Nand Ratan Matrimonial

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Jain, Gupta, Agarwal (Baniya Community) High Class Matrimonial Services
20/08/2021

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04/05/2021

रोचक प्रसँग हनुमान जी महाभारत में
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महाभारत में हनुमान जी ध्वजा के रूप में अर्जुन के रथ पे विराजमान थे, इसलिए अर्जुन के रथ का नाम कपिध्वज रखा गया एक प्रसंग में आता है जब कर्ण के रथ और अर्जुन के रथ में टकराव होता था या कर्ण अर्जुन के रथ पर तीर चलाता था तो अर्जुन का रथ हिलता भी नहीं था और वहीं अर्जुन जब तीर चलता था तो कर्ण का रथ 3-4 कदम पीछे चला जाता था तब अर्जुन श्री कृष्ण भगवान से हँस के कहता था प्रभु नीचे देखो हमारा रथ हिल भी नहीं रहा भगवान बोले नीचे मत देखो ऊपर देखो “तुम ऊपर इसलिए हो रथ के क्यूँकि तुम्हारे ऊपर कोई और है” तो इसलिए जीवन में कभी घमंड या भ्रम में ना रहे हमेशा ऊपर वाले का धन्यवाद करते रहें आपको जीवन में कभी तकलीफ़ें नहीं आयेंगी |
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24/10/2019
ज्येष्ठ के पहले  बड़े   मंगल पर  आप सब  को हार्दिक बधाई एवं शुभ  कामना . महावीर , बजरंगबली ,आप सब की मानोकामना पूर्ण करे....
01/05/2018

ज्येष्ठ के पहले बड़े मंगल पर आप सब को हार्दिक बधाई एवं शुभ कामना . महावीर , बजरंगबली ,आप सब की मानोकामना पूर्ण करे. By: www.nandratan.com

08/12/2016
धैर्य ""एक संत ने एक मनुष्य को कहा कि कठिन समय के दौरान अगर मनुष्य धैर्य से काम लें तो हर समस्या का समाधान निकल सकता है।...
07/09/2016

धैर्य "
"एक संत ने एक मनुष्य को कहा कि कठिन समय के दौरान अगर मनुष्य धैर्य से काम लें तो हर समस्या का समाधान निकल सकता है।
मनुष्य ने पूछा कि क्या धैर्य से छलनी में पानी भरा जा सकता है
संत ने बड़ी नम्रता से जवाब दिया कि अगर पानी का बर्फ बनने तक का धैर्य रखा जाये तो पानी को भी छलनी में भरा जा सकता है।

इन्सान जैसा कर्म करता है कुदरत या परमात्मा उसे वैसा ही उसे लौटा देता है ? एक बार द्रोपदी सुबह तडके स्नान करने यमुना घाट ...
01/09/2016

इन्सान जैसा कर्म करता है कुदरत या परमात्मा उसे वैसा ही उसे लौटा देता है ?

एक बार द्रोपदी सुबह तडके स्नान करने यमुना घाट पर गयी भोर का समय था तभी उसका ध्यान सहज ही एक साधु की ओर गया जिसके शरीर पर मात्र एक लँगोटी थी l साधु स्नान के पश्चात अपनी दुसरी लँगोटी लेने गया तो वो लँगोटी अचानक हवा के झोके से उड पानी मे चली गयी ओर बह गयी l सँयोगवस साधु ने जो लँगोटी पहनी वो भी फटी हुई थी l साधु सोच मे पड़ गया कि अब वह अपनी लाज कैसे बचाए थोडी देर मे सुर्योदय हो जाएगा और घाट पर भीड बढ जाएगी l साधु तेजी से पानी के बाहर आया और झाडी मे छिप गया l

द्रोपदी यह सारा दृश्य देख अपनी साडी जो पहन रखी थी उसमे आधी फाड कर उस साधु के पास गयी ओर उसे आधी साडी देते हुए बोली-तात मै आपकी परेशानी समझ गयी l इस वस्त्र से अपनी लाज ढँक लीजिए l साधु ने सकुचाते हुए साडी का टुकडा ले लिया और आशीष दिया l जिस तरह आज तुमने मेरी लाज बचायी उसी तरह एक दिन भगवान तुम्हारी लाज बचाएगे l

जब भरी सभा मे चीरहरण के समय द्रोपदी की करुण पुकार नारद ने भगवान तक पहुचायी तो भगवान ने कहा-कर्मो के बदले मेरी कृपा बरसती है क्या कोई पुण्य है द्रोपदी के खाते मे l जाँचा परखा गया तो उस दिन साधु को दिया वस्त्र दान हिसाब मे मिला जिसका ब्याज भी कई गुणा बढ गया था l जिसको चुकता करने भगवान पहुच गये द्रोपदी की मद्दद करने l दुस्सासन चीर खीचता गया और हजारो गज कपडा बढता गया l

इँसान यदि सुकर्म करे तो उसका फल सूद सहित मिलता है ओर दुस्कर्म करे तो सूद सहित भोगना पडता ह

*5000 वर्ष बाद बना जन्माष्टमी पर अद्भुत संयोग*                                                इस बार कृष्ण जन्माष्टमी पर...
24/08/2016

*5000 वर्ष बाद बना जन्माष्टमी पर अद्भुत संयोग*
इस बार कृष्ण जन्माष्टमी पर फिर एक बार वही संयोग बनने जा रहा है जो आज से 5000 वर्ष पूर्व भगवान कृष्ण के जन्म पर बना था। इस बार जन्माष्टमी पर अष्टमी उदया तिथि तथा मध्य रात्रि जन्मोत्सव के समय रोहिणी नक्षत्र का संयोग बन रहा है। इस बार श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का पर्व अनूठा संयोग लेकर आ रहा है जब माह, तिथि, वार और चंद्रमा की स्थिति वैसी ही बनी है, जैसी कृष्ण जन्म के समय थी। इस लिहाज से ज्योतिषी इसे अत्यन्त शुभ बता रहे हैं।
5,000 वर्ष पूर्व इन्हीं संयोगों में हुआ था भगवान कृष्ण का जन्म
श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि, बुधवार, रोहिणी नक्षत्र और वृषभ के चंद्रमा की स्थिति में हुआ था। ऐसा योग आज से 58 साल पहले 1958 में भी बना था। 58 साल बाद ऐसा संयोग दोबारा आया है। ज्योतिषियों के अनुसार कृतिका नक्षत्र का काल क्रम 9 घंटे 32 मिनट का होता है। मान्यता है कि भगवान कृष्ण का जन्म अष्टमी की रात्रि रोहिणी नक्षत्र के आरंभ काल के संयोग में हुआ। केवल रोहिणी नक्षत्र की स्थिति में मामूली अंतर भर आया है।
इस बार जन्माष्टमी (25 अगस्त) के दिन सूर्योदय के साथ ही अष्टमी तिथि का आगमन हो रहा है। अष्टमी तिथि 25 अगस्त की रात 8.13 बजे तक रहेगी। इससे पूरे समय अष्टमी तिथि का प्रभाव रहेगा। इसके साथ ही मध्य रात्रि भगवान के जन्मोत्सव के समय रोहिणी नक्षत्र का भी संयोग रहेगा। इससे कृष्ण जन्माष्टमी भगवान कृष्ण के जन्म के समय बनने वाले संयोगों के साथ विशेष फलदायी रहेगी।
विद्वान पंडितों के अनुसार 24 अगस्त बुधवार की रात 10.13 बजे से अष्टमी तिथि का आगमन हो रहा है। इस वजह से तिथि काल मानने वाले बुधवार को भी जन्मोत्सव मनाएंगे, लेकिन गुरुवार उदयाकाल की तिथि में व्रत जन्मोत्सव मनाना शास्त्र सम्मत रहेगा।
पंडितों के अनुसार ऐसा शुभ संयोग बनने से इस बार की जन्माष्टमी खास बन गई है। इस दिन किए गए दान-पुण्य आदि कर्मों का विशेष फल प्राप्त होगा तथा सौभाग्य में बढ़ोतरी होगी|

Jai Jawan Jai kissan...
15/08/2016

Jai Jawan Jai kissan...

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