स्वर्णकार समाज नाथद्वारा

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05/02/2025
श्री मेढ़ क्षत्रिय स्वर्णकार समाज, युवा परिषद् एवं महिला मण्डल श्रीनाथद्वाराएवंश्री मेढ़ क्षत्रिय स्वर्णकार समाज सेवा सम...
22/12/2024

श्री मेढ़ क्षत्रिय स्वर्णकार समाज, युवा परिषद् एवं महिला मण्डल श्रीनाथद्वारा
एवं
श्री मेढ़ क्षत्रिय स्वर्णकार समाज सेवा समिति (रजि.), उदयपुर संभाग
क संयुक्त तत्वावधान में
श्रीनाथजी बावा की पावन नगरी श्रीनाथद्वारा में
प्रथम तुलसी विवाह एवं सामुहिक विंवाह सम्मेलन
का आयोजन
बसन्त पंचमी, रविवार, दि. 2 फरवरी 2025
आप सभी स्वर्णकार भाई बहन सादर आमंत्रित है।
आप सभी पधार कर इस कार्यक्रम की शोभा को बढ़ाए।

26/10/2023
23/08/2023

बहुत बहुत बधाई हो हर भारतीय को
चंद्रयान 3 की सफलतापूर्वक लैंडिंग पर ।

10/10/2022

जय अजमीढ़ जी महाराज
मुख्य अतिथि के रूप मै पधारे माननीय डॉ. सी पी जोशी सा., देवकीनंदन जी गुर्जर द्वारा की गई महाराजा अजमीढ़ जी की आरती।

💞👏🌿सादर आमंत्रण / बधाई💞👏🌿श्री मेढ क्षत्रिय क्षत्रिय स्वर्णकार समाज के आराध्य 💞👏🌿श्री अजमीढ़ जी महाराज की जयंती💞👏🌿 की सभी...
09/10/2022

💞👏🌿सादर आमंत्रण / बधाई💞👏🌿
श्री मेढ क्षत्रिय क्षत्रिय स्वर्णकार समाज के आराध्य
💞👏🌿श्री अजमीढ़ जी महाराज की जयंती💞👏🌿 की सभी भूमंडल पर विराजमान स्वर्णकार समाज के बंधुओं को खूब-खूब बधाई साथ ही निवेदन की श्रीनाथद्वारा स्वर्णकार समाज द्वारा आज अजमिढ महोत्सव 2022 भव्य व धूमधाम से मनाया जाना है , जिसमे मुख्य कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रुप में राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष आदरणीय श्रीमान डॉक्टर सी .पी . जोशी साहब (विधायक) श्री नाथद्वारा पधारेंगे (समय 6.00pm) , सभी समाज बंधुओं से निवेदन है कि आज होने वाले कार्यक्रम में समय पर पधार कर कार्यक्रम को भव्यता प्रदान करने वह आनंद लाभ लेने में अग्रणी रहे , व समाज की एकजुटता का परिचय दें , सभी समाज के वरिष्ठ एवं आदरणीय महानुभाव से निवेदन है , समय पर पधार कर विधानसभा अध्यक्ष जी के स्वागत में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें , किसी कारणवश या भुलवश
अगर समाज बंधु को निमंत्रण नहीं पहुंचा है , तो इस सूचना और आमंत्रण को ही हमारी प्रत्यक्ष उपस्थिति मान कर कार्यक्रम में अवश्य पधारें ,यह कार्यक्रम संपूर्ण समाज का है जय श्री कृष्णा राधे राधे
💞👏🌿निवेदक - दिलीप रुणवाल (अध्यक्ष)💞 महिपाल अडाणिया (अध्यक्ष) युवा परिषद श्री नाथद्वारा
💞👏🌿 हम सब रहे साथ - समाज का हो विकास💞👏🌿

Congratulations
20/09/2022

Congratulations

श्री मेढ क्षत्रिय स्वर्णकार समाज , श्रीनाथद्वारा के नगर अध्यक्ष पद पर श्रीमान दिलीप जी रुणवाल एवं युवा परिषद अध्यक्ष पद ...
18/09/2022

श्री मेढ क्षत्रिय स्वर्णकार समाज , श्रीनाथद्वारा के नगर अध्यक्ष पद पर श्रीमान दिलीप जी रुणवाल एवं युवा परिषद अध्यक्ष पद पर श्रीमान महिपाल जी अडाणीया के निर्विरोध निर्वाचित होने पर खूब-खूब बधाई , सभी समाज बंधुओं का हार्दिक आभार अभिनंदन
जय अजमीढ जी

18/09/2022

🎉Congratulations 🎉

श्री मेढ क्षत्रिय स्वर्णकार समाज , श्रीनाथद्वारा के नगर अध्यक्ष पद पर श्रीमान दिलीप जी रुणवाल एवं युवा परिषद अध्यक्ष पद पर श्रीमान महिपाल जी अडाणीया के निर्विरोध निर्वाचित होने पर खूब-खूब बधाई , सभी समाज बंधुओं व बाहर से पधारे हुए चुनाव पर्यवेक्षकों का हार्दिक आभार अभिनंदन
जय अजमीढ जी

04/04/2021

मैढ़ क्षत्रिय स्वर्णकार समाज श्री महाराजा अजमीढ़जी को अपना पितृ-पुरुष (आदि पुरुष) मानती है। ऐतिहासिक जानकारी जो विभिन्न रुपों में विभिन्न जगहों पर उपलब्ध हुई है उसके आधार पर मैढ़ क्षत्रिय अपनी वंशबेल को भगवान विष्णु से जुड़ा हुआ पाते हैं। कहा गया है कि भगवान विष्णु के नाभि-कमल से ब्रह्माजी की उत्पत्ति हुई। ब्रह्माजी से अत्री और अत्रीजी की शुभ दृष्टि से चंद्र-सोम हुए। चंद्रवंश की 28वीं पीढ़ी में अजमीढ़जी पैदा हुए। महाराजा अजमीढ़जी का जन्म त्रेतायुग के अन्त में हुआ था। मर्यादा पुरुषोत्तम के समकालीन ही नहीं अपितु उनके परम मित्र भी थे। उनके दादा महाराजा श्रीहस्ति थे जिन्होंने प्रसिद्ध हस्तिनापुर बसाया था। महाराजा हस्ति के पुत्र विकुंठन एवं दशाह राजकुमारी महारानी सुदेवा के गर्भ से महाराजा अजमीढ़जी का जन्म हुआ। इनके अनेक भाईयों में से पुरुमीढ़ और द्विमीढ़ विशेष प्रसिद्ध हुए और दोनों पराक्रमी राजा थे। द्विमीढ़जी के वंश में मर्णान, कृतिमान, सत्य और धृति आदि प्रसिद्ध राजा हुए। पुरुमीढ़जी के कोई संतान नहीं हुई।

राजा हस्ती के येष्ठ पुत्र अजमीढ़ महान चक्रवर्ती राजा चन्द्रवंशी थे। महाराजा अजमीढ़ के दो रानियां सुयति व नलिनी थी। इनके गर्भ में बुध्ददिषु, ऋव, प्रियमेध व नील नामक पुत्र हुए। उनसे मैढ़ क्षत्रिय स्वर्णकार समाज का वंश आगे चला। अजमीढ़ ने अजमेर नगर बसाकर मेवाड़ की नींव डाली। महान क्षत्रिय राजा होने के कारण अजमीढ़ धर्म-कर्म में विश्वास रखते थे। वे सोने-चांदी के आभूषण, खिलौने व बर्तनों का निर्माण कर दान व उपहार स्वरुप सुपुत्रों को भेंट किया करते थे। वे उच्च कोटि के कलाकार थे। आभूषण बनाना उनका शौक था और यही शौक उनके बाद पीढ़ियों तक व्यवसाय के रुप में चलता आ रहा है।

समाज के सभी व्यक्ति इनको आदि पुरुष मानकर अश्विनी शुक्ल पूर्णिमा को अजमीढ़जी जयंती मनाते हैं।

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9782917204

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