Shree Gautam Swami Guniyaji

Shree Gautam Swami Guniyaji Shree Jain Swetambar Bhandar Tirth is a Jain temple dedicated to Ganadhar Goutam Swami located in the small town of Gunayaji-Nalanda, Bihar.

It is believed that this place was visited many times by Lord Mahavira to preach his doctrines of non-violence.

01/03/2024

Hidden gem in Nawada! Discover the Guniyaji Jal Mandir, a Jain temple with a rich history.

जो छंदमाहयइ स पुज्जो - जो गुरु की भावनाओं का आदर करता है, वह शिष्य पूज्य होता है। जैसे गणधर गौतम स्वामी हमेशा पूजनीय रहे...
18/02/2024

जो छंदमाहयइ स पुज्जो
- जो गुरु की भावनाओं का आदर करता है, वह शिष्य पूज्य होता है।

जैसे गणधर गौतम स्वामी हमेशा पूजनीय रहेंगे क्योंकि उन्होंने ज्ञान अर्जन के साथ ही गुरु के प्रति अगाध आस्था और आदर भाव के साथ जीवन का हर कदम आगे बढ़ाया था। हमारा मार्गदर्शन किया।
हमें भी गुरु की कृपा चाहिए तो उसके प्रति आस्था, श्रद्धा व विनीत भाव के साथ सेवा कार्य करना चाहिए।

गुणीयाजी गौतम स्वामी कैवल्य ज्ञान कल्याण भूमि

सूरज का तेज जिसके व्यक्तित्व में जिनमें चंदा की शीतलताजो झिलमिलाते हैं तारों से नभ परसरस्वती के वीणा के स्वर जिनके जिह्व...
15/02/2024

सूरज का तेज जिसके व्यक्तित्व में
जिनमें चंदा की शीतलता
जो झिलमिलाते हैं तारों से नभ पर
सरस्वती के वीणा के स्वर
जिनके जिह्वा पर झंकृत
वे हैं हमारे अराध्य गणधर गौतम
इन्हें ध्याये, इन्हें पूजे, इनका करें नित्य दर्शन
जीवन होगा धन्य, होगी मनोकामना पूरण ।
जय जय गणधर गौतम स्वामी की जय।

गुणीयाजी गौतम स्वामी कैवल्य ज्ञान कल्याण भूमि

अणुसासिओ न कुप्पिज्जा ।                                  गुरुजनों द्वारा अनुशासित होने पर कुद्ध न हो।  वाएण विणापोओ, न च...
12/02/2024

अणुसासिओ न कुप्पिज्जा ।


गुरुजनों द्वारा अनुशासित होने पर कुद्ध न हो।
वाएण विणापोओ, न चएइ महण्णवं तरिउं।

अच्छे से अच्छा जलयान भी वायु के बिना सागर को पार नहीं कर सकता, वैसे ही योग्य होने पर भी शिष्य स्वयं संसार को पार नहीं कर सकता। उसे योग्य निर्देशक रूप गुरु की जरूरत होती ही है।

उत्तराध्ययन सूत्र 1/9

गुणीयाजी गौतम स्वामी कैवल्य ज्ञान कल्याण भूमि

उद्धरिय सव्वसल्लो, आलोइय निंदिय गुरु सगासे । होइ अतिरेगलहुओ, ओहरियभरो व्व भारवहो।।                                      ...
09/02/2024

उद्धरिय सव्वसल्लो, आलोइय निंदिय गुरु सगासे ।
होइ अतिरेगलहुओ, ओहरियभरो व्व भारवहो।।
अर्थात - जैसे सिर पर लादा हुआ भार उतार देने पर भारवाहक भार से हल्का हो जाता है, वैसे ही जो साधक गुरु के सम्मुख अपने मन के सारे शल्यों (पाप रूपी कांटों) को निकालकर उसकी आलोचना व निंदा करता करता है, वह हल्का-लघु हो जाता है।

🙏🏻गुरु कृपा ही केवलम🙏🏻

गुणीयाजी गौतम स्वामी कैवल्य ज्ञान कल्याण भूमि

जैन जगत् के सर्वोत्तम मंत्र नवकार में भी गुरु को महान् स्थान प्राप्त है। पाँच पदों में से चार पदों पर गुरु का निवास है।ज...
06/02/2024

जैन जगत् के सर्वोत्तम मंत्र नवकार में भी गुरु को महान् स्थान प्राप्त है। पाँच पदों में से चार पदों पर गुरु का निवास है।

जगत् के सर्वश्रेष्ठ गुरु श्रीमन्महावीर ! लब्धि भण्डार गणधर गौतम स्वामी! परमात्मा वीर के पट्टधर सुधर्मा स्वामी। मूर्धन्य मनीषी आचार्य श्री हरिभद्रसूरि। खरतरनभश्रृंगार वृत्तिकार श्री अभयदेवसूरि हर गच्छ-समुदाय में गुरुजनों की महती कृपा रही है। कोई प्रवचनकार तो कोई ग्रन्थकार! कोई लेखक तो कोई पाठक! कोई जैन निर्माता तो कोई संकट त्राता। कोई श्रुत संरक्षक तो कोई नृप-प्रतिबोधक ! ज्ञान-प्रचारक तो कोई संयम-साधक। शम-दम, जप-तप, ज्ञान-ध्यान, त्याग-वैराग, हर क्षेत्र में गुरु की अनिर्वचनीय भूमिका रही है।

जय जय गुरु देव 🙏🏻

गुणीयाजी गौतम स्वामी कैवल्य ज्ञान कल्याण भूमि

वास्तव में गुरु ही मोक्ष महल की नींव है और गुरु ही सिद्धि-मंदिर का मंगल कलश है।जैन शास्त्रों में ही नहीं, जैनेतर शास्त्र...
03/02/2024

वास्तव में गुरु ही मोक्ष महल की नींव है और गुरु ही सिद्धि-मंदिर का मंगल कलश है।

जैन शास्त्रों में ही नहीं, जैनेतर शास्त्रों में भी गुरु को विशिष्ट सम्मान दिया गया है। कवियों ने तो यहाँ तक कह दिया कि भगवान से पहले गुरु को वंदन करो क्योंकि भगवान का परिचित हमें गुरु ही करवाते है।

संत कबीर की ये पंक्तियाँ अद्‌भुत है -

कबीरा ते नर अन्ध हैं, कहत गुरु को और! हरि रुठे गुरु ठौर है, गुरु रुठे नहीं ठोर ।।

कदाचित् भगवान नाराज हो जाये तो चिन्ता मत करना क्योंकि हरि के अभाव में गुरु के चरणों का ठिकाना है पर गुरु को रूठने मत देना क्योंकि वे रूठ गए तो न कोई आसरा है, न कोई अपना है।

गुणीयाजी गौतम स्वामी कैवल्य ज्ञान कल्याण भूमि

तस्मै श्री गुरवे नमःगुरु भगवंतों में सर्वोत्तम गुरु परमात्मा महावीर है, जिनको नंदीसूत्र में "जगद्‌गुरु' के रूप में सम्बो...
30/01/2024

तस्मै श्री गुरवे नमः

गुरु भगवंतों में सर्वोत्तम गुरु परमात्मा महावीर है, जिनको नंदीसूत्र में "जगद्‌गुरु' के रूप में सम्बोधित किया है। उन्होंने जगदन्धकार को प्रदीप के रूप में दूर करके शांति की रश्मियों से धरातल को रोशन किया है।

इसी अनुक्रम में गौतम स्वामी का आभावलय इतना पुनीत है कि जीवनकाल में 50000 आत्माओं को कैवल्य का उपहार दिया तथा आज भी उनके नाम में लब्धि-शक्ति-मुक्ति का निवास है। आचार्य श्री जिनदत्तसूरि आदि चारों दादा गुरुदेवों ने जन-जन में जैनत्व की अलख जगाकर गुरु-महिमा की माला में एक नया मोती पिरोया।

आईये ! हम सभी गुरु के चरणों में शीष रखकर आशीष का वरदान पाएं।

- मुनि मनितप्रभसागर

गुणीयाजी गौतम स्वामी कैवल्य ज्ञान कल्याण भूमि

तत्त्वज्ञान के प्रकाशक गुरु🙏🏻मोहतिमिर के विनाशक गुरु🙏🏻श्रद्धा के धरातल पर दीप गुरु🙏🏻अपार भवसागर में द्वीप गुरु🙏🏻गुरु है ...
26/01/2024

तत्त्वज्ञान के प्रकाशक गुरु🙏🏻
मोहतिमिर के विनाशक गुरु🙏🏻
श्रद्धा के धरातल पर दीप गुरु🙏🏻
अपार भवसागर में द्वीप गुरु🙏🏻

गुरु है तो ज्ञान है और ज्ञान है तभी तो हम सब गुरु कृपा की छांव तले है।

आओ सब मिलकर गाए प्रभु महावीर का गान,
शीश नवाए, हमसब सुमिरै गणधर गौतम का नाम।

गुणीयाजी गौतम स्वामी कैवल्य ज्ञान कल्याण भूमि

अब व्यक्ति की सोच बदली जाती है, तब आचरण स्वतः रूप ढल जाता है। जब तक इन्द्रभूति गौतम को सम्यग्दृष्टि उपलब्ध नहीं हुई तब उ...
23/01/2024

अब व्यक्ति की सोच बदली जाती है, तब आचरण स्वतः रूप ढल जाता है। जब तक इन्द्रभूति गौतम को सम्यग्दृष्टि उपलब्ध नहीं हुई तब उनकी दृष्टि में संसार ही मुख्य था; पर जब परमात्मा की शरण में पहुँचे, तब सारे मिथ्या मल का विसर्जन हो गया।
उन्हें जीवन की सही सोच मिल गई। जीवन का सच्चा लक्ष्य प्राप्त हुआ। उन्हें आत्मा का पुरुषार्थ प्राप्त हुआ।
सत्संग और सही गुरु ही जीवन का मार्ग तथा जीने का सार्थक उद्देश्य दे जाता है।
हमें हमेशा गुरु की शरण में नतमस्तक होना चाहिए।

गुणीयाजी गौतम स्वामी कैवल्य ज्ञान कल्याण भूमि

गौतम स्वामी बनने के लिए युगों-युगों की साधना लगती है। हर युग में खुद को तपाना पड़ता है। पाप काटने होते है पुण्य कमाना हो...
13/01/2024

गौतम स्वामी बनने के लिए युगों-युगों की साधना लगती है। हर युग में खुद को तपाना पड़ता है। पाप काटने होते है पुण्य कमाना होता है। तप करना पड़ता है तब कही जाकर गौतम स्वामी का जन्म होता है।
गौतम स्वामी के सभी भव को जानने के बाद सभी को साधना करना चाहिए। अपने भव को सुधारना चाहिए, पाप-कर्म बन्द करना चाहिए। मन-वचन और कार्य से किसी को ठेस न पहुंचे इसका पूरा ध्यान रखना चाहिए। तभी सच्चे भक्त और अनुयायी बना जा सकता है।

गुणीयाजी गौतम स्वामी कैवल्य ज्ञान कल्याण भूमि

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Gunayaji-Pawapuri
Nalanda
803115

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