Mata tara devi mandir nalagarh

Mata tara devi mandir nalagarh Tara Devi temple is situated in Nalagarh, district Solan (H.P.) This temple is situated at the top of hill, wich is present in the Sirsa Valley of Nalagarh

Jai mata di
30/09/2023

Jai mata di

Jai bholenath
02/05/2023

Jai bholenath

Shiv bhakti Jarur pahunche Har Har Mahadevमाता तारा देवी नालागढ़Mata   devi     durga     durga       shri radhe  Tara  ...
01/05/2023

Shiv bhakti Jarur pahunche Har Har Mahadev
माता तारा देवी नालागढ़
Mata devi
durga durga shri radhe
Tara
🙏

Shri radhe माता तारा देवी नालागढ़Mata   devi     durga     durga       shri radhe  Tara               🙏
30/04/2023

Shri radhe
माता तारा देवी नालागढ़
Mata devi
durga durga shri radhe
Tara
🙏

Jai mata di
16/04/2023

Jai mata di

0 Likes, 0 Comments - 🛕माता तारा देवी मंदिर🛕इनका मूल स्थान नालागढ़ हिमाचल () on Instagram: "Maa tara ka darbar Maa tara devi nalagarh माता तारा देवी नाला.....

दस महाविद्या मंत्र  में देवी मातंगी दस महाविद्या की नौवीं तांत्रिक देवी है। माता ज्ञान, भाषण, कला और संगीत को नियंत्रित ...
12/04/2023

दस महाविद्या मंत्र में देवी मातंगी दस महाविद्या की नौवीं तांत्रिक देवी है। माता ज्ञान, भाषण, कला और संगीत को नियंत्रित करती है।

बीज मंत्र:

ॐ ह्रीं क्लीं हूं मातंग्यै फट् स्वाहा।

मंत्र के चमत्कारिक फायदे:

मातंगी देवी की आराधना करने से अलौकिक शक्तियां प्राप्त होती है जिससे आप अपने विरोधियों पर नियंत्रण प्राप्त कर सकते है।

मंत्र जाप से आप लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर सकते है।

व्यक्ति मंत्र जाप कर कला पर महारत हासिल कर सकता है।

माँ को प्रसन्न कर सर्वोच्च ज्ञान प्राप्त कर सकता है।
माता तारा देवी नालागढ़
Mata devi
durga durga shri radhe
Tara
🙏

दस महाविद्या मंत्र में देवी धूमावती दस महाविद्याओं में सातवीं हैं। धूमावती देवी को भयानक और बदसूरत रूप में दर्शाया गया ह...
10/04/2023

दस महाविद्या मंत्र में देवी धूमावती दस महाविद्याओं में सातवीं हैं। धूमावती देवी को भयानक और बदसूरत रूप में दर्शाया गया है।

बीज मंत्र:

ऊँ धूं धूं धूमावती देव्यै स्वाहा:।

मंत्र के चमत्कारिक फायदे:

इनकी साधना करने से केतु ग्रह के अशुभ प्रभाव दूर होते हैं।

इनकी साधना से व्यक्ति को परम ज्ञान, वास्तविक सत्य के विषय में जागरूकता प्राप्त होती है।

माँ सभी परेशानियों का हरण करने वाली है इसलिए इनकी आराधना से व्यक्ति की परेशानियाँ दूर हो जाती है।

माँ का यह मंत्र काले जादू और नकारात्मक ऊर्जाओं से रक्षा करता है।

*💐💐ह्रदय रूपी मंदिर 💐💐*      एक बार भगवान दुविधा में पड़ गए! कि कोई भी मनुष्य जब मुसीबत में पड़ता है, तब मेरे पास भागा-भ...
07/04/2023

*💐💐ह्रदय रूपी मंदिर 💐💐*

एक बार भगवान दुविधा में पड़ गए! कि कोई भी मनुष्य जब मुसीबत में पड़ता है, तब मेरे पास भागा-भागा आता है और मुझे सिर्फ अपनी परेशानियां बताने लगता है,मेरे पास आकर कभी भी अपने सुख या अपनी संतुष्टि की बात नहीं करता मेरे से कुछ न कुछ मांगने लगता है!

अंतत: भगवान ने इस समस्या के निराकरण के लिए देवताओं की बैठक बुलाई और बोले- कि हे देवो, मैं मनुष्य की रचना करके कष्ट में पड़ गया हूं। कोई न कोई मनुष्य हर समय शिकायत ही करता रहता हैं, जबकी मै उन्हे उसके कर्मानुसार सब कुछ दे रहा हूँ। फिर भी थोड़े से कष्ट मे ही मेरे पास आ जाता हैं। जिससे न तो मैं कहीं शांति पूर्वक रह सकता हूं, न ही शास्वत स्वरूप में रह कर साधना कर सकता हूं। आप लोग मुझे कृपया ऐसा स्थान बताएं, जहां मनुष्य नाम का प्राणी कदापि न पहुंच सके।

प्रभु के विचारों का आदर करते हुए देवताओं ने अपने-अपने विचार प्रकट करने शुरू किए। गणेश जी बोले- आप हिमालय पर्वत की चोटी पर चले जाएं। भगवान ने कहा- यह स्थान तो मनुष्य की पहुंच में हैं। उसे वहां पहुंचने में अधिक समय नहीं लगेगा। इंद्रदेव ने सलाह दी- कि आप किसी महासागर में चले जाएं। वरुण देव बोले- आप अंतरिक्ष में चले जाइए।

भगवान ने कहा- एक दिन मनुष्य वहां भी अवश्य पहुंच जाएगा। भगवान निराश होने लगे थे। वह मन ही मन सोचने लगे- “क्या मेरे लिए कोई भी ऐसा गुप्त स्थान नहीं हैं, जहां मैं शांतिपूर्वक रह सकूं"।

अंत में सूर्य देव बोले- प्रभु! आप ऐसा करें कि मनुष्य के हृदय में बैठ जाएं! मनुष्य अनेक स्थान पर आपको ढूंढने में सदा उलझा रहेगा, क्योंकि मनुष्य बाहर की प्रकृति की तरफ को देखता है दूसरों की तरफ को देखता है खुद के हृदय के अंदर कभी झांक कर नहीं देखता इसलिए वह यहाँ आपको कदापि तलाश नहीं करेगा।

करोड़ों में कोई एक जो आपको अपने ह्रदय में तलाश करेगा वह आपसे शिकायत करने लायक नहीं रहेगा क्योंकि उसकी बाहरी इच्छा शक्ति खत्म हो चुकी होगी ईश्वर को सूर्य देव की बात पसंद आ गई। उन्होंने ऐसा ही किया और भगवान हमेशा के लिए मनुष्य के हृदय में जाकर बैठ गए।

उस दिन से मनुष्य अपना दुख व्यक्त करने के लिए ईश्वर को मन्दिर, पर्वत पहाड़ कंदरा गुफा ऊपर, नीचे, आकाश, पाताल में ढूंढ रहा है पर वह मिल नहीं रहें हैं।
परंतु मनुष्य कभी भी अपने भीतर ईश्वर को ढूंढने की कोशिश नहीं करता है
इसलिए मनुष्य "हृदय रूपी मन्दिर" में बैठे हुए ईश्वर को नहीं देख पाता और ईश्वर को पाने के चक्कर में दर-दर घूमता है पर अपने ह्रदय के दरवाजे को खोल कर नहीं देख पाता..!!
*कहानी से सीखः-*
“हृदय रूपी मंदिर” में बैठे हुए ईश्वर को देखने के लिए “मन रूपी द्वार” का बंद होना अति आवश्यक है, क्योंकि “मन रूपी द्वार” संसार की तरफ़ खुला हुआ है और “हृदय रूपी मंदिर” की ओर बंद है।

*सदैव प्रसन्न रहिये।*
*जो प्राप्त है, पर्याप्त है।।*

🙏🙏🙏🙏🌳🌳🌳🙏🙏🙏🙏🙏

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AT UCCHIA PAHARA VALI MAA Shri Tara Devi Mandir
Nalagarh
174101

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