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24/04/2026

HUMAN RIGHTS DEFENDERS FORUM
मानव अधिकार रक्षक मंच, राष्ट्रीय अध्यक्ष उल्हास डफळे हेल्प लाईन 8180804243 + 8830258083

16/01/2026
29/10/2025

*मानव अधिकार रक्षक मंच राष्ट्रीय अध्यक्ष:- उल्हास पी. डफळे 8180804243+8830258083*
मानवाधिकार एक व्यक्ति को जन्म से प्राप्त होते हैं, और वे सार्वभौमिक, अविभाज्य और अपरिवर्तनीय होते हैं। मानवाधिकारों में जीवन का अधिकार, स्वतंत्रता का अधिकार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, काम का अधिकार, शिक्षा का अधिकार आदि शामिल हैं।
मानव अधिकार क्या हैं?
मानव अधिकार सभी मनुष्यों के लिए निहित अधिकार हैं, चाहे उनकी जाति, लिंग, राष्ट्रीयता, जातीयता, भाषा, धर्म या कोई अन्य स्थिति कुछ भी हो.
ये अधिकार सार्वभौमिक हैं, जिसका अर्थ है कि वे सभी लोगों के लिए समान रूप से लागू होते हैं.
ये अधिकार अविभाज्य हैं, जिसका अर्थ है कि वे एक दूसरे से जुड़े हुए हैं और एक को अलग नहीं किया जा सकता है.
ये अधिकार अपरिवर्तनीय हैं, जिसका अर्थ है कि वे किसी भी व्यक्ति को उनसे वंचित नहीं किया जा सकता है.
मानव अधिकारों के कुछ उदाहरण:
जीवन का अधिकार
स्वतंत्रता का अधिकार
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार
धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार
राजनीतिक अधिकारों का अधिकार
आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकार
शिक्षा का अधिकार
काम का अधिकार
मानव अधिकार क्यों महत्वपूर्ण हैं?
मानव अधिकार सभी मनुष्यों के लिए गरिमा और स्वतंत्रता के साथ रहने के लिए आवश्यक हैं. वे यह सुनिश्चित करते हैं कि सभी मनुष्यों को समान अवसर और सम्मान मिले. मानव अधिकार सरकारों को मानव अधिकारों का उल्लंघन करने से रोकते हैं और उन्हें लोगों की रक्षा करने के लिए प्रेरित करते हैं.
मानव अधिकारों की रक्षा कैसे करें?
मानव अधिकारों की रक्षा करने के लिए, हमें मानव अधिकारों के बारे में जानने और समझने की आवश्यकता है। हमें मानव अधिकारों के उल्लंघन के खिलाफ आवाज उठाने और न्याय के लिए संघर्ष करने की आवश्यकता है। हमें उन संगठनों और आंदोलनों का समर्थन करने की आवश्यकता है जो मानव अधिकारों की रक्षा करते हैं.
*तो आईये जुडे मानव अधिकार रक्षक मंच से*
https://www.facebook.com/share/1N91NrUiiW/

*सदस्यता प्राप्त करणे के लिये ऑनलाईन लिंकपे फॉर्म भरे 👇🏻*
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*तो जुड़िये देश के सबसे शक्तिशाली संगठन से सदस्य नोंदणी के लिए संपर्क करे 8180804243+8830258083* उपर दिये हुए लिंक से ॲप डाऊंलोड करे और अभी आँनलाईन फॉर्म भरे और सदयसता प्राप्त करे

*मानव अधिकार रक्षक मंच राष्ट्रीय अध्यक्ष : उल्हास पी. डफळे* आइये, आम आवाज़ को बनायें आवाम की आवाज़ !! पूंछिये खुद से !!

क्या किसी मजबूर को उसका हक़ दिलाने की ताकत है आप में ? क्या इस सिस्टम के भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ आप लड़ना चाहते हैं ? क्या किसी के अधिकारों के लिए आप आवाज़ उठा सकते है ? क्या महिलाओं के सम्मान के लिए आप कदम उठाने की हिम्मत रखते हैं ? क्या सच को सच और झूठ को झूठ कहने की ताकत है आप में ? क्या आप ज़िन्दा है ? आपका ज़मिर जिन्दा है ?

*तो जुड़िये देश के सबसे शक्तिशाली संगठन से सदस्य नोंदणी के लिए संपर्क करे 8180804243+8830258083*

संविधान द्वारा प्रदान किसी भी अधिकार का हनन ! आत्याचार ! व्याभिचार ! बाल विवाह ! अप्राकृतिक सेक्स उत्पीड़न श्रमिक उत्पीडन ! महिला उत्पीडन ! बालश्रम ! दहेज हत्या ! भरण-पोषण के झूठे मुकद्दमे ! हनी ट्रैपिंग ! सांप्रदायिक हिंसा ! गरीबों का शोषण : थाना में सुनवाई न होना ! पुलिस उत्पीड़न ! एफ आई आर दर्ज न करना ! घूसखोरी ! ठेकेदारी में बेईमानी ! कैदियों का उत्पीडन बलात्कार । गैरकानूनी कार्य ! पुलिस कार्य में विफलता ! बाल शोषण फ़्फ़र्जी मुठभेड़ ! राजनैतिक दमन भ्रूणहत्या ! दहेज़ के झूठे मुकदमे ! गरीब व असहायों की मदद। अनुसूचित चित जाति-जनजाति के विरुद्ध आत्याचार ! धोखा ! विव विश्वासघात ! दहेज उत्पीड़न ! साइबर अपराध व अन्य कोई भी समस्या जहाँ आपका बेक्सूरू होने के बावजूद उत्पीड़न किया जा रहा है। *हेल्प लाईन 81 80 80 42 43 + 8830258083*

मानवाधिकार रक्षक मंच 8830258083 + 8180804243

25/09/2025

*मानव अधिकार रक्षक मंच राष्ट्रीय अध्यक्ष:- उल्हास पी. डफळे 8180804243*
मानवाधिकार एक व्यक्ति को जन्म से प्राप्त होते हैं, और वे सार्वभौमिक, अविभाज्य और अपरिवर्तनीय होते हैं। मानवाधिकारों में जीवन का अधिकार, स्वतंत्रता का अधिकार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, काम का अधिकार, शिक्षा का अधिकार आदि शामिल हैं।
मानव अधिकार क्या हैं?
मानव अधिकार सभी मनुष्यों के लिए निहित अधिकार हैं, चाहे उनकी जाति, लिंग, राष्ट्रीयता, जातीयता, भाषा, धर्म या कोई अन्य स्थिति कुछ भी हो.
ये अधिकार सार्वभौमिक हैं, जिसका अर्थ है कि वे सभी लोगों के लिए समान रूप से लागू होते हैं.
ये अधिकार अविभाज्य हैं, जिसका अर्थ है कि वे एक दूसरे से जुड़े हुए हैं और एक को अलग नहीं किया जा सकता है.
ये अधिकार अपरिवर्तनीय हैं, जिसका अर्थ है कि वे किसी भी व्यक्ति को उनसे वंचित नहीं किया जा सकता है.
मानव अधिकारों के कुछ उदाहरण:
जीवन का अधिकार
स्वतंत्रता का अधिकार
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार
धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार
राजनीतिक अधिकारों का अधिकार
आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकार
शिक्षा का अधिकार
काम का अधिकार
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मानव अधिकार सभी मनुष्यों के लिए गरिमा और स्वतंत्रता के साथ रहने के लिए आवश्यक हैं. वे यह सुनिश्चित करते हैं कि सभी मनुष्यों को समान अवसर और सम्मान मिले. मानव अधिकार सरकारों को मानव अधिकारों का उल्लंघन करने से रोकते हैं और उन्हें लोगों की रक्षा करने के लिए प्रेरित करते हैं.
मानव अधिकारों की रक्षा कैसे करें?
मानव अधिकारों की रक्षा करने के लिए, हमें मानव अधिकारों के बारे में जानने और समझने की आवश्यकता है। हमें मानव अधिकारों के उल्लंघन के खिलाफ आवाज उठाने और न्याय के लिए संघर्ष करने की आवश्यकता है। हमें उन संगठनों और आंदोलनों का समर्थन करने की आवश्यकता है जो मानव अधिकारों की रक्षा करते हैं.
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*मानव अधिकार रक्षक मंच राष्ट्रीय अध्यक्ष : उल्हास पी. डफळे* आइये, आम आवाज़ को बनायें आवाम की आवाज़ !! पूंछिये खुद से !!

क्या किसी मजबूर को उसका हक़ दिलाने की ताकत है आप में ? क्या इस सिस्टम के भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ आप लड़ना चाहते हैं ? क्या किसी के अधिकारों के लिए आप आवाज़ उठा सकते है ? क्या महिलाओं के सम्मान के लिए आप कदम उठाने की हिम्मत रखते हैं ? क्या सच को सच और झूठ को झूठ कहने की ताकत है आप में ? क्या आप ज़िन्दा है ? आपका ज़मिर जिन्दा है ?

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संविधान द्वारा प्रदान किसी भी अधिकार का हनन ! आत्याचार ! व्याभिचार ! बाल विवाह ! अप्राकृतिक सेक्स उत्पीड़न श्रमिक उत्पीडन ! महिला उत्पीडन ! बालश्रम ! दहेज हत्या ! भरण-पोषण के झूठे मुकद्दमे ! हनी ट्रैपिंग ! सांप्रदायिक हिंसा ! गरीबों का शोषण : थाना में सुनवाई न होना ! पुलिस उत्पीड़न ! एफ आई आर दर्ज न करना ! घूसखोरी ! ठेकेदारी में बेईमानी ! कैदियों का उत्पीडन बलात्कार । गैरकानूनी कार्य ! पुलिस कार्य में विफलता ! बाल शोषण फ़्फ़र्जी मुठभेड़ ! राजनैतिक दमन भ्रूणहत्या ! दहेज़ के झूठे मुकदमे ! गरीब व असहायों की मदद। अनुसूचित चित जाति-जनजाति के विरुद्ध आत्याचार ! धोखा ! विव विश्वासघात ! दहेज उत्पीड़न ! साइबर अपराध व अन्य कोई भी समस्या जहाँ आपका बेक्सूरू होने के बावजूद उत्पीड़न किया जा रहा है। *हेल्प लाईन 81 80 80 42 43*

मानवाधिकार रक्षक मंच 8830258083 + 8180804243

14/05/2025

मानव अधिकार रक्षक मंच है आप के साथ,
*मानव अधिकार रक्षक मंच पूढिल संविधानिक अधिकार अधिनियम 12 ते 35 या कलमांचा आधारे कार्य करत आहे या करिता सर्व पदाधिकारी सदस्य यांनी नोंद घ्यावी आपन करत असलेल्या कार्यात आपनास मदत करिता महत्वाचे आहे*
मानव अधिकार रक्षक मंच
राष्ट्रीय अध्यक्ष उल्हास पी.डफळे
8830258083 , 8180804243

मूलभूत हक्क म्हणजे काय? मूलभूत हक्क माहिती मराठी

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मूलभूत हक्क
महत्वाचे मुद्दे
मूलभूत हक्क
मूलभूत हक्कांचे महत्व –
मूलभूत हक्कांची वैशिष्ट्ये –
मूलभूत हक्क
६) घटनात्मक उपायांचा हक्क –
प्रत्येक व्यक्तीने वयाची १८ वर्षे पूर्ण केल्यानंतर त्याला मतदानाचा अधिकार मिळतो. आपल्याला भारतीय नागरिक म्हणून भारतामध्ये मुक्तसंचार करण्याचा अधिकार आहे. मग हे हक्क व अधिकार आपल्याला मिळाले कसे ?

हक्क म्हणजे काय? हक्क म्हणजे माणूस व नागरिक या नात्याने केलेल्या न्याय मागण्या व अधिकार आहेत. हक्कामुळे शासनाची सत्ता मर्यादित होते. लोकशाही शासन व्यवस्थेमध्ये नागरिकांना हक्क दिले जाणे आणि शासनाकडून अशा हक्कांचे रक्षण होणेही गरजेचे असते.

लोकशाही देशांमध्ये व्यक्तींना काही मूलभूत हक्क प्रदान केले जातात. त्याचे संरक्षण देशातील न्यायव्यवस्था मार्फत केले जाते. फ्रेंचच्या राज्यक्रांतीने मानवी हक्काची सनद जाहीर करून स्वातंत्र्य समता बंधुता ही महत्त्वाची मूल्ये जगाला दिली. अमेरिकन संविधानात घटना दुरुस्ती करून ‘ बिल ऑफ राइट्स ‘ या नावाने नागरिकांच्या मूलभूत हक्कांचा समावेश करण्यात आला.

१० डिसेंबर १९४८ रोजी संयुक्त राष्ट्राने मानवी हक्काचा सार्वत्रिक जाहीरनामा घोषित केला. भारतीय संविधानात मूलभूत हक्काचे महत्व जाणून तिसऱ्या भागात सहा प्रकारच्या मूलभूत हक्कांचा समावेश केला आहे.

भारतीय राज्यघटनेच्या भाग ३ मध्ये कलम १२ ते ३५ मध्ये मूलभूत हक्क स्पष्ट करण्यात आले आहेत. याच कारणामुळे भारतीय राज्यघटनेच्या भाग ३ ला भारताची मॅग्ना कार्टा असे संबोधले जाते.

भारतातील मूलभूत हक्क हे जगातील इतर देशांच्या तुलनेत अधिक विस्तृत पद्धतीने स्पष्ट केलेले मूलभूत हक्क आहेत. संविधानात असे नमूद करण्यात आले आहे की मूलभूत हक्क देण्याची आणि त्यांच्या संरक्षणाची जबाबदारी राज्यांकडे आहे.

मूलभूत हक्कांचे महत्व –
व्यक्तीला विकास साधण्यासाठी स्वातंत्र्य आणि समता आवश्यक ठरते म्हणून लोकशाहीचे स्वातंत्र्य आणि समता हे दोन आधारस्तंभ ठरतात. स्वातंत्र्य, समता, बंधुता, न्याय ही महत्त्वाची मुल्ये संविधानाच्या उद्देश पत्रिकेमध्ये व्यक्त केली आहेत. कोणत्याही देशाची राज्यघटना ही त्या देशाचा मूलभूत कायदा असते.

राज्यघटनेत मूलभूत हक्कांना स्थान दिले गेल्यामुळे मूलभूत हक्क व्यक्तीसाठी महत्त्वाचे ठरतात. मूलभूत हक्क न्यायप्रविष्ठ असतात. न्याय व्यवस्थेमार्फत अशा हक्कांचे उल्लंघन झाल्यास न्याय मिळण्याच्या दृष्टीने प्रयत्न करता येतो.

मूलभूत अधिकार देशात राजकीय लोकशाहीचा आदर्श प्रस्थापित करतात. जनतेच्या स्वातंत्र्याचे रक्षण मूलभूत हक्काकडून होते. देशातील कार्यकारी मंडळ व कायदे मंडळ यांच्या या कृतीवर मर्यादा घालण्याचे काम मूलभूत हक्काकडून होत असते.

मूलभूत हक्कांची वैशिष्ट्ये –
१) हक्कांची सविस्तर पद्धतीने नोंद –

भारतीय राज्यघटनेत व्यक्तीच्या मूलभूत हक्कांची नोंद सविस्तर पद्धतीने करण्यात आली आहे स्वातंत्र्याच्या काळात नागरिकांना देण्यात येणारी सहा प्रकारचे स्वतंत्र तर कलम ३२ मध्ये हक्कांच्या संरक्षणासाठी देणात येणाऱ्या पाच वेगवेगळ्या आदेशांची माहिती आहे.

२) मूलभूत हक्क मर्यादित आहेत –

भारतीय नागरिकांना देण्यात आलेले मूलभूत हक्क अमर्याद नाहीत. या मर्यादा मूलभूत हक्काबरोबरच स्पष्ट करण्यात आल्या आहेत.

३) न्यायालयीन संरक्षण –

मूलभूत हक्कांना न्यायालयीन संरक्षण आहे. हक्कांचे उल्लंघन होणार नाही याची काळजी घेण्याची जबाबदारी न्याय मंडळावर आहे. व्यक्तीला जर वाटले आपल्या हक्काचे उल्लंघन झाले तर व्यक्ती न्यायालयात धाव घेऊ शकते.

४) मूलभूत हक्कांची दुरुस्ती –

मूलभूत हक्कांमध्ये दुरुस्ती करता येते. भारतीय संसदेला मूलभूत हक्कांमध्ये दुरुस्ती करण्याचा अधिकार आहे. मात्र यासाठी घटनेच्या मूलभूत संरचनेचा विचार केला जावा अशी अट आहे.

५) मूलभूत हक्कांची स्थगिती –

राष्ट्रीय आणीबाणीच्या काळात कलम २० व २१ मधील हक्क वगळता इतर सर्व हक्क स्थगित करता येतात.

भारतीय संविधान भाग – ३

मूलभूत हक्क
१) समानतेचा हक्क
२) स्वातंत्र्याचा हक्क
३) शोषणाविरुद्धचा हक्क
४) धर्मस्वातंत्र्याचा हक्क
५) सांस्कृतिक व शैक्षणिक हक्क
६) घटनात्मक उपायांचा हक्क
१) समानतेचा हक्क (कलम १४ ते १८) –

१.१) कलम १४ – कायद्यापुढे समानता – कलम १४ नुसार प्रत्येक व्यक्ती कायद्यासमोर समान असते. सर्वांना कायद्याचे समान संरक्षण आहे. धर्म जात लिंग आर्थिक दर्जा अशा कोणत्या आधारावर राज्य नागरिकांच्या मध्ये भेदभाव करू शकणार नाही. कायद्यासमोर समानता ही एक नकारात्मक संकल्पना आहे. तर कायद्याचे समान संरक्षण ही एक सकारात्मक संकल्पना आहे. कायद्यासमोर समानता हा कायद्याचे राज्य या संकल्पनेचा प्रमुख घटक आहे.

१.२) कलम – भेदभावास प्रतिबंध – भारतीय नागरिकांमध्ये धर्म, वंश, जात, लिंग, जन्मठिकाण, या व अशा कोणत्या आधारावर राज्य भेदभाव करू शकत नाही. या कलमाला अपवाद कलम १५ (३) मध्ये दिलेल्या आहे. राज्यसंस्था महिला व बालकांसाठी विशेष तरतूद करू शकते. तसेच कलम १५ (५) नुसार अनुसूचित जाती व जमाती करता विशेष तरतूद करण्याचा अधिकार आहे.

१.३) कलम १६ – समानसंधी – राज्यसंस्थेच्या नियंत्रणाखालील कोणत्याही पदावरील नेमणूकासंबंधी सर्व नागरिकांना समान संधी असेल.

१.४) कलम १७ – अस्पृश्यतेवर बंदी – कलम १७ नुसार अस्पृश्यता नष्ट करण्यात आली आहे. व तिचे कोणत्याही स्वरूपातील आचरण हे निषिद्ध मानण्यात आले आहे. भारतीय संसदेने नागरी हक्क संरक्षण अधिनियम १९५५ संमत करून अस्पृश्यता पाळणे हा कायद्याने फौजदारी गुन्हा ठरवला आहे.

१.५) कलम १८ – पदव्यांची समाप्ती – भारतीय संविधानाने भेदभाव निर्माण करणारे पदव्या व किताब कलम १८ नुसार नष्ट केले आहेत. समानतेची भावना रुजवण्यासाठी ही पदव्यांची समाप्ती आवश्यक ठरते.

२) स्वातंत्र्याचा हक्क –

स्वातंत्र्य हा लोकशाहीचा आत्मा आहे. स्वातंत्र्य आणि समता परस्परांवर अवलंबून असतात. भारताच्या राज्यघटनेमध्ये भारतीय नागरिकाला सुरुवातीला सात प्रकारची स्वातंत्र्य देण्यात आली होती. मात्र १९७८ मधील ४४ व्या घटनादुरुस्तीनुसार संपत्ती संपादन करणे, धारण करणे आणि संपत्तीची विल्हेवाट लावणे या प्रकारचे स्वातंत्र्य वगळण्यात आले आहे.

२.१) कलम १९ – सहा स्वातंत्र्ये –

अ) भाषण व विचार स्वातंत्र्य – भाषण व विचार स्वातंत्र्याच्या त्यानुसार सरकारवर टीका देखील करता येते हे स्वातंत्र्य लोकशाहीचे द्योतक आहे.
ब) शांततापूर्ण व निशस्त्र एकत्र येण्याचे स्वातंत्र्य
क) संघटना स्थापन करण्याचे स्वातंत्र्य
ड) भारताच्या क्षेत्रात मुक्त संचार करण्याचे स्वातंत्र्य
इ) देशाच्या कोणत्याही भागात वास्तव्य करण्याचे स्वातंत्र्य
फ) कोणताही व्यवसाय वा पेशा आचारण्याचे स्वातंत्र्य
२.२) कलम २० – अपराधांच्या दोषसिद्धीबाबत संरक्षण कलम २० नुसार सर्व व्यक्तींना अयोग्य व अत्याधिक शिक्षेपासून संरक्षण प्रदान करण्यात आले आहे.

२.३) कलम २१ – जीवित व व्यक्तिगत स्वातंत्र्य याचे संरक्षण – कायद्याने प्रस्थापित कार्यपद्धती शिवाय कोणत्याही व्यक्तीचे जिवीत किंवा व्यक्तिगत स्वातंत्र्य हिरावून घेतले जाणार नाही.

२.४) कलम २२ – अटक व स्थानबद्धता यापासून संरक्षण – स्थानबद्धता दोन प्रकारची असते. शिक्षा म्हणून केलेली स्थानबद्धता व प्रतिबंधक स्थानबद्धता. प्रतिबंधक स्थानबद्धता केवळ संशयावरून केलेली आगाऊ सावधगिरी असते. प्रतिबंधक स्थानबद्धता ही भविष्यात गुन्हा करण्यापासून रोखणे या उद्देशाने केलेली असते.

३) शोषणाविरुद्धचा हक्क –

भारतीय समाजात पूर्वी वॅट बेदारी देवदासी अशा प्रकारच्या शोषण करणाऱ्या अनिष्ठ प्रथा प्रचलित होत्या. या प्रथा नष्ट करण्याच्या दृष्टीने शोषणाविरुद्धचा मूलभूत हक्क व्यक्तीला देण्यात आला.

३.१) कलम २३ – माणसांचा अप्पा व्यापार आणि वेट बिगारी यांना मनाई. माणसांचा अपंग व्यापार आणि वेट बिगारी करणे हा कायद्यानुसार शिक्षा पात्र अपराध असेल.

३.२) कलम २४ – कारखाने इत्यादीमध्ये बालकांना कामाला ठेवण्यास मनाई. कलम २४ नुसार १४ वर्ष वयाखालील कोणत्याही बालकास कारखान्यात किंवा खाणीमध्ये किंवा इतर कोणत्याही धोकादायक ठिकाणी कामाला ठेवण्यास सक्त मनाई आहे.

४) धार्मिक स्वातंत्र्याचा हक्क –

राज्याचा कोणताही विशिष्ट धर्म नाही किंवा धर्माच्या आधारावर राज्य भेदभाव करू शकणार नाही. भारतातील राज्यव्यवस्था धर्मनिरपेक्ष आहे.

४.१) कलम २५ – विवेकबुद्धी चे स्वातंत्र्य आणि धर्माचे मुक्त आचरण व प्रसार . कलम २५ नुसार सर्व नागरिकांना कोणताही धर्म स्वीकारण्याचा व त्याचा प्रचार व प्रसार करण्याचा हक्क असेल.

४.२) कलम २६ – धर्मविषयक व्यवहारांची व्यवस्था पाहण्याचे स्वतंत्र. या कलमाअंतर्गत धार्मिक उद्दिष्टांनी धार्मिक संस्थांची स्थापना करणे, त्याच्या व्यवहारांची व्यवस्था पाहणे, धार्मिक संस्थांची मालमत्ता स्वमालकीची असणे किंवा संपादन करणे, व अशा मालमत्तेचे प्रशासन करणे हे सर्व हक्क सार्वजनिक सुव्यवस्था, नीतिमत्ता व आरोग्य राखण्याच्या अधीन राहूनच उपभोगता येतील.

४.३) कलम २७ – विशिष्ट धर्माच्या संवर्धनाकरिता कर देण्याबाबत स्वातंत्र्य. कोणत्याही व्यक्तीवर अशी सक्ती केली जाणार नाही की एखाद्या विशिष्ट धर्मासाठी त्या व्यक्तीने कर दिलाच पाहिजे. हे व्यक्तिगत स्वातंत्र्य त्या व्यक्तीला या कलमानुसार दिलेले आहे.

४.४) कलम २८ – शैक्षणिक संस्थांमध्ये धार्मिक शिक्षण किंवा धार्मिक उपासना यांना उपस्थित राहण्याबाबत स्वतंत्र. शासकीय अनुदानातून चालवल्या जाणाऱ्या कोणत्याही शैक्षणिक संस्थेत धार्मिक शिक्षणावर बंदी आहे. शासकीय किंवा शासन अनुदानित संस्थेमध्ये धार्मिक उपासनेसाठी सहभागी होण्यास कोणत्याही व्यक्तीला भाग पाडले जाणार नाही.

५) सांस्कृतिक व शैक्षणिक हक्क –

भारत हा विविधतेने नटलेला देश आहे. यामध्ये वेगवेगळ्या समाजातील लोकांची वेगवेगळी संस्कृती दिसून येते. या समाजातील संस्कृतीचे जतन करण्याच्या दृष्टिकोनातून या मूलभूत हक्कांचा समावेश घटनेमध्ये केलेला दिसून येतो.

५.१) कलम २९ – अल्पसंख्यांकांच्या हितसंबंधांचे संरक्षण. भारतीय नागरिकाला स्वतःची वेगळी भाषा लिपी व संस्कृती जतन करण्याचा हक्क असेल.

५.२) कलम ३० – अल्पसंख्यांक नागरिकांना शैक्षणिक संस्था स्थापण्याचा व प्रशासन करण्याचा हक्क.

६) घटनात्मक उपायांचा हक्क –
व्यक्तीच्या मूलभूत हक्कांच्या संदर्भात घटनात्मक उपाय योजना या विभागा अंतर्गत मूलभूत हक्कांमध्ये पुरवल्या आहेत.

कलम ३२ – भारतीय घटनेच्या भाग ३ मध्ये प्रदान केलेले हक्क बजावण्या करता उपाय. मूलभूत हक्कांच्या संरक्षणासाठी किंवा मूलभूत हक्कांचे उल्लंघन झाले तर ते हक्क परत मिळवण्याच्या दृष्टीने न्यायालयात न्याय मागता येतो. मूलभूत हक्कांच्या संरक्षणासाठी सर्वोच्च किंवा उच्च न्यायालयाने काढलेल्या आदेशात रिट्स असे म्हणतात. ह्या आदेशांना निर्देश किंवा प्रसिद्धी लेख असेही म्हटले जाते.

१) देहोपस्थिती / बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas corpus)
२) परमादेश (Mandamus)
३) प्रतिषेध ( prohibition)
४) उत्प्रेक्षण ( Certiorari)
५) अधिकारपृच्छा

कलम ३३ – सेनेच्या मूलभूत हक्कांमध्ये फेरबदल करण्याचा अधिकार – मूलभूत हक्क सेनेला लागू करताना त्यामध्ये आवश्यक ते फेरबदल करण्याचा अधिकार संसदेला कायद्याद्वारे प्रदान करण्यात आला आहे .

कलम ३४ – लष्करी कायदा अमलात असताना मूलभूत हक्कावर निर्बंध – भारताच्या राज्य क्षेत्रात एखाद्या भागात जर लष्करी कायदा अमलात असेल तर व्यक्तीच्या मूलभूत हक्कावर निर्बंध आणण्याबद्दल तरतूद या कलमांमध्ये दिलेली आहे.

३५ कलम – मूलभूत हक्काचा अंमलबजावणी करता कायदे – काही मूलभूत हक्कांच्या अंमलबजावणी करता कायदे करण्याचा अधिकार हा फक्त संसदेला असेल राज्य विधान मंडळाला असा अधिकार असणार नाही अशी तरतूद या कलमात करण्यात आलेली आहे.
*मानव अधिकार रक्षक मंच वरील संविधानिक अधिकार अधिनियम 12 ते 35 या कलमांचा आधारे कार्य करित आहे*
(याची नोंद सर्व पदाधिकारी यांनी घ्यावि) *मानव अधिकार रक्षक मंच पूढिल संविधानिक अधिकार अधिनियम 12 ते 35 या कलमांचा आधारे कार्य करत आहे या करिता सर्व पदाधिकारी सदस्य यांनी नोंद घ्यावी आपन करत असलेल्या कार्यात आपनास मदत करिता महत्वाचे आहे*
मानव अधिकार रक्षक मंच
राष्ट्रीय अध्यक्ष उल्हास पी.डफळे

मूलभूत हक्क म्हणजे काय? मूलभूत हक्क माहिती मराठी

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https://youtu.be/7bMkvHkancw?si=KtrtOHan1kWII2BQजननायक न्यूज जाहिराती व बातम्यांसाठी संपर्क शशिकांत जगताप
02/04/2024

https://youtu.be/7bMkvHkancw?si=KtrtOHan1kWII2BQ
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🌍प्रेषिता मिनिस्ट्रीज NLF: https://youtu.be/a36hm1j3vNM👉🏻क्या आप के जिवन मे शांति नही???  क्या आप के काम मे आप सफलता नही...
13/10/2021

🌍प्रेषिता मिनिस्ट्रीज NLF
: https://youtu.be/a36hm1j3vNM
👉🏻क्या आप के जिवन मे शांति नही??? क्या आप के काम मे आप सफलता नही पारहे??? क्या आप कोई बिमारी से परेशान हैं! ??? क्या आप निराशा दु:खो से गुजर रहे हो??? येशू मसिहा आप से प्यार करता हैं! समस्या कोही भी हो येशू मसिहा मै ही शांति आनंद हैं! आरोग्य सभा के लिये फोन फोन नं. 8180804243 + 8007008581
Pastor:- ULHAS P. DAFLE

क्या आप के जिवन मे शांति नही??? क्या आप के काम मे आप सफलता नही पारहे??? क्या आप कोई बिमारी से परेशान हैं! ??? क्या आप निराशा...

13/10/2021

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