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03/04/2025
माँ का नाम कात्यायनी कैसे पड़ा इसकी भी एक कथा है- कत नामक एक प्रसिद्ध महर्षि थे। उनके पुत्र ऋषि कात्य हुए। इन्हीं कात्य ...
03/04/2025

माँ का नाम कात्यायनी कैसे पड़ा इसकी भी एक कथा है- कत नामक एक प्रसिद्ध महर्षि थे। उनके पुत्र ऋषि कात्य हुए। इन्हीं कात्य के गोत्र में विश्वप्रसिद्ध महर्षि कात्यायन उत्पन्न हुए थे। इन्होंने भगवती पराम्बा की उपासना करते हुए बहुत वर्षों तक बड़ी कठिन तपस्या की थी। उनकी इच्छा थी माँ भगवती उनके घर पुत्री के रूप में जन्म लें। माँ भगवती ने उनकी यह प्रार्थना स्वीकार कर ली।
कुछ समय पश्चात जब दानव महिषासुर का अत्याचार पृथ्वी पर बढ़ गया तब भगवान ब्रह्मा, विष्णु, महेश तीनों ने अपने-अपने तेज का अंश देकर महिषासुर के विनाश के लिए एक देवी को उत्पन्न किया। महर्षि कात्यायन ने सर्वप्रथम इनकी पूजा की। इसी कारण से यह कात्यायनी कहलाईं।

आज चैत्र नवरात्र का तीसरा दिन है. यह साहस और आत्मविश्वास पाने का दिन है. इस दिन हर तरह के भय से मुक्ति के लिए माता चंद्र...
01/04/2025

आज चैत्र नवरात्र का तीसरा दिन है. यह साहस और आत्मविश्वास पाने का दिन है. इस दिन हर तरह के भय से मुक्ति के लिए माता चंद्रघण्टा की पूजा की जाती है. जिन लोगों की कुंडली में मंगल कमजोर है, उनके लिए माता चंद्रघण्टा की पूजा विशेष होती है. नवरात्रि के तीसरे दिन विशेष साधना से व्यक्ति निर्भय हो जाता है. ऐसा माना जाता है कि माता चंद्रघंटा की पूजा से ना सिर्फ भय से मुक्ति मिल जाती है. बल्कि साहस और शक्ति में भी अपार वृद्धि होती है. नवदुर्गा के इस स्वरूप की उपासना से जन्म-जन्मांतर के पाप और कष्टों से मुक्ति मिल जाती है.

मां चंद्रघंटा का मंत्र जाप

1) पिण्डजप्रवरारूढ़ा ण्डकोपास्त्रकेर्युता.
प्रसादं तनुते मह्यं चंद्रघण्टेति विश्रुता॥

2) या देवी सर्वभूतेषु मां चंद्रघंटा रूपेण संस्थिता.
नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमो नम:।।

3) वन्दे वांछित लाभाय चन्द्रार्धकृत शेखरम्।
सिंहारूढा चंद्रघंटा यशस्वनीम्॥

4) मणिपुर स्थितां तृतीय दुर्गा त्रिनेत्राम्।
रंग, गदा, त्रिशूल,चापचर,पदम् कमण्डलु माला वराभीतकराम्॥

🙏चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन देवी दुर्गा के दूसरे स्वरूप, मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। इस दिन उनकी पूजा से जीवन ...
31/03/2025

🙏चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन देवी दुर्गा के दूसरे स्वरूप, मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। इस दिन उनकी पूजा से जीवन की सभी परेशानियां और संकट दूर होते हैं। मां ब्रह्मचारिणी को ज्ञान, तपस्या और वैराग्य की देवी माना जाता है। 'ब्रह्म' का अर्थ है तपस्या और 'चारिणी' का अर्थ है आचरण करने वाली। मां ब्रह्मचारिणी वे देवी हैं, जो कठोर तपस्या और ब्रह्मचर्य का पालन करती हैं। मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से व्यक्ति के अंदर त्याग, सदाचार और संयम की भावना बढ़ती है। यह पूजा जीवन की कठिनाइयों और बाधाओं से मुक्ति दिलाती है।

मां ब्रह्मचारिणी का पूजा मंत्र

दधाना करपद्माभ्याम्, अक्षमालाकमण्डलू।
देवी प्रसीदतु मयि, ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा।।
ओम ऐं ह्रीं क्लीं ब्रह्मचारिण्यै नम:
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते।।

देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों में शैलपुत्री को प्रथम माना जाता है। हिमालय की पुत्री के रूप में जन्म लेने के कारण देवी का ना...
30/03/2025

देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों में शैलपुत्री को प्रथम माना जाता है। हिमालय की पुत्री के रूप में जन्म लेने के कारण देवी का नाम शैलपुत्री पड़ा। कथा के अनुसार दक्ष प्रजापति ने यज्ञ का आयोजन किया। उसमें समस्त देवताओं को आमंत्रित किया किंतु भगवान शिव को नहीं बुलाया। सती यज्ञ में जाने के लिए आतुर हो उठीं। भगवान शिव ने बिना निमंत्रण यज्ञ में जाने से मना किया लेकिन सती के प्रबल आग्रह पर उन्होंने अनुमति दे दी। वहां जाने पर सती का अपमान हुआ। इससे दुखी होकर सती ने स्वयं को यज्ञाग्नि में भस्म कर लिया। तब भगवान शिव ने क्रोधित होकर यज्ञ को तहस नहस कर दिया। वही सती अगले जन्म में शैलराज हिमालय की पुत्री के रूप में जन्मीं और शैलपुत्री कहलाईं। काशी खंड में इनका स्थान मढ़िया घाट बताया गया है जो वर्तमान में अलईपुर क्षेत्र में है।

मां शैलपुत्री बीज मंत्र-

या देवी सर्वभूतेषु मां शैलपुत्री रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥🙏

23/11/2024

🙏ॐ 🙏
वास्तु शास्त्र में, उत्तर दिशा की ओर रुख उस ऊर्जा से जुड़ा है जो धन और प्रचुरता की ओर ले जाती है।
इस दिशा को पानी की दिशा भी कह सकते है।

23/11/2024

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11/10/2023

केतु शुभ हो तो व्यक्ति को रंक से राजा बना देता है, वहीं जब ये अशुभ होता है तो एक पल में राजा को भी रंक बनाकर छोड़ता है। केतु को मान, अपमान, दुर्घटना, घबडाहट, उलझन, आर्थिक तंगी और उत्साहहीन का कारक बताया गया है।

28/09/2023

बृहस्पति भाग्य, सफलता और उदारता का ग्रह है। बृहस्पति विशाल, बड़ी सोच वाला, स्वस्थ, धनवान और शक्तिशाली, उपलब्धि और सफलता का स्वामी है।

17/09/2023

बुजुर्गों, असहायों और बड़ों का अनादर करने से भी शनि देव नाराज होते हैं। इन लोग में से किसी का भी अपमान करने से शनि देव की क्रूर दृष्टि का सामना करना पड़ता है।

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