शिवांश संदीप

शिवांश संदीप आर्यवर्त भारत महान को फिर से विश्वगुरू बनाना
सबका भला हो प्राणियों में सद्भावना हो सर्व शांति

ऋषि_मुनियों की भूमि भारत एक रहस्यमय देश है आईये जानते हैं इसकी महानता के कारण....1. प्रकृतिएक ओर समुद्र तो दूसरी ओर बर्फ...
06/11/2024

ऋषि_मुनियों की भूमि भारत एक रहस्यमय देश है
आईये जानते हैं इसकी महानता के कारण....

1. प्रकृति

एक ओर समुद्र तो दूसरी ओर बर्फीले हिमालय है, एक ओर रेगिस्तान तो दूसरी ओर घने जंगल है एक ओर ऊंचे-ऊंचे पहाड़ तो दूसरी ओर मैदानी इलाके है। प्रकृति के ऐसे सारे रंग किसी अन्य देश में नहीं है। भारतीय मौसम दुनिया के सभी देशों के मौसम से बेहतर है। सिर्फ यहीं पर प्रमुख रूप से चार ऋतुएं होती है। विदेशी यहां आकर भारत के वातावरण से मंत्रमुग्ध हो जाते हैं।

2. ऋषि_मुनि

सप्त ऋषियों के अलावा, कपिल, कणाद, गौतम, जैमिनि, व्यास, पतंजलि, बृहस्पति, अष्टावक्र, शंकराचार्य,
गोरखनाथ, मत्स्येंद्र नाथ, जालंधर, गोगादेव, झुलेलाल, तेजाजी महाराज, संत नामदेव, संत ज्ञानेश्वर, रामानंद, कबीर, पीपा, रामसापीर बाबा रामदेव, पाबूजी, मेहाजी मांगलिया, हड़बू, रैदास, मीराबाई, गुरुनानक, धन्ना, तुलसीदास, दादू दयाल, मलूकदास, पलटू, चरणदास, सहजोबाई, दयाबाई, एकनाथ, तुकाराम, समर्थ रामदास, भीखा, वल्लभाचार्य, चैतन्य महाप्रभु, विट्ठलनाथ, संत सिंगाजी, हितहरिवंश, गुरु गोविंदसिंह, हरिदास, दूलनदास, महामति प्राणनाथ, शैगांव के गजानन महाराज, रामकृष्‍ण परमहंस, स्वामी विवेकानंद, मेहर बाबा, दादा धूनी वाले, लाहड़ी महाशय, शीलनाथ बाबा, महर्षि अरविन्द, जे कृष्णमूर्ति, ओशो, स्वामी प्रभुपाद, दयानंद सरस्वती, महर्षि महेश योगी, एनी बिसेंट, आनंद मूर्ति, दादा लेखराज, श्रीशिव दयाल सिंह, श्रीराम शर्मा आचार्य, देवहरा बाबा, नीम करौली बाबा आदि ऐसे हजारों साधु और संत हैं।

3. 'प्रथम_मानव'

यूं तो मनुष्य विकासक्रम से मनुष्य बना, लेकिन कहते हैं कि मनुष्य प्रारंभ में भारत में ही रहता था। शोधानुसार सप्तचरुतीर्थ के पास वितस्ता नदी की शाखा देविका नदी के तट पर मनुष्य जाति की उत्पत्ति हुई। प्रथम सृष्टिकर्ता मानव को स्वायंभु मनु कहा गया।

4. 'प्रथम_धर्म'

ऋग्वेद को संसार का प्रथम धर्मग्रंथ माना जाता है। ऋग्वेद को भारतीयों ने ही सरस्वती नदी के तट पर बैठकर लिखा गया। चार ऋषियों अग्नि, वायु, अंगिरा और आदित्य ने मिलकर ऋग्वेद के ज्ञान को वाचिक परंपरा में ढाला जो अभी तक जारी है। वेदों पर आधारित धर्म को ही सनातन वैदिक या हिन्दू धर्म कहा जाता है।

5. मोक्ष_का_दर्शन

योग, तप, षड् दर्शन और ध्यान ही धर्म और मोक्ष का मार्ग है। प्राचीन काल से ही साधु-संतों ने इसे प्रचारित किया।
ऋषि पतंजलि ने इसे 'आष्टांग योग' नाम से सुव्यवस्थित किया। आष्टांग योग के बाहर धर्म, दर्शन और अध्यात्म की कल्पना नहीं की जा सकती।

6. मंदिर_और_गुफाएं

भारत में कई प्राचीन रहस्यमी मंदिर, स्तंभ, महल और गुफाएं हैं। बामियान, बाघ, अजंता-एलोरा, एलीफेंटा और भीमबेटका की गुफाएं। 12 ज्योतिर्लिंग, 51 शक्तिपीठ के अलावा कई चमत्कारिक मंदिर।

7. रहस्यमयी_विद्याएं

प्राणविद्या, त्राटक, सम्मोहन, जादू, टोना, स्तंभन, इन्द्रजाल, तंत्र, मंत्र, यंत्र, चौकी बांधना, गार गिराना, सूक्ष्म शरीर से बाहर निकलना, पूर्वजन्म का ज्ञान होना, अंतर्ध्यान होना, त्रिकालदर्शी बनना, मृत संजीवनी विद्या, ज्योतिष, सामुद्रिक शास्त्र, वास्तु शास्त्र, हस्तरेखा, पानी बताना, धनुर्विद्या, अष्टसिद्धियां, नवनिधियां आदि सैंकड़ों विद्याओं का जन्म भारत में हुआ।

8. किताबें

वेद , पुराण , गीता ,उपनिषद की कथाएं, पंचतंत्र, बेताल या वेताल पच्चीसी, जातक कथाएं, सिंहासन बत्तीसी, हितोपदेश, कथासरित्सागर, तेनालीराम की कहानियां, शुकसप्तति, कामसूत्र, कामशास्त्र, रावण संहिता, भृगु संहिता, लाल किताब, संस्कृत सुभाषित, विमान शास्त्र, योग सूत्र, परमाणु शास्त्र, शुल्ब सूत्र, श्रौतसूत्र, अगस्त्य संहिता, सिद्धांतशिरोमणि, चरक संहिता, सुश्रुत संहिता, च्यवन संहिता, शरीर शास्त्र, गर्भशास्त्र, रक्ताभिसरण शास्त्र, औषधि शास्त्र, रस रत्नाकर, रसेन्द्र मंगल, कक्षपुटतंत्र, आरोग्य मंजरी, योग सार, योगाष्टक, अष्टाध्यायी, त्रिपिटक, आगम एवं जिन सूत्र, समयसार, लीलावती, करण कुतूहल, कौटिल्य के अर्थशास्त्र, आदि लाखों ऐसी किताबें , ग्रंथ हैं जिनके दम पर आज विज्ञान, तकनीक आदि सभी क्षेत्रों में प्रगति हो रही है।

9. कला

कलारिपट्टू (मार्शल आर्ट), भाषा, लेखन, नाट्य, गीत, संगीत, नौटंकी, तमाशा, स्थापत्यकला, चित्रकला, मूर्तिकला, पाक कला, साहित्य, बेल-बूटे बनाना, नृत्य, कपड़े और गहने बनाना, सुगंधित वस्तुएं-इत्र, तेल बनाना, नगर निर्माण, सूई का काम, बढ़ई की कारीगरी, पीने और खाने के पदार्थ बनाना, पाक कला, सोने, चांदी, हीरे-पन्ने आदि रत्नों की परीक्षा करना, तोता-मैना आदि की बोलियां बोलना आदि कलाओं का जन्म भारत में हुआ।

10.खेल

शतरंज, फुटबॉल, कबड्डी, सांप-सीढी का खेल, ताश का खेल, तलवारबाजी, घुड़सवारी, धनुर्विद्या, युद्ध कला, खो-खो, चौपड़ पासा,
रथ दौड़, नौका दौड़, मल्ल-युद्ध, कुश्ती, तैराकी, भाला फेंक, आखेट, छिपाछई, पिद्दू, चर-भर, शेर-बकरी, चक-चक चालनी,
समुद्र पहाड़, दड़ी दोटा, गिल्ली-डंडा, किकली (रस्सीकूद), मुर्ग युद्ध, बटेर युद्ध, अंग-भंग-चौक-चंग, गोल-गोलधानी, सितौलिया, अंटी-कंचे,
पकड़मपाटी, पोलो या सगोल कंगजेट, तीरंदाजी, हॉकी, गंजिफा, आदि खेलों का जन्म भारत में हुआ ,,

11.अविष्कार

पहिया, बटन, रूलर स्केल, शैम्पू, विमान, नौका, जहाज, व्यंजन, रथ, बैलगाड़ी, भाषा, व्याकरण, शून्य और दशमलव, शल्य चिकित्सा,
हीरे का खनन, खेती करना, रेडियो, बिनारी कोड, स्याही, धातुओं की खोज, प्लास्टिक सर्जरी, अस्त्र-शश्त्र, बिजली, ज्यामिती, गुरुत्वाकर्षन का नियम, आयुर्वेद चिकित्सा, पृथ्वी का सूर्य का चक्कर लगाना, ब्रह्मांड की लंबाई चौड़ाई नापना, कैलेंडर, पंचाग, परमाणु सिद्धांत, वाद्य यंत्र, पाई के मूल्य की गणना, लोकतंत्र, साम्यवाद आदि का अविष्कार भारत में हुआ !!

साभार....

🚩जय हिंदूराष्ट्र 🚩

जय नाथ एकलिंग जय मेवाड़
09/05/2024

जय नाथ एकलिंग जय मेवाड़

भक्तियोग के प्रणेता ,भक्ति के आचार्य , नवधा भक्ति के प्रतिपादनकर्ता , रुद्रावतार , मारुतिनंदन , भक्ति एवं शक्ति के प्रती...
23/04/2024

भक्तियोग के प्रणेता ,भक्ति के आचार्य , नवधा भक्ति के प्रतिपादनकर्ता , रुद्रावतार , मारुतिनंदन , भक्ति एवं शक्ति के प्रतीक , भक्त शिरोमणि महावीर हनुमान जी के प्रकाट्य दिवस पर सभी देशवासियों को हार्दिक बधाईयाँ !

भक्ति शिरोमणि हनुमान जी दास्य भाव के उच्चकोटि के अग्रदूत , राजदूत , नीतिज्ञ , चारों वेदों के पंडित , शास्त्रज्ञ , विद्वान् , सच्चे अर्थों में एक ब्राह्मण, रक्षक , अष्ट सिद्धियों एवं नौ निधियों के स्वामी , श्रेष्ठ वक्ता , गायक , नर्तक , बलवान और सर्वोत्कृष्ट बुद्धिमान हैं !
शास्त्रीय संगीत के तीन आचार्यों में से एक हनुमान जी भी हैं , अन्य दो में थे शार्दूल और कहाल ! " संगीत पारिजात " हनुमान जी के संगीत सिद्धांत पर आधारित है !
भगवान् को अपने भक्तों में प्रियातिप्रिय सर्वप्रिय हनुमान जी हैं !

" हनुमान सम नहिं बड़भागी !
नहिं कोउ रामचरन अनुरागी !!
गिरिजा जासु प्रीति सेवकाई !
बार बार प्रभु निज मुख गाई !! "

हनुमान जी की भक्ति या सेवा करने वाले को हनुमान जी स्वयमेव अपने आराध्य भगवान् श्री राम सीता की भक्ति सहज प्रदान कर देते हैं !

इसीलिए कागभुशुंडी जी कहते हैं :

मोरे मन प्रभु अस बिस्वासा !
राम ते अधिक राम कर दासा !!

मुझे भगवान् से ज्यादा विश्वास भगवान् के भक्त पर है ! क्योंकि स्वयं भगवान् ने कहा है : "अहम् भक्त पराधीनं ! मैं भक्तों के अधीन रहता हूँ !

और क्योंकि भगवान् का भक्त ही मुझे भगवान् से मिलवा सकता है !

हनुमन मतवे हरिम मतवो !
हरिम मतवे हनुमन मतवो !!
हनुमनु ओलिदरे हरि ताजो लिवनु !
ह्नुमनु मुनिदरै हरि मुनिव !!

श्री हनुमान का मत ही श्री हरि का मत है ! श्री हरि का मत ही श्री हनुमान का मत है ! श्री हनुमान प्रसन्न होंगे तो श्री हरि अवश्य प्रसन्न होंगे ! यदि श्री हनुमान अप्रसन्न हुए तो श्री हरि भी अवश्य अप्रसन्न होंगे !

इसीलिए भक्त ( भगवद प्राप्त महापुरुष) और भगवान् में कभी भेद नहीं होता !
भक्ति के साक्षात अवतार के रूप में हनुमान जी ने भगवान् के हर कार्य को सेवा भाव से करते हुए उनके लीला काल में अपनी महत्वपूर्ण सेवा देकर उनके कार्यों को प्रतिपादित किया और भक्तों को नव नव रस प्रदान किया !

असुर निकंदन हनुमान जी के प्राकट्य दिवस पर सभी देशवासियों को शुभकामनाएं ! जिस प्रकार हनुमान जी ने रावण के दर्प , मद अहंकार रुपी लंका को जलाकर भस्म किया था , ठीक उसी प्रकार हम सभी के सभी अशुभ कर्मों की लंका जलाकर हनुमान जी हम सभी को नित्य नवीन रस और आनंद प्रदान करें 🌼

- Shwetabh Pathak ( श्वेताभ पाठक )

#हनुमान #हनुमानजी #हनुमानजयंती

24/03/2024

Happy love festival Holi

सभी को बुद्ध पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामना❣️❣️❣️कितना अद्भुत होता है किसी बुद्ध का आगमन,अपनी प्रसुप्त संभावना में खिल उठत...
05/05/2023

सभी को बुद्ध पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामना
❣️❣️❣️
कितना अद्भुत होता है
किसी बुद्ध का आगमन,
अपनी प्रसुप्त संभावना में
खिल उठता है तन मन।
इस आगमन में मिट जाता है
भीतर और बाहर,
वन प्रांतर और घर,
निम्नतर और उच्चतर,
चारों ओर उठती है
प्रकाश की एक लहर,
जिसमें समा जाता है
समग्र संसार और निर्वाण…
बुद्ध हमसे अलग नहीं हैं,
हमारी ही संभावना का
कायामय हो जाना
होता है बुद्ध का आगमन,
खोजो तो कहीं नहीं हैं बुद्ध
लेकिन हम ही जब हो जाते हैं
अपनी ग्रंथियों को गिराकर
निर्मल, निश्छल, विशुद्ध
और जब नहीं रहता कुछ भी
हमारे भीतर अवरुद्ध,
तब हमारे रोम रोम से झाँकते
हैं तथागत बुद्ध…
- बोधि कृष्णा

  Badrinath narayanam 🙏
11/04/2023

Badrinath narayanam 🙏

संत शिरोमणि रविदास जी की जयंती पर शत–शत नमन। भारत प्राचीन काल से ही शान्ति, सौहार्द तथा विश्व बंधुत्व पर बल देता रहा है।...
05/02/2023

संत शिरोमणि रविदास जी की जयंती पर शत–शत नमन। भारत प्राचीन काल से ही शान्ति, सौहार्द तथा विश्व बंधुत्व पर बल देता रहा है। हमारी सभ्यता और संस्कृति का प्रभाव विश्व के विभिन्न भागों में परिलक्षित होता है। 'वसुधैव कुटुम्बकम' की हमारी संकल्पना में प्रतिबिम्बित विश्व को एक परिवार के रूप में देखने की हमारी दृष्टि वैश्विक शांति और सह-अस्तित्व का आधार प्रदान करती है। इस दृष्टिकोण के विकास और इसे कायम रखने में संत रविदास जी जैसे संतों ने बहुत बड़ा योगदान दिया है।

संत रविदास जी के व्यक्तित्व, आत्म-साक्षात्कार से उपजी उनकी सरलता व उनके उपदेशों में सत्य की प्रखरता ने उन्हें आराध्य का स्थान प्रदान किया है। वे विश्व-बंधुत्व के मूर्तमान प्रतीक और समाज सुधार के प्रखर प्रवक्ता थे। भारतीय समाज को जागरूक बनाने में उनका महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने जातिविहीन सामाजिक व्यवस्था के सृजन एवं समतावादी समाज पर बल दिया।

आज जब पूरे विश्व के सामने अनेक कठिनाइयाँ हैं, शांति और समन्वय का अभाव है; तब रविदास जी की मानवतावादी और सबको साथ लेकर चलने वाली शिक्षाओं का अनुसरण करके ही हम एक ऐसे महान भविष्य का निर्माण कर सकते हैं जहां जाति, पंथ, क्षेत्र, भाषा या अन्य किसी विभाजक कारक के आधार पर कोई भेदभाव न हो।

जय हिन्द
23/01/2023

जय हिन्द

जय जय श्री राम जय जय सत्य सनातन आदि अनंत वैदिक धर्म संस्कृति 🔱
22/01/2023

जय जय श्री राम जय जय सत्य सनातन आदि अनंत वैदिक धर्म संस्कृति 🔱

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