श्री ठाकुर लक्ष्मीवेंकटेश मंदिर नगरह

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श्री ठाकुर लक्ष्मीवेंकटेश मंदिर नगरह This Venkatshwar temple is among the main four Balaji temples. This Venkateshwar temple is 110yrs old and situated in the center of the village. Nagrah.

It was established by a family of land lords in 1903. It is worship place of Lord Vishnu. There are only 4 temples of this type in India, 1.Tirupati Balaji, 2.Vrindawan, 3.Ayodhya and 4. The statue having more then 3.3 tonnes of Lord Vishnu is bigger than stutue avaliable in other 3-temples. This statue is made of black marbles. There are various other God-Goddess statues made of precious metals.

It is governed by two committee 1. Nagrah religious committee and 2. Totadri Math Ayodhya. Please read at http://nagrah.info/places.html

04/11/2022

कृष्णावतार में किस देवता ने लिया कौन-सा अवतार?

श्रीकृष्णावतार से पहले जब भगवान ने देवताओं से पृथ्वी पर अवतीर्ण होने के लिए कहा, तब देवताओं ने कहा -‘भगवन्! हम देवता होकर पृथ्वी पर जन्म लें, यह हमारे लिए बड़ी निंदा की बात है; परन्तु आपकी आज्ञा है, इसलिए हमें वहां जन्म लेना ही पड़ेगा फिर भी इतनी प्रार्थना है कि हमें गोप और स्त्री के रूप में वहां उत्पन्न न करें जिससे आपके अंग-स्पर्श से वंचित रहना पड़ता हो। ऐसा मनुष्य बन कर हममें से कोई भी शरीर धारण नहीं करेगा; हमें सदा आप अपने अंगों के स्पर्श का अवसर दें, तभी हम अवतार ग्रहण करेंगे।’

देवताओं की बात सुनकर भगवान ने कहा – ‘देवताओं! मैं तुम्हारे वचनों को पूरा करने के लिए तुम्हें अपने अंग-स्पर्श का अवसर अवश्य दूंगा।’

यह प्रसंग अथर्ववेद के श्रीकृष्णोपनिषत् से उल्लखित है।

श्रीकृष्ण के परिकर के रूप में किस देवता ने क्या भूमिका निभाई –

▪️ भगवान विष्णु का परमानन्दमय अंश ही नन्दरायजी के रूप में प्रकट हुआ।

▪️ साक्षात् मुक्ति देवी नन्दरानी यशोदा के रूप में अवतरित हुईं।

▪️ भगवान की ब्रह्मविद्यामयी वैष्णवी माया देवकी के रूप में प्रकट हुई हैं और वेद ही वसुदेव बने हैं; इसलिए वे सदैव भगवान नारायण का ही स्तवन करते रहते थे।

▪️ दया का अवतार रोहिणी माता के रूप में हुआ।

▪️ ब्रह्म ही श्रीकृष्ण के रूप में पृथ्वी पर अवतीर्ण हुआ।

▪️ शेषनाग बलरामजी बने।

▪️ वेदों की ब्रह्मरूपा ऋचाएं हैं, वे गोपियों के रूप में अवतीर्ण हुईं। भगवान महाविष्णु को अत्यन्त सुन्दर श्रीराम के रूप में वन में भ्रमण करते देखकर वनवासी मुनि विस्मित हो गए और उनसे बोले – ‘भगवन्! यद्यपि हम पुनर्जन्म लेना उचित नहीं समझते तथापि हमें आपके आलिंगन की तीव्र इच्छा है।’

श्रीराम ने कहा – ‘आप लोग मेरे कृष्णावतार में गोपिका होकर मेरा आलिंगन प्राप्त करोगे।’

▪️ गोकुल साक्षात् वैकुण्ठ है। वहां स्थित वृक्ष तपस्वी महात्मा हैं।

▪️ गोप रूप में साक्षात् श्रीहरि ही लीला-विग्रह धारण किए हुए हैं।

▪️ ऋचाएं ही श्रीकृष्ण की गौएं हैं।

▪️ ब्रह्मा ने श्रीकृष्ण की लकुटी का रूप धारण किया।

▪️ रुद्र (भगवान शिव) वंशी बने।
देवराज इन्द्र सींग (वाद्य-यंत्र) बने।

▪️ कश्यप ऋषि नन्दबाबा के घर में ऊखल बने हैं और माता अदिति रस्सी के रूप में अवतरित हुईं जिससे यशोदाजी ने श्रीकृष्ण को बांधा था। कश्यप और अदिति ही समस्त देवताओं के माता-पिता हैं।

▪️ भगवान श्रीकृष्ण ने दूध-दही के मटके फोड़े हैं और उनसे जो दूध-दही का प्रवाह हुआ, उसके रूप में उन्होंने साक्षात् क्षीरसागर को प्रकट किया है और उस महासागर में वे बालक बनकर पहले की तरह (क्षीरसागर में) क्रीड़ा कर रहे थे।

▪️ भक्ति देवी ने वृन्दा का रूप धारण किया।

▪️ नारद मुनि श्रीदामा नाम के सखा बने।

▪️ शम श्रीकृष्ण के मित्र सुदामा बने।

▪️ सत्य ने अक्रूर का रूप धारण किया और दम उद्धव हुए।

▪️ पृथ्वी माता सत्यभामा बनी हैं।

▪️ सोलह हजार एक सौ आठ, रुक्मिणी आदि रानियां वेदों की ऋचाएं और उपनिषद् हैं।

▪️ जगत के बीज रूप कमल को भगवान ने अपने हाथ में लीलाकमल के रूप में धारण किया।

▪️ श्रीकृष्ण का जो शंख है वह साक्षात् विष्णु है तथा लक्ष्मी का भाई होने से लक्ष्मीरूप भी है।

▪️ साक्षात् कलि राजा कंस बना है।

▪️ लोभ-क्रोधादि ने दैत्यों का रूप धारण किया है। द्वेष चारुण मल्ल बना; मत्सर मुष्टिक बना, दर्प ने कुवलयापीड़ हाथी का रूप धारण किया और गर्व बकासुर राक्षस के रूप में और महाव्याधि ने अघासुर का रूप धारण किया।

▪️ गरुड़ ने भाण्डीर वट का रूप ग्रहण किया।

▪️ भगवान के हाथ की गदा सारे शत्रुओं का नाश करने वाली साक्षात् कालिका है।

▪️ भगवान के शांर्ग धनुष का रूप स्वयं वैष्णवी माया ने धारण किया है और काल उनका बाण बना है।

▪️ धर्म ने चंवर का रूप लिया, वायुदेव ही वैजयन्ती माला के रूप में प्रकट हुए है, महेश्वर खड्ग बने हैं। भगवान के हाथ में सुशोभित चक्र ब्रह्मस्वरूप ही है।

▪️ सब जीवों को ज्ञान का प्रकाश देने वाली बुद्धि ही भगवान की क्रिया-शक्ति है।

इस प्रकार श्रीकृष्णावतार के समय भगवान श्रीकृष्ण ने स्वर्गवासियों को तथा सारे वैकुण्ठधाम को ही भूतल पर उतार लिया था ।

इस प्रसंग को पढ़ने का माहात्म्य इस प्रकार है –

▪️ इससे मनुष्य को सभी तीर्थों के सेवन का फल प्राप्त होता है ।

▪️मनुष्य देह के बंधन से मुक्त हो जाता है अर्थात् पुनर्जन्म नहीं होता है।

https://youtu.be/qZoZesw9he4
20/08/2022

https://youtu.be/qZoZesw9he4

श्री ठाकुरलक्ष्मीवेंकटेश जी के समस्त वर्षोत्सव में से एक, "श्री कृष्ण जन्माष्टमी" को "जन्मोत्सव" के रूप में वर्षों ....

https://youtu.be/OPLsrPxxvng
20/08/2022

https://youtu.be/OPLsrPxxvng

श्री ठाकुरलक्ष्मीवेंकटेश जी के समस्त वर्षोत्सव में से एक, "श्री कृष्ण जन्माष्टमी" को "जन्मोत्सव" के रूप में वर्षों ....

https://youtu.be/AwAX4vb7ZO4
07/08/2020

https://youtu.be/AwAX4vb7ZO4

श्री ठाकुरलक्ष्मी वैंकटेश् मंदिर नगरह (वेद मंदिर नगरह)

https://youtu.be/T-Fg2XjJhHc
04/08/2020

https://youtu.be/T-Fg2XjJhHc

© 𝗡𝗮𝗴𝗿𝗮𝗵𝗽𝗮𝘁𝗶 𝗕𝗮𝗹𝗮𝗷𝗶 𝗣𝗶𝗰𝘁𝘂𝗿𝗲𝘀 𝗽𝗿𝗲𝗺𝗶𝗲𝗿𝗲.. 𝐕𝐄𝐃 𝐌𝐀𝐍𝐃𝐈𝐑 𝐍𝐀𝐆𝐑𝐀𝐇 (𝐯𝐨𝐥. 𝟐) श्रीपतिवैंकटेश्वरदेवस्थानम....

https://youtu.be/r11DdHpkV34
03/08/2020

https://youtu.be/r11DdHpkV34

श्री ठाकुर लक्ष्मीवैंकटेश मंदिर नगरह वेद मंदिर नगरह, विश्व का तीसरा श्रीपतिवैंकटेश्वरदेवस्थानम् Shree Shree Venkateshwar Balaji Mandir...

03/08/2020
विगत रात्रि ठाकुर जी दरबार में हीं संध्याकाळ में पुजारी श्री अमोल झा जी साष्टांगवत ब्रह्मलीन हो गये! दो वर्ष से पुजारी ज...
09/05/2020

विगत रात्रि ठाकुर जी दरबार में हीं संध्याकाळ में पुजारी श्री अमोल झा जी साष्टांगवत ब्रह्मलीन हो गये!
दो वर्ष से पुजारी जी वृद्ध् शरीर के बावजूद भी भगवान की सेवा में तल्लीन रहते थे!
नगरह इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है जिससे सभी ग्रामीणजन अचंभित व प्रभु की लीला से असमंजस में हैं!

|| जय श्री हरि ||

श्रद्धांजलि 💐💐💐💐

16/08/2019

इस वीडियो में आप सभी के लिए झूलनोत्सव की यादों को सहेज कर कुछ अंश प्रस्तुत किया गया है। #झूलनोत्सव (२०१९) का यह पावन उ...

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