Shreenath ji nathdwara - श्रीनाथजी

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26/05/2026

🌸✨ फूलों की सुगंध में बसे हमारे लड्डू गोपाल जी के दिव्य दर्शन… 💛🙏
हर एक फूल मानो प्रेम, भक्ति और सेवा का एक छोटा सा अर्पण हो 🌿🦚

“जहाँ प्रेम से सेवा होती है, वहाँ ठाकुरजी स्वयं विराजते हैं…” ✨
आपको यह फूल मण्डली कैसी लगी? 💬

जय श्री राधे कृष्ण 🙏

🎥

Bhakti

व्रज - विस २०८३ अधिक ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी (प्रथम) व्रत की एकादशी कल 27 मई को Tuesday, 26 May 2026अंगूरी मलमल का पिछोड़ा ए...
26/05/2026

व्रज - विस २०८३ अधिक ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी (प्रथम) व्रत की एकादशी कल 27 मई को
Tuesday, 26 May 2026

अंगूरी मलमल का पिछोड़ा एवं श्रीमस्तक पर छज्जेदार पाग पर तुर्रा का श्रृंगार

आज के मनोरथ

🪷 राजभोग में फलफूल की मंडली
🪷 शाम को फ़लफ़ूल का हिंडोलना

🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸

राजभोग दर्शन –

कीर्तन – (राग : सारंग)

भलेई मेरे आये हो पिय
भलेई मेरे आये हो पिय ठीक दुपहरी की बिरियाँ l
शुभदिन शुभ नक्षत्र शुभ महूरत शुभपल छिन शुभ घरियाँ ll 1 ll
भयो है आनंद कंद मिट्यो विरह दुःख द्वंद चंदन घस अंगलेपन और पायन परियां l
'तानसेन' के प्रभु मया कीनी मों पर सुखी वेल करी हरियां ll 2 ll

साज - आज श्रीजी में अंगूरी मलमल की पिछवाई धरायी है.
गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर सफ़ेद बिछावट की है.

वस्त्र – आज श्रीजी को अंगूरी रंग की मलमल का पिछोड़ा धराया है.

श्रृंगार – आज प्रभु को छेड़ान का (कमर तक) ऊष्णकालीन हल्का श्रृंगार धराया है. मोती के आभरण धराये हैं.
श्रीमस्तक पर छज्जेदार पाग के ऊपर कतरा धराये हैं.
श्रीकर्ण में एक जोड़ी कर्णफूल धराये हैं. पुष्पों की कलात्मक थागवाली मालाजी धरायी हैं.
श्रीहस्त में कमलछड़ी, सूवा वाले वेणुजी एवं एक वेत्रजी धराये हैं. पट ऊष्णकाल का व गोटी राग रंग की है.

nathdwara shringar

26/05/2026

🦚🐄✨ मोऱ कुटी और गौ चरण के अद्भुत दर्शन…
जहाँ हर कण में श्रीजी की कृपा और हर पल में भक्ति का अनुभव होता है। 🌿🙏
इन पावन स्थलों की सुंदरता मन को वृंदावन की याद दिला देती है…💛

📍 जय श्रीनाथजी
💬 आपको ये दर्शन कैसे लगे, कमेंट में जरूर बताइए।
❤️ Reel पसंद आए तो Save & Share जरूर करें।

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व्रज - विस २०८३ अधिक ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी (प्रथम) व्रत की एकादशी कल 27 मई को Tuesday, 26 May 2026            मंगला दर्शन...
25/05/2026

व्रज - विस २०८३ अधिक ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी (प्रथम) व्रत की एकादशी कल 27 मई को
Tuesday, 26 May 2026

मंगला दर्शन

(मंगला समय सुबह 6:00 बजे)

आड़बंद श्वेत मलमल का

कीर्तन –मंगला दर्शन (राग : रामकली)

फलफलित होय फलरूप जाने

🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸
🌸🌸🌸🌸🌸🌸

nathdwara shringar

25/05/2026

गर्मी के इस सुंदर मनोरथ को देखकर मन सच में शीतल हो जाता है… 💧🌿
ठाकुरजी के प्रति प्रेम जब सेवा में दिखाई देता है, तब हर छोटी चीज भी बेहद खास लगती है। 🙏✨

अगर आपको भी ऐसा मनोरथ अपने घर में कराने का सौभाग्य मिले… तो कैसा लगेगा? 🥹💙

जय श्रीनाथजी ✨

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Vaishnav LadduGopal Bhakti

व्रज - विस २०८३ अधिक ज्येष्ठ शुक्ल दशमी Monday, 25 May 2026श्वेत मलमल की परधनी एवं श्रीमस्तक पर श्वेत छज्जेदार पाग पर तु...
25/05/2026

व्रज - विस २०८३ अधिक ज्येष्ठ शुक्ल दशमी
Monday, 25 May 2026

श्वेत मलमल की परधनी एवं श्रीमस्तक पर श्वेत छज्जेदार पाग पर तुर्रा के श्रृंगार

संध्या-आरती के उपरांत ऊष्णकाल का प्रथम शीतल जल स्नान

आज के मनोरथ

🪷 राजभोग में "सुंदर तिबारो खस खाने को"
🪷 शाम को चीरहरण का मनोरथ

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राजभोग दर्शन –

कीर्तन – (राग : सारंग)

भलेई मेरे आये हो पिय
भलेई मेरे आये हो पिय ठीक दुपहरी की बिरियाँ l
शुभदिन शुभ नक्षत्र शुभ महूरत शुभपल छिन शुभ घरियाँ ll 1 ll
भयो है आनंद कंद मिट्यो विरह दुःख द्वंद चंदन घस अंगलेपन और पायन परियां l
'तानसेन' के प्रभु मया कीनी मों पर सुखी वेल करी हरियां ll 2 ll

साज - श्रीजी में आज ख़सखाना की तिबारी के चित्रांकन की पिछवाई धरायी जाती है. गादी, तकिया और चरणचौकी के ऊपर सफेद बिछावट की जाती है.

वस्त्र – आज श्रीजी को श्वेत रंग की मलमल की गोल छोर वाली रुपहली ज़री की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित परधनी धरायी जाती है.

शृंगार – आज प्रभु को छोटा (कमर तक) ऊष्णकालीन हल्का श्रृंगार धराया जाता है.
मोती के सर्व आभरण धराये जाते हैं.
श्रीमस्तक पर श्वेत रंग की छज्जेदार पाग के ऊपर सिरपैंच, तुर्रा एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं.

श्रीकर्ण में मोती के एक जोड़ी कर्णफूल धराये जाते हैं.

श्रीकंठ में मोती का चोलड़ा धराया जाता हैं.
श्वेत पुष्पों की कलात्मक थागवाली दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती हैं.
श्रीहस्त में तीन कमल की कमलछड़ी, चाँदी के वेणुजी एवं एक वेत्रजी धराये जाते हैं.
पट ऊष्णकाल का व गोटी छोटी हकीक की आती है.

🌺🌸🍀🌼🌺🌸🍀🌼

ऊष्णकाल का प्रथम शीतल जल स्नान

आज श्रीजी में संध्या-आरती के उपरांत ऊष्णकाल का प्रथम शीतल जल स्नान होगा. ऊष्णकाल के ज्येष्ठ और आषाढ़ मास में श्रीजी में नियम के चार अभ्यंग स्नान और तीन शीतल जल स्नान होते हैं. यह सातो स्नान ऊष्ण से श्रमित प्रभु के सुखार्थ होते हैं.

अभ्यंग स्नान प्रातः मंगला उपरांत और शीतल जल स्नान संध्या-आरती के उपरांत होते हैं.


25/05/2026

क्यों श्रीनाथजी कि हर कहानी मे गाय का जिक्र आता है?

व्रज - विस २०८३ अधिक ज्येष्ठ शुक्ल नवमीSunday, 24 May 2026केसरी मलमल का पिछोड़ा एवं श्रीमस्तक पर केसरी कुल्हे पर तीन मोर ...
24/05/2026

व्रज - विस २०८३ अधिक ज्येष्ठ शुक्ल नवमी
Sunday, 24 May 2026

केसरी मलमल का पिछोड़ा एवं श्रीमस्तक पर केसरी कुल्हे पर तीन मोर चंद्रिका के जोड़ के श्रृंगार

आज के मनोरथ

राजभोग में नंदमहोत्सव
शाम को सांझी मनोरथ

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राजभोग दर्शन –

साज – (राग : सारंग)

लालन पहिरत है नवचंदन l
विविध सुगंध मिलाय अरगजा व्रजयुवतिन मनफंदन ll 1 ll
शीतल मंद बहत मलयानिल मोहन मन को रंजन l
अंग अंग छबि कहा लों वरनो मनमथ मनके गंजन ll 2 ll
आरत चित विलोकत हरिमुख चपल चलन दृग खंजन l
‘गोविंद’ प्रभुपिय सदा बसो जिय गिरिधर विरह निकंदन ll 3 ll

साज – आज श्रीजी में श्री ठाकुरजी को पलना झुलाते नंद-यशोदा जी, नंदोत्सव एवं छठी पूजन के सुन्दर कलात्मक चित्रांकन की पिछवाई धरायी जाती है. गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर सफ़ेद बिछावट की जाती है.

वस्त्र – आज प्रभु को केसरी मलमल का पिछोड़ा धराया जाता हैं. सभी वस्त्र रुपहली ज़री की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित होते हैं.

श्रृंगार – आज प्रभु को वनमाला का (चरणारविन्द तक) ऊष्णकालीन श्रृंगार धराया जाता है.
मोती के आभरण धराये जाते हैं.
श्रीमस्तक पर केसरी कुल्हे के ऊपर सिरपैंच, तीन मोरपंख की मोर-चंद्रिका की जोड़ एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं.
श्रीकर्ण में मकराकृति कुंडल धराये जाते हैं.
श्वेत पुष्पों की सुन्दर थागवाली दो कलात्मक वनमाला धरायी जाती हैं.
श्रीहस्त में चार कमल की कमलछड़ी, गंगा जमुनी के वेणुजी एवं दो वेत्रजी धराये जाते है.
पट व गोटी ऊष्णकाल के धराए जाते है.
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24/05/2026

शुप्रभात
सभी वल्लभ वैष्णव जन को जय श्री कृष्णा 🙏

व्रज - विस २०८३ अधिक ज्येष्ठ शुक्ल नवमीSunday, 24 May 2026            मंगला दर्शन      (मंगला समय सुबह 5:45 बजे)आड़बंद अ...
23/05/2026

व्रज - विस २०८३ अधिक ज्येष्ठ शुक्ल नवमी
Sunday, 24 May 2026

मंगला दर्शन

(मंगला समय सुबह 5:45 बजे)

आड़बंद अंगूरी मलमल का

कीर्तन –मंगला दर्शन (राग : रामकली)

नैन भर देख अब भानु तनया

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