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19/06/2023

हिंदु राजा और मुस्लिम रानी...

अक्सर हिंदू राजाओ को नीचा दिखाने के लिए जोधा अकबर का झूठा वैवाहिक संबंध इतिहास बता दिया जाता है..

तो आज हम बताते हैं हिन्दू राजा और मुस्लिम लड़कियो के वैवाहिक संबंध बनाने का इतिहास..

1-अकबर की बेटी शहज़ादी खानूम से महाराजा अमर सिंह जी का विवाह।

2-कुँवर जगत सिंह ने उड़ीसा के अफगान नवाब कुतुल खा कि बेटी मरियम से विवाह।

3-महाराणा सांगा मुस्लिम सेनापति की बेटी मेरूनीसा से ओर तीन मुस्लिम लड़किया से विवाह

4 -विजयनगर के सम्राट कृष्ण देव राय का गुजरात के नवाब सुल्तान महमूदशाह की बेटी मिहिरिमा सुल्तान से विवाह।

5-महाराणा कुंभा (अपराजित योद्धा) का जागीरदार वजीर खा की बेटी से विवाह।

6-बप्पा रावल (फादर ऑफ रावलपिंडी) गजनी के मुस्लिम शासक की पुत्री से और 30 से अधिक मुस्लिम राजकुमारीयो से विवाह

7-विक्रमजीत सिंह गोतम का आज़मगढ़ की मुस्लिम लड़की से विवाह।

8-जोधपुर के राजा राजा हनुमंत सिंह का मुस्लिम लड़की ज़ुबेदा से विवाह।

9-चंद्रगुप्त मौर्य का सिकंदर के सेनापति सेल्यूकस निकेटर की बेटी हेलेना से विवाह।

10- कश्मीर के राजा सम्राट ललितादित्य मुक्तापीड़ का तुर्की के खालीफा मुहम्मद बिन क़ासिम की बेटी जैनम से विवाह इसके अलावा उनकी 8 मुस्लिम बीबीया भी थी

11-महाराणा उदय सिंह ने एक मुस्लिम लड़की लाला बाई से विवाह

12-राजा मान सिंह मुस्लिम लड़की मुबारक से विवाह।

13-अमरकोट के राजा वीरसाल का हामिदा बानो से विवाह।

14-राजा छत्रसाल का हैदराबाद के निजाम की बेटी रूहानी बाई से विवाह।

15-मीर खुरासन की बेटी नूर खुरासन का राजपूत राजा बिन्दुसार से विवाह।

ये तो वैवाहिक संबंध की बात हुई अब हिंदू राजाओ की मुस्लिम प्रेमिकाओ पर बात करते हैं

1-अल्लाउदीन खिलजी की बेटी "फिरोजा"" जो जालोर के राजकुमार विरमदेव की दीवानी थी वीरमदेव की युद्ध मै वीरगति प्राप्त होने पर फिरोजा सती हो गयी थी

2-औरंगजेब की एक बेटी ज़ेबुनिशा जो कुँवर छत्रसाल के पीछे दीवानी थी ओर प्रेम पत्र लिखा करती थी ओर छत्रसाल के अलावा किसी ओर से शादी करने से इंकार कर दिया था

3-औरंगजेब की पोती ओर मोहम्मद अकबर की बेटी सफियत्नीशा जो राजकुमार अजीत सिंह के प्रेम की दीवानी थी

4-इल्तुतमिश की बेटी रजिया सुल्तान जो राजपूत जागीरदार कर्म चंद्र से प्रेम करती थी

5-औरंगजेब की बहन भी छत्रपति शिवाजी की दीवानी थी शिवाजी से मिलने आया करती थी।

हिन्दू राजाओ की और भी बहुत सी मुस्लिम बीवीया थी लेकिन वो राज परिवार और कुलीन वर्ग से नहीं थी।
लेकिन उस समय की किताबो में ब्रिटिश और उस समय के कवियों के रचनाओ मैं जिक्र स्पष्ट है

और ब्रिटिश रिकॉर्ड में भी औऱ ज्यादातर हिन्दू राजाओ की एक से ज्यादा मुस्लिम बीवीया थी लेकिन रक्त शुध्दता की वजह से इनके बच्चो को अपनाया नहीं जाता ओर उन बच्चों को वर्णशंकर मान के जागिर दे दी जाती थी

तो ये ऐतिहासिक प्रक्षेप चप्पल की तरह फेंक कर उनके मुह पर अवश्य मारिए जो हिन्दुओ को जोधा अकबर जैसे झूठे ऐतिहासिक तथ्यों पर बहस करते हैं
कभी इनपर भी "बॉलीवुड" फिल्म बनाए

जय श्रीराम 🚩🙏💐❣️
#सनातन_धर्म_सर्वश्रेष्ठ_है

17/06/2023

*क्या है यूनिफॉर्म सिविल कोड*

यूनिफॉर्म सिविल कोड का संबंध सिविल मामलों में कानून की एकरूपता से है। देश के हर व्यक्ति के लिए सिविल मामलों में एक समान कानून यूनिफॉर्म सिविल कोड की मूल भावना है। इसमें धर्म, संप्रदाय, जेंडर के आधार पर भेदभाव की कोई गुंजाइश नहीं होती है। इस कोड के तहत देश के सभी नागरिकों पर विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, पैतृक संपत्तियों में हिस्सा, गोद लेने जैसे मसलों के लिए एक ही कानून होते हैं। समान नागरिक संहिता होने पर धर्म के आधार पर कोई छूट नहीं मिलती।

भारत में फिलहाल धर्म के आधार पर इन मसलों पर अलग अलग कानून हैं। हिंदुओं, मुस्लिमों और ईसाइयों के लिए भारत में संपत्ति, विवाह और तलाक के कानून अलग अलग हैं। अलग अलग धर्मों के लोग अपने पर्सनल लॉ का पालन करते हैं। मुस्लिम, ईसाई और पारसियों का अपना अपना पर्सनल लॉ है। हिंदू सिविल लॉ के तहत हिंदू, सिख, जैन और बौद्ध आते हैं।

यूनिफॉर्म सिविल कोड पर क्या कहता है संविधान...

संविधान के भाग चार में यूनिफॉर्म सिविल कोड का जिक्र किया गया है। संविधान के भाग 4 में अनु्छेद 36 से लेकर 51 तक राज्य के नीति निर्देशक तत्व (Directive Principal of State Policy) को शामिल किया गया है। इसी हिस्से के अनुच्छेद 44 में नागरिकों के लिए यूनिफॉर्म सिविल कोड का प्रावधान है। इसमें कहा गया है "राज्य, भारत के समस्त राज्यक्षेत्र में नागरिकों के लिए एक समान सिविल संहिता प्राप्त कराने का प्रयास करेगा।"

अब सवाल उठता है कि जब संविधान में इसका जिक्र है ही, तो आजादी के बाद इस पर कोई कानून क्यों नहीं बना। दरअसल संविधान के भाग 3 में देश के हर नागरिक के लिए मूल अधिकार की व्यवस्था की गई है, जिसे लागू करना सरकार के लिए बाध्यकारी हैं।

वहीं संविधान के भाग 4 में जिन नीति निर्देशक तत्वों का जिक्र किया गया है, उसे लागू करना सरकार के लिए बाध्यकारी नहीं है। दरअसल इस हिस्से में शामिल प्रावधान लोकतंत्र के आदर्श हैं, जिसे हासिल करने की दिशा में हर सरकार को बढ़ना चाहिए। बाध्यकारी नहीं होने की वजह से ही देश में अब तक यूनिफॉर्म सिविल कोड नहीं बन पाया है।

संविधान सभा में भी हुई थी चर्चा...

संविधान सभा में इस पर व्यापक बहस हुई थी। कुछ सदस्य इसे मूल अधिकार में रखने के पक्ष में भी थे। संविधान सभा में 23 नवंबर, 1948 को इस पर विस्तार से बहस हुई। मोहम्मद इस्माइल, नज़ीरुद्दीन अहमद, महबूब अली बेग साहिब बहादुर, हुसैन इमाम ने समान नागरिक संहिता से जुड़े अनुच्छेद में संशोधन का प्रस्ताव पेश किया।

इन लोगों का कहना था कि सिविल मामलों में हर शख्स को अपने धर्म के मुताबिक आचरण करने की छूट होनी चाहिए। किसी भी वर्ग या समुदाय के लोगों को अपना निजी कानून छोड़ने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए। केएम मुंशी और अल्लादी कृष्णास्वामी अय्यर ने समान संहिता के पक्ष में दलील दी थी।

संविधान निर्माण में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले डॉ. बीआर आंबेडकर भी समान नागरिक संहिता के समर्थन में थे। आंबेडकर का तर्क था कि देश में महिलाओं को समानता का अधिकार दिलाने के लिहाज से धार्मिक आधार पर बने नियमों में सुधार बेहद जरूरी है। आजाद भारत में महिलाओं की स्वतंत्रता और समानता के लिए आंबेडकर ने समान नागरिक संहिता को बेहद जरूरी बताया था। बाद में इसे नीति निर्देशक तत्त्व के अन्दर शामिल कर उस वक्त राज्य को हर कीमत पर लागू करने की संवैधानिक बाध्यता से बचा लिया गया।

*हिंदू, बौद्ध, जैन और सिख के लिए बने कानून...*

मुस्लिम नेताओं के भारी विरोध के कारण देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू समान नागरिक संहिता पर आगे नहीं बढ़े। हालांकि 1954-55 में भारी विरोध के बावजूद हिंदू कोड बिल लेकर आए। हिंदू विवाह कानून 1955, हिंदू उत्तराधिकार कानून 1956, हिंदू दत्तक ग्रहण और भरण पोषण कानून 1956 और हिंदू अवयस्कता और संरक्षकता कानून 1956 लागू हुए। इससे हिंदू, बौद्ध, जैन और सिख समुदायों के लिए शादी, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने जैसे नियम संसद में बने कानून से तय होने लगे। लेकिन मुस्लिम, ईसाई और पारसियों को अपने अपने धार्मिक कानून के हिसाब से शादी, तलाक, उत्तराधिकार जैसे मुद्दे को तय करने की छूट बरकरार रही।

*यूनिफॉर्म सिविल कोड के पक्ष में तर्क...*

इस कोड के पक्षधर लोगों का कहना है कि संविधान की प्रस्तावना में शामिल समानता और बंधुत्व का आदर्श तभी पाया जा सकता है, जब देश में हर नागरिक के लिए एक समान नागरिक संहिता हो। 42वें संविधान संशोधन के जरिए भारतीय संविधान की प्रस्तावना में पंथनिरपेक्ष शब्द जोड़ा गया। इसके तहत सरकार किसी भी धर्म का समर्थन नहीं करेगी।

कोड के पक्ष में दलील दी जाती है कि धार्मिक आधार पर पर्सनल लॉ होने की वजह से संविधान के पंथनिरपेक्ष की भावना का उल्लंघन होता है। संहिता के हिमायती यह मानते हैं कि हर नागरिक को अनुच्छेद 14 के तहत कानून के समक्ष समानता का अधिकार, अनुच्छेद 15 में धर्म, जाति, लिंग के आधार पर भेदभाव की मनाही और अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और निजता के संरक्षण का अधिकार मिला हुआ है।

उनकी दलील है कि यूनिफॉर्म सिविल कोड के अभाव में महिलाओं के मूल अधिकार का हनन हो रहा है। शादी, तलाक, उत्तराधिकार जैसे मुद्दों पर एक समान कानून नहीं होने से महिलाओं के प्रति भेदभाव हो रहा है। इन लोगों का तर्क है कि लैंगिक समानता और सामाजिक समानता के लिए समान नागरिक संहिता होनी ही चाहिए।

पक्ष में तर्क देने वाले लोगों का कहना है कि मुस्लिम समाज में महिलाएं धर्म के आधार पर चल रहे पर्सनल लॉ की वजह से हिंसा और भेदभाव का शिकार हो रही है। इन महिलाओं को बहुविवाह और हलाला जैसी प्रथाओं का दंश झेलना पड़ रहा है।

*यूनिफॉर्म सिविल कोड के विरोध में तर्क...*

अल्पसंख्यक समुदाय के लोग यूनिफॉर्म सिविल कोड का खुलकर विरोध करते आए हैं। आजादी के बाद से ही मुस्लिम समाज इसे उनके निजी जीवन में दखल का मुद्दा मानता रहा है। विरोध में तर्क देने वाले लोगों का कहना है कि संविधान के मौलिक अधिकार के तहत अनुच्छेद 25 से 28 के बीच हर शख्स को धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार मिला हुआ है। इसलिए हर धर्म के लोगों पर एक समान पर्सनल लॉ थोपना संविधान के साथ खिलवाड़ करना है।

मुस्लिम इसे उनके धार्मिक मामलों में दखल मानते हैं। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) हमेशा से यूनिफॉर्म सिविल कोड को असंवैधानिक और अल्पसंख्यक विरोधी बताता रहा है। ये बोर्ड दलील देता है कि संविधान हर नागरिक को अपने धर्म के मुताबिक जीने की अनुमति देता है। इसी अधिकार की वजह से अल्पसंख्यकों और आदिवासी वर्गों को अपने रीति रिवाज, आस्था और परंपरा के मुताबिक अलग पर्सनल लॉ के पालन करने की छूट है।

बोर्ड का तर्क है कि संविधान के अनुच्छेद 371 (A-J) में देश के आदिवासियों को अपनी संस्कृति के संरक्षण का अधिकार हासिल है। अगर हर किसी के लिए समान कानून लागू किया जाएगा तो देश के अल्पसंख्यक समुदाय और आदिवासियों की संस्कृति पर असर पड़ेगा।

*आम सहमति बनाने की है जरूरत...*

समान नागरिक संहिता के रास्ते में वोट बैंक की राजनीति एक बड़ी बाधा रही है। भारत में इस पर आम सहमति बनाने की जरूरत है। मुस्लिम वोट बैंक के नुकसान के डर से शुरू से राजनैतिक दल कभी खुलकर इसके पक्ष में नहीं बोलते है।

कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा था कि राजनीतिक हथकंडा बनाने की बजाय केंद्र सरकार को इस पर गंभीरता से सहमति बनाने की कोशिश करनी चाहिए। देश में इसे लागू करने के लिए संविधान में संशोधन की जरूरत होगी। बीजेपी को संसद से इसे कानून बनाने के रास्ते में आने वाली अड़चनों का अहसास है। वो चाहती है कि धीरे धीरे इस मसले पर लोग आगे आएं और इस पर बहस करें। उसके बाद ही संसद में पूरे देश के लिए एक समान नागरिक संहिता बनाने की पहल की जाए

08/05/2023
14/12/2022
29/08/2022

कल मैंने 550 रु किलो की दर से घी लिया।😋😋😋😋

पिताजी बोले कि हमारे समय में तो इतने रुपए में 'ढ़ेर सारा' घी आ जाता।😎😎😎😎😎

मैंने बोला, पिताजी ढ़ेर_सारा यानी क्या? उदाहरण देकर समझाइये।🤔🤔🤔🤔🤔

मेरी बात सुन पिताजी शांत रह गए।😐😐😐😐

मैंने फिर पूछा, पिताजी ढ़ेर_सारा मतलब क्या?🤔🤔🤔🤔

पिताजी कुछ नहीं बोले, बस चुपचाप छत पर आ गए।
ऊपर आकर वो शांति से बैठे, पानी पिया फिर बोले...😎😎😎😎

बेटा, 'ढ़ेर सारा' यानि बहुत_सा...

उदाहरण देकर कहूँ तो हमारे समय में इतने रुपए में इतना घी आ जाता कि पूरा मोहल्ला एक एक कटोरी घी पी लेता 🤤🤤🤤🤤

मैं बोला... पिताजी, ये उदाहरण तो आप नीचे भी दे सकते थे ?🤓🤓🤓🤓

बेटा, नीचे बहुत भीड़ थी और "भीड़ को उदाहरण समझ नही आता है।"😏😏😏😏😏😏

मैं बोला, पिताजी में समझा नही...
'भीड़ को उदाहरण' क्यों समझ नही आता ?🤔🤔🤔🤔🤔🤔

पिताजी बोले... एक बार मोदी जी ने कहा था कि "विदेशों में हमारे देश का बहुत पैसा जमा है।"😎😎😎😎😎

भीड़ ने कहा कि... कितना?🤔🤔🤔🤔🤔

तो मोदी जी ने उदाहरण देकर समझाया, "इतना कि पूरा पैसा अगर वापस आ जाए तो सभी के हिस्से में 15-15 लाख आ जाए।"💸💷
बस सुनने वालों की भीड़ तभी से "15 लाख" मांग रही है।💸💷💴

और ये उदाहरण अगर मैं नीचे देता तो हो सकता है कि कल कई लोग अपनी अपनी कटोरी लेकर घी मांगने आ जाते।
😃😂😂😂😂

27/08/2022

जब आप फुर्सत मे हों , तब पढ़ लीजियेगा , किंतु पढ़ना धैर्य और शांति से , फिर निष्कर्ष निकलना❗️
_2021_ BJP
Vs
Congress + Left + BSP + SP + TDP + RJD + Shiv Sena + TMC + DMK + AAP + NDTV + ABP NEWS + Scroll + The Wire + Award Wapsi Gang + JNU + Pakistan + China
मोदी जी को हिंदू और मुसलमान दोनों हटाना चाहते हैं , किंतु दोनों के बीच अंतर देखिये : *हिन्दू पेट्रोल का दाम देख रहा है* और *मुसलमान रोहिंग्या मुसलमान को*❗️
• हिन्दू जी एस टी से रूठे हैं और कांग्रेस को लाना चाहते हैं और मुसलमान भारत को इस्लामी राष्ट्र बनाना चाहते हैं , इसलिए कांग्रेस को लाना चाहते हैं ! कारण जो भी हो उद्देश्य सबका एक ही है !l
• भारत में बहुत से लोग हैं , जो भ्रष्ट नेताओं की बातों में आकर , नरेन्द्र मोदी का विरोध करते हैं ! अच्छा है , लोकतंत्र है विरोध करें या समर्थन , ये तो आपका अपना हक है , पर मोदी का विरोध करके , आप समर्थन किसका कर रहे हैं , ये बडा गंभीर सवाल है , इसलिए निर्णय भी गंभीरता पूर्वक ही होना चाहिये !l
• क्या ..; मुलायम , लालू , मायावती , सोनिया , राहुल , केजरीवाल , ममता बनर्जी , वामपंथी .; ये सब नरेन्द्र मोदी से बेहतर हैं या इनका रिकॉर्ड बेहतर है❓
• क्या , नरेन्द्र मोदी के गुजरात के मुख्यमंत्रीकाल की तुलना मे ममता बनर्जी , अखिलेश आदि का कार्यकाल बेहतर नजर आता है❓तुलना करनी है , तो गुजरात के किसी छोटे शहर मे जाकर , एक नजर मार लीजिये और फिर इन अन्य राज्यों की राजधानी का भ्रमण कीजिये !l
• राजनीति मे प्रवेश के समय लालू और मुलायम , दोनों के घर की स्थिति ऎसी थी , कि इनके पास साइकिल और लालटेन खरीदने तक के पैसे नहीं थे , जाति के नाम पर चलने वाले ये नेता आज अरबपति हैं , रामगोपाल चार्टर्ड प्लेन में घूमता है , तो शिवपाल ऑडी मे , कहां से आया इतना अकूत धन , क्या ये लोग नरेन्द्र मोदी से बेहतर हैं❓
• सोनिया जी के बेटा - बेटी और दामाद , आज सभी अरबपति है , क्या ये नरेन्द्र मोदी से बेहतर हैं❓
• क्या 35 साल बंगाल में राज करने वाले वामपंथी , नरेन्द्र मोदी से बेहतर हैं ❓
• पांच साल केजरीवाल ने विज्ञापन चलाकर , दिल्ली के लोगों को चूना लगाया , WIFI , CCTV , 150 कॉलेज , 500 स्कूल , क्या ये कुकुरमुत्ता नरेंद्र मोदी से बेहतर है❓
• जब मायावती राजनीती करने निकली थी और काशीराम की साथी थी , तब उसके घर में दिया जलाने का धन नहीं था , साईकल से प्रचार करती थी , आज उसका सैंडल भी प्लेन से आता है , उसके भाई के पास 497 कंपनियां हैं , क्या ये नरेंद्र मोदी से बेहतर है❓
• मोदी का विरोध करने वालों , विरोध करो , पर समर्थन किसका करना है , ये तो तय करो , कोई बेहतर विकल्प हो , तो बताना ! थोड़ा देश का भी सोचो , कितना बर्बाद करवाना है , कितना लूटवाना है❓ बाहर निकलो जातियो के बंधनों से , इसे उबारकर ये लूटेरे , हमे ही लूटते हैं❗️
● मुझे नहीं मालूम , कि मैं मोदी को क्यों पसंद करता हूं , लेकिन मेरे पास कांग्रेस , सपा , बसपा , आप को नापसंद करने के बहुत कारण हैं❗️
● मुझे नहीं मालूम , कि अच्छे दिन आयेंगे या नहीं , पर मोदी जी के अतिरिक्त और कोई राजनेता दूर - दूर तक दिखाई नहीं देता , जो भारत के अच्छे दिनों के लिए तन और मन से प्रयत्न करता हो !l
● मुझे ये भी नहीं मालूम , कि मोदी जी भारत को हिन्दू राष्ट्र बना पायेंगे या नहीं , लेकिन ये पूरा यकीन हैं , कि वो पूरी संजीदगी और गंभीरता से भारत माता को पुनः विश्वगुरु का दर्जा दिलवाने हेतु प्रयासरत हैं !l
● मुझे फर्क नहीं पड़ता , कि मोदी जी के पास इतिहास की जानकारी है या नही , पर *मुझे पक्का यकीन है , कि उनके पास भविष्य की पूरी तैयारी है*‼️
जय भारत ।।।
कम से कम 100 लोगो को भेजे ‼️
🙏🏻🙏🏻🙏🏻🕉️🙏🏻🙏🏻🙏🏻

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पंजीकृत कार्यालय श्री सिध्द हनुमान मंदिर K-ब्लाक ITI मोड जहांगीरपुरी दिल्ली/110042
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