29/07/2026
🌺गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः, गुरुर्देवो महेश्वरः। गुरुःसाक्षात् पर ब्रह्म, तस्मै श्रीगुरवे नमः ।।१।। ब्रह्मानन्दम् परम सुखदम्, केवलम् ज्ञान मूर्तिम् । द्वन्द्वातीतम् गगन सदृशम्, तत्त्व मस्यादि लक्ष्यम् ।।२।। एकम् नित्यम् विमलम् अचलम्, सर्वधी साक्षिभूतम् । भावातीतम् त्रिगुण रहितम्, सद्गुरुम् तम् नमामि ।।३॥
काषाय वस्त्रम् कर दण्ड धारिणम् । कमण्डलुम् पद्म करेण शंखम् ।।४।। चक्रम् गदा भूषित भूषणाढ्यम् । श्रीपाद राजम् शरणम् प्रपद्ये ।।५।।
धृत्वा कमण्डलुम् करे दर टंक मालिकाम् । कौपीन मौन्जी भुज शास्त्र मुख त्रि केशवम् ।।६।। नित्यम् हि वास औदुम्बर छायिम् श्रीहरे । दत्तात्रेय शरणम् माम् भव पार कारक ।।७।।
नमो गुरुभ्यो गुरु पादुकाभ्यो । नमः परेभ्यः पर पादुकाभ्यः ।।८।। आचार्य सिद्धेश्वर पादुकाभ्यो । नमोस्तु लक्ष्मी पति पादुकाभ्यः ।।९।।🌺