26/10/2024
जो विद्वान् 31 अक्टूबर को दीवाली बता रहे हैं वो पूरी बात नहीं बता रहे जिससे आम जनता परेशान हो रही है,31 अक्टूबर को जो रात में पूजा करते हैं अर्थात मंत्र सिद्धि करते हैं यंत्र निर्माण करते हैं वो कर सकते हैं लेकिन यह सब कर्म यदि पूर्ण विधि से होते है तो 1 नवम्बर को भी दोष नहीं है,लेकिन जो प्रदोष काल में लक्ष्मी पूजन करते हैं ओर दीप जलाते हैं वो कर्म 1 नवंबर के है उसमें कोई दोष नहीं है।कुछ लोग पंचांग कर्ता का आदर भी करते हैं उनको योग्य भी मानते हैं बस उनकी बात नहीं मानते क्योंकि पंचांग में 1 नवंबर को दीवाली दे दी ओर विद्वानों ने 31 अक्टूबर के लिए सोशल मीडिया पर डाल दिया ।अब जब अयोध्या में 1 नवंबर को दीवाली मना रहे हैं तो बाकी कुछ ज्योतिषियों ने उसे अपनी नाक का सवाल बनाकर ना झुकने का फैसला कर लिया है, वैसे भी कार्तिक अमावस्या 1 नवंबर को भी है और सूर्य अस्त के बाद तक भी है तो फिर अफवाह क्यों। जो विद्वान् 1 नवंबर को दीवाली मनाने को महादोष बता रहे हैं वो उसका कारण भी बता दें कि ऐसा किस ग्रह नक्षत्र योग या किस घड़ी के कारण है।
आप लोग इतने विद्वान हैं आपको लाखों लोग फोलो करते हैं फिर भी आप गुमराह कर रहे हैं,,ये कौनसे ग्रह के कारण है....?ये भी बता दें। कुछ जगह सूर्यास्त जल्दी होने से लक्ष्मी पूजन 31 को बताया है लेकिन वो सर्वमान्य नहीं है।
अपने त्यौहार हर्षोल्लास से मनायें खुशी से मनायें ।
अपने यहां बहुत स्थानों पर दीवाली की अमावस्या को पितरों के वस्त्र देते हैं ओर 31 अक्टूबर को 4 बजे के करीब अमावस्या आ रही है तो क्या 4 बजे तक पूरा परिवार बिना भोजन रहेगा या फिर परिवार भोजन कर सकता है ओर पितर बिना भोजन के रहेंगे।1नवंबर को सुबह पितरों की पूजा भी हो सकती है और वस्त्र दान भी हो सकता है दीवाली भी मना सकते हैं तो फिर टेंशन किस बात की ।खुश रहो आनन्द रहो मस्त रहो सब अच्छा होगा ।।
नोट-- आम जनता के पंचांग समझ नहीं आता पंचांग जिसे हम साधारण भाषा में पत्रा बोलते हैं वहीं है।
ॐ ज्योतिष कार्यालय रजि.
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