Bhakti sangathgan

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पावन सरोवर की महिमानंदग्राम के पवित्र गाँव में नंदीश्वर पर्वत नाम की एक पहाड़ी है, जिसका भक्तों के हृदय में एक विशेष स्थ...
21/08/2026

पावन सरोवर की महिमा

नंदग्राम के पवित्र गाँव में नंदीश्वर पर्वत नाम की एक पहाड़ी है, जिसका भक्तों के हृदय में एक विशेष स्थान है। इस पहाड़ी की तलहटी में नंद सरोवर नाम की एक झील है, जो अपनी पावन प्रकृति के कारण बाद में पावन सरोवर के रूप में प्रसिद्ध हुई। वृंदावन की सुंदरता से घिरी यह झील राधा और कृष्ण की कई दिव्य लीलाओं की साक्षी रही है।

राधा और कृष्ण की जल-क्रीड़ा
हर दिन, नंद महाराज अपने परिवार और अन्य ब्रजवासियों के साथ नंद सरोवर के पवित्र जल में स्नान करते थे। कहा जाता है कि जब नंद महाराज और उनका परिवार झील के एक तरफ स्नान करते थे, तो श्रीमती राधारानी के पिता राजा वृषभानु और उनका परिवार दूसरी तरफ स्नान करता था। स्नान के दौरान, राधा और कृष्ण कभी-कभी एक-दूसरे से मिलने के लिए पानी के नीचे तैरकर झील के बीच में पहुँच जाते थे। आचार्यों ने इन क्षणों का वर्णन प्रभु की आनंदमयी 'अंडरवाटर' (जल के भीतर) लीलाओं के रूप में किया है।

कृष्ण की चंचल जिज्ञासा
एक दिन, नंदग्राम के महल में बालक कृष्ण ने देखा कि मैया यशोदा कुछ विशेष प्रकार का प्रसाद तैयार कर रही हैं, जो उनके रोज़ के चावल, दाल, सब्जी और चपाती जैसा नहीं था। उत्सुक होकर कृष्ण ने पूछा, "मैया, आज आप ये कैसी अजीब चीज़ें बना रही हैं?" माँ यशोदा ने उत्तर दिया, "लला, कल तुम्हारे पिता तीर्थयात्रा पर जा रहे हैं, इसलिए मैं कुछ तला हुआ भोजन बना रही हूँ जो कई दिनों तक खराब न हो।"

जिज्ञासु कृष्ण अपने पिता नंद महाराज के पास गए और पूछा, "बाबा, आप कल कहाँ जा रहे हैं?" नंद महाराज ने मुस्कुराते हुए कहा, "मेरे प्रिय पुत्र, मैं प्रयाग जा रहा हूँ ताकि संगम में स्नान कर सकूँ, जहाँ गंगा, यमुना और सरस्वती नदियाँ मिलती हैं।"

कृष्ण ने अपनी बाल-सुलभ मासूमियत से उत्तर दिया, "बाबा, वृंदावन स्वयं सर्व-पावन है; यहाँ से कहीं और जाने की कोई आवश्यकता नहीं है।" लेकिन नंद महाराज ने कृष्ण की बात को गंभीरता से न लेते हुए कहा, "मेरे प्रिय पुत्र, अब बस करो। मुझे अपने राजकीय कार्यों को देखना है।"

नंद सरोवर पर दिव्य अतिथि
अगली सुबह, जब नंद महाराज अपनी प्रयाग यात्रा शुरू करने से पहले नंद सरोवर में स्नान करने की तैयारी कर रहे थे, तो उन्होंने एक अद्भुत दृश्य देखा। नंदीश्वर पहाड़ी की तलहटी में, उन्होंने एक अत्यंत तेजस्वी व्यक्तित्व को वृंदावन की धूल में लोटते हुए देखा। फिर वह दिव्य पुरुष उठा और बड़े सम्मान के साथ नंद सरोवर के जल में प्रवेश कर गया।

आश्चर्यचकित होकर नंद महाराज ने पुकारा, "हे महाराज, आप कौन हैं?" उस तेजस्वी पुरुष ने उत्तर दिया, "प्रिय नंद महाराज, मैं प्रयागराज हूँ, सभी तीर्थों का राजा।"

नंद महाराज ने पूछा, "हे महाराज, आप आज यहाँ क्यों आए हैं?" प्रयागराज ने उत्तर दिया, "मैं यहाँ नंद सरोवर में स्नान करने आया हूँ क्योंकि साल भर लोग मेरे जल में स्नान करते हैं और अपने पापों का बोझ छोड़ जाते हैं। मैं यहाँ वृंदावन की रज में लोटने और इस पवित्र झील में स्नान करने आया हूँ ताकि मैं स्वयं 'पावन' (शुद्ध) हो सकूँ।"

नंद महाराज अभी विस्मय में खड़े ही थे कि उन्होंने झील के दूसरी ओर कई सुंदर स्त्रियों को स्नान करते देखा। वे साधारण स्त्रियाँ नहीं थीं; उन्होंने सोने और चांदी के धागों से बुनी रेशमी साड़ियाँ पहनी थीं और उनके आभूषण सूर्य के समान चमक रहे थे।

नंद महाराज ने उनके पास जाकर आदरपूर्वक पूछा, "क्षमा करें देवियों, आप कौन हैं?" एक देवी ने उत्तर दिया, "हे महाराज, मैं गंगा हूँ।" दूसरी ने कहा, "महाराज, मैं सरस्वती हूँ।" किसी ने स्वयं को यमुना बताया, तो किसी ने गोदावरी, कावेरी, नर्मदा और ब्रह्मपुत्र जैसी पवित्र नदियाँ।

नंद महाराज ने उनसे भी पूछा, "आप सब आज यहाँ क्यों आई हैं?" नदियों ने उत्तर दिया, "पूरे वर्ष लोग हमारे जल में स्नान करके अपने पाप छोड़ जाते हैं। इसलिए हम यहाँ ब्रज की धूल में लोटने और इस झील में स्नान करके पावन होने आई हैं।"

नंद सरोवर का परिवर्तन
इस चमत्कारिक घटना को देखने के बाद, नंद महाराज ने श्रद्धापूर्वक स्वयं झील में स्नान किया। जब वे नंदग्राम लौटे, तो सोकर उठे कृष्ण ने मुस्कुराहट के साथ पूछा, "बाबा, आप प्रयाग के लिए कब निकल रहे हैं?"

नंद महाराज ने उत्तर दिया, "लला, मैंने न जाने का निर्णय लिया है।" जब कृष्ण ने कारण पूछा, तो नंद महाराज ने समझाया, "लला, आज सभी पवित्र नदियाँ और तीर्थ साक्षात रूप में यहाँ वृंदावन आए ताकि वे नंद सरोवर में स्नान कर पावन हो सकें। तो जब वे स्वयं यहाँ स्नान करने आए हैं, तो मुझे कहीं और जाने का कष्ट क्यों करना चाहिए?"

उस दिन के बाद से, नंद सरोवर पावन सरोवर के रूप में जाना जाने लगा। आज भी यह एक अत्यंत पवित्र स्थल है, जहाँ स्नान करने से मनुष्य के सभी पाप धुल जाते हैं।

सीख:
यह कथा हमें वृंदावन की पवित्रता को समझने का संदेश देती है, जहाँ स्वयं भगवान कृष्ण ने अपनी लीलाएँ की थीं। यह हमें भक्ति की शक्ति और पवित्र स्थानों के महत्व की याद दिलाती है। नंद महाराज का यह बोध कि सभी पवित्र नदियों का जल वृंदावन आया है, इस विचार को पुष्ट करता है कि कृष्ण की उपस्थिति ही हर चीज़ को परम पावन बना देती है।

🙏🚩🙏

20/08/2026

With Khatu Shyam Live – I just got recognized as one of their top fans! 🎉

*🙏🏻🌹जय सच्चिदानंद जी🌹🙏🏻**🙏🏻🌹श्री गुरु चरणों में प्रार्थना🌹🙏🏻**पारब्रह्म सतगुरु भगवान्*           *बक्शो भगति का वरदान**म...
20/08/2026

*🙏🏻🌹जय सच्चिदानंद जी🌹🙏🏻*

*🙏🏻🌹श्री गुरु चरणों में प्रार्थना🌹🙏🏻*

*पारब्रह्म सतगुरु भगवान्*
*बक्शो भगति का वरदान*
*मात - पिता तुम बंधू सहाई*
*महिमा तुमरी वर्णी ना जाये*
*तुम बिन देव ना मानू दूजा*
*बक्शो चरण कमल की पूजा*
*जन्म - मरण का संकट हर दो*
*नाम रत्न से झोली भर दो*
*नाम जपे तेरा दिन राति*
*ज्योत जगे बिन दीपक बाती*
*मोह माया अभिमान हटा दो*
*योग अगम का दीप जगा दो*
*दाता तीनों ताप निवारो*
*भव् सागर से पार उतारो*
*मीठी अनहद तान सुना दो*
*अमृत की बूंदे बरसा दो*
*साद संगत से मुख नही मोड़े*
*सिमरण की करनी नही छोड़े*
*तू - मैं की दीवार गिरा दो*
*सूरत शब्द को एक बना दो*
*दया करो हे सुख के धाम*
*मन मेरा पावे विश्राम*
*आठ पेहर गुण तेरे गाये*
*तुमसे निर्गुण भक्ति पाये*
*बक्शो श्रद्धा और विश्वास*
*तुम स्वामी हम दासन दास*
*तुम स्वामी हम दासन दास*

*🌹श्री सद्गुरू देवाय् नमः🌹*
🌳🌲 *शुभ अमृत वेला मुबारक*🌲🌳

*सुप्रभात**घमंड बहुत भूखा होता है*।*इसकी मनपसंद खुराक है रिश्ते*।*इसलिए इससे जितना दूर रहें उतना ही अच्छा*।*पैसा तो सिर्...
19/08/2026

*सुप्रभात*

*घमंड बहुत भूखा होता है*।
*इसकी मनपसंद खुराक है रिश्ते*।
*इसलिए इससे जितना दूर रहें उतना ही अच्छा*।
*पैसा तो सिर्फ जीने की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए होता है*।
*मगर हंसने के लिए तो हमेशा अपनों की जरूरत पड़ती है*😊
*सुख में न्योता उन्हें ही देना चाहिए जो दुख में बिना बुलाए चले आते हैं*🧚‍♂️
*प्रेम करना मुश्किल नहीं है और ना ऐसी मुश्किल है उसे निभाना🙃*
*मुश्किल तो है तुम और मैं की अदला बदली हो जाना*
*प्रेममय होकर मैं का तुम और तुम का मैं हो जाना*
*नकारात्मक विचार और टेंशन पंछियों की तरह है*🐦‍⬛
*आप उन्हें अपने आसपास उड़ने से नहीं रोक सकते*🦅
*पर आप उन्हें अपने दिमाग में घोंसला बनाने से जरूर रोक सकते हैं*🚫🌳सकारात्मक सोचिए सकारात्मक रहिए*🌳

भक्त शिरोमणि संत जनाबाई और भगवान श्रीकृष्ण (विट्ठलनाथ) का है। यह उस पावन पौराणिक कथा को दर्शाता है जब स्वयं भगवान अपने भ...
18/08/2026

भक्त शिरोमणि संत जनाबाई और भगवान श्रीकृष्ण (विट्ठलनाथ) का है। यह उस पावन पौराणिक कथा को दर्शाता है जब स्वयं भगवान अपने भक्त के प्रेम के वश में होकर उसके घर के काम-काज में हाथ बंटाते थे।
संत जनाबाई और भगवान विट्ठल की पौराणिक कहानीदासी के रूप में जीवन: संत जनाबाई का जन्म महाराष्ट्र के गंगाखेड़ में एक बेहद गरीब परिवार में हुआ था। बचपन में ही माता-पिता का साया उठ जाने के बाद, वे प्रसिद्ध संत नामदेव जी के घर दासी (परिचारिका) के रूप में रहने लगीं।अथाह भक्ति और सेवा: जनाबाई का काम घर में झाड़ू लगाना, बर्तन मांजना, पानी भरना और सुबह-सुबह पत्थर की चक्की से अनाज पीसना था। वे काम करते-करते हर समय भगवान विट्ठल (श्रीकृष्ण) के नाम का जप और उनके 'अभंग' (भजन) गाया करती थीं। उनकी भक्ति इतनी गहरी थी कि गाते-गाते वे अक्सर अपनी सुध-बुध खो बैठती थीं।जब स्वयं भगवान पीसने लगे चक्की: जब जनाबाई भावविभोर होकर चक्की पीसना बंद कर देती थीं, तब उनके काम में कोई कमी न आए और उन्हें थकावट न हो, इसलिए स्वयं भगवान विट्ठल (श्रीकृष्ण) प्रकट होकर चक्की चलाने लगते थे। वे जनाबाई के मुख से अपने भजन सुनते और मुस्कुराते हुए चक्की से आटा पीसते थे।परम प्रेम का प्रतीक: पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान केवल चक्की ही नहीं पीसते थे, बल्कि जनाबाई के साथ कचरा उठाना, कपड़े धोना और उनके बाल संवारने जैसे काम भी खुशी-खुशी करते थे।यह चित्र इसी दिव्य और निश्चल प्रेम को दर्शाता है, जहाँ एक भक्त अनाज डाल रही है और ब्रह्मांड के स्वामी भगवान श्रीकृष्ण बड़े प्यार से उसकी मदद के लिए चक्की थामे बैठे हैं।

*🕉️नागपंचमी पर इन 12 नागों की होती है पूजा, जानें सबसे बड़ा कौन?🕉️**🐍नागपंचमी 2026: सावन माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी को न...
17/08/2026

*🕉️नागपंचमी पर इन 12 नागों की होती है पूजा, जानें सबसे बड़ा कौन?🕉️*

*🐍नागपंचमी 2026: सावन माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी को नागपंचमी का त्योहार मनाया जाता है। इस दिन 12 प्रमुख नागों की पूजा की जाती है जो कि सभी शिवजी के गण हैं। इनमें से भी 8 नाग प्रमुख हैं। इस बार नाग पंचमी का पर्व 17 अगस्त 2026 सोमवार को मनाया जाएगा। आओ जानते हैं 12 नागों के नाम और 8 नागों का परिचय।*
*अनन्तं वासुकिं शेषं पद्मनाभं च कम्बलम्।*
*शङ्ख पालं धृतराष्ट्रं तक्षकं कालियं तथा॥*
*एतानि नव नामानि नागानां च महात्मनाम्।*
*सायङ्काले पठेन्नित्यं प्रातःकाले विशेषतः।*
*तस्य विषभयं नास्ति सर्वत्र विजयी भवेत्॥*

*📿मन्त्र अर्थ-* *नौ नाग देवताओं के नाम अनन्त, वासुकी, शेष, पद्मनाभ, कम्बल, शङ्खपाल, धृतराष्ट्र, z तक्षक तथा कालिया हैं। यदि प्रातःकाल नियमित रूप से इनका जप किया जाता है, तो नाग देवता आपको समस्त पापों से सुरक्षित रखेंगे तथा आपको जीवन में विजयी बनाएंगे।*

*🪱शेष नाग:-* *इन नागों में सबसे बड़ा शेष नाग है जो कि श्रीहरि विष्‍णु की सेवा में रहते हैं। राम के भाई लक्ष्मण और श्रीकृष्ण के भाई बलराम दोनों ही शेषनाग के अवतार थे। इसके बाद वासुकि नाग का नाम आता है जोकि भगवान शिव की सेवा में लगे रहते हैं और जिनकी बहन का नाम मनसा देवी है।*

*🪱1. शेषनाग-* *भगवान विष्णु के सेवक शेषनाग के सहस्र फन पर धरती टिकी हुई है। ब्रह्मा के वरदान से ये पाताल लोक के राजा हैं। रामायण काल में लक्ष्मण शेषनाग के अवतार थे और महाभारत काल में बलराम शेषनाग के अंश थे।*

*🪱2. वासुकि-* *भगवान शिव के सेवक वासुकि हैं। समुद्र मंथन के दौरान मंदराचल पर्वत को मथनी तथा वासुकि को ही नेती (रस्सी) बनाया था। त्रिपुरदाह के समय वे शिव के धनुष की डोर बने थे। महाभारत काल में उन्होंने विष से भीम को बचाया था।*

*🪱3. पद्म-* *पद्म नागों का गोमती नदी के पास के नेमिश नामक क्षेत्र पर शासन था। बाद में ये मणिपुर में बस गए थे। असम के नागवंशी इन्हीं के वंश से है।*

*🪱4. महापद्म-* *विष्णुपुराण में सर्प के विभिन्न कुलों में महापद्म का नाम भी आया है। पद्म और महापद्म नाग कुल में विशेष प्रीति थी।*

*🪱5. तक्षक-* *महाभारत काल में शमीक मुनि के शाप के कारण तक्षक नाग ने राजा परीक्षित को डंस लिया था। तब उनके पुत्र जन्मेजय ने नागदाह यज्ञ कर सभी नागों को मार दिया था लेकिन कर्कोटक बच गया था।*

*🪱6. कुलिक-* *कुलिक नाग जाति नागों में ब्राह्मण कुल की मानी जाती है जिसमें अनंत भी आते हैं। ये अन्य नागों की भांति कश्यप ऋषि के पुत्र थे लेकिन इनका संबंध सीधे ब्रह्माजी से भी माना जाता है।*

*🪱7. कर्कोटक-* *नागराज कर्कोटक शिव के गण थे। नारद के शाप से वे एक अग्नि में पड़े थे, लेकिन नल ने उन्हें बचाया और कर्कोटक ने एक शाप के चलते नल को ही डंस लिया। शिवजी की स्तुति के कारण कर्कोटक जन्मेजय के नाग यज्ञ से बचकर अवंतिका में छुप गए थे।*

*🪱8. शंख-* *नागों के 8 मुख्य कुलों में से एक है। शंख नागों पर धारियां होती हैं। यह जाति अन्य नाग जातियों की अपेक्षा अधिक बुद्धिमान मानी जाती थी।*

*📿भारत में उपरोक्त आठों के कुल का ही क्रमश: विस्तार हुआ जिनमें निम्न नागवंशी रहे हैं- नल, कवर्धा, फणि-नाग, भोगिन, सदाचंद्र, धनधर्मा, भूतनंदि, शिशुनंदि या यशनंदि तनक, तुश्त, ऐरावत, धृतराष्ट्र, अहि, मणिभद्र, अलापत्र, शंख चूड़, कम्बल, अंशतर, धनंजय, कालिया, सौंफू, दौद्धिया, काली, तखतू, धूमल, फाहल, काना, गुलिका, सरकोटा इत्यादी नाम के नाग वंश हैं। अग्निपुराण में 80 प्रकार के नाग कुलों का वर्णन है*

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