08/08/2020
*रामजन्मभूमि आंदोलन की अग्रवाल विभूतियां*
*महाराज अग्रसेन का जन्म मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के पुत्र कुश की पीढ़ी के 34 वें राजा, प्रतापनगर के राजा वल्लभसेन के घर में हुआ था*। अग्रभागवत के अनुसार परम शुद्ध इक्ष्वाकु वंश में द्वापर के अंत में महाराज अग्रसेन के जन्म हुआ था। महाराज अग्रसेन वंशकर राजा थे। (अर्थात जिनके नाम पर उनके वंशजों के जाना जाए) इसीलिए महाराज अग्रसेन के वंशज अग्रवाल कहलाते हैं। रामजन्मभूमि आंदोलन में अग्रवालों की अहम भूमिका थी उन्हीं में से कुछ अग्रकुल वंशजों का नाम नीचे उल्लेखित किया है-
हिंदुत्व पुरोधा *श्रद्धेय श्री अशोक सिंहल* -माननीय अशोक सिंहल जी ने विश्व के सबसे बड़े आंदोलन राम जन्मभूमि आंदोलन को नेतृत्व प्रदान किया। अशोक सिंघल जी रामजन्मभूमि आंदोलन के हनुमान थे। उन्होंने राम जन्म भूमि न्यास के नाम से ट्रस्ट की स्थापना की थी। क्या आप जानते हैं की वो कोई बाबा या साधु नहीं बल्कि IIT BHU से पासआउट इंजीनियर थे लेकिन उन्होंने अपने जीवन में प्रण लिया था की वो हिंदुओं के मस्तक पर जो कलंक लगा है (बाबरी मस्जिद) उसे मिटाकर ही दम लेंगे। उन्होंने सर्व प्रथम 1989 में एक ईंट अपने सर पर रखकर राम जन्मभूमि आंदोलन का शिलान्यास किया और उसी के ठीक 30 वर्ष पश्च्यात सुप्रीम कोर्ट से राम जन्मभूमि आंदोलन के पक्ष में फैसला आया। अशोक सिंघल जी के नेतृत्व में विहिप ने पूरे देश में बड़ी बड़ी रैलियां आयोजित की जिसमें अशोक जी की तेजस्वी वाणी से लोगों में जोश भरा। अशोक सिंघल जी ने अपना पूरा जीवन राम जन्मभूमि आंदोलन के लिए समर्पित कर दिया था। ये रामजन्मभूमि आंदोलन के दौरान कई बार पुलिस की लाठियों से घायल हुए लेकिन उन्होंने अपनी राम जन्मभूमि के प्रति लगन कम नहीं होने दी। जब तथाकथित हिंदूवादी लोगों ने भी रामजन्मभूमि आंदोलन से अपना पल्ला झाड़ लिया था तब भी अशोक सिंहल जी अपनी अंतिम सांस तक रामजन्मभूमि आंदोलन के साथ बने रहे। उन्होंने बीजेपी की सरकार में भी, जिस समय माननीय श्री अटल बिहारी जी स्वयं प्रधान मंत्री थे, रामलला के मंदिर निर्माण के लिए अनशन पर बैठे थे। सुब्रमनियम स्वामी ने भी राम मन्दिर का फैसला आने के बाद श्री अशोक सिंघल जी के लिए भारत रत्न की मांग की थी।
*नित्यलीलालीन हनुमान प्रसाद पोद्दार 'भाई जी'* अयोध्याधाम में जो भगवान श्री रामलला सरकार का विग्रह है उसका निर्माण स्वयं भाई जी ने अष्टधातु में करवाया था। 1949 में जब श्रीरामलला सरकार का प्राकट्य हुआ था उसमें श्री हनुमान प्रसाद पोद्दार जी की महती भूमिका थी। पोद्दार जी ने जन्मभूमि के वास्तविकता को साबित करने के लिए बहुत ही तथ्यपूर्ण ढंग अपने कल्याण में "रामजन्मभूमि अंक" निकाला था।कल्याण पत्रिका उस समय बहुत लोकप्रिय हुआ करता था। सरकार को इसकी भनक लगी उसने कल्याण के 'रामजन्मभूमि ' अंक पर बैन लगा दी साथ में उसके मूलप्रति को भी जब्त कर लिया था। उन्होंने कल्याण पत्रिका में खुल कर राम जन्म भूमि के पक्ष में रिपोर्टिंग की थी।
*देवकी नंदन अग्रवाल* - इन्होंने श्री रामलला सरकार के विग्रह को जन्मभूमि का पैरोकार बनाने के लिए कोर्ट में मुकदमा दाखिल किया था और कोर्ट में खुद को रामलला सरकार के निकटतम मित्र के तौर पर पेश किया था। हिंदू मान्यताओं के अनुसार प्राण-प्रतिष्ठित मूर्ति एक जीवित इकाई है और अपना मुकदमा लड़ सकती है। लेकिन प्राण-प्रतिष्ठित मूर्ति नाबालिग मानी जाती है, इसलिए उनका मुकदमा लड़ने के लिए किसी एक व्यक्ति को माध्यम बनाया जाता है। न्यायालय ने रामलला का मुकदमा लड़ने के लिए देवकीनंदन अग्रवाल को रामलला के अभिन्न सखा के रूप में अधिकृत किया। न्याय प्रक्रिया संहिता की धारा 32 मानती है कि विराजमान ईश्वर (मूर्ति) को एक व्यक्ति माना जाता है। उसे एक व्यक्ति मानकर पक्षकार बनाया जा सकता है। इससे जन्मभूमि परिसर में फालतू में दावा करने वालों और मंदिर निर्माण में बाधा डालने वालों को रोका गया।
*सीताराम गोयल* और *रामस्वरूप अग्रवाल* जी - सीताराम गोयल जी का मंदिर आंदोलन में अद्वितीय योगदान था। सीताराम गोयल जी ने भारत भर में आक्रान्ताओं द्वारा तोड़े गए मंदिरों की पूरी सूची, तथ्यों और तस्वीरों के साथ संकलित की थी, व इसमें सप्रमाण सभी तोड़े गए मंदिरों की पूरी डिटेल हिन्दू समाज के सामने रखी थी, जिसमें अयोध्या का श्रीरामजन्मभूमि मन्दिर भी था।
*जय भगवान गोयल* - अग्रवंशी जय भगवान गोयल वो शेरदिल शख्शियत जिसने सबसे पहले नेशनल टेलीविजन पर स्वीकारा की हाँ हमने तोड़ी थी बाबरी मस्जिद जो प्रतीक थी गुलामी की। इन्होंने कोर्ट में ये कहा था कि वह ढांचा मैंने ढहाया जो सजा देनी है मुझे दो।
*श्री चम्पत राय जी* - बहुत कम लोग जानते हैं चम्पत राय जी को जो आज कल रामजन्मभूमि न्यास का कुशलतापूर्वक संचालन व सब व्यवस्थओं की देखरेख कर रहे हैं। वे हमेशा से जमीनी स्तर पर कार्य करने वाले संघ के प्रचारक रखे हैं जिन्होंने पूरा जीवन रामजन्मभूमि आंदोलन के लिए खपा दिया। वे अशोक सिंघल जी के राइट हैंड माने जाते थे इससे उनके योगदान का अंदाजा हो जाता है।
*श्री पवन सिंहल* - ये अशोक सिंघल जी के भतीजे हैं और 5 अगस्त को अयोध्या में होने वाले भूमिपूजन के मुख्य जजमान है। पवन जी बहुत धार्मिक हैं और ये स्वयं का वेद विश्वविद्यालय भी चलते हैं।
राम जन्म भूमि विवाद में, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के अधिवक्ता * श्री हनुमान प्रसाद अग्रवाल*ने सुप्रीम कोर्ट में शपथ पत्र पेश कर खुद और अग्रवालो को भगवान राम का वंशज होने का दावा किया था.हनुमान अग्रवाल ने अग्र भागवत में किए गए उल्लेख का जिक्र करते हुए कहा कि कुश की पीढ़ी के राजा बल्लभ देव के पुत्र *महाराजा अग्रसेन सूर्यवंशी क्षत्रिय थे, महाभारत में मात्र 15 वर्ष कि आयु में पांडवों कि ओर से युद्ध लड़ा था। अग्रवाल समाज के पितृ पुस्र्ष महाराजा अग्रसेन भगवान श्रीराम के पुत्र कुश के वंशज हैं.महाराजा इक्ष्वाकु के कुल में महाराजा माधांता, महाराजा दिलीप, भगीरथ, कुकुत्स्य, महाराजा मास्र्त, महाराजा रघु, भगवान श्रीराम आदि का जन्म हुआ. इसी कुल में महाराजा अग्रसेन का जन्म हुआ.*
वर्तमान में देश में रह रहे अग्रवाल भगवान श्रीराम के वंशज हैं. महाराज अग्रसेन का इतिहास 5189 वर्ष पुराना है. उन्होंने रामजन्म भूमि विवाद में इस तथ्य को शामिल करने की मांग की थी।
उपरोक्त जन्में सभी साकेतवासी महापुरुष भगवान् राम के वंशज थे। इन सभी का जन्म अग्रोहा नरेश महाराज अग्रसेन की कुल परम्परा में हुआ था। लाखों अग्रवाल व्यापारी और उद्योगपतियों ने रामजन्मभूमि आंदोलन के लिए तन-मन-धन तीनों से सहयोग किया... विहिप के पूर्व अध्यक्ष और भारत के जाने माने उद्योगपति *श्री विष्णु हरि डालमिया* तो आजीवन रामजन्मभूमि मंदिर के कोषाध्यक्ष बने रहे और आंदोलन को आर्थिक सहायता प्रदान की। कहते हैं ढांचा को ढहाने के बाद सर्वाधिक अग्रकुल वंशजों की गिरफ्तारी हुई थी। इस तरह अनेकों अग्रवालों ने अपने बलिदान से खुद को श्री राम का वंशज होना चरितार्थ किया।
*अनंत कोटि ब्रम्हाण्ड नायक रघुकुल चूड़ामणि भानुकुल दिवाकर राजीवनयन राजा रामचंद्र सरकार की जय*