माता विषहरी मंदिर नगरह, विषहरीस्थान्

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माता विषहरी मंदिर नगरह,  विषहरीस्थान् नगरह के दक्षिण-पूर्व में अवस्थित प्रसिद्ध माता विषहरी मंदिर की स्थापना सन् 1875 ई0 में हुई थी।

नगरह गाँव की धार्मिक पृष्ठभूमि ;

दो पावन नदियों 'गंगा' व 'कोसी' नदी के मध्य स्थित एक 'पवित्र' व 'ऐतिहासिक' स्थल 'नगरह' (प्राचीन नाम- शुचिक्षेत्र), नवगछिया प्रखंड से लगभग ३-४ किमी उत्तर में है।


सदियों से ही यह क्षेत्र शांत वातावरण , प्राकृतिक सुंदरता व सिद्धस्थल के कारण साधना प्रेमियों के लिए प्रिय व प्रथम चयनित रहा है।
यहाँ अनेकों संतों ने सिद्धि प्राप्त की और प्रसिद्धि पायी।
वर्तमान समय में स्वामी आगमानंद जी महाराज समस्त जनों के लिए प्रत्यक्ष प्रमाण हैं।



इस गाँव की धार्मिक पृष्ठभूमि है कि यहाँ छह प्रमुख तीर्थस्थान हैं।

सर्वप्रथम , 52 शक्तिपीठों में से एक इस गाँव के उत्तर पूर्वी कोणों पर अवस्थित माता महाश्मशानी उग्रकालिका का सिद्ध शक्तिपीठ मंदिर है जो अनादिकालीन अर्थात्‌ अति प्राचीन एवं अनुसंधेय भी है।

दूसरा स्व ठाकुर ललित नारायण सिंह के द्वारा सन् 1835 ई के करीब स्थापित विशालकाय श्री शिव मंदिर,शिवालय है।

तीसरा स्व ठाकुर रामानुग्रह सिंह जी उर्फ रामबाबू के द्वारा 1875 ई में श्री विषहरी माता मंदिर स्थापित हुआ।

चौथा स्व ठाकुर नन्दकिशोर सिंह जी के द्वारा सन् 1905 ई में स्थापित श्री ठाकुर लक्ष्मीवैंकटेश मंदिर , श्रीपतिवेंकटेश्वरधाम है।
नवगछिया प्रखंड के अंतर्गत नगरह पंचायत स्थित श्री लक्ष्मीपति वेंकटेश्वर मंदिर के गर्भ गृह में भगवान श्री वेंकटेश जी की 80 मन वजनी आदमकद प्रतिमाँ सहित अन्य देवी देवता की अष्टधातु की प्रतिमा है।

पांचवा स्व ठाकुर जनार्दन प्रसाद सिंह जी के द्वारा सन् 1912 ई में स्थापित श्री दुर्गा मंदिर है और छठा 1942-43 ई के करीब ओरछा के राजकुमार हरदौल की स्मृति में बनाया गया उनका हीं समाधि मंदिर है।

सभी धर्म स्थल अभी भी सुव्यवस्थित एवं सुनियोजित हैं, इससे गाँव की धार्मिक चेतना की झलक मिल जाती है।

� परमहंस स्वामी आगमानंद जी महाराज

19/08/2026

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आज माँ मनसा (माता बिषहरी) की वार्षिक पुजनोत्सव विषहरीस्थान , नगरह में परंपरागत हर्षोल्लास से मनाया गया है। माता के पूजन ...
17/08/2026

आज माँ मनसा (माता बिषहरी) की वार्षिक पुजनोत्सव विषहरीस्थान , नगरह में परंपरागत हर्षोल्लास से मनाया गया है। माता के पूजन पश्चात हवन , भजन-कीर्तन हो रहा है। मंदिर में माता रानी के पूजन व दर्शन करने हेतु दिन भर भीड़ लगी रही।
हम धन्य हैं कि मां बिषहरी की कृपा सदा नगरह ग्राम वासियों के साथ साथ सभी भक्तजनों पर बनी रहती है। खासकर नगरह में माँ की कृपा दृष्टि सदा बनी रहती है, जैसा कि सभी जानते हैं कि भक्तों की इच्छा होने पर वो मंदिर का निर्माण कार्य करते हैं, लेकिन यहां माता बिषहरी स्वयं आई थी वर्ष 1875ई0 में, और रामबाबू जी के द्वारा पूजित हैं।
अति प्राचीन (लगभग 148 वर्ष प्राचीन) , यह मंदिर मां बिषहरी की छत्रछाया में सदा रहा है, गांव में कहीं भी किसी को भी अगर कोई सर्प डंस करता है, वह माता के संरक्षण में आता है तो वह पूर्णत ठीक होकर जाता है। मां बिषहरी की कृपा ऐसे ही सबों पर बनी रहे।

https://www.facebook.com/MataVishahariMandirNagrahBihar

ज्ञातव्य हों कि, इस मंदिर में आप अगर आकर अपनी मनोकामना बताते हैं, तो उसे मां विषहरी अर्थात मनसा देवी जरूर पूर्ण करती है।

॥ ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं एं मनसा दैव्ये स्वाहा ॥

25/06/2026

यह माँ भगवती विषहरी माता ( मनसा देवी ) को समर्पित ३ मिनट के एक भावपूर्ण भक्ति गीत जेमिनी प्रो म्यूज़िक AI से बनाया गया है, जिसमें इनकी महिमा का वर्णन किया गया है।
कृपया सुनें और अवश्य अपनी प्रतिक्रिया दें।

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