श्री विश्वेश्वर नाथ धाम, छोटी काशी।

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श्री विश्वेश्वर नाथ धाम, छोटी काशी। देवों के देव भगवान शिव का मंदिर।
(2)

26/05/2026

*Bureaucracy…*

दो वरिष्ठ सरकारी अफ़सर देर रात सड़क पर निकले

एक सोते हुए भिखारी को उठा कर पूछा, “कुछ खाया ?”

भिखारी ने कहा, “नहीं साहब, कल से कुछ नहीं खाया।”

दोनों अफ़सर पूरी रात उस भिखारी के पास बैठे रहे और उसे सोने नहीं दिया।

क्योंकि ऊपर से आदेश था कि…

*कोई भूखा न सोए !!*

26/05/2026

जेल में बंद कैदी रोज़ रामायण पढ़ता था… एक दिन जेलर को पता चला कि उसने अपराध क्यों किया था।

1. सीतापुर जेल की बैरक नंबर 7
सीतापुर जिला जेल। ऊँची दीवारें, लोहे की सलाखें और सन्नाटा। बैरक नंबर 7 में 42 कैदी थे। उन्हीं में एक था कैदी नंबर 2911 — राघव शुक्ला। उम्र 38 साल, दुबला-पतला, दाढ़ी बढ़ी हुई, आँखें हमेशा नीचे।

राघव की पहचान थी रामायण। सुबह 4 बजे उठता, नहाकर जेल के मंदिर वाले कोने में बैठ जाता। फटी-पुरानी रामायण खोलता और पाठ करता। आवाज़ धीमी पर साफ। "मंगल भवन अमंगल हारी, द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी।"

दूसरे कैदी हँसते। "पंडित, रामायण पढ़ने से सजा कम नहीं होगी। 20 साल काटने हैं तुझे।"
राघव जवाब नहीं देता। पाठ खत्म करके वो रामायण को माथे से लगाता और वापस बैरक में।

जेलर थे अविनाश सिंह। 50 साल के, कड़क अफसर। 25 साल की नौकरी में हर तरह के कैदी देखे थे। पर राघव अजीब था। न लड़ाई, न गाली, न भागने की कोशिश। बस रामायण।

2. अपराध क्या था?
राघव की फाइल में लिखा था — "धारा 302, हत्या। 2019 में लखनऊ के गोमतीनगर में बिल्डर विजय अग्रवाल की हत्या। पत्नी और 2 साल की बेटी के सामने गोली मारी। कोर्ट ने उम्रकैद दी।"

जेलर अविनाश को हैरानी होती। जो आदमी रामायण पढ़ता है, वो एक परिवार के सामने खून कैसे कर सकता है? उन्होंने पुराने सिपाही शिवराम से पूछा।
"साहब, ये आदमी कोर्ट में भी चुप था। वकील नहीं किया। खुद कहा — हाँ, मैंने मारा। बस।"

"क्यों मारा, ये नहीं बताया?"
"ना साहब। जज ने भी पूछा। बोला — वजह मत पूछिए। सजा दे दीजिए।"

अविनाश की उलझन बढ़ गई।

3. जेल में रामराज
राघव 3 साल से जेल में था। धीरे-धीरे उसने बैरक का माहौल बदल दिया। जो कैदी गाली देते थे, वो अब धीरे बोलते। रामायण के बाद राघव सबको एक चौपाई का मतलब समझाता।

"कर्म प्रधान विश्व रचि राखा, जो जस करहि सो तस फल चाखा।"
"मतलब, भाई, जो करोगे वही भरोगे। गाली दोगे तो गाली मिलेगी। प्रेम दोगे तो प्रेम।"

छोटू नाम का 19 साल का लड़का चोरी में आया था। राघव ने उसे अक्षर सिखाए। अब छोटू रामायण पढ़ लेता था।

जेल में लड़ाई हो जाती तो वार्डन बुलाते — "पंडित को बुलाओ।" राघव दो लाइन बोलता, और मारपीट रुक जाती।

जेलर अविनाश देखते रहते। सोचते, "अगर ये आदमी बाहर होता तो कितने घर बचा लेता। पर इसने एक घर उजाड़ दिया। क्यों?"

4. बेटी की चिट्ठी
2025 की मार्च। होली का दिन। जेल में कैदियों को घर से चिट्ठी मिलती है। राघव को कभी चिट्ठी नहीं आई थी।

पर उस दिन एक लिफाफा आया। भेजने वाली — "अनन्या अग्रवाल, क्लास 6, सेंट मैरी स्कूल, लखनऊ।"
जेलर चौंक गए। अग्रवाल... वही विजय अग्रवाल की बेटी?

नियम था, जेलर चिट्ठी पढ़कर देते हैं। अविनाश ने लिफाफा खोला।

*अंकल,
आप मुझे जानते नहीं। मैं अनन्या हूँ। पापा विजय अग्रवाल की बेटी।
मम्मा कहती हैं आपने मेरे पापा को मार दिया। पुलिस अंकल ने भी यही कहा।
पर मैं आपसे नफरत नहीं करती।
क्योंकि मम्मा रात को रोती हैं। वो कहती हैं, "तेरे पापा अच्छे आदमी नहीं थे।"
नानी कहती हैं, "राघव अंकल ने तेरी जिंदगी बचाई थी।"
मैं बहुत कन्फ्यूज हूँ।
आप सच बताओगे? आपने पापा को क्यों मारा?
आप रामायण पढ़ते हो न? राम जी तो किसी को नहीं मारते थे बिना वजह।
प्लीज जवाब देना।
अनन्या*

अविनाश का हाथ काँप गया। उन्होंने चिट्ठी राघव को दी।

राघव ने चिट्ठी पढ़ी। पहली बार उसकी आँखें भर आईं। उसने चिट्ठी को माथे से लगाया और जेलर से बोला, "साहब, क्या मैं इसे जवाब दे सकता हूँ?"
"हाँ। पर पहले मुझे बताओ, सच क्या है?"

राघव चुप रहा। फिर बोला, "साहब, कल सुंदरकांड का पाठ पूरा होगा। उसके बाद बताऊँगा। 7 साल से इस दिन का इंतज़ार कर रहा था।"

5. सुंदरकांड और खुलासा
अगली सुबह। जेल के मंदिर में सुंदरकांड। राघव ने पाठ किया। जेलर अविनाश भी बैठे।

पाठ खत्म हुआ। राघव जेलर के कमरे में आया। "साहब, बैठ जाऊँ?"
"हाँ राघव। अब बताओ।"

राघव ने लंबी साँस ली। "साहब, मैं लखनऊ में ड्राइवर था। विजय अग्रवाल के यहाँ। 8 साल काम किया। वो बिल्डर था, पर आदमी नहीं था।"

"मतलब?"
"साहब, विजय अग्रवाल की बीवी यानी मिसेज कविता बहुत शरीफ थीं। बेटी अनन्या तब 2 साल की थी। पर विजय शराब पीकर दोनों को मारता था। कई बार मैंने बीच-बचाव किया। नौकरी जाने का डर था, पर चुप नहीं रह पाया।"

"फिर एक दिन?"
"5 मार्च 2019। होली का दिन था। विजय नशे में था। कविता मैडम ने तलाक माँगा। विजय ने कहा — 'तलाक दे दूँगा, पर पहले तुझे और तेरी बेटी को जान से मारूँगा। इंश्योरेंस का पैसा मिलेगा।'"

राघव की आवाज भर्रा गई। "उसने पिस्तौल निकाली। मैडम डरकर कमरे में भागीं। अनन्या पालने में सो रही थी। विजय पालने की तरफ बढ़ा। बोला — 'पहले इसे निपटाता हूँ।'"

"मैं किचन में था। सब सुन रहा था। मेरे पास कुछ नहीं था। विजय ने ट्रिगर पर उंगली रखी। साहब, उस वक्त मुझे रामायण की वो लाइन याद आई — 'परहित सरिस धर्म नहिं भाई। पर पीड़ा सम नहिं अधमाई।'"

"दूसरों की भलाई से बड़ा धर्म नहीं। और दूसरों को दुख देने से बड़ा पाप नहीं।"

"मैं दौड़ा। गेट के पास विजय की लाइसेंसी रिवॉल्वर पड़ी थी। मैंने उठाई। वार्निंग दी — 'साहब, रुक जाओ। बच्ची को मत मारो।' वो हँसा — 'तू ड्राइवर, मुझे रोकेगा?' उसने पालने पर गोली चला दी।"

राघव चुप हो गया।
"फिर?" जेलर ने पूछा।
"फिर मैंने गोली चला दी साहब। एक गोली। सीधे छाती में। विजय वहीं गिर गया।"

"अनन्या बच गई?"
"हाँ साहब। गोली पालने के बगल से निकली। मैं दौड़कर अनन्या को उठाया। कविता मैडम बेहोश थीं। मैंने पुलिस को फोन किया। कहा — 'मैंने मारा है। आ जाओ।'"

6. कोर्ट में चुप्पी क्यों?
"राघव, तुमने कोर्ट में ये सब क्यों नहीं बताया? सेल्फ डिफेंस था। सजा कम हो जाती।"

राघव हँसा, फीकी हँसी। "साहब, कविता मैडम की हालत खराब थी। पुलिस ने उनसे पूछा तो वो डर गईं। विजय का परिवार बहुत पावरफुल था। उन्होंने कहा — 'अगर मैं गवाही दूँगी तो ये लोग मेरी बेटी को मार देंगे।'"

"मैंने मैडम से कहा — 'आप चुप रहो। अनन्या को बड़ा करना है। मैं संभाल लूँगा।' साहब, एक माँ को अपनी बच्ची के लिए झूठ बोलना पड़े, इससे बड़ा पाप नहीं। मैंने वो पाप अपने सिर ले लिया।"

"पर तुम तो 20 साल के लिए अंदर हो गए।"
"साहब, बाहर रहकर भी मैं कौन सा आजाद था? हर रात सोचता — काश 2 सेकंड पहले पहुँच जाता, तो गोली ही न चलती। जेल में कम से कम राम जी के पास हूँ।"

7. जेलर का धर्मसंकट
अविनाश सन्न रह गए। फाइल में "हत्या" लिखा था। पर असल में ये "रक्षा" थी।

उन्होंने SP साहब को फोन किया। "सर, केस री-ओपन हो सकता है क्या?"
"अविनाश, 7 साल हो गए। कोर्ट का फैसला है। अब क्या कर सकते हैं?"
"सर, नई गवाही है। बच्ची की चिट्ठी है।"

SP चुप। "देखता हूँ। पर उम्मीद मत रखना।"

उधर राघव ने अनन्या को जवाब लिखा।

*बेटी अनन्या,
तुम्हारे पापा को मैंने मारा, ये सच है। पर क्यों मारा, ये भी सच है।
उस दिन होली थी। रंग की जगह खून बह जाता अगर मैं न रोकता।
तुम पालने में थी। तुम्हारे पापा नशे में थे। वो तुम्हें मारने वाले थे।
मैंने राम जी से पूछा — क्या करूँ? उन्होंने कहा — 'बच्ची को बचा।'
बस मैंने वही किया।
मुझे सजा मिली। पर तुम्हें जिंदगी मिली। मुझे कोई पछतावा नहीं।
तुम अपनी मम्मा का ख्याल रखना। खूब पढ़ना। और हाँ, रामायण जरूर पढ़ना। उसमें हर सवाल का जवाब है।
तुम्हारा,
राघव अंकल*

8. कविता का आना
चिट्ठी के 15 दिन बाद सीतापुर जेल के गेट पर एक औरत आई। साड़ी, आँखों में चश्मा, साथ में 9 साल की बच्ची।

गेट पर एंट्री — "कविता अग्रवाल, अनन्या अग्रवाल। कैदी 2911 से मुलाकात।"

जेलर अविनाश ने स्पेशल इजाजत दी। मुलाकात वाले कमरे में राघव आया। सामने कविता और अनन्या।

कविता फूट पड़ी। "राघव भैया... मुझे माफ कर दो। मैंने कायरता की। आपकी जिंदगी खराब कर दी।"
राघव ने हाथ जोड़े। "मैडम, आप माँ हो। माँ से बड़ा कोई धर्म नहीं। आपने सही किया।"

अनन्या दौड़कर राघव के पैरों में गिर गई। "अंकल, थैंक यू। आपने मुझे बचाया।"
राघव ने उसे उठाया, सिर पर हाथ फेरा। "बेटा, थैंक यू मत कहो। तुम खुश रहो, यही मेरी सजा काट देगा।"

कविता ने एक फाइल निकाली। "साहब, ये मेरा बयान है। 7 साल बाद ही सही, पर अब सच बोलूँगी। कोर्ट में दूँगी। राघव भैया बेकसूर हैं।"

9. केस री-ओपन
कविता के बयान से हड़कंप मच गया। मीडिया में खबर — "ड्राइवर ने मालिक को क्यों मारा? 7 साल बाद खुला राज।"

हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया। री-ट्रायल का आदेश। अनन्या भी कोर्ट में बोली, "अंकल ने मुझे बचाया। मैंने देखा था।"

पुराने नौकरों ने भी गवाही दी — "साहब बीवी-बच्ची को मारते थे।"
बैलिस्टिक रिपोर्ट से साबित हुआ कि पहली गोली विजय ने चलाई थी, पालने की तरफ।

6 महीने केस चला। 2026 की जनवरी। जज ने फैसला सुनाया —
"राघव शुक्ला ने अपराध नहीं, कर्तव्य किया। सेल्फ डिफेंस और नाबालिग की रक्षा। कोर्ट इन्हें बाइज्जत बरी करती है। 7 साल की सजा के लिए राज्य सरकार मुआवजा दे।"

कोर्ट में तालियाँ बज गईं। राघव चुप था। उसकी आँखों में आँसू थे।

10. आजादी और रामायण
26 जनवरी 2026। सीतापुर जेल का गेट। राघव बाहर आया। हाथ में वही फटी रामायण। सामने अनन्या, कविता, जेलर अविनाश, और पूरी बैरक नंबर 7।

छोटू दौड़कर आया। "पंडित जी, अब कौन रामायण पढ़ाएगा?"
राघव हँसा। "तू पढ़ाएगा। मैंने तुझे सिखाया न?"

जेलर अविनाश ने सैल्यूट किया। "राघव, माफ करना। मैंने तुम्हें कैदी समझा। तुम तो असली जेलर हो — जिसने सबको बुराई की जेल से आजाद किया।"

राघव ने पैर छुए। "साहब, आपने मुझे बेटी की चिट्ठी दी। वरना मैं सच लेकर मर जाता।"

11. नया जीवन
राघव अब लखनऊ में कविता के घर के पास ही रहता है। अनन्या उसे "बड़े पापा" बुलाती है।

उसने "रामायण सेवा ट्रस्ट" खोला है। जेल में बंद कैदियों को रामायण बाँटता है। कानून की क्लास देता है — "सेल्फ डिफेंस क्या है, चुप रहने से क्या नुकसान है।"

हर मंगलवार सीतापुर जेल जाता है। बैरक नंबर 7 में सुंदरकांड होता है। अब पाठ छोटू करता है।

कविता ने कहा, "भैया, आप हमारे साथ रह लो।"
राघव मना कर देता। "नहीं मैडम। मैं पास रहूँगा, पर साथ नहीं। दुनिया को लगना चाहिए कि आपने एहसान चुकाया। पर मैंने तो धर्म निभाया था, एहसान नहीं।"

12. जेलर की डायरी
अविनाश सिंह अब DIG हैं। उनकी टेबल पर एक रामायण रखी रहती है। उस पर राघव ने लिखा है —
"साहब, वर्दी का रंग खाकी है, पर काम राम जी वाला है। सही को सही कहने से मत डरना।"

अविनाश नए जेलरों को ट्रेनिंग देते हैं। पहला लेसन — "हर कैदी अपराधी नहीं होता। कभी-कभी वो राम होता है, जिसे सीता बचाने के लिए रावण मारना पड़ा। फर्क बस इतना है कि त्रेता में राम को राज मिला, कलयुग में जेल।"

आखिरी चौपाई
राघव अब भी रोज रामायण पढ़ता है। अनन्या पास बैठकर सुनती है। जब वो चौपाई आती है — "परहित सरिस धर्म नहिं भाई", अनन्या पूछती है, "बड़े पापा, इसका मतलब क्या है?"

राघव उसकी सिर पर हाथ फेरता है। "बेटा, मतलब ये कि अगर किसी की जान बचाने के लिए तुम्हें सजा भी मिले, तो वो सजा नहीं, पूजा है।"

अनन्या मुस्कुराती है। खिड़की से सूरज की रोशनी राघव की रामायण पर पड़ती है। 7 साल जेल की दीवारों ने जो सोना छिपा रखा था, वो अब दुनिया के सामने चमक रहा था।

क्योंकि अपराध वो नहीं जो कानून की किताब में लिखा हो। अपराध वो है जो इंसानियत की किताब के खिलाफ हो। और राघव ने इंसानियत की किताब कभी बंद नहीं की।
सीताराम, जय सियाराम.....
बोलो श्री राम जय राम जय जय राम 🙏
✍🏻✍🏻✍🏻

असलियत जान कर आपकी आँखें फट जायेंगी ! पहले आपको थोक ( औद्योगिक) और रिटेल ( जनता का भाव ) समझना होगा , कौन लोग हैं जो कह ...
26/05/2026

असलियत जान कर आपकी आँखें फट जायेंगी !
पहले आपको थोक ( औद्योगिक) और रिटेल ( जनता का भाव ) समझना होगा ,

कौन लोग हैं जो कह रहे हैं भारत में दुनियाँ के हिसाब से मात्र 3% बढ़ोत्तरी हुई है ?? लोग कुछ भी छाप देते हैं ,,

पहले थोक वाले समझो ,,

थोक वाले - बड़ी औद्योगिक कंपनियाँ हैं जो अपने उद्योग को चलाने के लिए बल्क में डीज़ल खरीदती हैं

जैसे राज्य परिवहन हुआ जिनकी हज़ारों बस चलती हैं उनको ट्रांसपोर्ट के लिए थोक में डीज़ल की जरूरत होती है

वैसे ही बड़े बड़े मॉल हुए , बड़े बड़े कारखाने हुए , ये सब पेट्रोल पम्प से तेल नहीं ख़रीदते , इनका सीधा कांट्रैक्ट बड़ी तेल कंपनी जैसे IOCL , BPCL , HPCL से होता है जिसे ( B2B Agreement ) भी कह सकते हैं

ये बड़ी तेल कंपनियों अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार से तेल ख़रीदती हैं , और भारत में थोक और रिटेल दोनों को सप्लाई देती हैं ,

थोक वालों का ये फ़ायदा होता है कि अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में उतार चढ़ाव से इनकी कीमतें तेज़ी से बदलती हैं ,,

अभी भारत के अंदर जब रिटेल ( आम जनता) के लिए कीमतें नहीं बढ़ी थी तब थोक वालों के लिए कीमतें बढ़ा दी गई थी ,

जो डीज़ल 87.67 प्रति लीटर था वो सीध 134 से 149 रुपये प्रति लीटर हो गया ,, मतलब 52.8% से 70 % बढ़ा ,

आज भी भारत के थोक ख़रीददार चाहे वो रेलवे सेक्टर हो , डिफेंस सेक्टर हो , राज्य परिवहन हो , या मॉल या फिर किसी कारखाने के मालिक ,, सब 52.8 % से 70% ज़्यादा भाव में ख़रीद रहे हैं ,,

अब बात कर लेते हैं रिटेल की ,,

जो लोग सिर्फ टीवी देखकर या अख़बार की हेडलाइन पढ़कर ज्ञान बांटते हैं, उन्हें रिटेल यानी 'आम जनता की जेब' का असली गणित पता ही नहीं है ,

रिटेल का मतलब है—मैं, आप और देश के करोड़ों आम नागरिक, जो अपनी बाइक, कार, ऑटो या ट्रैक्टर में तेल डलवाने सीधे गली-मोहल्ले के पेट्रोल पंप पर जाते हैं ,

ये जो तथाकथित ज्ञानी कह रहे हैं न कि भारत में दुनिया के हिसाब से मात्र 3% या 5% की बढ़ोतरी हुई है, वो दरअसल सरकार की 'किश्तों वाली मार' को समझ ही नहीं पा रहे हैं जिसे स्लाइडिंग मेथड भी कहते हैं ,

सरकार और तेल कंपनियों को अच्छे से पता था कि अगर थोक वालों की तरह रिटेल का दाम भी एक झटके में 50% से 70% बढ़ा दिया, तो देश की जनता सड़कों पर आ जाएगी, हाहाकार मच जाएगा,,

इसलिए उन्होंने जानता के तुरंत के हाहाकार रिएक्शन को कंट्रोल करने का फैसला लिया ,

उन्होंने क्या किया? रिटेल की कीमतों को फ्रीज़ कर दिया जिसे Price Freeze कहते हैं

जनता खुश हो गई कि वाह! दुनिया में युद्ध चल रहा है और हमारे यहाँ दाम नहीं बढ़ रहे। लेकिन यह सिर्फ तूफान से पहले की शांति थी ,,

जैसे ही थोक का भाव ₹149 पहुंचा, बाज़ार का संतुलन बिगड़ गया , जब बस डिपो और फैक्ट्रियों के मालिकों ने देखा कि पेट्रोल पंप पर डीज़ल ₹40-50 सस्ता मिल रहा है, तो वो अपने बड़े-बड़े टैंकर और ड्रम लेकर आम जनता वाले पेट्रोल पंपों पर लाइन लगाकर खड़े हो गए ,,

नतीजा क्या हुआ? पेट्रोल पंपों पर अचानक डीज़ल ख़त्म होने लगा, जिसे अंग्रेजी में 'ड्राई-आउट' कहते हैं। कई शहरों के पंपों पर 'डीज़ल ख़त्म है' के बोर्ड लटक गए ,,

सरकार के नियमों के अनुसार थोक वाले रिटेल ( जनता ) के लिए पेट्रोल पम्प से नहीं ख़रीद सकते , वरना जनता का डीज़ल तो वही ले जाएँगे , पंपों पर बड़ी बड़ी लाइन लग जायेंगीं ,

सोचो रोडवेज बस वाले अपनी बसें पेट्रोल पम्प पर लगा दें तो सुबह से शाम तक किसी का नंबर नहीं आयेगा ,,

फिर भी सैंधमारी खूब हुई ,

जब पम्प पर डीज़ल 40 -50 रुपये सस्ता मिल रहा है तो एक 12000 लीटर वाले टैंकर पर 6 लाख ज़्यादा कियूँ देंगे ??

इस किल्लत को संभालने के लिए प्रशासन को कड़े निर्देश दिए कि पेट्रोल पंपों पर विशेष नज़र रखी जाये ,,

पहले सोचा युद्ध ख़त्म हो जाएगा तो कीमतें अपने आप नीचे आजायेंगीं , सरकार की खूब वाही वाही होगी ,,

पर स्थिति हाथ से निकलती जा रही है , हर दिन तेल कंपनियों को घाटा हो रहा है , हालांकि अंतराष्ट्रीय बाज़ार में तेल की क़ीमत कम थी तब इन्ही तेल कंपनियों ने भर भर के मुनाफ़ा कमाया था ,,

सरकार पर दवाब बनाया गया , सरकार के पास अब चॉइस नहीं बची , इसलिए अब स्लाइडिंग मेथड अपना कर रिटेल ( जनता ) के लिए भी कीमतें बढ़ाना शुरू कर दिया है ,

2-2 , 3-3 रुपये कर के ये कीमतें थोक की कीमतों के आस पास पहुँचनी ही पहुँचनी हैं ,,

थोक की कीमतें अभी डीज़ल 132 रुपये से 149 रुपये तक है
इसका मतलब जनता के लिए अभी कीमतें और बढ़ेंगीं बस तैयार रहिए ,

स्लाइडिंग मेथड 2-2 , 3-3 रुपये बढ़ाने से जनता में आक्रोश पैदा नहीं होता ,,

हाँ जहाज़ी के इस लेख कोई न्यूज़ वाला छापना चाहे तो नाम के साथ छाप सकता है , लेख 100% सत्य है ,

जिसे थोक वालों से पता करना हो पता कर सकते हैं कि उनको डीज़ल किस भाव में मिल रहा है

Rahul Gaur ✍️✍️✍️

इस यन्त्र का प्रयोग कब, क्यूं और कहां होता था---??😄
25/05/2026

इस यन्त्र का प्रयोग कब, क्यूं और कहां
होता था---??😄

25/05/2026
आज का दिन शुभ हो, सर्वेश्वर को बारम्बार नमन 🙏महाद्रिपार्श्वे च तटे रमन्तं सम्पूज्यमानं सततं मुनीन्द्रैः। सुरासुरैर्यक्ष ...
25/05/2026

आज का दिन शुभ हो, सर्वेश्वर को बारम्बार नमन 🙏

महाद्रिपार्श्वे च तटे रमन्तं सम्पूज्यमानं सततं मुनीन्द्रैः।
सुरासुरैर्यक्ष महोरगाढ्यैः केदारमीशं शिवमेकमीडे॥

शिव समान दाता नहीं...

जय केदार... कृपा अपार 🕉️

24/05/2026

मार्को रूबियो भारत आते है और दिल्ली जाने की जगह सीधे कोलकाता में उतरते है, इसके बाद ये मदर टेरेसा की मिशनरी संस्था में घुसकर उनके पदाधिकारियों से कमरे के भीतर मुलाकात करते है

जिसके बाद ये दिल्ली जाते है,

ये सामान्य यात्रा बिल्कुल नहीं थी, ये अमेरिका का वहीं पुराना ढर्रा है जहां भारत को ब्लैकमेल करने का प्रयास हो रहा है

वरना जिस संस्था के विदेशी फंडिंग पर रोक लगी हो, जिनके लोगो पर गंभीर अपराध लगे हो, उनसे मिलना वो भी एक अमेरिकी विदेश मंत्री का साधारण नहीं हो सकता

इससे पहले नॉर्वे में पत्रकार वाला इंसीडेंट केवल इत्तेफाक नहीं हो सकता, अमेरिकन CIA इस तरह के हथकंडे अपनाती रही है दूसरे देश के सरकारों को कंट्रोल करने के लिए

इसका कारण बहुत हद तक तेल ही है, दरअसल इस समय भारत 40 से ज्यादा देशों से तेल खरीद रहा है जिस कारण हमें तेल संकट पर उतना फर्क नहीं पड़ा, पर क्योंकि हम दुनिया में सबसे ज्यादा तेल खरीदने वाले देशों में से है तो अमेरिका चाहता है कि हम तेल उसके कंट्रोल वाले देशों से खरीदे

इसका कारण पेट्रोडॉलर को बचाना है और नई करेंसी को आने से रोकना है

ये अभी ज्यादा बड़ा लग रहा है लेकिन इस तेल क्लेश की शुरुआत बहुत पहले से हो गई थी जब अमेरिका ने क्वाड की स्थापना की थी, ये चीन से युद्ध के लिए नहीं था, बल्कि चीन के व्यापारिक जहाजों को कंट्रोल करने के लिए था, कुछ ऐसा ही इन्होंने द्वितीय विश्वयुद्ध में जापान के साथ किया था

जब इनके सभी व्यापारिक जहाजों को खत्म कर जापान में घेर लिया था

लेकिन भारत चीन से क्लेश नहीं बढ़ाना चाहता था दूसरे देशों के फायदों के लिए, इसलिए क्वाड की अहमियत खत्म हो गई

अमेरिका ने बहुत नाक घिसे पर भारत तैयार नहीं हुआ, अमेरिका ने लद्दाख में घुसपैठ का प्रोपेगैंडा भी फैलाया, चीन से युद्ध का डर भी दिखाया लेकिन भारत ने फिर भी अमेरिका को घास नहीं डाला

जिसके बाद यूक्रेन वॉर हुआ, उसमें भी भारत ने कोई सहयोग नहीं दिया, जापान बिलियन डॉलर इन्वेस्ट का लालच लेकर आया था लेकिन फिर भी बात नहीं बनी

तो अब अमेरिका ब्लैकमेल और धमकियों पर उतर चुका है

हालांकि ये उनकी मजबूरी थी क्योंकि अमेरिका चाइना का विजन समझ चुका था, अमेरिका भले दक्षिण चीन सागर में फेल हो गया पर चीन नहीं हुआ, उसने साइलेंटली ईरान को परमाणु से लैस करने का प्रयास किया, ताकि अरब में पेट्रो डील को खत्म किया जा सके

अमेरिका ने भले युद्ध करके इस डाउनफॉल को कुछ समय के लिए रोक दिया हो, लेकिन अरब से अमेरिका नामक विश्वाश खत्म हो चुका है, हालांकि अब अमेरिका किसी को विश्वास में लाना भी नहीं चाहता

अब अमेरिका ओपेक को कमजोर कर रहा, और UAE का उनसे अलग होना बताता है कि तेल की सुरक्षा की जिम्मेदारी अब अमेरिका अपने कंधों पर लेने वाला है

चीन को सबसे बड़ा फायदा यह है कि चीन को बस देखते रहना है क्योंकि अमेरिका का गिरना तय है, चाहे वे कितना भी जतन करे

तो फिर भारत किस चीज की चिंता कर रहा है, वो अमेरिका की दादागिरी का जवाब क्यों नहीं देता? जब वो इतने खराब सिचुएशन में है?

दरअसल भारत भी चाहता है कि अमेरिका कुछ ऐसा करे, अमेरिका चीन के विस्तार को कंट्रोल करे, चीन जो इतनी तेजी से नई महाशक्ति बन रहा है, अमेरिका अपनी साख बचाने के ही नाम पर, पर कुछ करे जो उनके विस्तार पर कुछ समय के लिए डिले हो

भारत बिल्कुल नहीं चाहेगा कि एक सुपरपावर की जगह फिर कोई दूसरा सुपरपावर आ जाए और दुनिया को कंट्रोल करने लग जाए

इस समय सबसे मजबूत करेंसी युआन डॉलर के विकल्प के रूप में देखी जा रही है लेकिन भारत नहीं चाहता कि युआन वैश्विक मुद्रा बने

हालांकि भारत ये भी जानता है कि वो अभी तैयार नहीं है, इसलिए बस दोनों के बीच सामंजस्य बना रहा है, भारत अमेरिका से सीधे पंगा लिए बिना बस उसे प्रोत्साहित कर रहा है और अपने लिए टाइम मांग रहा है

🔴

24/05/2026

India Stress Dashboard Scenario

Petrol: 99.58 ~ 100 🔴
Doller: 97 ~ 100 🔴
Nifty 50: -9% 🔴
AQI: 500 🔴
Temperature: 45C 🔴
Inflation: 8% 🔴
Unemployment: High 🔴
Electricity Bill: +25–40% 🔴
Gold and Silver: Restricted 🔴
Home Loan Interest: 10%+ 🔴
Water Shortage: Severe in major cities 🔴
Traffic Congestion: Extreme 🔴
Health issues: High🔴
Work-Life Balance: Weak 🔴
Rupee Purchasing Power: Declining 🔴
Urban Noise Pollution: Extreme 🔴
Middle Class Tax Burden: Increasing 🔴

आज *राजश्री*आरती दर्शन🛐🙏*जय माँ विंध्यवासिनी*
23/05/2026

आज *राजश्री*
आरती दर्शन🛐🙏
*जय माँ विंध्यवासिनी*

20/05/2026

वट सावित्री पूजन वाले दिन एक घटना हुई थी लोगों ने उसे ऐसे लपक लिया था जैसे चींटी मीठे को लपकती है।
खैर.....
वट सावित्री व्रत के दिन महिलाएं एक बरगद की परिक्रमा और पूजन कर रही थीं। सामान्यतः ऐसे बरगदों में कई कई साल पुराने धागे लिपटे रहते हैं। कहीं कहीं कोई हटा भी देता है, पर अधिकांश जगहों पर धागों की मोटी परत लिपटी रहती है। ऐसे ही उस बरगद के नीचे किसी के द्वारा जलाए गए दीपक से धागों में आग लग गई और धागे धू धू कर जल गए।
फिर क्या... दे दनादन पोस्ट। ऐसा लगा जैसे देश में कितनी बड़ी आपदा आ गई है। लगे हाथ तीज त्यौहार, पूजा पद्धति आदि पर विमर्श छिड़ गया और इसे ढोंग, पाखंड आदि आदि बताया जाने लगा। कोई महिलाओं को दोष दे रहा है, कोई आसपास खड़े लोगों को... एक झटके में हजारों वैज्ञानिक तैरने लगे फेसबुक पर... फेसबुक जैसे इसरो नासा हो गया।
कभी कभी लगता है कि हम हिंदू जन इतने अपराधबोध के साथ जी रहे हैं कि अपनी परंपराओं को लेकर हमेशा बैकफुट पर ही रहते हैं। एक कोई छोटी सी घटना हुई नहीं कि झट से अपनी ही परम्पराओं को गलत बताने लगते हैं, फेसबुक पर क्रांति ठोकने लगते हैं। जबकि इस बात में भी कोई संदेह नहीं कि ठीक आज ही समय में अन्य संप्रदायों की रिलिजियस ट्रेडिशन से अपनी तुलना करें तो आप अधिक वैज्ञानिक, अधिक सहज और अधिक लोक हितैषी सिद्ध होते हैं। खैर...
अब पहली बात सुनिए। यदि आपको लगता है कि धागों में आग लगने से उस बरगद में आग लग गई होगी और पेड़ जल गया होगा, देन यू आर बॉयलर चिकन ब्रो, बिल्कुल पोल्ट्रीफार्म वाला... मतलब आप किसी वृक्ष विहीन शहर के कमरे में बैठ के ज्ञान बांट रहे हैं। सच यह है कि उस वृक्ष के कुल दस पत्ते भी नहीं जले होंगे, और बिना किसी सुई दवाई के वह वृक्ष अपना स्वास्थ ठीक कर लेगा। ठीक है?
दूसरी बात। डेढ़ अरब की जनसंख्या वाले देश में ऐसी छोटी छोटी घटनाओं में आश्चर्य करने लगिए तो कुछ ही घंटों में प्राण फेक कर मर जाना होगा। जिस शहर की वह घटना होगी उसी शहर में पिछले पांच वर्ष में सड़क चौड़ीकरण के नाम पर सैकड़ों बड़े पेड़ काट दिए गए होंगे। उसपर न उस शहर को चिंता हुई होगी, ना ही हम सब को... हुई क्या? आप अपने ही शहर को याद कर लीजिए...
पिछले दस वर्षों में धार्मिक गतिविधियों के कारण सूखने वाले वृक्षों की संख्या अपने पूरे देश में भी सौ नहीं होगी, और इसी देश में एक सड़क बनाने के लिए एक महीने में लाखों पेड़ काट दिए जाते हैं। पिछले पचास सालों में देश का समूचा जंगल क्षेत्र आधा हो गया है, और वे पेड़ हिन्दू महिलाओं ने नहीं जलाए हैं।
तो मित्रों। बार बार आत्मग्लानि मोड में आ जाना कोई अच्छी बात नहीं। साल में एक दिन हमारी देवियां सज संवर के किसी वटवृक्ष को भांवर दे लेती हैं तो इससे बहुत कुछ नहीं बिगड़ जाता। और अगर इतने से ही ओजोन परत में छेद बढ़ रहा हो तो बढ़ता रहे, घुइयां फर्क नहीं पड़ता। ओजोन बचाने का ठेका केवल हमारी देवियों ने ही नहीं लिया...
है कि नहीं?

साभार सर्वेश तिवारी श्रीमुख जी
गोपालगंज, बिहार।

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