16/08/2026
आर्य समाज के उत्थान और युवा शक्ति को जोड़ने की दिशा में सार्थक विमर्श
14 अगस्त 2026 को विनय आर्य जी का मुंबई आगमन हुआ। मुंबई प्रवास के दौरान उन्होंने अपना बहुमूल्य समय निकालकर आर्य समाज अंधेरी स्थित आर्य प्रतिनिधि सभा मुंबई के कार्यालय में पधारकर अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई।
इस अवसर पर अंतरंग सभा के सदस्यों सहित विभिन्न आर्य समाजों के कार्यकर्ताओं एवं सदस्यों के साथ महत्वपूर्ण एवं सार्थक विचार-विमर्श हुआ। चर्चा का मुख्य विषय था—वर्तमान समय में आर्य समाज की स्थिति को और सुदृढ़ कैसे किया जाए तथा आर्य समाज के विचारों और वैदिक संस्कृति को नई पीढ़ी तक कैसे पहुँचाया जाए।
विनय आर्य जी ने विशेष रूप से इस बात पर बल दिया कि हमारे साथ जुड़े हुए परिवारों के बच्चों और युवाओं को आर्य समाज से जोड़ने के लिए विशेष प्रयास किए जाने चाहिए। आज आवश्यकता है कि हम अपनी पूरी शक्ति, सामर्थ्य और ऊर्जा आर्य समाज के उत्थान एवं विस्तार में लगाएँ। हमारे युवा ही आर्य समाज के भविष्य की शक्ति हैं। यदि हम उन्हें समय रहते आर्य समाज के सिद्धांतों, वैदिक विचारधारा और महर्षि दयानंद के संदेश से जोड़ने में सफल होते हैं, तो निश्चित रूप से आर्य समाज का भविष्य और अधिक उज्ज्वल होगा।
इस अवसर पर आदरणीय हरीश आर्य जी ने संकल्प व्यक्त करते हुए कहा कि मुंबई की सभी आर्य समाज संस्थाओं को एकजुट करने का प्रयास निरंतर जारी है और अब विशेष रूप से युवाओं की सहभागिता बढ़ाने की दिशा में ठोस प्रयास किए जाएंगे। जो युवा किसी कारणवश आर्य समाज से दूर होते जा रहे हैं, उन्हें प्रेम, आत्मीयता और वैदिक विचारों से प्रेरित करके पुनः आर्य समाज से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।
बैठक में आर्य समाज के संगठन, विस्तार, युवा सहभागिता, पारिवारिक जुड़ाव तथा समाज की गतिविधियों को अधिक प्रभावी बनाने सहित अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ।विनय आर्य जी ने विभिन्न विषयों पर अपने उपयोगी सुझाव एवं मार्गदर्शन प्रदान किए।
हरीश आर्य जी ने विश्वास दिलाया कि प्राप्त सुझावों पर निश्चित रूप से गंभीरता से अमल किया जाएगा और मुंबई के सभी आर्य समाजों को साथ लेकर आर्य समाज के संगठन को और मजबूत, सक्रिय एवं व्यापक बनाने का निरंतर प्रयास किया जाएगा।
यह मुलाकात केवल एक बैठक नहीं, बल्कि आर्य समाज के भविष्य को नई दिशा देने, युवा शक्ति को जोड़ने और महर्षि दयानंद के विचारों को जन-जन तक पहुँचाने के संकल्प की एक महत्वपूर्ण कड़ी रही।
आइए, हम सब मिलकर संकल्प लें—
आर्य समाज से जुड़े प्रत्येक परिवार को जोड़ेंगे,
हर युवा तक पहुँचेंगे,
और मिलकर आर्य समाज को और अधिक सशक्त एवं व्यापक बनाएँगे।
कृण्वन्तो विश्वमार्यम्।