Shreenathji-Nathdwara

Shreenathji-Nathdwara Unique details of Bhog, Raag, Shringaar and festivals in Shreenathji Temple, Nathdwara
इसका
(3)

यह वो page है जहाँ आपको श्रीनाथजी के राग, भोग, श्रृंगार, उत्सवों, सेवा पद्धति आदि की विस्तृत जानकारी, पुष्टिमार्गीय विद्वानों के अमृत वचन, भाव - भावना के विभिन्न प्रसंग और पुष्टिमार्ग पर विशेष साहित्य हम उपलब्ध कराएँगे.
यह जानकारी एवं साहित्य आपको किसी अन्य पुस्तक अथवा page पर नहीं मिलेगा.

साथ ही श्रीजी की नगरी नाथद्वारा की पहचान, विशेषताएँ, संस्कृति, त्यौहार आदि के विषय में भी हम समय - समय पर unique साहित्य आपके समक्ष रखेंगे.

व्रज - अधिक ज्येष्ठ शुक्ल त्रयोदशीગુજરાતી - અધિક જેઠ સુદ તેરસFriday, 29 May 2026 🪷 राजभोग में चांदी का बंगला 🪷 शाम को चं...
28/05/2026

व्रज - अधिक ज्येष्ठ शुक्ल त्रयोदशी
ગુજરાતી - અધિક જેઠ સુદ તેરસ
Friday, 29 May 2026

🪷 राजभोग में चांदी का बंगला
🪷 शाम को चंवरी मनोरथ

🙏🏼
जय श्री कृष्ण
राजभोग दर्शन –

कीर्तन - (राग : सारंग)

आज बने गिरधारी दूल्हे चंदनको तनलेप किये ।
सकल श्रृंगार बने मोतिन के विविध कुसुम की माल हिये।। 1।।
खासाको कटि बन्यो है पिछोरा मोतिन सहेरो सीस धरे।
रातै नैन बंक अनियारे चंचल अंजन मान हरे ।।2।।
ठाड़े कमल फिरावत गावत कुंडल श्रमकन बिंदु परे।
’सूरदास’ प्रभु मदन मोहन मिल राधासौं रति केल करे।।3।।

साज – आज श्रीजी में सेहरा का श्रृंगार धराये श्री स्वामिनीजी, श्री यमुनाजी एवं मंगलगान करती व्रजगोपियों के सुन्दर चित्रांकन से सुसज्जित पिछवाई धरायी है. गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर सफेद बिछावट की है.

वस्त्र – श्रीनाथजी को आज केसरी मलमल के धोती पटका और अन्तरवास का पटका धराया है.

श्रृंगार – आज प्रभु को मध्य का (घुटनों तक) ऊष्णकालीन श्रृंगार धराया जाता है. मोती के सर्व आभरण धराये हैं.
श्रीमस्तक पर केसरी मलमल के दुमाला के ऊपर मोती का सेहरा एवं बायीं ओर शीशफूल धराये हैं. कली आदि की मालाएं श्रीकंठ में धरायी हैं.
दायीं ओर सेहरे की मोती की चोटी धरायी है.
श्रीकर्ण में मोती के कुंडल धराये हैं.
पुष्पों की दो सुन्दर मालाजी भी धरायी हैं.
श्रीहस्त में कमलछड़ी, गंगा जमुना के वेणुजी एवं वेत्रजी धराये हैं.
पट गोटी ऊष्णकाल के राग-रंग के हैं.

सभी समां के कीर्तन :

मंगला-अधम उधारनी में जानी थी
श्रृंगार-श्याम संग श्याम व्हे रही श्री
राजभोग-आज बने गिरधारी दूल्हे
आरती-चितेवो छाँड़ दे री राधा
शयन-ऐ बल बांध्यो हे लड़ेती जु के
मान-राधे जु के प्राण गोवर्धन धारी
पोढवे-कुंज में पौढ़े रसिक पिय प्यारी

🌼🌿🌼🌿🌼🌿🌼🌿🌼

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व्रज - अधिक ज्येष्ठ शुक्ल त्रयोदशी ગુજરાતી - અધિક જેઠ સુદ તેરસ Friday, 29 May 2026 🙏🏼जय श्री कृष्ण मंगला दर्शन:कीर्तन - ...
28/05/2026

व्रज - अधिक ज्येष्ठ शुक्ल त्रयोदशी
ગુજરાતી - અધિક જેઠ સુદ તેરસ
Friday, 29 May 2026

🙏🏼
जय श्री कृष्ण

मंगला दर्शन:
कीर्तन - अधम उधारनी में जानी थी

व्रज - अधिक ज्येष्ठ शुक्ल द्वादशीગુજરાતી - અધિક જેઠ સુદ બારસThursday, 28 May 2026 प्राचीन बसरा के मोती के आड़बन्द का श्रृ...
27/05/2026

व्रज - अधिक ज्येष्ठ शुक्ल द्वादशी
ગુજરાતી - અધિક જેઠ સુદ બારસ
Thursday, 28 May 2026

प्राचीन बसरा के मोती के आड़बन्द का श्रृंगार,
सायं मोगरा की कली के श्रृंगार का मनोरथ

🙏🏼
जय श्री कृष्ण

आज के श्रृंगार धराये जाने का विशिष्ट प्रसंग इस पोस्ट में देखें
https://www.facebook.com/100064278116661/posts/1398643232288267/

उपरोक्त पोस्ट के प्रसंग के अनुसंधान में आज श्रीजी को प्राचीन बसरा के मोतियों से गूंथा हुआ आड़बंद धराया जाता है, श्रीमस्तक पर बसरा के मोतियों की पाग धरायी जाती है और कोई वस्त्र नहीं धराये जाते यहाँ तक कि आज प्रभु को आड़बंद के भीतर तनिया भी नहीं धराया जाता.

इस विशिष्ट श्रृंगार को धराये जाने का दिन नियत नहीं परन्तु ज्येष्ठ मास के किसी खाली दिन धराया अवश्य जाता है.

राजभोग दर्शन –

साज – आज श्रीजी में श्वेत जालीदार वस्त्र की पिछवाई धरायी जाती है. गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर श्वेत बिछावट की जाती है.

वस्त्र – आज श्रीजी को प्राचीन मोतियों से गूंथा हुआ आड़बंद धराया जाता है.

श्रृंगार – आज प्रभु को छोटा (कमर तक) ऊष्णकालीन हल्का श्रृंगार धराया जाता है.
सर्व आभरण मोती के धराये जाते हैं.
श्रीमस्तक पर प्राचीन मोतियों की छज्जेदार-पाग के ऊपर सिरपैंच, लूम, मोती का दोहरा कतरा एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं.
श्रीकर्ण में एक जोड़ी मोती के कर्णफूल धराये जाते हैं. श्वेत पुष्पों की दो मालाएँ हमेल की भांति धरायी जाती हैं.
श्रीहस्त में कमलछड़ी, मोती के वेणुजी एवं वेत्रजी धराये जाते हैं.
पट ऊष्णकाल का व गोटी हकीक की आती है.

सभी समां के कीर्तन :

मंगला-बिभास को यमुना जी को
श्रृंगार-देख्योरी हरी नंगम नंगा
राजभोग-सुनरी आली दुपहरी की
आरती-अरे कोंन टेव तेरी रे कन्हैया
शयन-चारू नट भेख धर बैठे
मान-उठ चल बेग राधिका प्यारी
पोढवे-झीनों पट दे ओर पोढ़े

आप सभी को ज्ञात ही होगा कि अष्टछाप के प्रमुख कवि सूरदासजी नेत्रहीन थे परन्तु प्रतिदिन मन की दिव्य दृष्टि से प्रभु के दर्...
27/05/2026

आप सभी को ज्ञात ही होगा कि अष्टछाप के प्रमुख कवि सूरदासजी नेत्रहीन थे परन्तु प्रतिदिन मन की दिव्य दृष्टि से प्रभु के दर्शन कर अपने कीर्तनों में प्रभु के श्रृंगार का वर्णन करते थे और इसे प्रभु की कृपा कहते थे.

एक बार श्री गुसांईजी स्वयं नाथद्वारा पधारे अतः सूरदासजी ने भी नाथद्वारा जाने का विचार किया. तब श्री गिरधरजी आदि बालकों ने उन्हें दो दिन और रुककर श्री नवनीतप्रियाजी को कीर्तन सुनाने को कहा अतः सूरदासजी गोकुल में ही रुक गये.

श्री गिरधरजी से तीनों बालकों (श्री गोविन्दरायजी, श्री बालकृष्णजी और श्री गोकुलनाथजी) ने संशयवश कहा कि हम श्री नवनीतप्रियाजी को जो श्रृंगार धराते हैं, सूरदासजी वैसे ही वस्त्र आभूषणों का वर्णन करते हैं.
आज कुछ ऐसा अद्भुत अनोखा श्रृंगार करें कि सूरदासजी पहचान ही नहीं पायें. तब श्री गिरधरजी ने कहा –“सूरदासजी भगवदीय है और इनके हृदय में स्वरूपानंद का अनुभव है. तुम जो भी श्रृंगार करोगे वो उसी भाव का वर्णन अपने पदों में करेंगे अतः भगवदीय की परीक्षा नहीं करनी चाहिए.”

तब तीनों बालकों ने कहा –“फिर भी हमारा मन है अतः हम अपना संशय दूर करने के लिए कल ठाकुरजी को अद्भुत श्रृंगार धरायेंगे.”

अगले दिन प्रातः तीनों बालक श्री नवनीतप्रियाजी के मंदिर में पधारे और सेवा में नहाये, श्री ठाकुरजी को जगाकर भोग धरे. मंगलभोग सरे उपरांत ठाकुरजी को नहला कर श्रृंगार धराने लगे.
ऊष्णकाल के दिन थे और कुछ अलग भी करना था अतः ठाकुरजी को वस्त्र ही नहीं धराये.
केवल मोती की दो लड़ श्रीमस्तक पर, मोती के बाजूबंद, कटि किंकिणी नुपूर, हार आदि सभी मोती के, तिलक, नकवेसर, कर्णफूल ही धराये.

सूरदासजी जगमोहन में बैठे थे और उनके हृदय में यह अनुभव हुआ तब उन्होंने विचार किया कि आज तो श्री नवनीतप्रियाजी ने अद्भुत श्रृंगार धराया है जो कि कभी नहीं सुना, नहीं देखा.
केवल मोती ही धराये हैं और वस्त्र तो है ही नहीं. मुझे भी इस अद्भुत श्रृंगार के लिए कुछ अद्भुत कीर्तन गाना चाहिए. जब श्रृंगार दर्शन खुले और सूरदासजी को कीर्तन हेतु बुलाया गया तो उन्होंने राग-बिलावल में यह सुन्दर कीर्तन गाया.

देख्यो री हरी नंगमनंगा l
जलसुत भूषण अंग विराजत
बसन हीन छबि उठि तरंगा ll 1 ll
अंग अंग प्रति अमित माधुरी
निरखि लज्जित रति कोटि अनंगा l
किलकत दधिसुत मुख लेपन करि ‘सूर’ हसत ब्रज युवतिन संगा ll 2 ll

शब्दार्थ -
जलसुत - मोती
बसन - वस्त्र
दधिसुत - माखन

यह सुनकर श्री गिरधरजी सहित वहां उपस्थित सभी बालक अत्यंत प्रसन्न हुए और बोले –“सूरदासजी, आज आपने ऐसा कीर्तन क्यों गाया ?”

तब सूरदासजी ने विनम्रता से कहा –“जैसा अद्भुत श्रृंगार आपने किया है वैसा ही अद्भुत कीर्तन मैंने रचित कर गाया है.” सभी बालक सूरदासजी पर बहुत प्रसन्न हुए और कुछ दिन पश्चात श्री गिरधरजी सूरदास जी को लेकर नाथद्वारा पधारे और श्री गुसांईजी को उस अद्भुत घटना का सविस्तार विवरण दिया.
तब श्री गुसांईजी ने श्री गिरधरजी से कहा –“सूरदासजी पर संशय नहीं करना चाहिए था.
ये तो पुष्टिमार्ग के जहाज हैं अतः इन्हें भगवदलीला का अनुभव आठों पहर होता रहता है और इसीलिए सूरदासजी श्री महाप्रभुजी के अत्यंत कृपापात्र भगवदीय थे.”

पोस्ट में सूरदास जी और श्रीजी का संग का भाव चित्र

व्रज - अधिक ज्येष्ठ शुक्ल द्वादशी ગુજરાતી - અધિક જેઠ સુદ બારસ Thursday, 28 May 2026 🙏🏼जय श्री कृष्ण मंगला दर्शन:कीर्तन -...
27/05/2026

व्रज - अधिक ज्येष्ठ शुक्ल द्वादशी
ગુજરાતી - અધિક જેઠ સુદ બારસ
Thursday, 28 May 2026

🙏🏼
जय श्री कृष्ण

मंगला दर्शन:
कीर्तन - बिभास को यमुना जी को

व्रज - अधिक ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी (द्वितीय)ગુજરાતી - અધિક જેઠ સુદ અગિયારસ (દ્વિતીય)Wednesday, 27 May 2026 🪷 कमला एकादशी व...
26/05/2026

व्रज - अधिक ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी (द्वितीय)
ગુજરાતી - અધિક જેઠ સુદ અગિયારસ (દ્વિતીય)
Wednesday, 27 May 2026

🪷 कमला एकादशी व्रत
🪷 आज नव निकुंज अति शोभा
🪷 दानगढ़ मानगढ़ मनोरथ
🪷 चन्दन की चोली व कली के आभरण का मनोरथ

🙏🏼
जय श्री कृष्ण

सूर्य के रोहिणी नक्षत्र के इन दिनों में प्रभु को चंदन धराया जाना उत्तम माना गया है.
यद्यपि पूरे ऊष्णकाल में प्रभु सेवा में चन्दन प्रयुक्त होता है परन्तु इस अवधि में विशेष रूप से श्रीजी को शीतोपचारार्थ चन्दन धराना, विशेषकर चन्दन की चोली, चन्दन की गोली धराना, लपट-झपट, खस-खाना, जल-विहार और नौका-विहार के मनोरथ, शीतल जल से स्नान (संध्या-आरती पश्चात) आदि किये जाते हैं.

इसी भाव से आज श्रीजी में चन्दन चोली का मनोरथ होगा.

आज श्रीनाथजी को चंदनी मलमल का पिछोड़ा व श्रीमस्तक पर गोल-पाग के ऊपर तुर्रा के श्रृंगार धराये जाते हैं.

श्रृंगार समय धराये आभरण राजभोग समय बड़े करके चन्दन की चोली व मोगरे की कली के आभरण धराये जायेंगे.

राजभोग दर्शन –

साज – आज श्रीजी में चंदनी मलमल की रुपहली ज़री की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित पिछवाई धरायी जाती है. गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर श्वेत बिछावट की जाती है.

वस्त्र – आज श्रीजी को चंदनी मलमल का पिछोड़ा व चन्दन की चोली धरायी जाती है.

श्रृंगार – आज प्रभु को छोटा (कमर तक) ऊष्णकालीन हल्का श्रृंगार धराया जाता है. प्रातः मोती के सर्व आभरण धराये जाते हैं श्रीमस्तक पर चंदनी मलमल की छज्जेदार-पाग के ऊपर सिरपैंच, तुर्रा एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं.
श्रीकर्ण में मोती के एक जोड़ी कर्णफूल धराये जाते हैं. श्वेत पुष्पों की दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती हैं.
श्रीहस्त में कमलछड़ी, झीने लहरिया के वेणुजी एवं वेत्रजी धराये जाते हैं.
पट एवं गोटी छोटी हकीक की आती है.

श्रृंगार समय धराये सभी आभरण व श्रीमस्तक के श्रृंगार आदि बड़े करके राजभोग समय मोगरा की कली के आभरण धराये जाते हैं.

सभी समां के कीर्तन :

मंगला-जे जे श्री सुरजा कलिन्द नंदिन
श्रृंगार- अधम उधारनी में जानी
राजभोग-चन्दन की खोर कीये चंदन
आरती- पिछोरा खासा को कटि बांधे
शयन- आज को दिन धन धन री
मान-आज सुहावनी रात
पोढवे-नवल किसोर नवल नागरीया

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व्रज - अधिक ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी (द्वितीय)ગુજરાતી - અધિક જેઠ સુદ અગિયારસ (દ્વિતીય)Wednesday, 27 May 2026 कमला एकादशी व्र...
26/05/2026

व्रज - अधिक ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी (द्वितीय)
ગુજરાતી - અધિક જેઠ સુદ અગિયારસ (દ્વિતીય)
Wednesday, 27 May 2026

कमला एकादशी व्रत

🙏🏼
जय श्री कृष्ण

मंगला दर्शन:
कीर्तन - जे जे श्री सुरजा कलिन्द नंदिन

व्रज - अधिक ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी (प्रथम)ગુજરાતી - અધિક જેઠ સુદ અગિયારસ (પ્રથમ)Tuesday, 26 May 2026 *तिथि वृद्धि के कारण ...
25/05/2026

व्रज - अधिक ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी (प्रथम)
ગુજરાતી - અધિક જેઠ સુદ અગિયારસ (પ્રથમ)
Tuesday, 26 May 2026

*तिथि वृद्धि के कारण कमला एकादशी व्रत दूसरी एकादशी यानी बुधवार 27 मई को होगा.*

🪷 राजभोग में फलफूल की मंडली का मनोरथ
🪷 शाम को फलफूल का हिंडोलना का मनोरथ

🙏🏼
जय श्री कृष्ण

राजभोग दर्शन:

साज – आज श्रीजी में अंगूरी मलमल की किनारी के हांशिया पिछवाई धरायी है. गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर सफ़ेद बिछावट की है.

वस्त्र – आज श्रीजी को अंगूरी मलमल का पिछोड़ा धराया है.

श्रृंगार – आज प्रभु को छेड़ान का (कमर तक) ऊष्णकालीन हल्का श्रृंगार धराया है. मोती के आभरण धराये हैं.
श्रीमस्तक पर छज्जेदार पाग के ऊपर कतरा धराये हैं.
श्रीकर्ण में एक जोड़ी कर्णफूल धराये हैं. पुष्पों की कलात्मक थागवाली मालाजी धरायी हैं.
श्रीहस्त में कमलछड़ी, सूवा वाले वेणुजी एवं एक वेत्रजी धराये हैं. पट ऊष्णकाल का व गोटी राग रंग की है.

सभी समां के कीर्तन :

मंगला-मेरे कुल कलिमल सब ही
श्रृंगार-भक्त पर करी कृपा श्री यमुना
राजभोग-बन बन में बनवारी
आरती-मेरे री बगर में आवत श्याम
शयन-आज को दिन धन धन री
मान-चढ़ बड बिडर गई री आली
पोढवे-रावटि सुख सेज पोढ़े

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25/05/2026

दो एकादशी तिथि होने के कारण
पुष्टिमार्ग में कमला एकादशी व्रत
दूसरी एकादशी, बुधवार 27 मई 2026
के दिन है.

25/05/2026
व्रज - अधिक ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी (प्रथम)ગુજરાતી - અધિક જેઠ સુદ અગિયારસ (પ્રથમ)Tuesday, 26 May 2026 तिथि वृद्धि के कारण क...
25/05/2026

व्रज - अधिक ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी (प्रथम)
ગુજરાતી - અધિક જેઠ સુદ અગિયારસ (પ્રથમ)
Tuesday, 26 May 2026

तिथि वृद्धि के कारण कमला एकादशी व्रत दूसरी एकादशी यानी बुधवार 27 मई को होगा.

🙏🏼
जय श्री कृष्ण

मंगला दर्शन:
कीर्तन - मेरे कुल कलिमल सब ही

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