Durga Sthan Patam

Durga Sthan Patam Temple

��IIदुर्गा स्थान, पाटम(मुंगेर)का संक्षिप्त इतिहासII��
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लोहचा पाटम निवासी तोताय मंडल सिद्ध तांत्रिक थे वो मां भगवती के परम भक्त थे जब उन्होंने दुर्गा- सिद्धि प्राप्त कर ली तो इनके मन में एक विचार आया और इन्होंने अपने जमीन पर एक छोटी सी फूस के मंदिर में माता रानी का प्रतिमा सन् 1944 ई० में स्थापित किया, इन्हें माता रानी से साक्षात् बातें होती थी इनके पिता-

स्वर्ग जवाहर मंडल थे| तोताय मंडल चार भाई थे तीन अन्य भाई,गोपाल मंडल,लौंगी मंडल और धूरो मंडल थे| इन्होंने प्रारंभ में अपने पैतृक जमीन पर 2 वर्ष तक माता का प्रतिमा स्वयं के खर्च से बनाकर मेला लगाया बाद में चौरसिया समाज लोहचा पाटम और बरईचक पाटम के सम्मानित नागरिकों द्वारा विशेष अनुरोध के उपरांत इसे सार्वजनिक रूप दिया गया इन्होंने सर्वप्रथम 5 कट्ठा जमीन मंदिर के लिए दान दिए थे पर इतनी सी जमीन में मेला लगना कठिन था तो समाज के बुद्धिजीवी वर्गों ने चारों भाई से विनती कर दुर्गा स्थान,पाटम में मेला सही से लगे इनके लिए जमीन दान स्वरूप मांग की जिनमें सभी भाइयों ने सहर्ष दुर्गा स्थान, पाटम को राम जानकी मंदिर के नाम से 1 बीघा जमीन दान में दी|पुनः चौरसिया समाज एक कमेटी का गठन कर इसे सुचारू रूप से चलाने का विचार किया तथा, सर्वसम्मति से समिति का निर्माण किया गया समय-समय पर दुर्गास्थान पाटम के अध्यक्ष और सचिव महोदय द्वारा मंदिर के निर्माण में अपने-अपने कार्यकाल में काफी बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया | पाटम की माता महारानी सिद्धिदात्री वैष्णवी दुर्गा के नाम से भी प्रसिद्ध है यहां पूर्व काल से ही बली की परंपरा नहीं है तथा यहां की महारानी बहुत ही शक्तिशाली है, जो भी भक्तजन माता के दरबार में सच्चे भाव से आते हैं माता उनकी सारी मनोकामनाएं पूर्ण करती है,कालांतर में दिन- प्रतिदिन मंदिर का विकास देखने को मिल रहा है|
��� ||जय माता दी||���

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Jamalpur Road
Munger
811214

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