26/10/2025
*पंच परिवर्तन और अपना छठ महातम्य*
*1. स्व का बोध-*
- स्व *भाषा* के छठ लोक गीत
- स्व *भूषा* साड़ी-धोती का ही उपयोग
- सामूहिक *भजन* अर्थात घरों एवं घाटों पर सामूहिक पूजन
- अपने *भवन* की सज्जा हिन्दू रीति-नीति के अनुसार - आरत, चावल के आटे से बने पारंपरिक सजावटी घोल, सिंदूर, आम के पल्लव, गेंदे के फूल, केले के पत्ते आदि से
- *भ्रमण* छठ घाटों के भ्रमण में पूर्ण सात्विकता का भाव
- सामूहिक *भोजन* - नहाय-खाय एवं खरना का महाप्रसाद
*2. नागरिक कर्तव्य-*
- सामाजिक स्वच्छता की विशेष यहां अभियान।
- छठ घाटों तक जाने वाले सड़कों की विशेष स्वच्छता अभियान
- छठ घाटों की विशेष स्वच्छता
- छठ घाटों पर भीड़ नियंत्रण की सामाजिक व्यवस्था
*3- कुटुम्ब प्रबोधन*
- छठ पूजा के समय देश-विदेश में बिखरा हुआ परिवार एक ही छत के नीचे पर छठ महापर्व मनाता है।
- यह पर्व संयुक्त परिवार व्यवस्था की महत्व को वर्ष में एक बार प्रत्यक्ष अनुभव कराता है।
- परिवार के सभी महिलाओं को स्वर-से-स्वर मिलाकर सामूहिक गीत गाने का अभ्यास कराता है।
- परिवार के सभी सदस्य एक साथ मिलकर ठेकुआ जैसे पारंपरिक पकवान बनाने एवं प्रसाद के रूप में ग्रहण करने का आनंद उठाते हैं।
- छठ घाटों पर पारिवारिक एकजुटता का भाव सहज रूप से दिखता है।
*4- पर्यावरण संरक्षण-*
- हम भारतीय पर्यावरण संरक्षक नहीं अपितु पर्यावरण पूजक हैं। इस भाव का स्वाभाविक प्रस्फुटन है छठ महापर्व।
- भगवान सूर्य इस ब्रह्मांड के अनन्य ऊर्जा के स्रोत हैं। अतः उनके प्रति हमारी कृतज्ञता का भाव है यह छठ पूजन।
- अपना घर-परिवेश, गलियों,जल स्रोतों के सामूहिक स्वच्छता वर्ष में कम-से-कम एक बार छठ पूजा के बहाने हो जाती है।
- ऋतु फलों का उपयोग भी पर्यावरण संरक्षण के महत्व को बढ़ावा देता है।
- गौ माता के अमृत तुल्य दूध के उपयोग, गोबर का पूजन एवं स्वच्छता में उपयोग गौ माता के संरक्षण को बढ़ावा देती है।
- छठ पूजा के उपरांत लटलटिया (अपामार्ग), माटी पूजन भी पर्यावरण पूजन का अनुपम उदाहरण है।
*5- सामाजिक समरसता-*
- छठ घाटों पर सामाजिक समरसता का सहज भाव देखा जा सकता है।
- एक साथ सामूहिक अर्घ्य दान करना।
- एक दूसरे से मिल- बाँटकर प्रसाद ग्रहण करना।
- इस पर्व में कोई पुरोहित नहीं होते अर्थात प्रत्येक छठ व्रत करने वाला ही पुरोहित होता है।
- समाज का हर वर्ग कंधे से कंधा मिलाकर छठ घाटों एवं गलियों की सामूहिक स्वच्छता के अभियान में लगते हैं।
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