Dev Astha - देव आस्था

Dev Astha - देव आस्था Dev Astha - देव आस्था

17/07/2026

🔴 LIVE : झुंझुनूं से श्री श्याम मंदिर मूर्ति स्थापना महोत्सव

15/07/2026

मुकुंदगढ़ अघोरी बाबा शैलेन्द्रनाथ

फतेहपुर शेखावाटी 😍
07/07/2026

फतेहपुर शेखावाटी 😍

नीमकाथाना के श्री खेड़ापति बालाजी 😍
02/07/2026

नीमकाथाना के श्री खेड़ापति बालाजी 😍

29/06/2026

🔴LIVE | DAY-7 श्रीमद्भागवत कथा हरिद्वार,उत्तराखंड | आचार्य नीरज शौनक |

परमहंस पंडित गणेश नारायण जीपरमहंस पंडित गणेश नारायण जी का जन्म सन 1903 में बुगाला गांव के  एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था...
28/06/2026

परमहंस पंडित गणेश नारायण जी

परमहंस पंडित गणेश नारायण जी का जन्म सन 1903 में बुगाला गांव के एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था इनके पिताजी का नाम घनश्याम दास था वह खंडेलवाल रूंथला गोत्र के ब्राह्मण थे बालक गणेश जी ने थोड़ी ही अवस्था में व्याकरण के आरंभिक ग्रंथ कंठस्थ कर लिए इन्होंने छंद व्याकरण ज्योतिष आयुर्वेद कर्मकांड और तंत्र विद्या में दक्षता प्राप्त की इनके आचार्य पंडित रूडेंद्र जी थे इनका विवाह नवलगढ़ के गोपीनाथ मंदिर के पुजारी जी की पुत्री से सन 1917 में हुआ उस समय इनकी अवस्था 14 साल की थी इन्होंने फारसी भाषा का भी ज्ञान प्राप्त किया यह दुर्गा के अनुष्ठान से ही जीविका कमाते थे इन्होंने द्वारकाधीश जी के मंदिर के ऊपर की छतरी में भी एक बार अनुष्ठान किया था वहां इन्होंने जो त्रिशूल अंकित किया वह आज भी विद्यमान है उनके भक्तों में बाबू जुगल किशोर जी बिरला भी थे पंडित जी कुछ दिन नवलगढ़ रहे उसके बाद गुढ़ागौड़ जी और जसरापुर में थोड़े-थोड़े दिन रहे सन 1947 में यह चिड़ावा पहुंच गए जसरापुर में थे तभी से शमशानों में रहने लगे थे चिड़ावा में आते-आते पूरे अघोरी साधु का रूप ग्रहण कर चुके थे और ड़ ड़ का मंत्र जाप करते यह आने वाली अनिश्तकारी घटनाओं का संकेत कर देते थे लोगों से मिलना जुलना बहुत कम करते थे उनकी वेशभूषा डरावनी थी जिससे स्त्रियों और बच्चे बहुत डरते थे यह वस्त्र के पूरे थान को नीले रंग में रंगवा कर उसे फाड़ कर पहन लेते थे इनके साथ कुत्ते और कौवे भी भोजन कर लेते थे यह पन्नालाल चौरसिया के मंदिर के आगे बने शिवालय में अंतिम समय तक रहे कभी-कभी शमशान में जाकर लोटपोट भी हो जाते इनका भयानक रूप होने पर भी कई भक्त उनके दर्शन नित्य किया करते उनमें परम धर्म भगत स्वर्गीय सेठ जुगल किशोर जी बिरला भी थे जो नित्य ऊंट या रथ से पिलानी से चिड़ावा आते और रात भर पंडित जी के साथ रहकर दूसरे दिन सुबह पिलानी वापस जाते लोग पंडित जी को बावलिया बाबा कहकर पुकारते

बाबू जुगल किशोर जी बिरला का बनवाया गणेश लाट

पंडित जी चिड़ावा को शिवपुरी मानते थे एक बार जुगल किशोर जी बिरला के बहुत कहने पर रथ से पिलानी के लिए रवाना हुए किंतु आधे रास्ते से ही पुनः चिड़ावा लौट आए पंडित जी भगिनी जोड़े में अक्सर घूमा करते जुगल किशोर जी ने उनकी स्मृति में जोड़ का एक घाट बनवाया और उस पर गणेश लाट नाम से एक स्तूप भी बनवाया यह स्तूप सन 1956 में बना इस पर चढ़कर देखने से पिलानी साफ दिखाई देता था पंडित जी ने चौरसिया के शिवालय में अपनी इच्छा से शरीर त्याग दिया जहां उनका अंतिम संस्कार हुआ यहाँ एक मंदिर बना है तथा बिरला जी ने स्मारक के रूप में एक स्तूप भी बनवाया है जिस पर ब्रह्मा विष्णु महेश और भवानी की संगमरमर की मूर्तियां लगी है आज चिड़ावा के लोग ग्राम देवता के रूप में इनको भी पूछते हैं मांगलिक अवसरों पर देवी देवताओं के साथ इनके भी गीत गाए जाते हैं इनका निवारण सन १९६९ को हुआ इस तिथि को इनके मंदिर पर मेला लगता है इनके चमत्कार के सैकड़ो किस्से आज भी लोगों की जुबान पर है

28/06/2026

🔴LIVE | DAY-6 श्रीमद्भागवत कथा हरिद्वार,उत्तराखंड | आचार्य नीरज शौनक |

27/06/2026

🔴LIVE | DAY-5 श्रीमद्भागवत कथा हरिद्वार,उत्तराखंड | आचार्य नीरज शौनक |

26/06/2026

🔴LIVE | DAY-4 श्रीमद्भागवत कथा हरिद्वार,उत्तराखंड | आचार्य नीरज शौनक |

25/06/2026

🔴LIVE | DAY-3 श्रीमद्भागवत कथा हरिद्वार,उत्तराखंड | आचार्य नीरज शौनक |

Address

Nawalgarh
333042

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Dev Astha - देव आस्था posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Shortcuts

Share