05/08/2012
मैं जगत में आया हूँ केवल सुख, शांति, पुण्य, प्रेम, परमात्मा की भक्ति और भगवान् का अखंड ज्ञान पाने और सारे जगत में उसे वितरण करने के लिए । यही मेरे जीवन का परम व्रत है । इस व्रत का मुझे व्रती रहना है । यह मेरा निश्चय दृढ है । मैं अपने निश्चय पर, निर्णय पर अटल रहूँगा और प्रभु की लीला - भूमि में प्रभु का बन कर विचरण करूंगा । यही मेरा शुभ निश्चय है, मंगलमय निर्णय है ।