20/02/2025
प्रणाम जी, 👏
#विष्णु_विष्णु #विष्णु_विष्णु 🌺.................... प्रथम सबद में गुरु के बारे में बताया गया है कि गुरु कोन है व कैसा होना चाहिए।इस सबद को अच्छे से समझना चाहिए मन की भ्रांतियों का समाधान करता है।
#गुरु_चिन्हों_गुरु_चिन्ह_पुरोहित_गुरु_मुख_धरम_बखाणी
➡️श्री गुरु जी कहते हैं-हे संसार के लोगो !आप सभी लोग यदि अपना कल्याण चाहते हो तो उस परमपिता परमात्मा नामी गुरु को पहचानो।यहा पर चीन्हों का अर्थ मानना या स्मरण करना नही है यहाँ चीन्हों का अर्थ पहचान करना है।गुरु की पहचान कुछ सद्गुणों द्वारा ही हो सकती है।
हे पुरोहित तू भी गुरु को पहचान तथा गुरुमुखी होकर सदधर्म का उपदेश कर तथा मनमुखि धर्म का परित्याग कर क्योकि गुरुमुख से निकला हुआ वचन सदा धर्म की ओर ले जाने वाला है।
#जो_गुरु_होयबा_सहजे_शीले_सबदे_नादे_वेदे_तिहि_गुरू_का_आलिंकार_पिछाणी
➡️ आजकल तथाकथित ढोंगी ही घूम रहे हैं।
जो सच्चा गुरु होगा वह सहज स्वभाव से शीलवान, शब्दनाद का साधक,मोह माया,लोभ,अंहकार,कामवासना,तृष्णाओं से दूरी बनाए रखेगा वही सच्चा गुरु हो सकता जो उस परमपिता परमेश्वर को जान सकता है वह ज्ञान देने वाला है।ऐसे गुरु की शरण मे जाने से मन की भ्रांतियो को दूर की जा सकती है।
िंहि_के_रुपण_थापण_संसार_बरतण_निज_कर_थरप्या_सो_गुरु_प्रत्यक्ष_जाणी
➡️ यहाँ पर गुरु जी बताते हैं कि गुरु तो वह है जिसके आप दर्शन आकाश,वायु,सूर्य,चन्द्रमा, धरती,जल में कर सकते हो यह परमपिता परमात्मा ने इस संसार की थरपना की थी तब इन 6 दर्शनों को जीवन जीने के लिए बनाया है।इसको प्रत्यक्ष गुरु जानो।
काम,क्रोध,लोभ,मोह,अंहकार, तृष्णा इन विषयों का त्याग जिसने भी कर दिया वह गुरु है उसको आत्मज्ञान की प्राप्ति हो गई है।इन्हीं छ शास्त्रों में जीव ईश्वर और जगत के बारे में अति सूक्ष्मता से वर्णन हुआ है।इस संसार रूपी घट बर्तन को जिस सतगुरु रूप परमात्मा ने अपने हाथों द्वारा बनाया है।उसी सतगुरु को हे पुरोहित! तू यहां पर प्रत्यक्ष देखकर पहचान।
#जिंहि_के_खरतर_गोठ_निरोतर_वाचा_रहिया_रुदर_समाणी
➡️जिसको प्राप्त करने का मार्ग कठिन है, उसका बखान करते करते वाणी भी नेति नेति कह कर निरुत्तर हो जाती है वह शरीर मे रुद्र की भांति सर्वत्र समाया हुआ है।अथवा वह गुरु काल से परे है।अथवा रूद्र परमात्मा सर्वत्र सम्पूर्ण सृष्टि में व्याप्त है।
#गुरु_आप_सन्तोषी_अवरा_पोषी_तंत_महारस_वाणी
➡️गुरु वह सन्तोषी है, कभी किसी से कुछ भी लेने की इच्छा नही रखते हैं वह दुसरो का पोषण करते हैं तथा प्रिय वाणी से तत्व दर्शन का वर्णन करते है।महारसिली मीठी वाणी से ज्ञान देकर अमृत पान कराते हुए वे अजर अमर कर देती है।
#के_के_अलिया_बासण_होत_हुतासण_तामे_खीर_दुहिजे
➡️ इस विशाल संसार मे कुछ लोग कच्चे मटके की तरह होते हैं, उसमे दूध पानी नही रुक सकता अर्थात जिनका अन्तःकरण अभी मलिन है उनके ऊपर ज्ञान की बात असर नही करती किन्तु यही मटका जब अग्नि के सयोंग से पक जाता है तब उसमें दूध,पानी ठहरने की योग्यता उस बर्तन में आ जाती है।ठीक उसी प्रकार से ही अमृतमय वाणी रूपी अग्नि का सयोंग मूढ़ जनों के अन्तःकरण से होगा तब वे भी मलिनता को दूर करके ज्ञान रूपी अमृत को धारण कर सकेंगे।
#रसुवन_गोरस_घीय_न_लीयू_तहाँ_दूध_न_पाणी
➡️ दूध में से घी निकाल लेने पर पीछे छाछ ही रह जाती है न तो आप उसे दूध कह सकते हो और न जल कह सकते हो।ठीक उसी प्रकार से ही मानव के अन्दर वह रसमय आत्म ज्योति है किंतु उसका साक्षात्कार नही होता है तो मानव छाछ की तरह ही रसहीन है।न तो आप उसे अपने मूल स्वरूप स्वभाव में स्थित ही कह सकते हो क्योकि वह तो स्वरूप को भुला चुका है और न ही उसे आप रर्स विहीन ही कह सकते हो क्योकि उस आनंदमय रस में तो वह ओत प्रोत ही है।किंतु वह रस उसे अब तक प्राप्त नही हुआ है, तो हम उसे गोरस ही कह सकते हैं।
#गुरु_ध्याइये_रे_ग्यानी_तोड़त_मोहा_अति_खुरासानी_छीजत_लोहा
➡️इसलिए ज्ञानी गुरु का ध्यान कर वह तेरे मोह का बंधन तोड़ देगा जिस प्रकार से खुरासानी पत्थर कठोर लोहे के लगे हुए जंग रूपी मेल को काट देता है उसे शुद पवित्र कर देता है उसी प्रकार से ही तुम्हारे जंग रूपी मोह को सतगुरु ही काट सकते हैं।
#पाणी_छल_तेरी_खाल_पखाला_सतगुरु_तोड़े_मन_का_साला
➡️हे मानव तेरा पंच भौतिक शरीर चमड़े की बनी हुई पखाल की तरह ही है ठीक उसी प्रकार से तुम्हारा शरीर भी पानी से भरा हुआ है।जिस प्रकार से पखाल में छोटा छेद हो जाता है तो सम्पूर्ण पानी निकल जाता है।उसी प्रकार से तुम्हारा शरीर भी फुट जाएगा तो पांचों तत्व स्वकीय स्वरूप में विलीन हो जाएगा यह देह मृत हो जाएगी।देही अपने कर्मानुसार अन्य शरीर मे गमन करेगी।मानसिक दुख को सतगुरु ही मिटा सकता है।सभी मानसिक दुःखो की सदा सर्वदा निवृत्ति हो जाएगी तो कायिक आदि दुख तो स्वतः ही निवृत हो जायेगे।
#सतगुर_है_तो_सहज_पिछाणी_किसन_चरित_बिन_काचे_करवे_रहो_न_रहसी_पाणी
➡️हे पुरोहित!तुम्हारे सामने बैठा हुआ बालक यदि सतगुरु है तो सहज ही में पहचान कर लेना यहाँ पर सतगुरु होने का बहुत बड़ा प्रमाण प्रस्तुत कर रहे हैं कि देख परमपिता परमेश्वर की लीला बिना इस कच्चे घड़े रूपी शरीर मे पानी रूपी प्राण नही ठहर सकते ।
विष्णु विष्णु 🙏🌳