22/08/2026
🚩 पुत्रदा एकादशी व्रत: 23 अगस्त या 24 अगस्त? डरें नहीं, सच जानें! 🚩राम-राम भाइयों और बहनों, 🙏आजकल सोशल मीडिया और यूट्यूब पर व्यूज (Views) और लाइक्स पाने के लिए कुछ लोग सनातन धर्म प्रेमियों को डरा रहे हैं। "भूलकर भी 23 अगस्त को व्रत न करें, नर्क मिलेगा" या "पुण्य नष्ट हो जाएगा" जैसी बातें पूरी तरह से भ्रामक और गलत हैं।शास्त्रों में ऐसी कोई बात नहीं लिखी है जो एक सच्चे भक्त को डराए। आइए पंचांग और शास्त्रों के अनुसार इसका सीधा और सच्चा गणित समझते हैं:🔹 दोनों दिन व्रत रखना सही क्यों है?सनातन धर्म में व्रत रखने की दो अलग-अलग पद्धतियां (परंपराएं) हैं—स्मार्त (सामान्य गृहस्थ) और वैष्णव (संन्यासी/दीक्षित भक्त)। इस बार तिथियों के फेर के कारण दोनों के नियम अलग-अलग दिन लागू हो रहे हैं।1️⃣ 23 अगस्त (रविवार) — गृहस्थों (स्मार्त) के लिए उत्तम:शास्त्रों का नियम: 'स्कंद पुराण' और 'निर्णयसिंधु' जैसे प्रामाणिक ग्रंथों के अनुसार, गृहस्थों के लिए 'उदया तिथि' (सूर्योदय के समय जो तिथि हो) ही सर्वोपरि है।23 अगस्त को सूर्योदय के समय एकादशी तिथि मौजूद है। इसलिए सभी आम गृहस्थों को इसी दिन व्रत रखना चाहिए। इससे आपको व्रत का पूरा पुण्य फल मिलेगा, कोई पुण्य नष्ट नहीं होगा।2️⃣ 24 अगस्त (सोमवार) — वैष्णव संप्रदाय के लिए उत्तम:शास्त्रों का नियम: जो लोग इस्कॉन (ISKCON) से जुड़े हैं या जिन्होंने वैष्णव संप्रदाय में विशेष दीक्षा ली है, वे 'हरि भक्ति विलास' ग्रंथ के कड़े नियमों का पालन करते हैं।वे सूर्योदय से पहले (अरुणोदय काल में) थोड़ा सा भी दशमी का अंश स्वीकार नहीं करते। इसलिए वे अगले दिन यानी 24 अगस्त को शुद्ध एकादशी (महाद्वादशी) का व्रत रखेंगे।💡 इसे एक आसान उदाहरण से समझें:जैसे देश में दो कानून होते हैं—एक आम नागरिकों के लिए और दूसरा सेना (Military) के लिए। सेना के नियम बहुत कड़े होते हैं। ठीक वैसे ही, वैष्णव नियम 'सैनिकों' (कड़े साधकों) के लिए हैं और स्मार्त नियम 'आम नागरिकों' (गृहस्थों) के लिए हैं। दोनों अपनी-अपनी जगह 100% सही हैं!📢 मेरी प्रार्थना:व्यूज के भूखे लोगों की डराने वाली बातों में न आएं। भगवान विष्णु भाव के भूखे हैं, भय के नहीं। यदि आप सामान्य गृहस्थ हैं, तो महावीर पंचांग और अपने स्थानीय पंडित जी के अनुसार 23 अगस्त को पूरे विश्वास के साथ व्रत रखें।इस जानकारी को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें ताकि हमारे भाई-बहन सोशल मीडिया के भ्रम और डर से बच सकें।जय श्री हरि! 🌸✍️ लेखन एवं प्रस्तुति —बाबा रविंद्र नाथ उपाध्याय और श्री राम जानकी बाबा लिंगेश्वर नाथ धाम ट्रस्ट (SRJBL Trust)