07/10/2026
🙏🏾💕 जय गुरुदेव 💕🙏🏾
यह तन दुर्लभ तुमने पाया ।
कोटि जनम जब भटका खाया ।।
अब या को बिरथा नही खोओ।
चेतो छिन छिन भक्ति कमाओ।।
👉हम अपने आत्म उत्थान और पतन के लिए स्वयं उत्तरदायी होते हैं। हमारे लिए भगवद्प्राप्ति के मार्ग में कोई भी बाधा उत्पन्न नहीं कर सकता। संत और गुरु हमें मार्ग दिखाते हैं, किन्तु हम अपनी मन और इच्छा के मार्ग पर चलना चाहते हैं।जीव का पतन उत्थान उसके स्वयं के कर्मों से होगा। इस जन्म से पूर्व हमारे अनन्त जन्म हो चुके हैं और भगवानुभूत संत भी सदा धरती पर रहे हैं। यदि संसार ऐसे संतों से विहीन होता तो लोग साधना कर के ईश्वर को कैसे प्राप्त करते? इसलिए भगवान सदा यह सुनिश्चित करते हैं कि भगवानुभूत संत या साध जन सदा कलियुग में विद्यमान रहकर निष्ठावान भक्तों का मार्गदर्शन करे और मानवता के प्रेरक बनें।
👉इस प्रकार हम अनन्त पूर्व जन्मों में कई बार इस प्रकार की भगवद्चेतना युक्त संतों से मिले हैं किन्तु फिर भी हमें कभी भगवद्प्राप्ति नहीं हुई। इसका कारण यह है कि उचित मार्गदर्शन के अभाव की समस्या कभी नहीं थी लेकिन या तो इन संतो के उपदेशों को स्वीकार करने में हमारी मूकता या इनका अनुपालन न करना ही मुख्य समस्या रही होगी। इसलिए हमें पहले अपनी वर्तमान आध्यात्मिक अवस्था के स्तर या इसकी कमी को स्वीकार करना चाहिए। यदि हमें अपनी वर्तमान अवस्था का बोध हो जाता है केवल तभी हमारे भीतर आत्म विश्वास जागृत होता है और हम अपने प्रयत्नों से भी स्वयं का उत्थान कर सकते हैं।
👉जब हम आध्यात्मिक उन्नति के मार्ग में प्रतिकूलताओं का सामना करते हैं तब हम शिकायत करते हैं कि अन्य लोग हमारे विध्वंस का कारण हैं और वे हमारे शत्रु हैं। जबकि हमारा सबसे बड़ा शत्रु हमारा अपना मन है। विध्वंस का कारण यही मन है। मन हमारी पूर्णता की अभिलाषा को निष्फल कर देता है।श्रीकृष्ण कहते हैं कि एक ओर जीवात्मा के परम हितैषी के रूप में मन में हमें अधिक से अधिक लाभ प्रदान करने की क्षमता होती है तथा दूसरी ओर उसमें हमें अधिकतम हानि पहुँचाने की क्षमता भी होती है। नियंत्रित मन कई कल्याणकारी कार्य पूर्ण कर सकता है जबकि अनियंत्रित मन अति अधम विचारों के साथ हमारी चेतना को विकृत कर सकता है। मन को मित्र के रूप में प्रयोग करने के लिए मन की प्रवृति को समझना आवश्यक है।इसलिए मन की शक्ति द्वारा अपना आत्म उत्थान करो और स्वयं का पतन न होने दो। मन जीवात्मा का मित्र और शत्रु भी हो सकता है।
🙏🏾शाकाहार सदाचार अपनाएं 🙏🏾
🙏🏾🌷आप सभी प्रेमियों को सादर जय गुरुदेव एवम सुप्रभात 🌷🙏🏾
#मन #आत्मा
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