20/08/2023
*सन्तों के रामराम राम सब को कहे, कहिये राम न होय ॥ गुरु परसादी राम मन बसे, तो फल पावे कोय* ॥
श्री गुरु अमरदास जी तीसरी पातशाही की यह वाणी है, ।परमार्थ की खोज में इनकी अपनी तलाश 70 साल की बयान की जाती है। 70 साल की आयु तक वे तलाश करते रहे। आखिर समय आया जब उन्हें श्री अंगद साहब के चरणों में जाना नसीब हुआ। उस वक्त तक जो भी साधन वह करते रहे, उनसे उनकी तसल्ली न हुई। अनुभवी महात्मा के चरणों में पहुँचे तो परमार्थ की ठीक समझ आई। फिर संसार के कल्याण के लिए खोल खोल कर समझाया है।
फरमाते हैं, राम राम तो सारा जहान कर रहा है, खाली शब्द का उच्चारण करने से हम उस रमें हुए परमात्मा से, जिसे हम राम कहते हैं, लग तो नहीं सकते। राम कहने से हम राम को पा नहीं सकते। जैसे पानी-पानी, आब या वाटर वाटर कहने से हम पानी जो चीज़ हैं उस तक नहीं जा सकते। पानी लेने के लिए हमें कुएँ, नल या दरिया पर जाना पड़ेगा। किताबों और ग्रन्थों में पानी के फायदों का उसके इस्तेमाल का ज़िक्र है, किताबों की हमारे दिल में पूरी कद्र है, पर उनमें उस चीज़ का केवल ज़िक्र है, किताबों को खाली पढ़ लेने से या केवल अक्षर के उच्चारण से हम पानी तक नहीं पहुँच सकते और हम उस शान्ति को, उस ठण्डक को, नहीं पा सकते जो पानी पीने से मिलती है।
💐💐 *जय सावन जी*
*जय कृपाल जी* 💐