Shrinathji-Mahaprasad

Shrinathji-Mahaprasad Details and Specialties of various kind of Samagries offered to Shreenathji during different seasons.

यह page विभिन्न ऋतुओं में समय-समय पर श्रीजी को अरोगायी वाली विविध और विशेष सामग्रियों का विवरण और उनकी विशेषताएँ वैष्णवजनों को उपलब्ध कराने का प्रयास है.

18/06/2026

श्रीनाथजी में नियम (घर) का नाव का मनोरथ

पूरा वीडियो हमारे यूट्यूब चैनल पर जरूर देखें
https://youtu.be/Ap2QLC4utEY

मनोरथ के कीर्तन :

बैठे घनश्याम सुंदर खेवत है नाव ।
आज सखी मोहन संग खेलवे को दाव ।। 1 ।।
यमुना गंभीर नीर अति तरंग लोलें ।
गोपिन प्रति कहन लागे मीठे मृदु बोलें ।। 2 ।।
पथिक तुम खेवट हम दीजियें उतराई ।
बिच धार मांझ रोकी मिष ही मिष डुलाई ।। 3 ।।
डरपत हों श्यामसुंदर राखियें पद पास ।
याही मिष मिल्यो चाहे 'परमानंददास ।। 4 ।।

🌼🌼🌼🌼🌼

चंदन पहरे नाव हरि बैठे, संग वृषभान दुलारी हो |
यमुना पुलिन फूल शोभित, तहां खेलत लालबिहारी हो ll 1 ll
त्रिविध पवन बहत सुख दायक, शीतल मंद सुगंधा हो |
कमल प्रकाश कुसुम बहु, फूले जहां राजत नंदनंदा हो ll 2 ll
अक्षय तृतीया अक्षय लीला, संग राधिका प्यारी हो |
करत विहार सबे सखी सों, 'नंददास' बलहारी हो ll 3 ll

🌼🌼🌼🌼🌼

बैठे नाव विहरत पिय प्यारी ।
आवत तहां सुगंध मनहरनी, यमुना जल सुखकारी ll 1 ll
लाल धर्यो अंबर अति झीनो, माथे पाघ धरी मनोहारी l
गल पहुपन के हार मनोहर, प्

अधिक ज्येष्ठ शुक्ल दशमी (सोमवार, 25 मई 2026) से अधिक ज्येष्ठ कृष्ण अष्टमी (सोमवार, 8 जून 2026) तक सूर्यदेव रोहिणी नक्षत्...
25/05/2026

अधिक ज्येष्ठ शुक्ल दशमी (सोमवार, 25 मई 2026) से अधिक ज्येष्ठ कृष्ण अष्टमी (सोमवार, 8 जून 2026) तक सूर्यदेव रोहिणी नक्षत्र में हैं.

इसे 'नौतपा' भी कहते हैं. ऐसा माना जाता है कि इन दिनों में सामान्य से बहुत अधिक गर्मी होती है.

पुष्टिमार्ग में इन दिनों में प्रभु को शीतोपचार के रूप में चन्दन धराना प्रशस्त (उत्तम) माना गया है इसलिए इन 15 दिनों में श्रीनाथजी में चन्दन की चोली, चन्दन की गोली धरावे के, लपट-झपट, खसखाना, जल विहार और नौका विहार के मनोरथ होते हैं. कुछ विशेष दिनों पर संध्या आरती दर्शन के बाद प्रभु को बरास वाले शीतल जल से स्नान भी कराए जाते हैं.

आप सभी वैष्णव भी इन दिनों में अपने गृह सेवा में सेव्य स्वरूपों को चंदन धरा कर यथाशक्ति विविध मनोरथ कर लाड़ लड़ाएं.

जय श्री कृष्ण

दो एकादशी तिथि होने के कारण पुष्टिमार्ग में कमला एकादशी व्रत दूसरी एकादशी, बुधवार 27 मई 2026के दिन है.
25/05/2026

दो एकादशी तिथि होने के कारण
पुष्टिमार्ग में कमला एकादशी व्रत
दूसरी एकादशी, बुधवार 27 मई 2026
के दिन है.

20/05/2026

Part 3 Adhik (Purushottam) Maas

सामग्रियों की डिटेल

महाप्रसाद कैटलॉग लिंक
https://wa.me/c/917976189763

18/05/2026

Part 2 अधिक (पुरुषोत्तम) मास
श्रीनाथजी, श्री नवनीतप्रियाजी और विठ्ठलनाथजी के अद्भुत मनोरथ

आप नाथद्वारा आ रहे हैं ?

15/05/2026

अधिक ज्येष्ठ मास
रविवार, 17 मई 2026 से सोमवार, 15 जून 2026 तक होगा.

🪷 अधिक मास में दान के विशेष दिन और नियम :-

कांसे के पात्र में 33 पूवा या अन्य कोई भी पकवान अपने सैव्य प्रभु को भोग धरकर और उसका प्रतिदिन दान करना इस मास में उत्तम माना जाता है.
यदि पूरे महीने रोज दान करते हैं तो दोनों एकादशी के दिन फलाहार की सामग्री भोग धर कर दान में दें.
यदि पूरे महीने सभी दिन दान नहीं कर सकें तो नीचे लिखे इन छह पर्व दिन पर यथाशक्ति दान कर सकते हैं.
🪷 पहले दिन - रविवार, 15 मई
🪷 व्यतिपात - बुधवार, 27 मई
🪷 द्वादशी - गुरुवार, 28 मई
🪷 पूर्णिमा - रविवार, 31 मई
🪷 द्वादशी - शुक्रवार, 12 जून
🪷 अमावस्या - सोमवार, 15 जून
इस माह में प्रभु की नित्य सेवा का विशेष नियम, भगवद्नाम का जाप, गीता या श्रीमद् भागवत आदि के पाठ, यथाशक्ति ब्राह्मण भोजन या गौ पूजन जो भी कर सकें, अवश्य करें.
नियम -
अधिक मास में सभी दिन या ऊपर बताए गए छह पर्व दिनों में 33 पूवा या अन्य पकवान 33 कांसे के पात्रों में धर कर दक्षिणा सहित दान करने च�

12/05/2026

श्री यमुना दशमी

🙏🏼
जय श्री कृष्ण

राजभोग दर्शन के आगे का सेवाक्रम...

राजभोग दर्शन के बाद मणिकोठा और डोल-तिबारी में घुटनों तक जल भरा जाता है.
डोल तिबारी की सभी दिशाओं में कुंज के भाव से केले के स्तम्भ खड़े किये जाते हैं.
प्रभु के सम्मुख रुई की बतखें रखी जाती है वहीं लकड़ी के खिलौना (मगरमच्छ, कछुआ रुई की बतखें आदि) जल में तैराये जाते हैं. सुन्दर कमल और अन्य पुष्प भी जल में तैराये जाते हैं.
डोल-तिबारी में ध्रुव-बारी के छोर पर नीचे की ओर चांदी का सिंहासन और यमुनाजी के घाट के भाव से चार सीढियाँ भी साजी जाती हैं.

पनघट और जल-विहार के पद गाये जाते हैं.

उत्थापन समय उत्सव भोग में प्रभु को रत्नागिरी आम की चांदी की डबरिया और शाककेरी (आम की छिलके बगैर की फांक) की डबरिया अरोगायी जाती है.

आज से प्रतिदिन भोग समय प्रभु के सम्मुख रखे जाने वाले खिलौना के थाल (जिसे यमुनाजी का थाल भी कहा जाता है) में रुई की बतख भी तैराई जाती है.

उत्थापन के दर्शन नहीं खोले जाते और भोग समय

श्री यमुना दशमी की बधाई
12/05/2026

श्री यमुना दशमी की बधाई

29/04/2026

पूरा वीडियो हमारे यूट्यूब चैनल Shriji Prasad पर जरूर देखें

“गोवर्धन वासी सांवरे...तुम बिन रह्यो न जाए…”
ये सुंदर पद सबसे पहले कब और क्यों गाया गया था?
नृसिंह जयंती के इस विशेष अवसर पर जानिए इस पद का रहस्य और श्रीनाथजी के उत्सव सेवाक्रम से इसका संबंध
🙏🏼
जय श्री कृष्ण

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