08/05/2026
केरल में भक्ति-सूफी समागम : आत्मबोधोदय संगम में आध्यात्मिक एकता और वैश्विक शांति का संदेश
केरल के अलाप्पुझा जिले स्थित श्री शुभानंद आश्रम, चेन्नाकोल में आयोजित ‘आत्मबोधोदय संगम’ में भक्ति और सूफी परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला। श्री शुभानंद गुरुदेव की 144वीं जयंती के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में देशभर के आध्यात्मिक संतों, विद्वानों और सूफी प्रतिनिधियों ने सहभागिता कर आध्यात्मिक एकता, सद्भाव और वैश्विक शांति का संदेश दिया।
कार्यक्रम में सूफी इस्लामिक बोर्ड की टीम ने राष्ट्रीय अध्यक्ष मंसूर खान तथा महासचिव दर्शन अत्रे के नेतृत्व में सहभागिता की। समारोह के मुख्य अतिथि वाराणसी स्थित श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर स्वामी आनंदवनम भारती महाराज रहे। कार्यक्रम का संचालन ब्रह्मश्री देवेंद्र गुरुदेव शिवबोधिचेतन ने किया।
इस अवसर पर विभिन्न संतों और विद्वानों ने अद्वैत वेदांत तथा सूफी दर्शन पर अपने विचार व्यक्त किए। वक्ताओं ने कहा कि आत्म-साक्षात्कार केवल व्यक्ति को आंतरिक शांति नहीं देता, बल्कि समाज को मानसिक तनाव और विभाजन से मुक्त करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। कार्यक्रम में स्वामी दयानंद सरस्वती, श्री रामकृष्ण परमहंस, स्वामी विवेकानंद और रवींद्रनाथ टैगोर जैसे महान विचारकों के विचारों का उल्लेख किया गया।
सैयद अब्दुल कोया जिफ्री थंगल ने सूफी विचारधारा के “वहदत-उल-वजूद” सिद्धांत की तुलना अद्वैत वेदांत के “अहं ब्रह्मास्मि” से करते हुए कहा कि दोनों परंपराएं मानवता को एकता और आत्मिक चेतना का मार्ग दिखाती हैं।
सूफी इस्लामिक बोर्ड के राष्ट्रीय अध्यक्ष मंसूर खान ने “सामूहिक चेतना” की शक्ति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्तमान वैश्विक संघर्षों और सामाजिक तनाव के दौर में आध्यात्मिक संवाद मानवता को नई दिशा दे सकता है। उन्होंने कहा कि सभी धर्मों के आध्यात्मिक प्रतिनिधियों को एक मंच पर लाकर विश्व शांति की दिशा में कार्य करना समय की आवश्यकता है।
डॉ. सूफी राज जैन ने इस आयोजन को भारत की गंगा-जमुनी तहजीब का प्रतीक बताते हुए कहा कि ऐसे आध्यात्मिक संगम विश्व को शांति, संवाद और भाईचारे का मार्ग दिखा सकते हैं। उन्होंने कहा कि सूफी और वेदांत का समन्वय मानवता के उत्थान की सबसे बड़ी शक्ति बन सकता है।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित संतों, विद्वानों और श्रद्धालुओं ने विश्व शांति, सामाजिक सद्भाव और मानव कल्याण के लिए सामूहिक प्रार्थना की।