08/06/2020
श्री मते रामानुजाय नम:। सर्वेभ्यो नम:। आज हम ज्योतिष की परिभाषा और महत्व पर चर्चा करेंगे सर्वप्रथम तो यही हम विचारें कि,ज्योतिष किसे कहते है?
तो शास्त्रों मे कहा है 'ज्योतिषां सूर्यादि ग्रहाणां बोधकं शास्त्र्म' अर्थात् ग्रह ( नवग्रह, नक्षत्र, धूमकेतु आदि) और समय का ज्ञान कराने वाले विज्ञान को ज्योतिष कहते है ज्योतिष- ज्युतृ दीप्तौ,अर्थात ज्योति(दीप्ति) प्रदान करने वाला अर्थात समय को प्रकाशीत करने वाले विज्ञान को ज्योतिष कहते हैं। एक तरह से यह रास्ता बतलाने वाला शास्त्र है।वेदचक्षु: किलेदं स्मृतं ज्योतिषं,,,,,,,कहके ज्योतिष शास्त्र को वेद का नेत्र कहा गया है।हमे सबको पता है कि घटनाओ का आधार समय है और इस समय चक्र को ठीक से देखजानकर ही समयोचित क्रिया कर्म किये जा सकते है।चाहे वह शास्त्रीय हो या अन्य प्रायोगिक हो,देश और काल मे काल भी एक महत्वपूर्ण अंग है।अत: काल की गति को दिखाने वाला होने से ज्योतिष को नेत्र कहा गया है,मै सिर्फ वेद का ही नही प्रकृति का भी नेत्र ज्योतिष को मानता हू। इस ज्योतिष विद्या का जिन शास्त्रों से अध्ययन किया जाता हे वे ज्योतिष शास्त्र कहलाते है।जिनमे ऋग्वेद से लेकर ऋग्ज्योतिष,,यजुर्वेद से याजुष ज्योतिष,अथर्व वेद से अथर्व ज्योतिष,,तथा पुराणो मे भी नारद पुराण ,गरुड पुराण,अग्निपुराण,विष्णु पुराण,आदि है।इनके उपदेष्टा ऋषी देवादि यथा -सूर्य,ब्रह्मा,व्यास,वसिष्ठ,अत्रि,पराशर,कश्यप,नारद,गर्ग,मरीचि,मनु,अन्गिरा,रोमश,पौलिश,च्यवन,यवन,भृगु,शौनक आदि श्रेष्ठ ज्ञाता रहे है।अर्वाचीन समय के भी कई ज्योतिष आचार्य है जिन्होने अपने अनमोल ग्रंथों से ज्योतिषशास्त्र को समृद्ध किया। अस्तु नित्य,नैमित्तिक,काम्य सभी कर्मो,यज्ञ,संस्कार दान,प्रतिगृह,अध्ययन,अध्यापन इत्यादि सभी भौतिक आध्यात्मिक कर्मो मे उत्तम समय के ज्ञान की आवश्यकता की पूर्ति ज्योतिषशास्त्र द्वारा होती है।संग्रह-त्याग से भी लाभ ज्योतिष के द्वारा सम्यकतया होता है।आर्त समय का ज्ञान ,दुर्देव का ज्ञान होके उससे रक्षा के उपाय भी ज्योतिष द्वारा सम्भव है।कईलोग ज्योतिष को अनुमान शास्त्र कहते है,परंतु वास्तव मे ज्योतिष प्रत्यक्ष शास्त्र है।जेसे नेत्रहीन को कार्यों मे सफलता सशंकित रहती है वैसे ही बिना ज्योतिष के वैदिक पौराणिक कर्मो की सफलता सशंकित ही है,अत: ज्योतिष का सभी वेदांगों मे अतीव महत्व है।शास्त्रो मे ज्योतिषी को ब्रह्मलोक सूर्य लोक आदि दिव्य लोकों मे गमन का अधिकारी माना गया है।बृहत्संहिता मे तो यहां तककहा है कि-
अन्यानि शास्त्राणि विनोद मात्रं ,न किन्चिदेषां भुविदृष्टमस्ति।चिकित्सितज्योतिषमन्त्रवादा:,पदेपदे प्रत्ययमावहन्ति।।
अर्थात् अन्य शास्त्र तो विनोद मात्र है,इनका इस पृथ्वी पर कोइ दृष्टांत नहीं दिखाई देता,किन्तु चिकित्सा शास्त्र,ज्योतिष शास्त्र,और मंत्र शास्त्र,तो पद पद पर विश्वास दिलाने वाले है,यानी प्रत्यक्ष प्रमाण देते है।
अस्तु अत: हम सभी सनातनी (हिन्दू)ही नही अपितु सम्पूर्ण मानव जाति आयुर्वेद और योग तथा मंत्र शास्त्र की तरह ज्योतिष से भी लाभान्वित हो ,और कल्याण की भागी हो यही शुभ मंगल आशायें है,इन्ही आशाओं से अपने यथा प्राप्त ज्ञान को वितरित करने का हम प्रयास करते है।
धन्यवाद।
आपका सत्यसखा(श्री मद्रामानुजमधुरकवि दासानुदासपं. सत्यनारायणाचार्य शर्मा)9179594898,7987319103