18/04/2022
नवलगढ़ महामाया शक्तिपीठ एक सर्वदेश पूज्य स्थान है जिसकी स्थापना परम पुज्य तपस्विनी माँ पन्ना माँजीसा ने संवत 1836 में की। नवलगढ़ में मांँ महामाया के 14 स्वरूपो का विग्रह है जिसमे सात माधवी अर्थात मैली माता जो मां दुर्गा के रूप है और सात उजली जो मां पार्वती के रूप है।
देवी माँ महामाया चौसठ योगिनी स्वरूपो में एक है। इन्हें सातु बहने, बिजासन माता, महामाया आदि नामो से जाना जाता है। ऐसी मान्यता है कि शुंभ निशुभ के युद्ध के समय रक्त बीज को मारकर ये सात शक्तियां उसके ऊपर आसन लगाकर बैठ गईं और बिजासन कहलायी। सातवें नवरात्रा पर विशेष आद्य शक्ति ने सृष्टि की रचना में कई देवी शक्तियों को प्रकट किया। इन शक्तियों में सात शक्तियों का अपना विशेष महत्व है।
सृष्टि की इन सात शक्तियों को एक साथ आद्य शक्ति ने अपने पार्वती अवतार के साथ ही प्रकट किया था। सातु के एक साथ प्रकट होने से यह सात बहनें कहलाई। इनकी शक्ति बीज मंत्रों के साथ ही जाग्रत होती है इसलिए ये बिजासन माता भी कहलायी।
पार्वती की इन सहेलियों ने शिव के रूप पर तंज कसे तो शिव जी ने भी उन्हें वरदान दे दिया कि तुम सब दुनियां मे अपने तंज की तरह ही रहोगी। इस पर पार्वती शिव पर क्रोधित हो गईं, तब शिव ने कहा कि यह वरदान है, इन सातों की दुनिया में सर्वत्र पूजा इसी रूप में होगी। तबसे सात बहनों की सात प्रकृति बन गई।
सात शक्तियां के क्षेत्र सप्त धातुओं- अन्न रस, रूधिर, मांस, मेद, अस्थि, मज्जा व वीर्य आदि में होता है और यह जगत के जीवों को इन्हीं सात धातुओं से पोषण कर स्वस्थ सुखी और दीर्घायु बनाती है।
काल भेद, स्थान भेद, भाषा भेद से यह अलग अलग नामों से से पूजी जाने लगीं। बाया सा महाराज, सातु बहना, बिजासन माता, महामाई, मावडलिया, जोगमाया, जोगणिया आदि कई नामों से इन देवियों को चमत्कारिक देवी के रूप में आज भी गांव, डाणी, मजरो, शहरों में पूजा जाता है।
किसी भी शुभ कार्य में मेहंदी, काजल, कुकू व पीठी की सात सात टिकिया दीवारों पर लगाई जाती है। शादी के अवसर पर भी बिजासन माता की उजली मैली पातडी विवाह मे लाई जाती है। छोटे बच्चो के गले मे सातो बहनो की पतड़ी बांधी जाती है।
इन्हे सांवली व उजली दो रूपों में पूजा जाता है तथा चावल, लापसी, पताशे, मोली, काजल टीकी, मेहंदी, कुमकुम, सात भात की मिठाई, लकड़ी का पालना, पीली ओढनी आदि अर्पण किए जाते हैं।
ऐसी मान्यता है कि बच्चों के अच्छे स्वास्थ्य के लिए तथा पति की लम्बी उम्र के लिए तथा घर में अन्न, धन, लक्ष्मी सदा बरसती रहे आदि के लिए भी इन्हें पूजा जाता है। ऐसी मान्यता है कि आज भी तीनों संध्याओं में सातु बहना का पालना आकाश मार्ग से सृष्टि मे भ्रमण करता है। ईमली, बोरडी, गूदी, बड इन पेडों में इनकी उपस्थिति मानी जाती है।
कभी कभार किसी न किसी को तीनों सन्ध्या में इनके पालने से घुंघरू की आवाज सुनाई देती है। संतान की चाहत, बाहरी बीमारी से मुक्ति, धन की जरूरत हो तो इनकी पूजा से तुरंत चमत्कार मिलते हैं। दैवी भागवत महापुराण के द्वादश स्कंध के मणि दीप अध्याय मे सात शक्तियों का उल्लेख मिलता है।