Bhakti sangathgan

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18/06/2026
*मैं भगवान विष्णु (नारायण) को प्रणाम करता हूँ, जो शांत स्वरूप वाले हैं, शेषनाग पर शयन करते हैं, जिनकी नाभि से कमल प्रकट ...
18/06/2026

*मैं भगवान विष्णु (नारायण) को प्रणाम करता हूँ, जो शांत स्वरूप वाले हैं, शेषनाग पर शयन करते हैं, जिनकी नाभि से कमल प्रकट हुआ है, जो समस्त विश्व के आधार हैं, मेघ के समान श्याम वर्ण वाले हैं, लक्ष्मीपति हैं, कमल के समान नेत्रों वाले हैं, योगियों के ध्यान में आने वाले हैं तथा संसार के भय को दूर करने वाले हैं।*

*ॐ नमो नारायणाय।*🙏🏻🪷🚩

*🥀🌸श्रीकृष्ण-वन्दना🌸🥀* नमामि देवदेवेशं नन्दगोपगृहे स्थितम्। यशोदालालितं वन्दे नवनीतहरं हरिम्॥🥀वृन्दावनविहारिणं वेणुनादवि...
16/06/2026

*🥀🌸श्रीकृष्ण-वन्दना🌸🥀*
नमामि देवदेवेशं नन्दगोपगृहे स्थितम्। यशोदालालितं वन्दे नवनीतहरं हरिम्॥🥀
वृन्दावनविहारिणं वेणुनादविशारदम्। गोपीमानसचोरं तं राधाप्राणप्रियं भजे॥🥀
कालियस्य फणे रम्यं नृत्यन्तं नटनायकम्। गोवर्धनधरं वन्दे गोब्राह्मणहिते रतम्॥🥀
पूतनामोक्षदातारं शकटासुरघातकम्। तृणावर्तविनाशिनं बाललीलाविशारदम्॥🥀
मुरारिं मधुसूदनं कंसचाणूरमर्दनम्। धर्मसंस्थापनार्थाय पृथिव्यां समुपागतम्॥🥀
पार्थस्य सारथिं वन्दे गीतामृतप्रवर्षकम्। विश्वरूपप्रदर्शिनं भक्तरक्षणतत्परम्॥🥀
द्रौपदीमानसं त्रातुं दीनबन्धुं दयाकरम्। सुदाममित्रमत्यन्तं प्रेमभक्तिप्रदायकम्॥🥀
रासमण्डलमध्यस्थं आनन्दामृतविग्रहम्। भक्तहृदयपद्मस्थं सच्चिदानन्दमच्युतम्॥
हे कृष्ण करुणासिन्धो जगन्नाथ जनार्दन। मदीयदोषान् क्षन्तव्याः त्वमेव शरणं मम॥🥀
अज्ञानतिमिरं नाश्य भक्तिं मे हृदि देहि भोः। मम जीवनमार्गे त्वं सदा दीपो भव प्रभो॥🥀
अन्ते च त्वत्पदाम्भोजे निश्चला मे मतिर्भवेत्। कृपां कुरु मयि नित्यं गोविन्द माधव अच्युत॥🥀
🙏॥ श्रीकृष्णार्पणमस्तु ॥ 🙏

भक्ति बीना मिलते नही भगवान,🙏नामदेव जी एक दिन ठाकुर जी के दर्शन करने गए। उन्होंने सोचा मंदिर में बहुत भीड़ है, और पादुका ...
15/06/2026

भक्ति बीना मिलते नही भगवान,🙏
नामदेव जी एक दिन ठाकुर जी के दर्शन करने गए। उन्होंने सोचा मंदिर में बहुत भीड़ है, और पादुका बहुत मुश्किल से मिली है (वह दैन्य और ग़रीब थे)।
उन्होंने एक कपड़े में पादुका को लपेट कर अपनी कमर पर बांध लिया (निराले होते हैं भगवान के भक्त, उनको बादशाह से कुछ नहीं चाहिए था लेकिन वो अपनी पादुका से आसक्त हो गए, महापुरुषों की लीला ठाकुर जी ही जानें)।
वो प्रभु के सामने जाकर नाचने लगे, उनकी कमर पे टंगी पादुका की गाँठ खुल गई और पादुका ज़मीन पर गिर गई।
यह देखकर ठाकुर जी के पुजारियों ने उन्हें बाहर जाने के लिए बोला लेकिन वो तो भाव में खोये हुए थे तो उन्होंने सुना ही नहीं।
इस पर पुजारियों ने उन्हें पाँच-सात थप्पड़ मारे और मंदिर से बाहर निकाल दिया। उन्होंने ये भी कह दिया कि आज के बाद यहाँ दर्शन करने मत आना।
नामदेव जी ने ठाकुर जी से कहा अब मैं तुम्हारे सामने बैठूंगा ही नहीं, मैं मंदिर के पीछे जाकर शांति से कीर्तन करुंगा।
मंदिर के पीछे जाकर उन्होंने ठाकुर जी से कहा आपने मुझे पिटवा दिया इसका कोई गुस्सा नहीं है पर ऐसा क्यों किया कि मैं आगे से दर्शन करने ही ना आ पाऊँ? वो अंदर से दुखी थे।
उन्होंने फिर कहा, अब मुझे मंदिर के पीछे से भी मत हटवा देना, मैं तुम्हारे सामने नहीं आऊँगा।
उसी समय कबीर दास जी वहाँ आए और बोले भगवान के यहाँ हम जैसे ग़रीबों की क़दर नहीं रही अब, ठाकुर जी बदल गए हैं, चलो यहाँ से चलते हैं।
भगवान डर गए और उनके सामने प्रकट हो गये, बोला मुझे छोड़कर आप दोनों मत जाओ। यह कहकर भगवान ने मंदिर घुमा दिया, पीछे वाला द्वार आगे की तरफ़ हो गया और आगे वाला द्वार पीछे को चला गया।
नामदेव जी एकांत में भजन कर रहे थे। उनके घर में आग लग गई। यह सूचना उन्हें देने कि लिये कुछ लोग वहाँ आए। लोगों ने उनकी सहायता करने के लिए जो सामान बच सकता था उसे बाहर निकाल के रख लिया।
जब वह घर पहुँचे तो उन्होंने सोचा कि आग में भी तो मेरे प्रभु ही हैं। उन्होंने पड़ोसियों से कहा हमारे प्रभु पधारे हैं और आप उनका भोग छीन रहे हैं। यह कहकर उन्होंने बाक़ी बचाया गया सामान भी आग में फेंक दिया।
लोगों ने सोचा कि अब कोई इनकी मदद नहीं करेगा, इनको ठंड में रात में बाहर ही रहने दें, हमने कितनी मुश्किल से आग में झुलस कर वह समान बचाया था और इन्होंने उसे वापस आग में डाल दिया।
उन्हें क्या पता कि प्रभु जिसके प्रीतम हैं उसके लिए कुछ भी दुर्लभ नहीं है। वह निश्चिंत होकर उसी राख की ताप में लेट गये।
प्रभु ने नामदेव जी के लिए एक नई कुटिया बना दी। सबसे सुंदर और सुगंधित सामग्री से उनकी कुटिया बनी। स्वयं रुक्मणी जी ने उनकी कुटिया बनाने में सहायता की।
उस कुटिया से एक दिव्य सुगंध आ रही थी जिससे पूरे गाँव के लोग वहाँ आने लगे। गाँव वाले नामदेव जी से पूछने लगे कि कितने रुपये लगे ऐसी कुटिया बनाने में, हम सब बनवाना चाहेंगे।
नामदेव जी ने कहा बहुत महँगी है, अपने-अपने घर से बाहर निकलकर हर चीज़ को आग लगा दीजिए और अपने जले हुए घर के बाहर बैठ कर कीर्तन कीजिए, फिर हमारा मालिक स्वयं आकर मुफ़्त में आपकी कुटिया बना देगा।
जिसने वैराग्य रूपी अग्नि में अपनी ममता को स्वाहा कर दिया है, जिसने अपना सब कुछ प्रभु के चरणों में समर्पित कर दिया है, प्रभु उसकी ज़िम्मेदारी ले लेते हैं। यह सुनकर गाँव वाले पीछे हट गए और सबने नामदेव जी के चरणों में प्रणाम किया..!!
*🙏🏻🙏🏼🙏जय श्री कृष्ण*🙏🏿🙏🏽🙏🏾

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