रूप से वर्णन किया किया
है!

यह लेख मुझे एक ग्रुप में आया है, आप लोग भी पढ़िये और आगे प्रचार भी करिए।

*_सभी से विनम्र निवेदन है कि सभी देशवासियों को अपने सभ्यता के स्वर्णिम युग के गौरवशाली अतीत के बारे में बताइये..._* 🙏
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सोम सोम दे भरे भण्डार तेरे,मंगल मेहर दा बक्षो दान माताबुध बुद्धि दे विच प्रकाश होवे,वीर वीरता दा बक्षो दान माताशक्र शुकर...
21/11/2017

सोम सोम दे भरे भण्डार तेरे,मंगल मेहर दा बक्षो दान माता
बुध बुद्धि दे विच प्रकाश होवे,वीर वीरता दा बक्षो दान माता
शक्र शुकर कराँ तेरा हर वेले,शनि शांति दे हों सामान माता
एतवार विश्वास यकीन होवे,पूरण कर दो सारे काज माता
हे माता मातेश्वरी सर्व सुखों की खान,माँ देवन वाली एक है मांगत कुल जहान
अज्ज वी तेरा आसरा कल वी तेरी आस,घड़ी घड़ी माँ आसरा ज्येष्ठ बारह मास
मेरी दाती के दरबार में सभी खड़े हत्थ जोड़, माँ देवन वाली एक है मांगत लाख करोड़
ऐ सच्चियाँ जोतां वाली माता तुहाडी सदा ही जय
एत अम्बिका जी हिंगलाज, ज्वाला माँ, तेरा पर्वतां दे विच दरबार माता
सोम सरस्वती, कालका, भद्रकाली, तैनू सिमरदा ए कुल संसार माता
मगल मनसा देवी तू है पिंडरानी, समय समय ते लवें अवतार माता
बुध वीरता दी वरी महान शक्ति, बग्घे शेर ते होवे सवार माता
वीर वैष्णो देवी नैना देवी, लक्खां भक्त दित्ते ने तार माता
शुक्र शक्ति भवानी कृपालु है तू,कई जालिमां नूँ दित्ता है मार माता
शनि शांति रूप महान दुर्गे, तैनू भक्त सिमरन सत्ते वार माता
रूप एक ते नाम अनेक तेरे, तेरे चरणां तो जावाँ बलिहार माता
मेहर करो मातेश्वरी, आये तेरे द्वार,रक्ख लाज दाती आनके
तुझे करते हैं नमस्कार नमस्कार नमस्कार

या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥    अगर आप भी इस पेज से जुड़ना चाहते हैं तो...
21/09/2017

या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥

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🚩जय माता दी🚩

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21/09/2017

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*🚩🌹हैप्पी नवरात्रि मेरे और मेरे परिवार की तरफ से आप सभी को नवरात्रि की हार्दिक बधॉईया और शुभकामनॉए माता रानी का आर्शिवाद आप पर सदा बना रहै 🚩ँ🔱*
*जय माता दी 🔱🚩*
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Shivaaa🙏🏻
04/09/2017

Shivaaa🙏🏻

21/08/2017
21/06/2017

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