आचार्य श्री प्रवीण देव गुप्त जी

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आचार्य श्री प्रवीण देव गुप्त जी Acharya Parveen Dev Gupt is one of the Expert Face Reading Astrology Service providers in India.

28/08/2019
Maa sarveshwari sewashram  samiti dwaara aayojit Maa sarveshwari Gyan deep Yagya Bela
28/01/2018

Maa sarveshwari sewashram samiti dwaara aayojit Maa sarveshwari Gyan deep Yagya Bela

07/09/2017

श्वेत प्रदर
(ल्यूकोरिया)

अक्सर स्त्रियों की योनि से सफेद, लेसदार, झाग के रूप में बदबूदार पानी सा निकलता
है, जिसको श्वेतप्रदर कहते हैं। इस रोग में स्त्री का शरीर
बिल्कुल कमजोर हो जाता है।
कारण-
स्त्री का मासिकधर्म आने पर
शुरुआती 3 दिनों में नहाने से उनको श्वेतप्रदर (योनि में से
सफेद पानी आना) का रोग हो जाता है। इसके अलावा यह
रोग ज्यादा संभोग क्रिया करने से, मन में हर समय सेक्स के बारे में विचार रखने से, भोजन में तेल, खटाई, लालमिर्च , प्याज, अंडा, मांस आदि का
ज्यादा सेवन करने से, गुप्त अंगों की ठीक प्रकार से सफाई न करने से भी हो जाता
है।

चिकित्सा-
त्रिफला- श्वेतप्रदर रोग में लगभग आधा लीटर पानी में
12 ग्राम त्रिफला या 1 लीटर पानी में लगभग 6 ग्राम खाने वाले सोड़े को मिलाकर स्त्री को अपनी योनि में उस पानी की छींटे मारनी चाहिए। श्वेतप्रदर रोग में इस पानी की पिचकारी देना भी बहुत
लाभकारी रहती है।
गूलर- श्वेतप्रदर रोग में स्त्री को लगभग 6 ग्राम गूलर या आधा ग्राम रसौत की सुबह और शाम
को पानी के साथ फंकी लेने से लाभ होता है।
अगर इन चीजों को मक्खन के साथ लिया जाए तो यह रोग जल्दी दूर हो जाता है।

ढाक - ढाक का गोंद, पीली कौड़ी, कीकर का गोंद और कहरूवा को अलग-अलग पीसकर और कपड़े में छानकर बराबर मात्रा में एकसाथ मिला लें। इस चूर्ण को 2-2 ग्राम की मात्रा में
सुबह-शाम ठंडे पानी के साथ लेने से श्वेतप्रदर रोग
में आराम मिलता है। इस औषधि का सेवन करते
समय रोगी स्त्री को गर्म, खट्टी और तली हुई चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए।

आंवला- लगभग 25 ग्राम आंवला को रात में 250
मिलीलीटर पानी में भिगोकर रख दें और सुबह उठने के बाद छान लें। इस छने हुए पानी में लगभग 12-12 ग्राम शहद और खांड मिलाकर पीने से
श्वेतप्रदर रोग में लाभ होता है।
शराब- श्वेतप्रदर रोग में लगभग 12 ग्राम शराब को 125 ग्राम पानी में मिला लें। फिर लगभग 3 ग्राम मोटी इलायची और 2 ग्राम तेजपत्ता खाकर ऊपर से यह शराब मिला पानी रात में
सोने से पहले एकबार पी लें।

चूहे की मींगनी का तेल- लगभग 250 ग्राम चूहे की मेंगनी को 4 लीटर पानी में डालकर पका लें। पकने के बाद जब लगभग 1 लीटर पानी बाकी रह जाए तो उस पानी में 250 ग्राम तिल का
तेल डालकर आग पर रखकर पका लें और सिर्फ तेल बाकी रहने पर उतार लें। इस तेल में रुई के फाहे को भिगोकर योनि में ऱखने से गर्भाशय की सूजन
और टेढ़ापन ठीक हो जाते हैं।

06/09/2017

*_"बुढापे में जीवन कैसे जीना चाहिए"_*

यूनान के प्रसिद्ध दार्शनिक सुकरात भ्रमण करते हुए एक शहर में पहुँचे। वहाँ उनकी वृद्ध व्यक्ति से भेंट हुई। दोनों काफी घुल-मिल गये। सुकरात में उनके व्यक्तिगत जीवन में काफी रुचि ली। उन्होंने काफी खुलकर बात की।

सुकरात ने संतोष व्यक्त करते हुए कहा- “आपका विगत जीवन तो बड़े शानदार ढंग से बीता है, पर इस वृद्धावस्था में आपको कौन-कौन से पापड़ बेलने पड़ रहे है, यह तो बताइये।”

*_"वृद्ध किंचित मुस्कुराया- “मैं अपने पारिवारिक उत्तरदायित्व अपने समर्थ पुत्रों की देकर निश्चिन्त हूँ। वह जो कहते है कर देता हूँ, जो खिलाते हैं खा लेता हूँ और अपने पौत्र, पौत्रियों के साथ हँसता-खेलता रहता हूँ। बच्चे कुछ भूल करते हैं तभी मैं चुप रहता हूँ। मैं उनके किसी कार्य में बाधक नहीं बनता, पर जब कभी वे परामर्श लेने आते हैं, मैं अपने जीवन के सारे अनुभवों की उनके सामने रख, की गई भूल उत्पन्न दुष्परिणामों की ओर से सचेत कर देता हूँ। वह मेरी सलाह पर कितना चलते है। यह देखना और अपना मस्तिष्क खराब करना मेरा काम नहीं है। वह मेरे निर्देशों पर चलें ही यह आग्रह नहीं। परामर्श देने के बाद भी यदि वह भूल करते है तो मैं चिंतित नहीं होता उस पर भी यदि वे पुनः मेरे पास आते हैं, तो उनके लिए सदैव मेरा दरवाजा खुला रहता है। मैं पुनः नेक सलाह देकर उन्हें विदा करता हूँ।"_* वृद्ध की बात सुनकर सुकरात बहुत प्रसन्न हुए। उन्होंने कहा- *”इस आयु में जीवन कैसे जिया जाय यह आपने बखूबी समझ लिया है।”*

अखण्ड ज्योति
अक्टूबर,1990
*"अपना सुधार संसार की सबसे बड़ी सेवा है।"*
*"Self refinement is the best service of the society."*

25/04/2017

New Delhi: When you were a child, did you ever notice a small white spot on one of your fingernails? Did you rush to your mom and ask her what it was? Surely, she must have pulled your ear and given you quite a bit of thrashing for not finishing your daily glass of milk. “There’s not enough calcium…

22/02/2017

Singing to babies is an important and effective way for mothers to create bonds and stimulate children, according to new US research Mothers singing to babies is an old practice across cultures and traditions. Now an American research finds it is actually an important way to stimulate children and h...

01/01/2017

अंग्रेजी नववर्ष 2017 की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं।
नववर्ष आपके जीवन में नए प्रकाश की किरण के साथ आपको प्रगति के मार्ग पर आगे बढाये।
गऊ सेवा - नारायण सेवा - पितृ सेवा - मातृ सेवा

गऊ सेवा ही भगवान् की सच्ची भक्ति है।

बाँझ अपंग एवं बीमार गऊ की सेवा करने से जन्मो के पापो का नाश होता है ।
आइये! इस नव वर्ष की घडी में
108 रूपये प्रतिमाह प्रतिव्यक्ति सदस्य बनकर एवं बनाकर गौ सेवा में भागीदार बने औऱ पुण्य कर्म फल की प्राप्ति करे।

आचार्य प्रवीण देव गुप्त जी
आध्यात्मिक गुरु

संस्थापक एवं अध्यक्ष
माँ सर्वेश्वरी सेवाश्रम समिति रजि0
मुजफ्फरनगर

*कौन सी धातु के बर्तन में भोजन करने से क्या क्या लाभ और हानि होती है.......🙏🏼*                         *सोना*सोना एक गर्...
30/12/2016

*कौन सी धातु के बर्तन में भोजन करने से क्या क्या लाभ और हानि होती है.......🙏🏼*

*सोना*

सोना एक गर्म धातु है। सोने से बने पात्र में भोजन बनाने और करने से शरीर के आन्तरिक और बाहरी दोनों हिस्से कठोर, बलवान, ताकतवर और मजबूत बनते है और साथ साथ सोना आँखों की रौशनी बढ़ता है।

*चाँदी*

चाँदी एक ठंडी धातु है, जो शरीर को आंतरिक ठंडक पहुंचाती है। शरीर को शांत रखती है इसके पात्र में भोजन बनाने और करने से दिमाग तेज होता है, आँखों स्वस्थ रहती है, आँखों की रौशनी बढती है और इसके अलावा पित्तदोष, कफ और वायुदोष को नियंत्रित रहता है।

*कांसा*

काँसे के बर्तन में खाना खाने से बुद्धि तेज होती है, रक्त में शुद्धता आती है, रक्तपित शांत रहता है और भूख बढ़ाती है। लेकिन काँसे के बर्तन में खट्टी चीजे नहीं परोसनी चाहिए खट्टी चीजे इस धातु से क्रिया करके विषैली हो जाती है जो नुकसान देती है। कांसे के बर्तन में खाना बनाने से केवल ३ प्रतिशत ही पोषक तत्व नष्ट होते हैं।

*तांबा*

तांबे के बर्तन में रखा पानी पीने से व्यक्ति रोग मुक्त बनता है, रक्त शुद्ध होता है, स्मरण-शक्ति अच्छी होती है, लीवर संबंधी समस्या दूर होती है, तांबे का पानी शरीर के विषैले तत्वों को खत्म कर देता है इसलिए इस पात्र में रखा पानी स्वास्थ्य के लिए उत्तम होता है. तांबे के बर्तन में दूध नहीं पीना चाहिए इससे शरीर को नुकसान होता है।

*पीतल*

पीतल के बर्तन में भोजन पकाने और करने से कृमि रोग, कफ और वायुदोष की बीमारी नहीं होती। पीतल के बर्तन में खाना बनाने से केवल ७ प्रतिशत पोषक तत्व नष्ट होते हैं।

*लोहा*

लोहे के बर्तन में बने भोजन खाने से शरीर की शक्ति बढती है, लोह्तत्व शरीर में जरूरी पोषक तत्वों को बढ़ता है। लोहा कई रोग को खत्म करता है, पांडू रोग मिटाता है, शरीर में सूजन और पीलापन नहीं आने देता, कामला रोग को खत्म करता है, और पीलिया रोग को दूर रखता है. लेकिन लोहे के बर्तन में खाना नहीं खाना चाहिए क्योंकि इसमें खाना खाने से बुद्धि कम होती है और दिमाग का नाश होता है। लोहे के पात्र में दूध पीना अच्छा होता है।

*स्टील*

स्टील के बर्तन नुक्सान दायक नहीं होते क्योंकि ये ना ही गर्म से क्रिया करते है और ना ही अम्ल से. इसलिए नुक्सान नहीं होता है. इसमें खाना बनाने और खाने से शरीर को कोई फायदा नहीं पहुँचता तो नुक्सान भी नहीं पहुँचता।

*एलुमिनियम*

एल्युमिनिय बोक्साईट का बना होता है। इसमें बने खाने से शरीर को सिर्फ नुक्सान होता है। यह आयरन और कैल्शियम को सोखता है इसलिए इससे बने पात्र का उपयोग नहीं करना चाहिए। इससे हड्डियां कमजोर होती है. मानसिक बीमारियाँ होती है, लीवर और नर्वस सिस्टम को क्षति पहुंचती है। उसके साथ साथ किडनी फेल होना, टी बी, अस्थमा, दमा, बात रोग, शुगर जैसी गंभीर बीमारियाँ होती है। एलुमिनियम के प्रेशर कूकर से खाना बनाने से 87 प्रतिशत पोषक तत्व खत्म हो जाते हैं।

*मिट्टी*

मिट्टी के बर्तनों में खाना पकाने से ऐसे पोषक तत्व मिलते हैं, जो हर बीमारी को शरीर से दूर रखते थे। इस बात को अब आधुनिक विज्ञान भी साबित कर चुका है कि मिट्टी के बर्तनों में खाना बनाने से शरीर के कई तरह के रोग ठीक होते हैं। आयुर्वेद के अनुसार, अगर भोजन को पौष्टिक और स्वादिष्ट बनाना है तो उसे धीरे-धीरे ही पकना चाहिए। भले ही मिट्टी के बर्तनों में खाना बनने में वक़्त थोड़ा ज्यादा लगता है, लेकिन इससे सेहत को पूरा लाभ मिलता है। दूध और दूध से बने उत्पादों के लिए सबसे उपयुक्त हैमिट्टी के बर्तन। मिट्टी के बर्तन में खाना बनाने से पूरे १०० प्रतिशत पोषक तत्व मिलते हैं। और यदि मिट्टी के बर्तन में खाना खाया जाए तो उसका अलग से स्वाद भी आता है।

पानी पीने के पात्र के विषय में 'भावप्रकाश ग्रंथ' में लिखा है....

*जलपात्रं तु ताम्रस्य तदभावे मृदो हितम्।*
*पवित्रं शीतलं पात्रं रचितं स्फटिकेन यत्।*
*काचेन रचितं तद्वत् वैङूर्यसम्भवम्।*
(भावप्रकाश, पूर्वखंडः4)

अर्थात् पानी पीने के लिए ताँबा, स्फटिक अथवा काँच-पात्र का उपयोग करना चाहिए। सम्भव हो तो वैङूर्यरत्नजड़ित पात्र का उपयोग करें। इनके अभाव में मिट्टी के जलपात्र पवित्र व शीतल होते हैं। टूटे-फूटे बर्तन से अथवा अंजलि से पानी नहीं पीना चाहिए।

26/11/2016

*रोग प्रतिरोधक क्षमता कैसे बढ़ाएं..!*

*प्रतिरोधक क्षमता (Immunity)*
हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता, हमारे शरीर को बीमारियों से बचाकर रखती है तथा संक्रमित हो जाने के समय हमारे शरीर को उस बीमारी से लड़ने में मदद करती है इसलिए जितना हमारा प्रतिरोधक (Immune) सिस्टम मजबूत होगा उतना ही हमारी किसी बीमारी से ग्रस्त हो जाने की सम्भावना कम होती है। कुछ लोगों का प्रतिरोध तंत्र (Immune system) या प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) कमजोर होती है उन्हें जरा सा बाहर का खाना खाने के बाद भी पाचन संबधित समस्या हो जाती है (क्योंकि रोग प्रतिरोधकता ही शरीर को बाहरी विषैले तत्वों, बेक्टीरिया और वायरस से बचाकर रखती है) और उसे कमजोर होने पर ऐसी परेशानी का सामना करना ही पड़ेगा।
हम कैसे अपनी Immunity को बढ़ायें, जानिए।

*भोजन से Immunity का सम्बन्ध*
भोजन और immunity का सीधा आपस में सम्बन्ध है क्योंकि शरीर की रोग प्रतिरोधक प्रणाली बहुत हद तक प्रोटीन पर निर्भर करती है इसलिए हमे ये सुनिश्चित करना चाहिए कि हमारे भोजन में प्रोटीन खासतौर पर शामिल हो।
प्रोटीन की आपूर्ति हमारे शरीर को होती रहे इसके लिए अपने भोजन में दूध के उत्पाद, बिना चर्बी वाला मीट, मछली और दालों से कर सकते है। घर में बना दही, पेट के लिए उत्तम होता है और कई तरह के संक्रमणों से रक्षा करने में सक्षम होता है।

*आवश्यक पोषक तत्व* Immune system सही से काम करे और हमारी Immunity अच्छी बनी रहे इसके लिए आप विटामिन-सी, विटामिन-ई, जिंक, कॉपर, और सेलेनियम को अपने भोजन के द्वारा अपने शरीर में बनाये रखें और ऐसा नहीं है किसी एक तरह के खास पदार्थ से शरीर में सभी तरह के पोषक तत्वों की पूर्ति हो सकती है जिसे आप विभिन्न तरह के खाद्य पदार्थो को उनके गुणों के आधार पर चार्ट बनाकर उनको डेली लाइफ में अपना सकते है
जैसे आप साइट्रस को मिर्च अमरुद टमाटर और अमरुद जैसे फलों में पा सकते है यह आपके इन्फेक्शन से लड़ने वाली श्वेत रक्त कोशिकाओं के निर्माण को बढ़ावा देता है और आपके शरीर में प्रवेश होने वाले अवांछित वायरस को भी रोकता है।

*व्यायाम करें*
नियमित व्यायाम से अपनी Immunity को ज्यादा बेहतर बनायें इसलिए भागदौड़ भरी इस जिन्दगी में व्यायाम के लिए थोडा समय निकाले और सेहतमंद बने।

*पर्याप्त नींद लें*
पर्याप्त नींद, फ्रेशनेस के साथ Immunity के लिए वरदान साबित हो सकती है।

इस तरह अपनी दिनचर्या में बेहतर खाने और फलों को शामिल करके आप अपनी Immunity बढ़ायें और स्वस्थ और खुशहाल जिदंगी जियें।

20/10/2016
शारदीय नवरात्र संवत् 2073
05/10/2016

शारदीय नवरात्र संवत् 2073

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