11/09/2024
।।Jai Jai Shree Radhe ।।
।। श्रीराधा़ रानी प्राकट्य कथा ।।
आप सभी को राधा अष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं ! प्रेम से बोलो लाडली श्री राधा रानी की जय हो!!
अति फूलीं घर घर व्रजनारीं राधा प्रगटी जानि॥
धाईं मंगल साज सबै लै महा महोच्छव मानि।
आयीं घर वृषभानु गोप के, श्रीफल सोहति पानि॥
कीरति बदन सुधानिधि देख्यौ सुंदर रूप बखानि।
नाचत गावत दै करतारी, होत न हरष अघानि॥
देत असीस सीस चरननि धरि, सदा रहौ सुखदानि।
एस की निधि ब्रजरसिक राय सौं करौ सकल दुखहानि॥
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आज रावल में जय जयकार।
प्रगट भई वृषभानु गोप कै श्रीराधा अवतार॥
गृह गृह ते सब चलीं बेग दै गावत मंगलचार।
प्रगट भई त्रिभुवन की सोभा रूप रासि सुखसार॥
निरतत गावत करत बधाई भीर भई अति द्वार।
परमानंद वृषभानुनंदिनी जोरी नंददुलार॥
संयोग की बात ! आज ही कुछ देर पहले से करभाजन, श्रृंगी, गर्ग एवं दुर्वासा-चारों वहाँ आये हुए हैं। गोपों की प्रार्थना पर वृषभानु को आनन्द में निमग्न करते हुए वे श्रीराधा के ग्रह-नक्षत्र का निर्णय कर रहे हैं-
करभाजन शृंगी जु गर्गमुनि लगन नछत बल सोध री।
भए अचरज ग्रह देखि परस्पर कहत सबन प्रतिबोध री॥
सुदि भादौं सुभ मास, अष्टमी अनुराधा के सोध री।
प्रीति जोग, बल बालव करनें, लगन धनुष बर बोध री॥
बालिका का नाम रक्खा गया--'राधा'। 'राधिका' नाम वृषभानु एवं कीर्तिदा दोनों ने मिलकर रक्खा-लोहितवर्ण विद्युत्-लहरी-सी अंगप्रभा होने के कारण। राधा--राधिका नाम जगत् में विख्यात हुआ -
चकार नाम तस्यास्तु भानुः कीर्तिदयान्वितः।
रक्तविद्युत्प्रभा देवी धत्ते यस्मात् शुचिस्मिते।
तस्मात्तु राधिका नाम सर्वलोकेषु गीयते॥
(राधातन्त्र)
गोलोक विहारी श्रीकृष्णचन्द्र के जन्मोत्सव पर जो रसधारा प्रसरित हुई. वह द्विगुणित परिमाण में रासेश्वरी के जन्म पर उमड़ चली -
जो रस-नन्दभवनमें उमग्यौ, तातैं दूनों होत री।
राधा-सुधा-धारा में स्थावर-जंगम सभी बह चले-
सुर मुनि नाग धरनि जंगम कौं आनँद अति सुख देत री।
ससि खंजन बिद्रुम सुक केहरि, तिनहि छीनि बल लेत री॥
सूरदास उर बसौ निरंतर राधा माधौ जोरि री।
यह छबि निरखि निरखि सचु पावै, पुनि डारै तृन तोरि री॥