02/04/2024
जय गुरूदेव Baba Neem Karoli Family
अभिलाशा की पुर्ति
इलहाबाद में डा़. ब्रहम्स्वरूप का मकान था और वही वे सेवाभाव से होमियोपैथिक चिकित्सा भी किया करते थे ! आपने बताया कि मेरे पास कभी कभी असाध्य रोगो के मरीज आते थे और कहते हमेम बाबा नीब करौरी ने आप के पास भेजा है ! मैं उनका इलाज करता और वह शीघ्र ठीक हो जाते ! मुझे बहुत आश्चर्य होता कि मेरी दवा बाबा के भेजे भक्तो पर कितना अच्छा कार्य करती है , उतना दुसरे मरीजो पर नही !:मैं बाबा को जानता नही था ,और उन्हे देखा भी नही था ! इस कारण मुझे उनके दर्शनो की बहुत अभिलाशा थी ! मगर धन्धे को छोडकर उन्हें खोजना मेरे लिये सम्भव नही था!
एक दिन अपने नम्बर पर एक लम्बा चौडा व्यक्ति , कम्बल ओढे , नंगे पैर , अपने एक व्यक्ति के साथ मेरे कमरे में प्रविष्ट हुआ ! पुछने पर उसने बताया कि वह हथेली मे कुछ गर्मी महसुस कर रहा है ! मैने निदान के लिये कुछ प्रशन पुछे ! पर किसी का खास उतर नही मिला और वे व्यक्ति बोला " जो दवा तेरी समझ में आवे देदे !" मै , उसके व्यवहार पर विचलित हुआ , पर मैने ३ दिन की दवाई बना दी ! वह बोला "इतनी थोडी दवा से क्या होगा ?बहुत तायदाद में बना दे , अब हम जा रहे है , फिर नही आयेगे !" उसने अपने साथ आये आदमी को मुझे २० रूपये देने को कहा ! पर मैने मना कर दिया , क्योकि वह देखने पर मुझे कोई बाबा लग रहे थे ! मैं अपनी व्यसतता के कारण सोच नही पाया कि वह नीब करौरी बाबा भी हो सकते है ! जाते हुये २० रूपये वह मेरे मेज पर रख गये ! मैने उन नोटो को दान- पेटी में डाल दिया !
इसके बाद दुसरा मरीज मेरे कमरे में आया तो वह बोला " आप जानते है कि अभी आपके कमरे से जो बाहर गये है , वह कौन थे ?" मेरे मना करने पर उसने कहा कि वह बाबा नीब करौरी थे !भारत की यह महान विभुति आपके द्वार पर दो घण्टे आपकी प्रतीक्षा मे बैठी रही ! यह सुनकर मैं स्तब्ध रह गया ! मुझे अत्याधिक ग्लानि हुई कि मै अग्यानतावश बाबा का यथोचित सम्मान ना कर सका ! मैं बाहर भागा , बहुत खोजा मगर बाबा ना मिले !
जय गुरूदेव
आलौकिक यथार्थ