20/12/2025
शरीर को भारत के ऋषि (प्राचिन भारतीय वैज्ञानिक) अन्नमय कोश कहते हैं. शरीर अन्न से बनता है. अन्न कुछ समय ठीक रहता है. अन्न कुछ समय के पश्चात सड़ जाता है, उसमें बदबु आने लगती है. अन्न से पोषित शरीर कुछ समय के लिए ठीक रहता है. कुछ समय के पश्चात अन्न से पोषित शरीर सड़ जाता है, उसमें बदबु आने लगती है. उचीत समय पर अन्न का सदुपयोग करना योग्य है. उसी तरह उचीत समय पर शरीर का सदुपयोग करना योग्य है.
"यत्प्रातः संस्कृतं चान्नं तच्च सायं विनश्यति। तदिय रसेसम्पुष्टे काये का नाम नित्यता॥" अन्न सड़नेवाला है - सदुपयोग करो. अन्नमयकोश शरीर सड़नेवाला है - सदुपयोग करो. उठो! जागो! उत्तिष्ठत! जाग्रत! Arise! Awake!
- स्वामी श्रीकण्ठानन्द
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प्रवर्तक - जागृत नाशिक जागृत भारत जागृत विश्व अभियान