15/06/2026
भक्ति बीना मिलते नही भगवान,🙏
नामदेव जी एक दिन ठाकुर जी के दर्शन करने गए। उन्होंने सोचा मंदिर में बहुत भीड़ है, और पादुका बहुत मुश्किल से मिली है (वह दैन्य और ग़रीब थे)।
उन्होंने एक कपड़े में पादुका को लपेट कर अपनी कमर पर बांध लिया (निराले होते हैं भगवान के भक्त, उनको बादशाह से कुछ नहीं चाहिए था लेकिन वो अपनी पादुका से आसक्त हो गए, महापुरुषों की लीला ठाकुर जी ही जानें)।
वो प्रभु के सामने जाकर नाचने लगे, उनकी कमर पे टंगी पादुका की गाँठ खुल गई और पादुका ज़मीन पर गिर गई।
यह देखकर ठाकुर जी के पुजारियों ने उन्हें बाहर जाने के लिए बोला लेकिन वो तो भाव में खोये हुए थे तो उन्होंने सुना ही नहीं।
इस पर पुजारियों ने उन्हें पाँच-सात थप्पड़ मारे और मंदिर से बाहर निकाल दिया। उन्होंने ये भी कह दिया कि आज के बाद यहाँ दर्शन करने मत आना।
नामदेव जी ने ठाकुर जी से कहा अब मैं तुम्हारे सामने बैठूंगा ही नहीं, मैं मंदिर के पीछे जाकर शांति से कीर्तन करुंगा।
मंदिर के पीछे जाकर उन्होंने ठाकुर जी से कहा आपने मुझे पिटवा दिया इसका कोई गुस्सा नहीं है पर ऐसा क्यों किया कि मैं आगे से दर्शन करने ही ना आ पाऊँ? वो अंदर से दुखी थे।
उन्होंने फिर कहा, अब मुझे मंदिर के पीछे से भी मत हटवा देना, मैं तुम्हारे सामने नहीं आऊँगा।
उसी समय कबीर दास जी वहाँ आए और बोले भगवान के यहाँ हम जैसे ग़रीबों की क़दर नहीं रही अब, ठाकुर जी बदल गए हैं, चलो यहाँ से चलते हैं।
भगवान डर गए और उनके सामने प्रकट हो गये, बोला मुझे छोड़कर आप दोनों मत जाओ। यह कहकर भगवान ने मंदिर घुमा दिया, पीछे वाला द्वार आगे की तरफ़ हो गया और आगे वाला द्वार पीछे को चला गया।
नामदेव जी एकांत में भजन कर रहे थे। उनके घर में आग लग गई। यह सूचना उन्हें देने कि लिये कुछ लोग वहाँ आए। लोगों ने उनकी सहायता करने के लिए जो सामान बच सकता था उसे बाहर निकाल के रख लिया।
जब वह घर पहुँचे तो उन्होंने सोचा कि आग में भी तो मेरे प्रभु ही हैं। उन्होंने पड़ोसियों से कहा हमारे प्रभु पधारे हैं और आप उनका भोग छीन रहे हैं। यह कहकर उन्होंने बाक़ी बचाया गया सामान भी आग में फेंक दिया।
लोगों ने सोचा कि अब कोई इनकी मदद नहीं करेगा, इनको ठंड में रात में बाहर ही रहने दें, हमने कितनी मुश्किल से आग में झुलस कर वह समान बचाया था और इन्होंने उसे वापस आग में डाल दिया।
उन्हें क्या पता कि प्रभु जिसके प्रीतम हैं उसके लिए कुछ भी दुर्लभ नहीं है। वह निश्चिंत होकर उसी राख की ताप में लेट गये।
प्रभु ने नामदेव जी के लिए एक नई कुटिया बना दी। सबसे सुंदर और सुगंधित सामग्री से उनकी कुटिया बनी। स्वयं रुक्मणी जी ने उनकी कुटिया बनाने में सहायता की।
उस कुटिया से एक दिव्य सुगंध आ रही थी जिससे पूरे गाँव के लोग वहाँ आने लगे। गाँव वाले नामदेव जी से पूछने लगे कि कितने रुपये लगे ऐसी कुटिया बनाने में, हम सब बनवाना चाहेंगे।
नामदेव जी ने कहा बहुत महँगी है, अपने-अपने घर से बाहर निकलकर हर चीज़ को आग लगा दीजिए और अपने जले हुए घर के बाहर बैठ कर कीर्तन कीजिए, फिर हमारा मालिक स्वयं आकर मुफ़्त में आपकी कुटिया बना देगा।
जिसने वैराग्य रूपी अग्नि में अपनी ममता को स्वाहा कर दिया है, जिसने अपना सब कुछ प्रभु के चरणों में समर्पित कर दिया है, प्रभु उसकी ज़िम्मेदारी ले लेते हैं। यह सुनकर गाँव वाले पीछे हट गए और सबने नामदेव जी के चरणों में प्रणाम किया..!!
*🙏🏻🙏🏼🙏जय श्री कृष्ण*🙏🏿🙏🏽🙏🏾