23/01/2026
या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता,
या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना।
या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता,
सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥
जो ज्ञान की देवी सफेद कमल, चंद्रमा और हिम के हार के समान उज्ज्वल हैं, जो श्वेत वस्त्र धारण करती हैं, उनके एक हाथ में वीणा तो दूसरा हाथ वरद मुद्रा में रहता है और वे कमल के आसन पर विराजमान होती हैं, उस देवी की वंदना ब्रह्मा, विष्णु, शिव आदि देव सदैव ही करते हैं. अज्ञानता रूपी अंधकार को दूर करने वाली वह देवी सरस्वती मेरी रक्षा करें. मुझे ज्ञान से आलोकित करें..
जय माँ सरस्वती 🙏
स्वागत है ऋतुराज,समस्त देशवासियों को बसंतपंचमी की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ,🙏🌹🌹