Jain Mantra Yantra And Vastu

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14/03/2026

*दिव्य दुर्लभ जैन मंत्र*

मैं आपको भेज रहा हूँ, इसे आप लोग मोबाइल में संग्रहित करे या एक डायरी में लिख लें । इन मन्त्रों के जाप से लगभग लाखों लोग लाभान्वित होते हैं। इन्हें सम्पूर्ण श्रद्धा सहित जपें।

*मंत्रो के द्वारा समस्या से समाधान पाएं*

1.पारिवारिक शांति एवं सौहार्द :- ॐ ह्रीं णमो लोए सव्वसाहूणं।
2. क्रोध शमन मंत्र :-
1. ‘‘ॐ क्षौं क्षौं स्वाहा।‘‘
*ॐ शांते-प्रशान्ते सर्व क्रोधोपशमनी स्वाहा।
3. ज्ञान वृद्धि मंत्र :- ‘‘ॐ णमो णाणस्स‘‘
4. भय-मुक्ति मंत्र :- ‘‘णमो अभयदयाणं‘‘
5. चिड़चिड़ापन मुक्ति मंत्र :- ‘‘ह्रूं।‘‘
6. शरारत कम करने के लिए :- ‘‘चंदेस्सु निम्मलयरा, आइच्चेसु अहियं पयासयरा‘‘
7. पारिवारिक इनसिकियोरिटी के लिए :- ‘‘ॐ अरिहे सर्व रक्ष ह्रं फट् स्वाहा।‘‘
8. नकारात्मक विचार को कम करना :- ‘‘ॐ ह्रीं श्री भगवते पार्श्वनाथाय हर हर स्वाहा।‘‘
9. आस-पास की नेगेटिविटी कम करने के लिए :- ‘‘ॐ अर्हम् अ सि आ उ सा नमः‘‘
10. जीवन में मंगल करने के लिए :- ‘‘अरहंता मंगलं‘‘
11. सगाई का मंत्र :- ‘‘ॐ ह्रीं श्री नमो वासुपूज्य प्रभवे, ममग्रह शांन्तिं कुरु कुरु स्वाहा।‘‘
12. किसी भी परीक्षा जैसे UPSC, C.A., CAT, GMAT, C. S., ICWA, M.B.A. I.A.S., I.F.S., C.F.A., JEE, P.M.T., DOCTORATE ETC..... में सफलता पाने के लिए :-
‘‘ॐ ह्रीं श्रीं चिंतामणि पार्श्वनाथाय अर्हते नमः‘‘
13. यात्रा प्रारम्भ पूर्व मंत्र :- ‘‘ॐ फुं क्ष्वीं ह्रीं ऐं नमः हः हः हः स्वाहा।‘‘
14. स्वयं को पावरफुल बनाने का मंत्र :- ‘‘ॐ ह्रीं श्रीं अर्ह चन्द्र प्रभवे नमः।‘‘
15. डिसीजन मेकिंग :- ॐ ह्रीं णमो सिद्धाणं
16. खुश रहने का मंत्र :- ‘‘ॐ ह्रां ह्रीं ह्रूं क्लीं ब्लूं श्लीं प्लीं स्वाहा।
17. पेट की समस्या :- ॐ किले विकले स्वाहा।
18. पाचन तंत्र की समस्या :- ॐ णमो भगवती गुणवती महामनसी स्वाहा।
19. ब्लड प्रेशर :- ‘‘ॐ‘‘
20. कोरोना मुक्ति मंत्र :- ॐ ह्रीं णमों लोए सव्वसाहूणं।
गुरुदेव द्वारा दिया गया मंत्र कोरोना का :- चइत्ता भारहं वासं चक्कवट्टी महिड्हिओ। संती संतिकरे लोए, पत्तो गइमणुतरं।।
21. सरदर्द मुक्ति मंत्र :- ॐ णमो परमोजिणाणं ह्रां ह्रीं
22. स्कीम प्राब्लम :- क्षिप ॐ स्वाहा।
23. घूटने के दर्द के लिए :- लं लं।
24. शुगर के लिए :- ‘‘ ॐ नमो भगवओ ऋषभाय हनि हनि स्वाहा।‘‘
25. थायराइड के लिए :- अ: सिद्धा अ:
26. नाड़ीतन्त शक्ति वर्धक :- ॐ हंसः
27. नींद नही आती :- ‘‘ह्रूं ह्रं।‘‘
28. धन की समस्या से मुक्ति :-
1. ॐ ह्रीं श्रीं का श्रीं क्लीं श्रीं महालक्ष्मी मम गृहे धनं पूरय पूरय चिंतायै दूरय दूरय स्वाहा।
2. श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं कमल वासिन्यै स्वाहा।
3. ॐ श्री श्रियै नमः।
4. ॐ ह्रीं श्रीं महालक्ष्मी पार्श्वनाथाय नमः।
29. स्वयं का और पर इम्प्रेशन स्ट्रांग करने का मंत्र :- ‘‘ ॐ ह्रीं त्रैलोक्याधीश जिनाय नमः
30. राजनीति, सामाजिक पद प्राप्ति :- ॐ ह्रीं वैं णमो आयरियाणं
31. धर्म बढ़ाने हेतु मंत्र :- ॐ अर्हं अ सि आ उ सा णमों अरंहतांण नमः
32. सर्व शरीर रक्षा मंत्र :- ॐ ह्रीं क्लीं ब्लीं स्वाहा।
33. वैर-शमन मंत्र :- ॐ ह्रीं श्रीं (व्यक्ति का नाम) साधय साधव।
34. प्रेम भाव वर्धक मंत्र :- ॐ ह्रीं अर्हं णमो पदानुसारिणं परस्पर विरोध विनाशनं भवतु।
35. परिवार में सम्मान :- ‘‘ ॐ ह्रीं श्रीं कुंथु अरं च मल्लिम, वंदे मुणिसुव्वयं नमिजिणं च। वंदामि रिट्ठनेमि पासं तह वद्धमाणं च मम मनोवांछितम पूरय पूरय ह्रीं स्वाहा।
36. खोई हुई वस्तु की प्राप्ति :- भक्तामर का 11 वां श्लोक - दृष्टवा भवन्तमनिमेष.......
37. सूर्य ग्रह को प्रभावी बनाने का मंत्र :- ॐ ह्रीं श्रीं नमः पद्मप्रभवें, मम ग्रह शान्तिं कुरु कुरु स्वाहा।
38. चंन्द्र की स्थिति :- ॐ ह्रीं श्रीं नमः नमश्प्रभवें, मम ग्रह शान्तिं कुरु कुरु स्वाहा।
39. बुध की स्थिति :- ॐ ह्रीं श्रीं नमो शांतिनाथाय, मम ग्रह शान्तिं कुरु कुरु स्वाहा।
40. गुरु की स्थिति :- ॐ ह्रीं श्रीं नमो ऋषभनाथाय, मम ग्रह शान्तिं कुरु कुरु स्वाहा।
41. शुक्र की स्थिति :- ॐ ह्रीं श्रीं नमो सुविधिनाथाय, मम ग्रह शान्तिं कुरु कुरु स्वाहा।
42. शनि की स्थिति :- ॐ ह्रीं श्रीं नमो मुनिसुव्रतनाथाय, मम ग्रह शान्तिं कुरु कुरु स्वाहा।
43. राहू की स्थिति :- ॐ ह्रीं श्रीं नमो नेमिनाथाय, मम ग्रह शान्तिं कुरु कुरु स्वाहा।
44. केतू की स्थिति :- ॐ ह्रीं श्रीं नमो पार्श्वनाथाय , मम ग्रह शान्तिं कुरु कुरु स्वाहा।

1. इष्ट सिद्धि में - ॐ ह्रीं श्रीं अर्हम ह्रूं श्री सीमंधर स्वामीने नमः स्वाहा।
2. विशिष्ट मंत्र की आराधना - सिद्धा, ॐ ह्रीं नमः
3. अनुकूल स्थिति का निर्माण -
ह्रीं णमो उवज्झायाणं।
ह्रीं णमो लोएसव्वसाहूणं।
ह्रीं णमो आयरियाणं।
ह्रीं णमो सिद्धाणं।
ह्रीं णमो अरहंताणं।
4. आसक्ति को कम करने के मंत्र -
एगो मे सासओ अप्पा, णाणदंसण संजुओ
सेसा में बाहिरा भावा, सव्वे संजोग लक्खणा
5. नजर उतारना - ॐ णमो भगवते श्रीपार्श्वनाथाय ह्रीं धरणेन्द्र पद्मावती सहिताय आत्मचक्षुप्रेतचक्षु पिशाचचक्षु सर्व ग्रहनाशाय त्रासय त्रासय ह्रीं श्रीं पार्श्वनाथाय स्वाहा।

*नम्र निवेदन*

*कृपया अधिक से अधिक ये मैसेज सबको भेजें जिससे सभी को समस्त समस्याओं का समाधान इन दिव्य दुर्लभ मंत्रों से लाभ मिले ।*

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06/11/2025

श्री चक्रेश्वरी माता - श्री शेत्रुंजय महातीर्थ

श्री शांतिनाथ भगवान के मंदिर के बाहर निकल कर बायीं ओर सीढ़ियों से नीचे उतरते हैं, तब एक देहरी में श्री आदीश्वर भगवान की अधिष्ठायिका एवं कर्माशा की कुलदेवी "चक्केश्वरी" के दर्शन होते हैं। जब कर्माशा ने इस तीर्थ का पन्द्रहवाँ उद्धार कराया था, तब विक्रम संवत् १५८४ में इसकी स्थापना की थी । देवी की मूर्ति चमत्कारी व रमणीय है । स्तवन में कहा है कि -

"प्रभुजी आवी वाधण पोल के, डाबा चक्केसरी रे लोल । चक्वेसरी जिनशासन रखवाल के, संघनी सहाय करे रे लोल ।"

चक्केसरी देवी ने इस तीर्थ के लिए अनेक प्रयत्न किये थे । चक्वेसरी देवी ने जावडशा को स्वप्न देकर तक्षशिला की मूर्ति प्राप्त कराई थी, कर्माशा को भी तीर्थोद्धार में वह सहायक हुई थी । शासन की सेवा करने वाला कोई देव अथवा देवी हो, ! हमें उसे प्रणाम कहकर नमस्कार करना चाहिए और साधु उसे धर्मलाभ कहें।

उसके समीप की दूसरी देरी में वागेसरी एवं पद्मावती माता बिराजमान है ।

06/11/2025
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