सत्यसन्तुष्टि ज्योतिष कार्यालय

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जय श्री मन्नारायण,,🌹🙏🌹कार्यालय की गतिविधि जानने के लिए या अपने किसी प्रश्न के लिए आप 091795 94898  पर व्हाट्सएप कर सकते ...
17/09/2023

जय श्री मन्नारायण,,🌹🙏🌹कार्यालय की गतिविधि जानने के लिए या अपने किसी प्रश्न के लिए आप 091795 94898 पर व्हाट्सएप कर सकते है।,

जय श्री मन्नारायण🌹🙏🏻🌹ऑनलाइन संस्कृत कक्षाएं पुन: शुरू होने वाली है।केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय में प्रवेश प्रारंभ हो ...
09/09/2023

जय श्री मन्नारायण🌹🙏🏻🌹
ऑनलाइन संस्कृत कक्षाएं पुन: शुरू होने वाली है।केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय में प्रवेश प्रारंभ हो चुका है।आशा है सभी सनातनी(हिंदू) जन, अपने धर्म की मूल भाषा संस्कृत भाषा को यह ऑनलाइन फॉर्म भरकर न्यूनतम वार्षिक शुल्क पर कक्षाएं अटेंड करते हुए सीख लेंगे,और अपनी भारतीय संस्कृति के सनातन धर्म, तथा देव भाषा संस्कृत को जानेंगे समझेंगे और आचरण करके जीवन को आनंदमय बना लेंगे।लिंक नीचे दिया है

https://sanskritnfse.samarth.edu.in/
🙏🏻🌹🙏🏻

(Non-Formal Sanskrit Education)५६-५७, इंस्टीटूशनल एरिया, जनकपुरी, नवदेहली-११००५८

08/06/2020

श्री मते रामानुजाय नम:। सर्वेभ्यो नम:। आज हम ज्योतिष की परिभाषा और महत्व पर चर्चा करेंगे सर्वप्रथम तो यही हम विचारें कि,ज्योतिष किसे कहते है?
तो शास्त्रों मे कहा है 'ज्योतिषां सूर्यादि ग्रहाणां बोधकं शास्त्र्‌म' अर्थात् ग्रह ( नवग्रह, नक्षत्र, धूमकेतु आदि) और समय का ज्ञान कराने वाले विज्ञान को ज्योतिष कहते है ज्योतिष- ज्युतृ दीप्तौ,अर्थात ज्योति(दीप्ति) प्रदान करने वाला अर्थात समय को प्रकाशीत करने वाले विज्ञान को ज्योतिष कहते हैं। एक तरह से यह रास्ता बतलाने वाला शास्त्र है।वेदचक्षु: किलेदं स्मृतं ज्योतिषं,,,,,,,कहके ज्योतिष शास्त्र को वेद का नेत्र कहा गया है।हमे सबको पता है कि घटनाओ का आधार समय है और इस समय चक्र को ठीक से देखजानकर ही समयोचित क्रिया कर्म किये जा सकते है।चाहे वह शास्त्रीय हो या अन्य प्रायोगिक हो,देश और काल मे काल भी एक महत्वपूर्ण अंग है।अत: काल की गति को दिखाने वाला होने से ज्योतिष को नेत्र कहा गया है,मै सिर्फ वेद का ही नही प्रकृति का भी नेत्र ज्योतिष को मानता हू। इस ज्योतिष विद्या का जिन शास्त्रों से अध्ययन किया जाता हे वे ज्योतिष शास्त्र कहलाते है।जिनमे ऋग्वेद से लेकर ऋग्ज्योतिष,,यजुर्वेद से याजुष ज्योतिष,अथर्व वेद से अथर्व ज्योतिष,,तथा पुराणो मे भी नारद पुराण ,गरुड पुराण,अग्निपुराण,विष्णु पुराण,आदि है।इनके उपदेष्टा ऋषी देवादि यथा -सूर्य,ब्रह्मा,व्यास,वसिष्ठ,अत्रि,पराशर,कश्यप,नारद,गर्ग,मरीचि,मनु,अन्गिरा,रोमश,पौलिश,च्यवन,यवन,भृगु,शौनक आदि श्रेष्ठ ज्ञाता रहे है।अर्वाचीन समय के भी कई ज्योतिष आचार्य है जिन्होने अपने अनमोल ग्रंथों से ज्योतिषशास्त्र को समृद्ध किया। अस्तु नित्य,नैमित्तिक,काम्य सभी कर्मो,यज्ञ,संस्कार दान,प्रतिगृह,अध्ययन,अध्यापन इत्यादि सभी भौतिक आध्यात्मिक कर्मो मे उत्तम समय के ज्ञान की आवश्यकता की पूर्ति ज्योतिषशास्त्र द्वारा होती है।संग्रह-त्याग से भी लाभ ज्योतिष के द्वारा सम्यकतया होता है।आर्त समय का ज्ञान ,दुर्देव का ज्ञान होके उससे रक्षा के उपाय भी ज्योतिष द्वारा सम्भव है।कईलोग ज्योतिष को अनुमान शास्त्र कहते है,परंतु वास्तव मे ज्योतिष प्रत्यक्ष शास्त्र है।जेसे नेत्रहीन को कार्यों मे सफलता सशंकित रहती है वैसे ही बिना ज्योतिष के वैदिक पौराणिक कर्मो की सफलता सशंकित ही है,अत: ज्योतिष का सभी वेदांगों मे अतीव महत्व है।शास्त्रो मे ज्योतिषी को ब्रह्मलोक सूर्य लोक आदि दिव्य लोकों मे गमन का अधिकारी माना गया है।बृहत्संहिता मे तो यहां तककहा है कि-
अन्यानि शास्त्राणि विनोद मात्रं ,न किन्चिदेषां भुविदृष्टमस्ति।चिकित्सितज्योतिषमन्त्रवादा:,पदेपदे प्रत्ययमावहन्ति।।
अर्थात् अन्य शास्त्र तो विनोद मात्र है,इनका इस पृथ्वी पर कोइ दृष्टांत नहीं दिखाई देता,किन्तु चिकित्सा शास्त्र,ज्योतिष शास्त्र,और मंत्र शास्त्र,तो पद पद पर विश्वास दिलाने वाले है,यानी प्रत्यक्ष प्रमाण देते है।
अस्तु अत: हम सभी सनातनी (हिन्दू)ही नही अपितु सम्पूर्ण मानव जाति आयुर्वेद और योग तथा मंत्र शास्त्र की तरह ज्योतिष से भी लाभान्वित हो ,और कल्याण की भागी हो यही शुभ मंगल आशायें है,इन्ही आशाओं से अपने यथा प्राप्त ज्ञान को वितरित करने का हम प्रयास करते है।
धन्यवाद।
आपका सत्यसखा(श्री मद्रामानुजमधुरकवि दासानुदासपं. सत्यनारायणाचार्य शर्मा)9179594898,7987319103

07/11/2018

रोशनी का यह त्योहार आपकी दुनिया को रोशन बनाए रखे 🌏

दूर शहर स्थित लोगों के लिए कार्यालय द्वारा न्यूनतम मूल्य में कूरियर से जन्म कुंडलियों की घर पहुंच सेवा
05/10/2018

दूर शहर स्थित लोगों के लिए कार्यालय द्वारा न्यूनतम मूल्य में कूरियर से जन्म कुंडलियों की घर पहुंच सेवा

सभी को जय श्रीमन्नारायण !आज हम श्राद्ध पक्ष के अपने एक अनुष्ठान के अनुभव को आप सब से बांट रहे हैं। श्राद्ध पक्ष में पितर...
03/01/2018

सभी को जय श्रीमन्नारायण !आज हम श्राद्ध पक्ष के अपने एक अनुष्ठान के अनुभव को आप सब से बांट रहे हैं। श्राद्ध पक्ष में पितरों के कल्याणार्थ कार्यालय के द्वारा कई जगह श्रीमद्भागवत महापुराण का मूल पाठ संपन्न कराया जाता है, इसी के अंतर्गत गत श्राद्ध पक्ष में मध्य प्रदेश के इंदौर जिले के अंतर्गत सांवेर तहसील में शिवपुरा खेड़ा नाम के गांव में दिनांक 9 सितंबर 2017 से विधिवत मूल पाठ आरंभ किया गया और उन पितरों के निमित्त जो स्थाई रूप से स्थान बनाकर बिठाए गए थे उनकी प्रतिमाओं के पास पूजन पूर्वक चल प्रतिमा बनाकर उन्हें मंडल स्थान पर श्रीमद्भागवत का पाठ श्रवण कराया गया उसी के दौरान सर्प योनि में गए पितरों ने सर्प रुप में ही उसी स्थिर स्थान पर प्रत्यक्ष होकर अपनी उपस्थिति का घंटो तक साक्षात्कार कराया। पाठ के दौरान भी सतत नाग पीठ मंडल पर अदृश्य रूप में सर्प की अनुभूति होती रही और मूल स्थान पर प्रत्यक्ष रुप से सर्प रूप में पितृ बैठे रहे ।अनुष्ठान, रोग-शोक और अर्थ हानियों के मद्देनजर रखते हुए जन्म कुंडलियों में कालसर्प दोष व सर्पशाप तथा तत्जन्य पितृ दोष के निवारण के दृष्टिकोण से रखा गया था और उसमें तत्तत् सफलताएं प्राप्त हुई अतः यह उक्ति अनुभवजन्य और मान्य है कि ,सभी योनियों में गए पितरों का कल्याण या उनको शांति श्रीमद्भागवत के मूल पाठ से प्राप्त होती है। इस विषय में चार पांच बार हमारे अनुभव में आए हुए घटनाक्रम प्रमाण है जहां-जहां पितृ स्थान पर सर्पों की अनुष्ठान के दौरान उपस्थिति रही।।।

सभी को जय श्रीमन्नारायण, उज्जैन में आज  कालसर्प शांति का प्रयोग करवा रहे, उसी का यह मंडल दिग्दर्शन है, ।वैसे कालसर्प योग...
15/12/2017

सभी को जय श्रीमन्नारायण, उज्जैन में आज कालसर्प शांति का प्रयोग करवा रहे, उसी का यह मंडल दिग्दर्शन है, ।वैसे कालसर्प योग से भयभीत होने की आवश्यकता नहीं होती ,क्योंकि यह कोई विनाश कारक योग नहीं है, मात्र इसके कुछ हानिकारक प्रभाव हो सकते हैं, जिनको रोकने का प्रयास शांतिओ के द्वारा किया जाता है, कालसर्प नाम का कोई योग होता ही नहीं ऐसा भी कुछ लोग कहते हैं ,लेकिन वास्तव में यह दो शब्दों से बना हुआ नाम है काल और सर्प इनमें जो योग राहु केतु के द्वारा बनता है उसमें राहु को सर्प का मुख और और केतु को पुच्छ भाग कहा जाता है, राहु के अधि प्रत्यधि देवता सर्प और काल है उन्हीं के नाम के आधार पर इस योग को ज्योतिष में कालसर्प योग नाम दे दिया गया है। अतः इस योग को राहु जन्य माना जाकर शांति की जाती है और यह शास्त्र सम्मत है जन्म कुंडलियों में यह योग लाभ कर और हानि कर दोनों तरह का होता है हमेशा कालसर्पयोग हानी देने वाला ही नहीं होता, कई बार कई विषयों में लाभ भी देता है जब कालसर्प योग हानि कर योग बनाए तब उसके लिए नाग पीठ पूजा या कालसर्प शांति करके उसके बुरे प्रभाव को समाप्त या कम किया जा सकता है।

इस पृष्ठ पर हम आपके साथ कार्यालय के कार्य-गतिविधियां तथा किये अनुष्ठान प्रयोगों के अनुभव व समस्याओं पर पृष्ठ के उद्देश्य...
14/12/2017

इस पृष्ठ पर हम आपके साथ कार्यालय के कार्य-गतिविधियां तथा किये अनुष्ठान प्रयोगों के अनुभव व समस्याओं पर पृष्ठ के उद्देश्य अनुसार विषयों पर चर्चा करेंगे।

श्रीमते रामानुजाय नमः।।अस्मद् गुरुभ्यो नमः अस्मद् परम गुरुभ्यो नमःअस्मद् सर्व गुरुभ्यो नमः ।श्री मते रामानुजाय नमः।सभी क...
14/12/2017

श्रीमते रामानुजाय नमः।।अस्मद् गुरुभ्यो नमः अस्मद् परम गुरुभ्यो नमःअस्मद् सर्व गुरुभ्यो नमः ।श्री मते रामानुजाय नमः।
सभी को जय श्री मन्नारायण।
सत्य संतुष्टि ज्योतिष कार्यालय हमारे द्वारा आरम्भ किया एक प्रयास है, जिसमे हम समाज के साथ मिलकर समाज और अपनी परस्पर उन्नति ज्योतिष के माध्यम से कर सकें। ईश्वर ने हर व्यक्ति को समाज का और हर प्राणी को प्रकृतिरूप परिवार का एक सदस्य बनाया है, और उसे जीने की अलग अलग विधाएं दी है,प्रकृति की विधाओं के अतिरिक्त भी धर्म के नाम पर कई पंथ है,और लगभग सभी मे जीवन जीने की एक एक विशिष्ट शैली विकसित हुई है।उनमें कई शैलियां प्रकृति के अनुकूल तो कुछ प्रतिकूल भी है, प्रतिकूल शैलियों का भी अपना एक महत्व है।।यह विषय अति विस्तृत है अतःअधिक गहराई में न उतरते हुए हम प्रारंभिक में इतना मात्र समझें कि हर धर्म की या पंथ की जीवन शैली में जीवन के दुख, दुविधाओं, समस्याओं,रोगों,आदि पर विचार करते हुए उनके बढ़ने पर असाध्य(कठिनसाध्य या कभी कभी असाध्य)होने की परिस्थितियां देखी गई,और फिर तब असाध्य होने की स्थिति तक पहुंचने पूर्व ही उसके निराकरण या निदान की व्यवस्था का जन्म हुआ,उसव्यवस्था का विकास हुआ,जिसमे समस्या ,पीड़ा,रोग,अशुभ,दुर्भाग्य,दुविधा,कष्ट,अपमृत्यु,कलह ,हानि,आदि नकारात्मकताओं के पूर्व अनुमान से उनका निवारण होने लगा ,उसी व्यवस्था को हम सब ज्योतिष के नाम से पुकारते है।प्रत्यक्ष खगोलगणितीय प्रक्रियाएं इसमे होने से विज्ञान और न्याय-संविधान ने भी इसे एक विज्ञान की परिभाषा दी, जिसका सदियों से समाज में किसी न किसी रूप में प्रचलन है।और इसके ज्ञाता समाज और अपना परस्पर उत्थान कर रहे है।जैसा कि आप सब जानते है कि मैं(सत्यनारायणाचार्य) भी एक सनातनी ब्राह्मण परिवार से हु और कुल पैतृक संस्कारों केकारण अध्यात्म और धर्म से जुड़ने का अवसर मुझे मिला, श्री पिताजी के सद्प्रयासों से मै श्री महांकाल की नगरी में रामघाट स्थित श्री रामानुज कोट में रहकर वेदाध्ययन द्वारा सनातनी वेद परंपरा से गहराई से जुड़ पाया और इसी अंतर्गत ज्योतिष भी मेरा अध्ययन का विषय रहा।तब से लेकर आज तक 17 वर्षों से मैं सतत ज्योतिष शास्त्र का उपयोग समाज के साथ करता हुआ आगे बढ़ता आरहा हूँ।यद्यपि मै कोई ज्योतिष का बहुत बड़ा विद्वान नही ,लेकिन श्री ठाकुर जिकी कृपा से जितना भी मै ज्योतिर्विज्ञान को औरउसके द्वारा कर्मकांडी समधानोको जानता हूँ ,उनसे कई लोगों को लाभान्वित किया,और स्वयं भी कुछ अनुभव लिए,, यह अकाट्य सत्य है कि भले ही 100 प्रतिशत ग्यारंटी नही,क्योंकि कोई भी विज्ञान या वैज्ञानिक परम पूर्ण नही होता सतत शोध चलता रहता है और विद्यार्थी भी सदैव विद्यार्थी रहकर ही विद्या को बढ़ाते रह सकता है लेकिन फिर भी अधिकतम मात्रा में व्यक्ति ज्योतिष द्वारा दुर्भाग्य से बचकर सौभाग्य को बढ़ाते हुए दुर्गम जीवन को सरल बना सकता है,यह मेरा अनुभव है। अतः जितना भी हमने प्रयोग किया,अनुभव लिया उसके आधार पे अधिकसे अधिक सामाजिक लोगों को इस ज्ञान का लाभ मिले और हम परस्पर उन्नति करें इसी को मूल (आधार)में रखकर हमने एक ज्योतिष कार्यालय की नींव रखी।
आशा है इससे समाज को और हमारी संस्था को भी लाभ पहुंचेगा। ज्योतिष कार्यालय के माध्यम से ज्योतिषीय जन्म लग्न,प्रश्नशास्त्र-प्रश्नलग्न,शकुनशास्त्र,सामुद्रिक,स्वप्न शास्त्र( मनोविज्ञान),स्वरशास्त्र,आदि के द्वारा या समस्या के प्रारूप से समस्या का कारण जानकरकिसी भी प्रकार के ग्रहदोष,तंत्रदोष,पितृदोष,वास्तु दोष आदि दोषो उनकी शांतियों से तथा मंत्र, यंत्र ,तंत्र,वैदिक व धार्मिक अनुष्ठान,कथासत्संग प्रवचन,योग ध्यान ,औषधि,रत्न आदि से समस्याओं का समाधान करने का प्रयास किया जाताहै।साथ मे अन्य वापी तालाब उद्यान व मंदिरों की प्राण प्रतिष्ठा - सभी सोलहों संस्कार और सभी पौराणिक पाठ व अन्य भागवत कथादि धार्मिक अनुष्ठान भी सामाजिक संगठनों के माध्यम से सम्पन्न करवाये जाते है अतः इन चीजों का आप सभी हमसे उक्त कार्यालय के संपर्कों से संपर्क बनाकर लाभ ले सकते है।

यही इस पृष्ठ और कार्यालय का लक्ष्य और उद्देश्य है और साथ ही यह भी प्रयास रहता है कि जो जिस धर्म पंथ का अनुयायी है उसको उन्ही से संबंधित उपाय समाधान आदि करवाएं जाएं। https://www.facebook.com/satyasantushtijyotishkaryalaynayagaonnimach/
सभी को जय श्री मन्नारायण।

श्री मद्रामानुज दासानुदासपं सत्यनारायणाचार्य शर्मा।

शाखाएं-------,नयागांव नीमच म. प्र, रतलाम म. प्र.उज्जैन म. प्र.,इंदौर म. प्र,उदयपुर राजस्थान,सूरत गुज.,कल्याण ठाणे महा.,मीरा रोड ठाणे महा.मुम्बई महाराष्ट्र.

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