Vishw hindu parishad nalanda

Vishw hindu parishad nalanda hindu samaj ko sangathit aur dharm ki rakha karna

01/06/2024
05/01/2024

*काशी विश्वनाथ धाम का अलौकिक रहस्य :-*

*क्यूं कहते हैं कि "काशी जमीन पर नहीं है, वह शिव के त्रिशूल के ऊपर है!*

*क्योंकि काशी एक_यंत्र है एक असाधारण यंत्र!!*
*मानव शरीर में जैसे नाभी का स्थान है, वैसे ही पृथ्वी पर वाराणसी का स्थान है.. शिव ने साक्षात धारण कर रखा है इसे!*

*शरीर के प्रत्येक अंग का संबंध नाभी से जुड़ा है और पृथ्वी के समस्त स्थान का संबंध भी वाराणसी से जुड़ा है। धरती पर यह एकमात्र ऐसा यंत्र है!!*

*काशी की रचना सौरमंडल की तरह की गई है:-*

*इस यंत्र का निर्माण एक ऐसे विशाल और भव्य मानव शरीर को बनाने के लिए किया गया,*
*जिसमें भौतिकता को अपने साथ लेकर चलने की मजबूरी न हो, और जो सारी* *आध्यात्मिक प्रक्रिया को अपने आप में समा ले।*

*आपके अपने भीतर ११४ चक्रों में से ११२ आपके भौतिक शरीर में हैं, लेकिन जब कुछ करने की बात आती है, तो केवल १०८ चक्रों का ही इस्तेमाल आप कर सकते हैं।*

*इसमें एक खास तरीके से मंथन हो रहा है। यह घड़ा यानी मानव शरीर इसी मंथन से निकल कर आया है, इसलिए मानव शरीर सौरमंडल से जुड़ा हुआ है और ऐसा ही मंथन इस मानव शरीर में भी चल रहा है।*

*सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी सूर्य के व्यास से 108 गुनी है। आपके अपने भीतर 114 चक्रों में से 112 आपके भौतिक शरीर में हैं, लेकिन जब कुछ करने की बात आती है, तो केवल 108 चक्रों का ही* *इस्तेमाल आप कर सकते हैं।*

*अगर आप इन 108 चक्रों को विकसित कर लेंगे, तो बाकी के चार चक्र अपने आप ही विकसित हो जाएंगे। हम उन चक्रों पर काम नहीं करते।*
*शरीर के 108 चक्रों को सक्रिय बनाने के लिए 108 तरह की योग प्रणालियां हैं।*

*पूरे काशी यानी बनारस शहर की रचना इसी तरह की गई थी। यह पांच तत्वों से बना है, और आमतौर पर ऐसा माना जाता है कि शिव के योगी और भूतेश्वर होने से, उनका विशेष अंक पांच है।*

*इसलिए इस स्थान की परिधि पांच कोश है। इसी तरह से उन्होंने सकेंद्रित कई सतहें बनाईं।*

*यह आपको काशी की मूलभूत ज्यामिति बनावट दिखाता है। गंगा के किनारे यह शुरू होता है, और ये सकेंद्रित वृत* *परिक्रमा की व्याख्या दिखा रहे हैं। सबसे बाहरी परिक्रमा की माप 168 मील है।*

*यह शहर इसी तरह बना है और विश्वनाथ मंदिर इसी का एक छोटा सा रूप है।*
*असली मंदिर की बनावट ऐसी ही है। यह बेहद जटिल है। इसका मूल रूप तो अब रहा ही नहीं।*

*वाराणसी को मानव शरीर की तरह बनाया गया था। यहां 72 हजार शक्ति स्थलों यानी मंदिरों का निर्माण किया गया।*

*एक इंसान के शरीर में नाड़िय़ों की संख्या भी इतनी ही होती है। इसलिए उन लोगों ने मंदिर बनाये, और आस-पास काफी सारे कोने बनाये - जिससे कि वे सब जुड़कर 72,000 हो जाएं।*

*यहां 468 मंदिर बने, क्योंकि चंद्र कैलेंडर के अनुसार साल में 13 महीने होते हैं*
*13 महीने और 9 ग्रह, 4 दिशाएं - इस तरह से तेरह, नौ और चार के* *गुणनफल के बराबर 468 मंदिर बनाए गए। तो यह नाडिय़ों की संख्या के बराबर है।*
*यह पूरी प्रक्रिया एक विशाल मानव शरीर के निर्माण की तरह थी। इस विशाल मानव शरीर का निर्माण ब्रह्मांड से संपर्क करने के लिए किया गया था।*
*इस शहर के निर्माण की पूरी प्रक्रिया ऐसी है, मानो एक विशाल इंसानी शरीर एक वृहत ब्रह्मांडीय शरीर के संपर्क में आ रहा हो।*
*काशी बनावट की दृष्टि से सूक्ष्म और व्यापक जगत के मिलन का एक शानदार प्रदर्शन है।*

*कुल मिलाकर, एक शहर के रूप में एक यंत्र की रचना की गई है।*
*रोशनी का एक दुर्ग बनाने के लिए, और ब्रह्मांड की संरचना से संपर्क के लिए, यहां एक सूक्ष्म ब्रह्मांड की रचना की गई।*
*ब्रह्मांड और इस काशी रूपी सूक्ष्म ब्रह्मांड इन दोनों चीजों को आपस में जोड़ने के लिए 468 मंदिरों की स्थापना की गई।*

*मूल मंदिरों में 54 शिव के हैं, और 54 शक्ति या देवी के हैं। अगर मानव शरीर को भी हम देंखें, तो उसमें आधा हिस्सा पिंगला है और आधा हिस्सा इड़ा। दायां भाग पुरुष का है और बायां भाग नारी का।*

*यही वजह है कि शिव को अर्धनारीश्वर के रूप में भी दर्शाया जाता है - आधा हिस्सा नारी का और आधा पुरुष का।*

*आपके स्थूल शरीर का 72% हिस्सा पानी है, 12% पृथ्वी है, 6%वायु है और 4%अग्नि। बाकी का 6% आकाश है। सभी योगिक प्रक्रियाओं का जन्म एक खास विज्ञान से हुआ है, जिसे भूत शुद्धि कहते हैं। इसका अर्थ है अपने भीतर मौजूद तत्वों को शुद्ध करना।*

*अगर आप अपने मूल तत्वों पर कुछ अधिकार हासिल कर लें, तो अचानक से आपके साथ अद्भुत चीजें घटित होने लगेंगी।*

*यहां एक के बाद एक 468 मंदिरों में सप्तऋषि पूजा हुआ करती थी और इससे इतनी जबर्दस्त ऊर्जा पैदा होती थी कि हर कोई इस जगह आने की इच्छा रखता था।* *यह जगह सिर्फ आध्यात्मिकता का ही नहीं, बल्कि संगीत, कला और शिल्प के अलावा व्यापार और शिक्षा का केंद्र भी बना।*

*इस देश के महानतम ज्ञानी काशी के हैं :-*

*शहर ने देश को कई प्रखर बुद्धि और ज्ञान के धनी लोग दिए हैं।*
*अल्बर्ट आइंस्टीन ने कहा था, 'पश्चिमी और आधुनिक विज्ञान भारतीय गणित के आधार के बिना एक कदम भी आगे नहीं बढ़ सकता था।’*

*यह गणित बनारस से ही आया। इस गणित का आधार यहां है।*
*जिस तरीके से इस शहर रूपी यंत्र का निर्माण किया गया, वह बहुत सटीक था।*
*ज्यामितीय बनावट और गणित की दृष्टि से यह अपने आप में इतना संपूर्ण है, कि हर व्यक्ति इस शहर में आना चाहता था। क्योंकि यह शहर अपने अन्दर अद्भुत ऊर्जा पैदा करता था।*
*इसीलिए, आज भी यह कहा जाता है कि "काशी जमीन पर नहीं है। वह शिव के त्रिशूल के uper hai......Jay sri RAM........

05/03/2023
11/02/2023

हर साल वेलेंटाइन के बाद, फेक लव के चक्कर में पड़कर औसतन 15 लाख लडकियां घर से भाग जाती हैं...

अजीब बात तो ये है की जब लड़की घर से भाग जाती है तो उसको ढूंढने के बजाए, खुद की बदनामी के डर से, परीवार वाले न FIR करते है, न कुछ करते है... उल्टा अपनी ही बहन/बेटी को दोष देकर वो हमारे लिये मर गयी ऐसा मानकर शांत हो जाते हैं...

जितनी लड़कियां घर से भागती हैं, उसमे से मुश्किल से 5% प्यार होता है, बाकि 95% मानव तस्करी का शिकार होती हैं... (जिसको भारत में लव जिहाद के नाम से जानते हैं)

अब मानव तस्करी में फंसी इन लड़कियों को बेहोश करके कंटेनर में भरकर इस्लामिक स्टेट और बाकी जगहों पर एक्सपोर्ट कर दिया जाता है...

👉जहां इन लडकियों को मंडियों में as s*x slave बेचा जाता है...
👉🏻पोर्न प्रोडक्शन में यूज करते हैं...
👉🏻 सेरोगेसी में यूज करते हैं
👉🏻 उनको काटकर उनका मांस human meet market में किलो के भाव बेच देते हैं...(ये आश्चर्य की बात नही, शौकीन और नरभक्षी टाइप के लोग खाते हैं)
👉🏻लड़कियों के सारे अंग निकाल कर बेच देते हैं... (अंगो का भाव और अंगो की जरूरत क्या है, ये तो आप अच्छे से जानते हो)
👉🏻 लड़कियों के बचे स्क्रैप जैसे हड्डी, चर्बी, चमड़ा, बाल, आंत Zoo Product के raw material में यूज होता है...(क्योंकी अब सारे जानवर खत्म हो रहे हैं, अब इंसान ही पर्याप्त और सस्ता बचा है)

अगर सबको जोड़ा जाए तो केवल एक लड़की में 05-10 करोड़ की कमाई होती है...

बस इसी से सोच लो, इसमें कितने की कमाई होती है... और इस कमाई में सबसे ज्यादा शेयर भ्रष्ट नेताओं का होता है...

इसीलिए नेता कभी भी मानव तस्करी / human trafficing/लव जिहाद पर कानून नही बनने देते...

और जिस कंटेनर में भरकर लड़कियां एक्सपोर्ट होती है, उसको बिना चेकिंग के पास करवाने और कस्टम के काम में 3-5-13 करने का काम नेता ही करते है...

सबको पता है, भारत सेक्युलर्स का देश है, ये सेक्युलर्स केवल संस्कार संस्कार खेलना जानते हैं, बड़ी बड़ी बाते करना जानते हैं, लेकिन अपनी बच्चियों के लिए इनके पास समय नही होता है...

इसीलिए भाड़बुड, presstitutes, राजनितिक ठेकेदार वेलेंटाइन, kiss of love, जैसे वाहियात चीजों को प्रोमोट करते हैं... क्योंकी इस धंधे में इन सबका हिस्सा बनता है...

भारत में हींदू ज्यादा हैं, इसलिए लापरवाह परिवारों की बिना दिमाग वाली लड़कियों को लव जिहाद में फंसाया जाता हैं...

वेलेंटाइन अपने देश के लिए और खासकर लड़कियों के लिए बेहद खतरनाक है... लेकिन वेलेंटाइन को लेकर सबसे ज्यादा पागलपन लडकियों में रहता हैं...

उसका एकमात्र कारण bollywood / टीवी सीरियल और परीवार की लापरवाही है...

लडकियों को घर से भगाने वाले दरिंदे क्रिसमस से वेलेंटाइन तक सक्रिय रहते हैं... और लडकियों के मरने की स्क्रिप्ट 25 dec से last feb तक रची जाती है...

बेटी आपकी, तो उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी भी आपकी है...

इस बार RSS/विहिंप/HYV/बजरंगदल के लोग नही, बल्कि आप खुद अपनी बहन/बेटी पर नजर रखोगे...

और उसके आस पास जो भी एब्नाॅर्मल लड़का दिखे या उसकी हरकते अजीब लगे, बल भर कुटना और पुलिस के हवाले कर देना...

या फिर बेटी आप के लिये बोझ हो, और आप खुद चाहते हो की वो कहीं जाके मर जाए और आपका पिंड छूटे, तो कोई बात नही...

09/12/2022

हलाला के लिये बीवी को गैरमर्द के बिस्तर पर भेजने पर इस्लाम सुरक्षित है और उसी बीवी का चेहरा गैर मर्द देख ले तो मजहब खतरे में 🤔😳🤫

बहुत सोचने के बाद मेरा तो व्यक्तिगत मत है कि भारत सरकार मुसलमानों के लिए अलग से शरिया कोर्ट बनाए और मुस्लिम्स के मामलों में कुरान के अनुसार ही सजा तय करें...

✩ बलात्कार पर इनके गुप्तांग काटो,
✩ चोरी पर इनके हाथ काटो,
✩ किसी धर्म के अपमान पर इनको सूली पर चढ़ाओ,
✩ मुस्लिम महिलाएं बिना बुर्के में दिखे उनको पत्थरों से मारने, कोड़े मारने की सजा हो,
✩ इनके मामलों को इनके हिसाब से ही अरबी स्टाइल में सजा दी जाए।

यह लोग जल्द यू ही खत्म हो जाएंगे। साल भर के अंदर इनका शरिया का भूत उतर जाएगा यह वापस संविधान के दायरे में हाथ जोड़ते हुए आ जाएंगे।

इसलिए मैं तो सरकार से मांग करता हूँ कि इस जिहादी जमात के मामलों के लिए खूंखार शरिया कोर्ट हर जिले स्तर पर बना दी जाए। एक दो साल में ही कटे अंगों के साथ सड़कों पर दिखाई देगें तब इनको भारत के संविधान की समझ आएगी... अरब के असली मुस्लिम सामान्य हो रहे हैं जबकि भारत के कन्वर्टेड जिहादियों ने बवाल काट रखा है।

अतः इनकी अक्ल ठिकाने लगाने के लिए कुछ वर्ष शरिया कोर्ट सिर्फ मुस्लिमों के मामले में शुरू कर देनी चाहिये।

इस्लाम में हराम वस्तुओं का प्रयोग करने पर प्रतिबंध भी लगाना चाहिये।👍

09/12/2022

*इस्लामिक जेहाद।*
*जेहाद अचानक नही होता, यह बहुत धीरे- धीरे होने वाली प्रक्रिया है जिसमे पहले काफिरो (हिन्दुओ) की ताकत को परखा जाता है और उनकी ताकत के हिसाब से तैयारी की जाती है!!*👇👇👇👇👇

जेहाद के पहले हर स्तर पर हिन्दुओ को मानसिक रूप से तोड़ा जाता है। जेहाद चरण दर चरण चलने वाली प्रक्रिया है।

*🫵🏻पहला चरण-* आपके क्षेत्र में कबाड़ी फेरीवाले आने शुरू होंगे जो आपकी आर्थिक स्थिति परखेंगे आपके घरों की महिलाओं की क्षमता परखेंगे

*🫵🏻दूसरा चरण-* आप के क्षेत्र में चादर फैला कर मांगने वाले लोभान छोड़ने वाले या सूफी गीत गा कर मांगने वाले आने लगेंगे ये दुआएं दे कर भीख मांगेंगे और तलाशेंगे कि कितने परेशान हिन्दू उनके जाल में फंस सकते है।

*🫵🏻तीसरा चरण-* वो आपके क्षेत्र में ऐसी दुकान खोलेंगे या ऐसा कार्य करेंगे जिससे महिलाओं से उनका संपर्क बढ़ सके और लव जेहाद को बढ़ाया जा सके और महिलाओं को माध्यम बनाकर उनके पिता, भाई व पति से तालमेल बनाया जा सके व उनके दिमाग को पढ़ा जा सके।

*🫵🏻चौथा चरण-* आपके क्षेत्र में रोड पर कब्जा करके दुकान खोलेंगे और कम कीमत में काम करेंगे, जिससे हिन्दुओ को छोड़ कर आप उनके पास काम करवाने जाने लगें, उनकी दुकानों पर आवारा लड़को का जमावड़ा होने लगेगा।

*🫵🏻पाचवां चरण-* हिन्दुओ की दुकानों व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर कम वेतन में नौकरी करना शुरू करेंगे।

*🫵🏻छठा चरण-* ये आपके क्षेत्र में हलाल के मांस की दुकान खोलेंगे।

*🫵🏻सातवां चरणजेड* हिन्दू बहुल क्षेत्र में महंगे दामों पर मकान खरीदेंगे या किराया पर लेंगे।

*🫵🏻आठवां चरण-* हिन्दू लड़को से दोस्ती करेंगे, जिससे वो हिन्दू लड़कियों से परिचय कर सकें और किसी न किसी बहाने आपके घर आ जा सकें।

*🫵🏻नौवां चरण-* आपके क्षेत्र में मज़ार बनाएंगे और उसके चमत्कारों का प्रचार करेंगे जिससे मूर्ख हिन्दू वहां जाना शुरू करें।

*🫵🏻दसवां चरण-* अब जिहाद का असर दिखने के लिए तैयार है अब वो इस्लामिक धार्मिक आयोजन करेंगे और इस तरह से करेंगे कि हिन्दुओ को उससे समस्या हो।

*🫵🏻ग्यारहवां चरण-* आपके धार्मिक आयोजनों का विरोध करने लगेंगे।

*🫵🏻बारहवां चरण-* वो हर तरह से अपना अधिकार जताएंगे और सदैव मौके की तलाश में होंगे कि कब हिंदुओं को अपमानित करते हुए इन पर हमला किया जाए।
*अब आप स्वयं इन लक्षणों को पहचाने और यह तय करें कि, आप जिहाद के किस चरण में हैं।*

इसलिए इस पोस्ट को शेयर करते हुए खुद भी जागिए और पूरे हिंदू समाज को एक सूत्र में बांधते हुए जगाने का कार्य कीजिए।
🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩

krishna Prasad Singh

09/12/2022

बडी उम्र की कुँवारी लड़कियाँ घर बैठी हैं । ,,,,, बाबूजी सुशील कुमार सरावगी का विचार।
नई दिल्ली।
अगर अभी भी माँ-बाप नहीं जागे तो स्थितियाँ और विस्फोटक हो सकती हैं।

हमारा समाज आज बच्चों के विवाह को लेकर इतना सजग हो गया है कि आपस में रिश्ते ही नहीं हो पा रहे हैं।

समाज में आज 27-28-32 उम्र तक की बहुत सी कुँवारी लडकियाँ घर बैठी हैं क्योंकि इनके सपने हैसियत से भी बहुत ज्यादा हैं ! इस प्रकार के कई उदाहरण हैं।

ऐसे लोगों के कारण समाज की छवि बहुत खराब हो रही है।

सबसे बडा मानव सुख, सुखी वैवाहिक जीवन होता है।

पैसा भी आवश्यक है, लेकिन कुछ हद तक।

पैसे की वजह से अच्छे रिश्ते ठुकराना गलत है। पहली प्राथमिकता सुखी संसार व अच्छा घर-परिवार होना चाहिये।

ज्यादा धन के चक्कर में अच्छे रिश्तों को नजर-अंदाज करना गलत है। "संपति खरीदी जा सकती है लेकिन गुण नहीं।"

मेरा मानना है कि घर-परिवार और लडका अच्छा देखें लेकिन ज्यादा के चक्कर में अच्छे रिश्ते हाथ से नहीं जाने दें।

सुखी वैवाहिक जीवन जियें।

30 की उम्र के बाद विवाह नहीं होता समझौता होता है और मेडिकल स्थिति से भी देखा जाए तो उसमें बहुत सी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं।

आप सोचिए जिनके साथ कुंडली मिलती है लेकिन घर और लड़का अच्छा नहीं और जहाँ लड़के में सभी गुण हैं वहां कुण्डली नहीं मिलती और हम सब कुछ अच्छा होने के कारण भी कुण्डली की वजह से रिश्ता छोड़ देते हैं।

आप सोच के देखें जिन लोगो के 36 में से 20 या फिर 36/36 गुण भी मिल गए फिर भी उनके जीवन में तकलीफें हो रही हैं, क्योंकि हमने लडके के गुण नहीं देखे।

आजकल समाज में लोग बेटी के रिश्ते के लिए (लड़के में) चौबीस टंच का सोना खरीदने जाते हैं, देखते-देखते चार पांच साल व्यतीत हो जाते हैं।

उच्च "शिक्षा" या "जॉब" के नाम पर भी समय व्यतीत कर देते हैं। लड़के देखने का अंदाज भी समय व्यतीत का अनोखा उदाहरण हो गया है?

खुद का मकान है कि नहीं? अगर है तो फर्नीचर कैसा है? घर में कमरे कितने हैं ? गाडी है कि नहीं? है तो कौनसी है? रहन-सहन, खान-पान कैसा है? कितने भाई-बहन हैं? बंटवारे में माँ-बाप किनके गले पड़े हैं? बहन कितनी हैं, उनकी शादी हुई है कि नहीं? माँ-बाप का स्वभाव कैसा है? घर वाले, नाते-रिश्तेदार आधुनिक ख्यालात के हैं कि नहीं?

बच्चे का कद क्या है?रंग-रूप कैसा है?शिक्षा, कमाई, बैंक बैलेंस कितना है? लड़का-लड़की सोशल मीडिया पर एक्टिव है कि नहीं? उसके कितने दोस्त हैं? सब बातों पर पूछताछ पूरी होने के बाद भी कुछ प्रश्न पूछने में और सोशल मीडिया पर वार्तालाप करने में और समय व्यतीत हो जाता है।

हालात को क्या कहें माँ-बाप की नींद ही खुलती है 30 की उम्र पर। फिर चार-पाँच साल की यह दौड़-धूप बच्चों की जवानी को बर्बाद करने के लिए काफी है। इस वजह से अच्छे रिश्ते हाथ से निकल जाते हैं और माँ-बाप अपने ही बच्चों के सपनों को चूर चूर-चूर कर देते हैं।

एक समय था जब खानदान देख कर रिश्ते होते थे। वो लम्बे भी निभते थे। समधी-समधन में मान मनुहार थी। सुख-दु:ख में साथ था। रिश्ते-नाते की अहमियत का अहसास था।

चाहे धन-माया कम थी मगर खुशियाँ घर-आँगन में झलकती थी। कभी कोई ऊँची-नीची बात हो जाती थी तो आपस में बड़े-बुजुर्ग संभाल लेते थे। तलाक शब्द रिश्तों में था ही नहीं।

दाम्पत्य जीवन खट्टे-मीठे अनुभव में बीत जाया करता था। दोनों एक-दूसरे के बुढ़ापे की लाठी बनते थे और पोते-पोतियों में संस्कारों के बीज भरते थे। अब कहां हैं वो संस्कार? आँख की शर्म तो इतिहास हो गई। नौबत आ जाती है रिश्तों में समझौता करने की।

लड़का-लड़की अपने समाज के नही होंगे तो भी चलेगा, ऐसी बातें भी सामने आ रही हैं।

आज समाज की लडकियाँ और लड़के खुले आम दूसरी जाति की तरफ जा रहे हैं और दोष दे रहे हैं कि समाज में अच्छे लड़के या लड़कियाँ मेरे लायक नहीं हैं।

कारण लडकियाँ आधुनिकता की पराकाष्ठा पार कर गई है। जब ये लड़के-लड़कियाँ मन से मैरिज करते हैं तब ये कुंडली मिलान का क्या होता है ? तब तो कुंडली की कोई बात नहीं होती‌। यही माँ बाप सब कुछ मान लेते हैं। तब कोई कुण्डली, स्टेटस, पैसा, इनकम बीच में कुछ भी नहीं आता।

अगर अभी भी माँ-बाप नहीं जागेंगे तो स्थितियाँ और विस्फोटक हो जाएंगी। समाज के लोगों को समझना होगा कि लड़कियों की शादी 22-23-24 में हो जाये और लड़का 25-26 का हो। सब में सब गुण नहीं मिलते।"

घर, गाड़ी, बंगला से पहले व्यवहार तोलो। माँ बाप भी आर्थिक चकाचोंध में बह रहे है । पैसे की भागम-भाग में मीलों पीछे छूट गए हैं, रिश्ते-नातेदार।

टूट रहे हैं घर परिवार , सूख रहा है प्रेम और प्यार।

परिवारों का इस पीढ़ी ने ऐसा तमाशा किया है कि आने वाली पीढ़ियां सिर्फ किताबों में पढ़ेंगी "संस्कार"।

समाज को अब जागना जरूरी है अन्यथा रिश्ते ढूंढते रह जाएंगे।"यह विचार आज डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी राष्ट्रीय विचार मंच भारत की बैठक में उपस्थित लोगों को समर्पित साभार

20/03/2022

होली की शुभ कामना

09/06/2021

आर्थिक बहिष्कार के लिए सूची तैयार हो गई है, सब हिन्दू इसे कम से कम 10 ग्रुप में भेजो...

आर्थिक बहिष्कार ऐसा होना चाहिए कि अगले महीने ही इनकी बेलेंस शीट आधी हो जाये। फिर इनके शेयर औंधे मुंह गिरेंगे। गोली नहीं मार सकते तो उंगली मार दो। बरबाद करो जेहादियों को। तुम्हारे ही पैसों से तुम्हें मार रहे हैं। यदि इतना भी दम नहीं है तो फिर मरोगे ही। तुम्हें कोई नहीं बचा सकता। इस सूची में और नाम पता चले तो जोड़ते जाओ।

01. किसी भी दरगाह पे मत जाओ।
02. मोरपंख वाले बाबा को चंदा मत दो।
03. मुल्ले से फल सब्जी मत खरीदो।
04. मुल्ले दर्जी से कपड़े मत सिलवावो।
05. मुल्ले नाई से बाल मत कटवाओ।
06. मुल्ले की टेक्सी/ रिक्सा में मत बैठो।
07. मुल्ले से मेहंदी/बुटीक मत करवाओ।
08. मुल्लो के होटलों में मत खाओ।
09. मुल्ले प्लम्बर/इलेक्ट्रिशियन/वेल्डर को रिप्लेस करो।

*प्रोडक्ट या कम्पनी का नाम।*
*मालिक या ब्रांड अम्बेसडर।*
01. हमदर्द के सभी प्रोडक्ट
-हाकिम अब्दुल हमीद
02. जारा.. Zara
-पाकिस्तानी ब्रांड
03. मेट्रो शूज.. Metro
-फराह मलिक भांजी
04. रेडटेप.. Redtape
-इरशाद मिर्जा, राशिद मिर्जा
05. दा मिलानो.. D Milano
-साहिल मलिक
06. अकमे(acme)ब्रांड
-शाहिद अमीन खान
07. दिल्ली दरबार(होटल चेन)
-हाजी शफी मंसूरी
08. हाइवे पर बने ढाबे
-चिलिया मुस्लिम
9. फरीदा फुटवियर
-रफीक अहमद
10. अल्लाना ग्रुप(फ़ूड प्रोडक्ट)
-अब्दुल रज्जाक
11. Karen's Software
-आसिफ खादर,मुक्क्रम जान
12. रेड चिल्लीज
-शाहरूख खान
13. Data Smart ESPL
-जाकिर वहाब
14. प्रोफेसनल कुरियर.. Professional Courier
-अहमद मिरान
15. शाहनाज हुसैन ग्रुप
-शाहनाज हुसैन
16. ST कुरियर
-के नवस कानी
17. लिबर्टी ग्रुप.. Liberty oil Mills
-परवेज कादर
18. हिमालय हर्बल हेल्थकेयर.. Himalaya Drugs
-मेराज मनल
19. Kweenbee Telecom
-मोहम्मद अली इस्माइल
20. स्पोर्ट्स वीक.. Sportsweek
-खालिद अंसारी
21. जावेद हबीब जेन्स पार्लर चेन
-जावेद हबीब
22. सभी फिल्में, जो मुल्लों द्वारा अभिनीत/लेखन/संगीतबध/वित्तपोषित/डिस्ट्रीब्यूटर का बहिष्कार करें
23 . शायम के समय अधिकतर महिलाएं सीरियल को देखने के लिए आतुर होते जिससे परिवात टूटते जा रहा है ये मुल्लो का षड्यंत्र है भिस्कारो और देवी देवताओं व महापुरुष की व शास्त्रों ज्ञान प्राप्त हो परिवार मजबूत बने ऐसे न

09/06/2021

आप एक प्रयोग कीजिये, एक भगौने में पानी डालिये और उसमे एक मेढक छोड़ दीजिये । फिर उस भगौने को आग में गर्म कीजिये । जैसे जैसे पानी गर्म होने लगेगा, मेढक पानी की गर्मी के हिसाब से अपने शरीर को तापमान के अनकूल सन्तुलित करने लगेगा ।
मेढक बढ़ते हुए पानी के तापमान के अनकूल अपने को ढालता चला जाता है और फिर एक स्थिति ऐसी आती है कि जब पानी उबलने की कगार पर पहुँच जाता है । इस अवस्था में मेढक के शरीर की सहनशक्ति जवाब देने लगती है और उसका शरीर इस तापमान को अनकूल बनाने में असमर्थ हो जाता है । अब मेढक के पास उछल कर, भगौने से बाहर जाने के अलावा कोई चारा नहीं बचा होता है और वह उछल कर, खौलते पानी से बाहर निकले का निर्णय करता है ।
मेढक उछलने की कोशिश करता है, लेकिन उछल नहीं पाता है। उसके शरीर में अब इतनी ऊर्जा नहीं बची है कि वह छलांग लगा सके, क्योंकि उसकी सारी ऊर्जा तो पानी के बढ़ते हुए तापमान को अपने अनुकूल बनाने में ही खर्च हो चुकी है ।
कुछ देर हाथ पाँव चलाने के बाद, मेढक पानी में मरणासन्न पलट जाता है और फिर अंत में मर जाता है ।
यह मेढक आखिर मरा क्यों ?
सामान्य जनमानस का वैज्ञानिक उत्तर यही होगा की उबलते पानी ने मेढक की जान ले ली है लेकिन यह उत्तर गलत है ।
सत्य यह है की मेढक की मृत्यु का कारण, उसके द्वारा उछल कर बाहर निकलने के निर्णय को लेने में हुयी देरी थी । वह अंत तक गर्म होते माहौल में अपने को ढाल कर सुरक्षित महसूस कर रहा था । उसको यह एहसास ही नहीं हुआ था, कि गर्म होते हुए पानी के अनुकूल बनने के प्रयास ने, उसको एक आभासी सुरक्षा प्रदान की हुयी है । अंत में उसके पास कुछ ऐसा नहीं बचता कि वह इस गर्म पानी का प्रतिकार कर सके और उसमें ही खत्म हो जाता है ।
मुझे इस कहानी में जो दर्शन मिला है वह यह कि यह कहानी मेढक की नहीं है, यह कहानी 'हिन्दू' की है ।
यह कहानी, सेकुलर प्रजाति द्वारा हिन्दू को दिए गए आभासी सुरक्षा कवच की है ।
यह कहानी, अपने सेकुलरी वातावरण में ढल कर, सुकून की ज़िन्दगी जीते रहने की, हिन्दू के छद्म विश्वास की है ।
यह कहानी, अहिंसा, शांति और दूसरों की भावनाओं के लिहाज़ को प्राथिमकता देने में, उचित समय में निर्णय न लेने की है ।
यह कहानी, सेकुलरों के बुद्धजीवी ज्ञान, 'मेढक पानी के उबलने से मरा है' को मनवाने की है ।
यह कहानी, धर्म के आधार पर हुए बंटवारे के बाद, उद्वेलित समाज के

09/11/2019

SC ka faisala swagat ke kabil hai,hum sab ko santi banaye rakhana chahiye,jai sri ram....

Address

Nalanda

Telephone

06111-253203

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Vishw hindu parishad nalanda posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Place Of Worship

Send a message to Vishw hindu parishad nalanda:

Share