Shri Ganpati Math

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आत्मलिंगम सन्निधि और सलंग्न श्री उच्चिष्ठ गणपति साधना पीठ :
प्राचीन गणपति संप्रदाय और उसके अधिपति श्री गणपति के विविध रूपों की साधना और उससे संलग्न तंत्र , मंत्र और यंत्र के प्राचीन ज्ञान को संजोने प्रचार और प्रसार करने के लिए उभारा गया एक स्थान ।

महाविनायक... काबुल अफगानिस्तान ईशा की पांचवी सदी में शाही राजा खिंगल ने अफगानिस्तान के गर्देज स्थान पर महाविनायक की प्रा...
22/04/2026

महाविनायक... काबुल अफगानिस्तान

ईशा की पांचवी सदी में शाही राजा खिंगल ने अफगानिस्तान के गर्देज स्थान पर महाविनायक की प्राण प्रतिष्ठा कराई थी।
समय के साथ सभ्यता के ऊपर धूल चढ़ती गई और महाविनायक की प्रतिमा मिट्टी में कहीं दब गई।

युगों बाद खुदाई में जब वह प्रतिमा मिली तो उसे काबुल में "दरगाह पीर रतन नाथ" के पास स्थापित किया गया।

दो वर्ष पूर्व बिहार का एक युवक अफगानिस्तान में भारतीय दूतावास में नौकरी करने पहुँचा।
स्वयं को यायावर कहने वाले उस युवक को अफगानिस्तान के प्राचीन महाविनायक के सम्बंध में पता था, सो वे महाविनायक के चिन्ह खोजने निकले।
पर अफगानिस्तान में सनातन के चिन्ह जितने ही सुलभ हैं, उन्हें खोज लेना उतना ही दुर्लभ।
कई दिनों नहीं कई महीनों के बाद उन्हें पीर रतन नाथ दरगाह का पता चला तो वे एक दिन पहुंचे तो एक ऐसा घर मिला जिसे भारत में मंदिर नहीं कह सकते। उस मंदिर में प्रतिमा स्थापित नहीं थी, बस रामायण महाभारत और गीता आदि पुस्तके रखी हुई थीं।

युवक ने सेवादार से जब महाविनायक की प्रतिमा के बारे में पूछा तो बुजुर्ग सेवादार आश्चर्य में डूब गया। क्या कोई दूर देश से मात्र एक प्रतिमा के लिए आया है? कौन है यह?
भावुक हो चुके सेवादार ने एक बन्द कमरे में रखी महाविनायक की प्रतिमा दिखाई...
युगों बाद किसी ने श्रद्धा से महाविनायक को देखा, युगों बाद महाविनायक की प्रतिमा ने अपने किसी श्रद्धालु को वात्सल्य की दृष्टि से देखा।
उस दिन युगों बाद किसी ने अभिशप्त महाविनायक के चरणों में प्रणाम किया, प्रतिमा पोंछी और फूल माला से उनका श्रृंगार किया।

जानते हैं, ढाई हजार वर्ष पूर्व अफगानिस्तान के हर कण्ठ से वेदमन्त्र उच्चारित होते थे,
गलियों में यज्ञध्रुम की सुगन्ध पसरी रहती थी।
"वसुधैव कुटुंकम" की अवधारणा को जन्म देने वाली उस पूण्य भूमि पर सौ वर्ष पूर्व तक सनातन धर्म पूरी प्रतिष्ठा के साथ खड़ा था।
पर आज का सत्य यह है कि अफगानिस्तान से महाविनायक पर लेख लिख कर जब उस युवक ने भारत भेजा तो पत्रिका के सम्पादक ने भय के मारे लेख में उनका नाम तक नहीं जोड़ा, कि कहीं उन्हें अफगानिस्तान में इसका दण्ड न भोगना पड़े।

सभ्यताओं के चिन्ह कैसे मरते हैं देखें।
काबुल में एक अत्यंत प्राचीन तीर्थस्थल है 'आशा माई'।
पस्तो प्रभाव के कारण वहां के लोग उस स्थान को 'कोही आस्माई' कहते थे, मतलब आशामाई की पहाड़ी।
बीस वर्ष पूर्व सरकार ने उस पहाड़ी पर टेलीविजन का टावर लगा दिया, लोग धीरे धीरे उस स्थान को "कोही टेलीविजन" कहने लगे।
आशामाई का नाम मिट गया।
काबुल में ही एक सड़क थी, देवगनाना रोड।
देवगनाना संस्कृत के "देवगणानाम" का अपभ्रंस है।
अब उस सड़क का नाम है, दे-अफ़ग़ान रोड।
सभ्यता के चिन्ह ऐसे मरते हैं।

कुछ राज्यों में लोकतंत्र का महापर्व चल रहा है। मत देना हमारा कर्तव्य भी है, और हमारी आवश्यकता भी। अपने घरों से निकलिए, और मत देते समय इतना अवश्य याद रखिए कि अब हमारे पास धरती का यही एक टुकड़ा है जहाँ हम अपनी परम्पराओं को निभा सकते हैं, महाविनायक की अर्चना कर सकते हैं।
ऐसा ना हो कि सौ पचास वर्षों बाद किसी दूसरे Lalit Kumar को इसी तरह दिल्ली, आगरा, मथुरा या कानपुर में अपने चिन्ह खोजने आना पड़े।
यकीन मानिए 200 वर्ष पहले काबुल के हिंदुओं ने भी ऐसा नहीं सोचा होगा कि 200 वर्ष बाद हमारा कोई बच्चा जब काबुल आएगा तो उसे अपने पूर्वजों के चिन्ह इस दशा में मिलेंगे।
1946 ईस्वी तक सिंध के लोगों ने यह नहीं सोचा होगा कि पचास वर्ष बाद ही उनसे उनकी सम्पति, उनका धर्म, उनकी बेटियां, उनके बेटे सबकुछ छीन लिए जाएंगे।

हम सभ्यताओं के युद्ध में जी रहे हैं।
हमको छोड़कर हर सभ्यता हमारी परम्पराओं को अपराध और हराम बताती है, और मूर्ति तथा मूर्तिपूजकों की समाप्ति को ही अपना परम् उद्देश्य मानती है।

उनकी तलवार हमारी गर्दन पर है... यही है हमारा आज का सत्य।
मैं यह नहीं कह रहा कि आप फलाँ दल को वोट दीजिये।
मैं क्यों कहूँ?
मैं बस यह कह रहा हूँ कि मत देते समय ध्यान रखिये कि मत अपने देश के लिए देना है।

मत इसलिए देना है ताकि देश मे फिर कोई हत्यारा गुरु गोविंद सिंह जी के साहिबजादों को दीवाल में न चुनवा सके।

मत इसलिए देना है ताकि फिर किसी बिरसा मुंडा को अपनी संस्कृति के लिए प्राण न देना पड़े।
मत इसलिए देना है ताकि फिर किसी पद्मावती को अग्नि में न उतरना पड़े।

मत इसलिए देना है ताकि अयोध्या, मथुरा, काशी, कांची, पूरी, अवंतिका बनी रहे।

मत इसलिए देना है ताकि हजार वर्षों बाद भी जब हमारा कोई बेटा इस मिट्टी को सूँघे तो उसे इस मिट्टी में हमारी गन्ध मिल सके।

मत इसलिए देना है ताकि हमारा देश हमारा ही रहे।
अपना देश रहेगा तभी हम रहेंगे।
Dinesh Jain


पोस्ट साभार

🚩🚩🚩जगद्गुरू रामानुजाचार्य जयंती 🚩🚩🚩वेदांत परंपरा के प्रमुख आचार्य, वैष्णव संप्रदायों के जगदगुरू जिन्होंने ने सकल हिंदू स...
22/04/2026

🚩🚩🚩जगद्गुरू रामानुजाचार्य जयंती 🚩🚩🚩

वेदांत परंपरा के प्रमुख आचार्य, वैष्णव संप्रदायों के जगदगुरू जिन्होंने ने सकल हिंदू समाज को समता और विशिष्ठ अद्वैत मार्ग की समझ वर्तमान भारत को दी। ब्रम्हासूत्र पे उनकी टीका ने एकता और समता का संदेश पारित किया।
अष्टाक्षरी मंत्र की साधना "ॐ नमो नारायण" की नीव रखने वाले श्री रामानुज को मात्र यह मंत्र साधना से ही पूर्ण ज्ञान प्राप्त हुआ और वे प्रथम वैष्णव जगद्गुरू बने।
आज यही मूल मंत्र की तर्ज पे भारत के अखाड़े और संन्यासी संप्रदायों के तीन अखाड़े खड़े है, जो वैष्णव तंत्र, भक्तिमार्ग और विशिष्ठ अद्वैत मार्ग को प्रशस्त करते है।
🚩 जयतु सनातन
#रामानुजाचार्य #सनातनहमारीपहचान

बाबा केदारनाथ के द्वारा खुले सुबह 8.15 को, श्री केदारनाथ जी दर्शन अब सर्वप्रजा के लिए उपलब्ध होंगे। यात्री रजिस्टर करवा ...
22/04/2026

बाबा केदारनाथ के द्वारा खुले सुबह 8.15 को, श्री केदारनाथ जी दर्शन अब सर्वप्रजा के लिए उपलब्ध होंगे। यात्री रजिस्टर करवा लें तो यात्रा में आसानी होती है। महाराष्ट्र की शान और श्री राजा छत्रपति शिवाजी महाराज , जिनके कारण हम सब आज भी हिंदू है, उनको आदरंजलि देते हुए महाराष्ट्र का प्रतिनिधित्व करते हुए केसरिया लहराया।
सकल हिंदुओ को चारधाम यात्रा के शुभारंभ की शुभकामनाएं 🚩🚩🚩

तस्वीर में तीन मुख्य मूर्तियाँ दिखाई दे रही हैं।1️⃣ बीच की मूर्तिबीच में जो काले रंग की मूर्ति है वह काल भैरव की प्रतीत ...
22/04/2026

तस्वीर में तीन मुख्य मूर्तियाँ दिखाई दे रही हैं।
1️⃣ बीच की मूर्ति
बीच में जो काले रंग की मूर्ति है वह काल भैरव की प्रतीत होती है।
यह भगवान शिव का उग्र (रक्षक) रूप माना जाता है।
काल भैरव को समय, मृत्यु और दुष्ट शक्तियों के नियंत्रक के रूप में पूजा जाता है।
मूर्ति पर तेल, सिंदूर और फूल चढ़ाए गए हैं, जो भैरव पूजा में सामान्य होता है।

2️⃣ बाईं ओर की मूर्ति
बाईं तरफ पत्थर पर लिखा है “श्री बटुक भैरव”।
बटुक भैरव भैरव का बाल रूप माना जाता है।
इनकी पूजा सुरक्षा, साहस और बाधाओं को दूर करने के लिए की जाती है।

3️⃣ दाईं ओर की मूर्ति
दाईं तरफ लिखा है “श्री भैरवी भवानी”।
भैरवी देवी शक्ति का रूप हैं और भैरव की शक्ति मानी जाती हैं।
भैरव और भैरवी की पूजा अक्सर साथ-साथ होती है।

भैरव की मूर्तियाँ अक्सर ऐसी क्यों होती हैं -
काल भैरव की मूर्तियाँ सामान्य देवताओं से अलग और कभी-कभी डरावनी या उग्र दिखाई देती हैं। इसके पीछे धार्मिक और प्रतीकात्मक कारण हैं।

1️⃣ उग्र रूप का अर्थ
भगवान शिव के इस रूप को बुराई, पाप और नकारात्मक शक्तियों को नष्ट करने वाला माना जाता है।
इसलिए भैरव की मूर्ति में अक्सर:
- तेज या बड़ी आँखें
- काला या गहरा रंग
- गंभीर या उग्र चेहरा
दिखाया जाता है, जिससे उनकी रक्षक शक्ति का प्रतीक मिलता है।

2️⃣ काला रंग
काला रंग समय (काल) और अज्ञात शक्ति का प्रतीक माना जाता है।
इसलिए काल भैरव की मूर्ति अक्सर काले पत्थर या तेल-सिंदूर से ढकी हुई होती है।

3️⃣ त्रिशूल और अन्य प्रतीक
भैरव मंदिरों में अक्सर पास में त्रिशूल, घंटी और हथियार दिखाई देते हैं।
- त्रिशूल शक्ति और नियंत्रण का प्रतीक है
- घंटी पूजा और ऊर्जा को जागृत करने का संकेत देती है

4️⃣ छोटे मंदिर या कोने में स्थापना
भैरव को कई जगह मंदिरों के रक्षक देवता माना जाता है, इसलिए उनकी मूर्ति अक्सर:
- मंदिर के प्रवेश के पास
- छोटे अलग कक्ष में
स्थापित की जाती है।

भैरव की मूर्तियाँ उग्र इसलिए दिखती हैं क्योंकि वे रक्षक, न्याय देने वाले और बुरी शक्तियों को समाप्त करने वाले देवता माने जाते हैं।

नोट:- अगर आपको काल भैरव के अष्ट रूप के बारे में जानना चाहते है तो कमेंट करे, ताकि अगले पोस्ट में काल भैरव के अष्ट रूपो का वर्णन करेगे।

तस्वीर में जो मूर्ति है, उसमें **हनुमान जी बैठी हुई मुद्रा में दिखाई दे रहे हैं और उनके हाथ में गदा भी है। इस प्रकार की ...
22/04/2026

तस्वीर में जो मूर्ति है, उसमें **हनुमान जी बैठी हुई मुद्रा में दिखाई दे रहे हैं और उनके हाथ में गदा भी है। इस प्रकार की मुद्रा का धार्मिक रूप से खास अर्थ माना जाता है।
1️⃣ बैठे हुए हनुमान जी-
बैठी हुई मुद्रा का मतलब होता है शांति, स्थिरता और भक्तों की रक्षा के लिए सदैव उपस्थित रहना। ऐसी मूर्तियाँ अक्सर मंदिरों या मार्गों के किनारे होती हैं, जहाँ माना जाता है कि हनुमान जी उस स्थान और भक्तों की रक्षा कर रहे हैं।

2️⃣ गदा (मेस) का अर्थ-
हनुमान जी की गदा उनकी शक्ति, साहस और दुष्टों के नाश का प्रतीक है। यह दिखाता है कि वे अधर्म और बुराई को नष्ट करने वाले देवता हैं।

3️⃣ सिंदूर से ढकी मूर्ति-
सिंदूर से पूरी मूर्ति ढकी होना भक्ति और समर्पण का प्रतीक है।
भक्त मानते हैं कि इससे हनुमान जी प्रसन्न होते हैं और संकटों से रक्षा करते हैं।

इस मुद्रा का अर्थ है कि **हनुमान जी शक्ति, सुरक्षा और भक्ति के प्रतीक हैं और भक्तों की रक्षा के लिए हमेशा तैयार रहते हैं।

इस मूर्ति में एक खास और थोड़ी दुर्लभ चीज़ दिखाई देती है — चेहरे की मानव-जैसी शैली।
~ मानव-जैसा चेहरा-
आम तौर पर हनुमान जी की मूर्तियों में बंदर जैसा चेहरा (वानर रूप) स्पष्ट दिखाया जाता है।
लेकिन इस मूर्ति में चेहरा थोड़ा मानव जैसा और शांत भाव वाला दिखाई देता है।ऐसी शैली कुछ पुराने या स्थानीय मंदिरों में मिलती है, जहाँ हनुमान जी को भक्त और रक्षक संत की तरह दर्शाया जाता है।

~ आँखों का अलग ढंग-
मूर्ति में आँखें सफेद और उभरी हुई बनाई गई हैं।
यह शैली अक्सर जागृत देवता (जागते हुए देव) का प्रतीक मानी जाती है, यानी देवता भक्तों की रक्षा के लिए हमेशा सतर्क हैं।

~ सिंदूर की मोटी परत-
मूर्ति पर बहुत मोटी सिंदूर की परत है।
कई पुराने मंदिरों में वर्षों तक भक्तों द्वारा सिंदूर चढ़ाने से मूर्ति की मूल आकृति बदलकर गोल और उभरी हुई दिखने लगती है ।
**हनुमान जी के ऐसे रूप को दर्शाते हैं जिसे भक्त सुरक्षा और शक्ति देने वाला जागृत देव मानते हैं। 🙏

🌷  पापनाशिनी पुण्यप्रदायिनी गंगा जयंती 🌷23 अप्रैल 2026 गुरूवार को श्री गंगा सप्तमी (गंगा जयंती) 🙏🏻 जैसे मंत्रों में ॐकार...
22/04/2026

🌷 पापनाशिनी पुण्यप्रदायिनी गंगा जयंती 🌷

23 अप्रैल 2026 गुरूवार को श्री गंगा सप्तमी (गंगा जयंती)

🙏🏻 जैसे मंत्रों में ॐकार, स्त्रियों में गौरीदेवी, तत्त्वों में गुरुतत्त्व और विद्याओं में आत्मविद्या उत्तम है, उसी प्रकार सम्पूर्ण तीर्थों में गंगातीर्थ विशेष माना गया है। गंगाजी की वंदना करते हुए कहा गया हैः

🌷 संसारविषनाशिन्यै जीवनायै नमोऽस्तु ते।
तापत्रितयसंहन्त्र्यै प्राणेश्यै ते नमो नमः।।

अर्थात् - " देवी गंगे ! आप संसाररूपी विष का नाश करने वाली हैं । आप जीवनरूपा है। आप आधिभौतिक, आधिदैविक और आध्यात्मिक तीनों प्रकार के तापों का संहार करने वाली तथा प्राणों की स्वामिनी हैं । आपको बार-बार नमस्कार है।'
(स्कंद पुराण, काशी खं.पू. 27.160)

🙏🏻 जिस दिन गंगा जी की उत्पत्ति हुई वह दिन गंगा जयंती (वैशाख शुक्ल सप्तमी) और जिस दिन गंगाजी पृथ्वी पर अवतरित हुई वह दिन 'गंगा दशहरा' (ज्येष्ठ शुक्ल दशमी) के नाम से जाना जाता है। इन दिनों में गंगा जी में गोता मारने से विशेष सात्त्विकता, प्रसन्नता और पुण्यलाभ होता है। वैशाख, कार्तिक और माघ मास की पूर्णिमा, माघ मास की अमावस्या तथा कृष्णपक्षीय अष्टमी तिथि को गंगास्नान करने से भी विशेष पुण्यलाभ होता है।
🚩 Shri Ganpati Math 🚩

🌷 गंगा स्नान का फल 🌷
➡️ 23 अप्रैल 2026 गुरूवार को श्री गंगा सप्तमी (गंगा जयंती)
🙏🏻 "जो मनुष्य आँवले के फल और तुलसीदल से मिश्रित जल से स्नान करता है, उसे गंगा स्नान का फल मिलता है ।"
(पद्म पुराण , उत्तर खंड)

#गंगा

 #आदिशंकराचार्य की कृतियाँआदि शंकराचार्य ने बहुत से ग्रंथों की रचना की जो अद्वैत वेदान्त के आधार स्तम्भ हैं। उनकी कृतियो...
21/04/2026

#आदिशंकराचार्य की कृतियाँ

आदि शंकराचार्य ने बहुत से ग्रंथों की रचना की जो अद्वैत वेदान्त के आधार स्तम्भ हैं। उनकी कृतियों में अद्वैत वेदान्त की तर्कपूर्ण स्थापना हुई है।

परम्परागत रूप से आदि शंकराचार्य की कृतियों को तीन समूहों में रखा जाता है-

:- भाष्य,

प्रकरण ग्रन्थ (दार्शनिक ग्रन्थ)
स्तोत्र (स्तुति के लिए श्लोक)

:- शंकराचार्य ने निम्नलिखित ग्रंथों पर भाष्य लिखा है-

ब्रह्मसूत्र पर ब्रह्मसूत्रभाष्य नामक भाष्य
ऐतरेय उपनिषद
वृहदारण्यक उपनिषद
ईश उपनिषद (शुक्ल यजुर्वेद)
तैत्तरीय उपनिषद (कृष्ण यजुर्वेद)
श्वेताश्वतर उपनिषद (कृष्ण यजुर्वेद)
कठोपनिषद (कृष्ण यजुर्वेद)
केनोपनिषद (सामवेद)
छान्दोग्य उपनिषद ((सामवेद)
माण्डूक्य उपनिषद तथा गौडपादकारिका
मुण्डक उपनिषद (अथर्ववेद)
प्रश्नोपनिषद ((अथर्ववेद)
भागवद्गीता (महाभारत)
विष्णु सहस्रनाम (महाभारत)
सानत्सुजातिय (महाभारत)
गायत्री मंत्र

:- प्रकरण ग्रन्थ

विवेकचूडामणि
उपदेशसाहस्री
शतश्लोकी
दशश्लोकी
एकश्लोकी
पञ्चीकरण
आत्मबोध
अपरोक्षानुभूति
साधनापञ्चकम्
निर्वाणशतकम्
मनीषापञ्चकम्
यतिपञ्चकम्
वाक्यशुद्धि
तत्त्वबोध
वाक्यवृत्ति
सिद्धान्तत्त्त्वबिन्दु
निर्णुगमानसपूजा
प्रश्नोत्तररत्नमालिका

:-स्तोत्र

आदि शंकर ने शिव, विष्णु, देवी, गणेश एवं सुब्रमण्य की स्तुति के लिए बहुत सी रचनाएँ कीं।

गणेश स्तुति

1 - गणेश पंचरत्‍नम्‌
2 - गणेश भुजांगम्‌

शिवस्तुति

1- कालभैरवाष्टक
2- दशश्लोकी स्तुति
दक्षिणमूर्ति अष्टकम्‌
3- दक्षिणमूर्ति स्तोत्रम्‌
4- दक्षिणमूर्ति वर्णमाला स्तोत्रम्‌
5- मृत्युंजय मानसिक पूजा
6- वेदसार शिव स्तोत्रम्‌
7- शिव अपराधक्षमापन स्तोत्रम्‌
8- शिव आनंदलहरी
9- शिव केशादिपादान्तवर्णन स्तोत्रम्‌
10- शिव नामावलि अष्टकम्‌
11- शिव पंचाक्षर स्तोत्रम्‌
12- शिव पंचाक्षरा नक्षत्रमालास्तोत्रम्‌
13- शिव पादादिकेशान्तवर्णनस्तोत्रम्‌
14- शिव भुजांगम्‌
15- शिव मानस पूजा
16- सुवर्णमाला स्तुति

शक्तिस्तुति

1- अन्‍नपूर्णा अष्टकम्‌
2- आनंदलहरी
3- कनकधारा स्तोत्रम्‌
4- कल्याण वृष्टिस्तव
5- गौरी दशकम्‌
6- त्रिपुरसुंदरी अष्टकम्‌
7- त्रिपुरसुंदरी मानस पूजा
8- त्रिपुरसुंदरी वेद पाद स्तोत्रम्‌
9- देवी चतु:षष्ठी उपचार पूजा स्तोत्रम्‌
10- देवी भुजांगम्‌
11- नवरत्‍न मालिका
12- भवानी भुजांगम्‌
13- भ्रमरांबा अष्टकम्‌
14- मंत्रमातृका पुष्पमालास्तव
15- महिषासुरमर्दिनी स्तोत्रम्‌
16- ललिता पंचरत्नम्‌
17- शारदा भुजंगप्रयात स्तोत्रम्‌
18- सौन्दर्यलहरी
19- नर्मदाष्टक

विष्णु एवं उनके अवतारों की स्तुति

1- अच्युताष्टकम्‌
2- कृष्णाष्टकम्‌
3- गोविंदाष्टकम्‌
4- जगन्‍नाथाष्टकम्‌
5- पांडुरंगाष्टकम्‌
6- भगवन्‌ मानस पूजा
7- मोहमुद्‌गार (भजगोविंदम्‌)
8- राम भुजंगप्रयात स्तोत्रम्‌
9- लक्ष्मीनृसिंह करावलंब (करुणरस) स्तोत्रम्‌
10- लक्ष्मीनरसिंह पंचरत्‍नम्‌
11- विष्णुपादादिकेशान्त स्तोत्रम्‌
12- विष्णु भुजंगप्रयात स्तोत्रम्‌
13- षट्‌पदीस्तोत्रम्‌

अन्य देवताओं एवं तीर्थों की स्तुतियाँ

1- अर्धनारीश्वरस्तोत्रम्‌
2- उमा महेश्वर स्तोत्रम्‌
3- काशी पंचकम्‌
4- गंगाष्टकम्‌
5- गुरु अष्टकम्‌
6- नर्मदाष्टकम्‌
7- निर्गुण मानस पूजा
8- मनकर्णिका अष्टकम्‌
9- यमुनाष्टकम्‌
10- यमुनाष्टकम्‌-२

📜 Rediscovering India’s Timeless WisdomThe discovery of 18 rare manuscripts at the historic Shri Thakur Radha Raman Lal ...
21/04/2026

📜 Rediscovering India’s Timeless Wisdom

The discovery of 18 rare manuscripts at the historic Shri Thakur Radha Raman Lal Ji Temple in Nawada stands as a significant milestone in preserving India’s rich knowledge heritage. Unearthed through systematic survey efforts, these invaluable texts—covering diverse subjects such as Ayurveda, literature, astronomy, and local history—are now being scientifically preserved and digitised under the Gyan Bharatam Mission.

This initiative not only safeguards fragile manuscripts but also transforms them into accessible digital resources for scholars and future generations, reaffirming India’s commitment to protecting its civilisational legacy.

🔗 To read the full news, visit: https://patnapress.com/bihar-nawada-temple-manuscripts-discovery-gyan-bharatam-digitisation/
Patna Press

श्री कामाख्या देवी: काशी बनारस अविमुक्तेश्वर क्षेत्रजहां शिव हो वहां शक्ति का होना सर्वथा योग्य है, लेकिन विश्व की सब से...
21/04/2026

श्री कामाख्या देवी: काशी बनारस अविमुक्तेश्वर क्षेत्र

जहां शिव हो वहां शक्ति का होना सर्वथा योग्य है, लेकिन विश्व की सब से प्राचीन नगरी काशी में श्री ईश्वेश्वर शिव के साथ योनि स्वरूपा भगवती कामाख्या का होना एक सर्वथा अनंत रहस्य है। शायद यही चीज काशी को तंत्र की जननी भी बनाता है।
जी हां, काशी में भी श्री कामाख्या मंदिर है, वह भी काशी की उत्पति से ही। "कामाच्छा" इलाके में यह मंदिर स्थित है, या यूं कहिए यह इलाके का नाम ही कामाक्षी कामाख्या मंदिर के नाम से हुआ है। काशी खंड में यह मंदिर में काशी में निवास करने वाली 64 योगिनियों का निवास होने की बात लिखी है।

"असम के कामरूप कामाख्या की तरह यह मंदिर भी तंत्र साधकों से जुड़ा हुआ है, कामाख्या तंत्र को सिद्ध करने का संकल्प यहां लेते हुए कही उत्तरी साधकों को हम ने नवंबर 2025 में देखा था। यहां संकल्प ले कर वें मुख्यत मणिकर्णिका और नदी के उस पार वाले रेतीले टीलों पे साधना करने की बात से एक साधक आचार्य ने अवगत कराया था।"
असम के बाहर प्राचीन कहा जाने वाला शायद ही यह एक मात्र कामख्या मंदिर है, और यहां देवी का पूर्ण विग्रह देखने मिलता है, लेकिन वह सुबह तीन से पांच तक ही दर्शन किया जा सकता है, बाद में वह पुष्पों और श्रृंगार के नीचे गुप्त हो जाता है।
तो अब के बार जब आप काशी जाएं तब आप निश्चित रूप में कामाख्या मंदिर का दर्शन करें।
🚩 जय काशी 🚩 जय कामाख्या

#काशी #बनारस #कामाख्या

जय श्री केदारनाथ 🚩 कल बाबा को डोली पहुंचेंगी श्री केदारनाथ धाम🚩 तयारियो को आखरी चरण में अब पूरा किया जा रहा है। मंदिर अभ...
21/04/2026

जय श्री केदारनाथ 🚩

कल बाबा को डोली पहुंचेंगी श्री केदारनाथ धाम🚩 तयारियो को आखरी चरण में अब पूरा किया जा रहा है। मंदिर अभी तक देवताओं के हस्तक था। कल मुख्य पुजारी द्वार खटखटाएंगे। मंत्रोचार के साथ मंदिर में प्रवेश होगा। और देवताओं के द्वारा छह महीने के लिए पूजित शिवलिंग अब मानुषों के द्वारा पूजन किया जाएगा !
जो भी यह वर्ष में केदारनाथ जाना चाहते है, जिनको भी जाने की इच्छा है , और जितने लोग जाने वाले है उन सभी को बहुत शुभकामनाएं।
Shri Ganpati Math के द्वारा श्री केदारनाथ यात्रा सितंबर के महीने में आयोजित की जाती है, तब भीड़ का प्रमाण कम होता है, मौसम भी साफ होता है। और साधकों को शांत रूप में साधना करने का अवसर प्राप्त होता हैं । अभी से सूचना दे रहे है, जितने भी साधक, भक्त और यात्री जाना चाहते हो वह अपना मन बना लें और अपने सभी कार्यों को पूरा करें ताकि सीमित समय में हम केदारनाथ प्रस्थान अरेंज करेंगे।
जय केदार🚩

#केदारनाथ #चारधाम #उत्तराखंड

2535 वी श्री आदि शंकराचार्य जयंती आज 21 अप्रैल, आज के भारत के जनक, हिंदू भारत के जनक, अद्वैत वेदांत की ज्ञाता, भगवान महा...
21/04/2026

2535 वी श्री आदि शंकराचार्य जयंती

आज 21 अप्रैल, आज के भारत के जनक, हिंदू भारत के जनक, अद्वैत वेदांत की ज्ञाता, भगवान महादेव शंकर के शिष्य श्री आदिगुरु परमराध्य आदि शंकरचार्य जी की 2535 जन्मजयंती है। सन 788 की बैशाख शुक्ल पंचमी को केरल के कालाडी में उनका जन्म हुआ। निर्वाण शतकम, सौंदर्य लहरी, भज गोविंदम और भवानी अष्टकम जैसी कई महान स्तुतियों और कृतियों के वह रचयिता रहे।
केदारनाथ सहित भारत के कई बड़े प्रख्यात मंदिरो को उन्होंने नवजीवन दिया, आप कह सकते है भारत को आज का धार्मिक भारत बनाने का सफर उन्होंने ढाई हजार साल पहले शुरू किया था !!
🚩 श्री शंकराचार्य विजयेते 🚩

#शंकराचार्य #आदि

बाबा केदारनाथ जी की डोली श्री केदारनाथ मंदिर की ओर प्रस्थान 🚩🚩बाबा केदारनाथ जी से यह प्रार्थना होगी के प्रभु महादेव चारध...
20/04/2026

बाबा केदारनाथ जी की डोली श्री केदारनाथ मंदिर की ओर प्रस्थान 🚩🚩

बाबा केदारनाथ जी से यह प्रार्थना होगी के प्रभु महादेव चारधाम आने वाले सभी भक्तों को सुरक्षित रखें। सभी की मनोकामनाएं पूर्ण हो। कुदरती आपदाओं और अकस्मातो से रक्षण प्राप्त हो। देश में आनंद और सुख समृद्धि आए।।
जय श्री केदारनाथ 🚩🙏

#केदारनाथ #केदार

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