Shri Ganpati Math

Directions Website

Shri Ganpati Math Contact information, map and directions, contact form, opening hours, services, ratings, photos, videos and announcements from Shri Ganpati Math, Religious organisation, Mumbai.

आत्मलिंगम सन्निधि और सलंग्न श्री उच्चिष्ठ गणपति साधना पीठ :
प्राचीन गणपति संप्रदाय और उसके अधिपति श्री गणपति के विविध रूपों की साधना और उससे संलग्न तंत्र , मंत्र और यंत्र के प्राचीन ज्ञान को संजोने प्रचार और प्रसार करने के लिए उभारा गया एक स्थान ।

🌑 तात्विक अंधकार / साधना के दौरान होने वाला एक अनुभवप्रत्येक साधक और आध्यात्मिक पथ पर चलने वाले व्यक्ति के जीवन में कभी ...
08/10/2026

🌑 तात्विक अंधकार / साधना के दौरान होने वाला एक अनुभव

प्रत्येक साधक और आध्यात्मिक पथ पर चलने वाले व्यक्ति के जीवन में कभी न कभी ये समय आता ही है, एक अनुभव के तौर पे या बदलाव के तौर पे एक ऐसा समय अवश्य आता है, जिसे ‘आत्मा की अंधकारमय रात्रि’ (Dark Night of the Soul) कहा जाता है।

यह वह अवस्था होती है, जब साधक को कुछ भी स्पष्ट दिखाई नहीं देता। यहां आंखो से देखने की बात नही है, यह मन में छाए अस्पष्ट और तात्विक धुंधलेपन की बात है। मन में अनेक प्रश्न उठते हैं, उनके उत्तर प्राप्त नही होते, या समझ में नहीं आते। साधना में पहले जैसी सहजता नहीं रहती और ऐसा प्रतीत होता है मानो भीतर सब कुछ अस्त-व्यस्त हो गया हो। जिस मार्ग पर चलते हुए कभी शांति, आनंद और दिव्यता का अनुभव होता था, उसी मार्ग पर अचानक शून्यता, बेचैनी और अनिश्चितता अनुभव होने लगती है।

कभी-कभी साधक अपने गुरु से संपर्क नहीं कर पाता, अपनी शंकाओं का समाधान नहीं खोज पाता और उसे यह भी समझ में नहीं आता कि अब उसे क्या करना चाहिए। ऐसा लगता है मानो भीतर का प्रकाश कहीं खो गया हो और चारों ओर केवल अंधकार ही शेष रह गया हो।
लेकिन साधक को यह समझना चाहिए कि प्रत्येक अंधकार विनाश का संकेत नहीं होता। कभी-कभी यही अंधकार भीतर छिपे सत्य को पहचानने की भूमिका भी बनता है।

🕉️ ऐसी अवस्था में साधक को क्या करना चाहिए?

१. धैर्य बनाए रखें।

जब मन अशांत हो और साधना में पहले जैसा रस न मिले, तब जल्दबाजी में कोई निर्णय न लें। अपनी साधना को लेकर निराश न हों और न ही स्वयं को असफल समझें। मन की प्रत्येक अवस्था स्थायी नहीं होती। जिस प्रकार ऋतुएँ बदलती हैं, उसी प्रकार मन की स्थितियाँ भी बदलती रहती हैं।

२. अपने भीतर उठने वाले अंधकार से संघर्ष न करें।

हर समय मन को शांत करने, अनुभवों को वापस पाने या किसी विशेष आध्यात्मिक अनुभूति को प्राप्त करने का प्रयास आवश्यक नहीं है। कभी-कभी मन को बिना किसी विरोध के उसकी अवस्था में रहने देना भी साधना का एक महत्त्वपूर्ण अंग होता है।
अपने भीतर उठने वाले विचारों, प्रश्नों और भावनाओं को साक्षीभाव से देखें। उन्हें दबाने के बजाय समझने का प्रयास करें।
याद रखें, अंधकार से भागने वाला व्यक्ति प्रकाश की खोज में भटकता रह सकता है, लेकिन अंधकार को समझने वाला व्यक्ति अपने भीतर के प्रकाश को पहचानना सीख सकता है।

३. साधना के मूल अनुशासन को न छोड़ें।

जब मन साथ न दे, तब भी अपनी सामर्थ्य के अनुसार नियमित जप, ध्यान, प्रार्थना और स्वाध्याय करते रहें। साधना का उद्देश्य केवल आनंददायक अनुभव प्राप्त करना नहीं, बल्कि अपने चित्त को समझना और जीवन में विवेक विकसित करना भी है।
यदि ध्यान में शांति न मिले, तो स्वयं को दोष न दें। यदि जप में मन भटके, तो निराश न हों। विनम्रता के साथ पुनः अपने अभ्यास में लौट आएँ।

४. गुरु के प्रति श्रद्धा रखें, लेकिन शिक्षाओं को जीवन में उतारें।

गुरु का महत्त्व केवल उनके सान्निध्य में रहने तक सीमित नहीं है। वास्तविक महत्त्व इस बात का है कि उनकी शिक्षाएँ हमारे विचारों, आचरण और जीवन में कितनी उतर पाई हैं।

जब गुरु शारीरिक रूप से उपलब्ध न हों, तब उनके द्वारा बताए गए सत्य, साधना के अनुशासन और विवेक का सहारा लें। श्रद्धा के साथ-साथ अपने भीतर विचार करने की क्षमता भी विकसित करें।
गुरु के प्रति सच्ची निष्ठा का अर्थ केवल उनके शब्दों को सुनना नहीं, बल्कि उन शिक्षाओं को आत्मसात करना है, जो हमें सत्य के निकट ले जाती हैं।

५. आध्यात्मिक अनुभवों के पीछे न भागें।

कभी ध्यान में आनंद मिलता है, कभी गहरी शांति अनुभव होती है और कभी कुछ भी विशेष अनुभव नहीं होता। इन सभी अवस्थाओं को साधना की सफलता या असफलता का अंतिम प्रमाण न मानें।
आध्यात्मिक मार्ग पर अनुभव आते-जाते रहते हैं। यदि साधक प्रत्येक अनुभव को पकड़कर रखना चाहे, तो वह अनुभवों का ही बंधक बन सकता है।

साधना का सार किसी विशेष अनुभूति को प्राप्त करना नहीं, बल्कि अपने भीतर जागरूकता, करुणा, स्थिरता और विवेक को विकसित करना है।

६. स्वयं के प्रति करुणा रखें।

हर समय मजबूत बने रहना आवश्यक नहीं है। साधना के दौरान यदि थकान, भ्रम या भावनात्मक कठिनाई अनुभव हो, तो स्वयं को समय दें। उचित विश्राम लें, प्रकृति के साथ समय बिताएँ और अपने दैनिक जीवन के कर्तव्यों को संतुलित ढंग से निभाएँ।
आध्यात्मिकता का अर्थ जीवन से दूर भागना नहीं, बल्कि जीवन को अधिक सजगता और समझ के साथ जीना है।
यदि बेचैनी बहुत अधिक बढ़ जाए या लंबे समय तक बनी रहे, तो किसी विश्वसनीय व्यक्ति अथवा योग्य मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सहायता लेने में संकोच न करें। सहायता लेना साधना की कमजोरी नहीं है।

🔱 साधकों के लिए सबसे महत्त्वपूर्ण संदेश

आध्यात्मिक मार्ग पर एक समय ऐसा भी आ सकता है, जब साधक को लगे कि उसके पास न कोई उत्तर है, न कोई सहारा और न ही आगे बढ़ने का स्पष्ट मार्ग।
ऐसे समय में स्वयं को असफल घोषित करने के बजाय ठहरना सीखें।
हर मौन शून्यता नहीं होता, हर विराम ठहराव नहीं होता और हर अंधकार पतन का संकेत नहीं होता।

कभी-कभी जीवन हमें बाहरी आधारों और आदर्शो से हटाकर अपने भीतर देखने के लिए प्रेरित करता है। जो बातें पहले स्पष्ट लगती थीं, उन पर पुनर्विचार करना पड़ता है। जिन अनुभवों को हम आध्यात्मिक उपलब्धि समझते थे, उनसे आगे बढ़ना पड़ता है। और जिन मान्यताओं को हमने बिना प्रश्न किए स्वीकार कर लिया था, उन्हें विवेक की कसौटी पर परखना पड़ता है।
यही वह समय है, जब साधना केवल एक अभ्यास न रहकर आत्मनिरीक्षण का माध्यम बन सकती है। साधना का मूल उद्देश्य ही आत्मजागृति है।

लेकिन यह भी याद रखें कि प्रत्येक कठिनाई को कोई विशेष आध्यात्मिक संकेत मानना आवश्यक नहीं है। कभी-कभी मनुष्य को केवल विश्राम, उचित मार्गदर्शन, धैर्य और जीवन में संतुलन की आवश्यकता होती है।

इसलिए न तो अंधकार से भयभीत हों और न ही उसे पकड़कर बैठ जाएँ। उसे समझें, उससे सीखें और अपनी साधना में संतुलन बनाए रखें।
जब मन शांत होने लगेगा, तब संभव है कि परिस्थितियाँ पहले जैसी न हों, लेकिन उन्हें देखने का आपका दृष्टिकोण बदल चुका हो।
और शायद यही परिवर्तन साधना की सबसे मूल्यवान उपलब्धियों में से एक है।

🌺 अंतिम संदेश
“गुरु को खोजते-खोजते कहीं ऐसा न हो कि तुम उनकी शिक्षाओं को ही भूल जाओ। गुरु का सान्निध्य अनमोल है, लेकिन उनकी शिक्षाओं का आत्मसात होना उससे भी अधिक महत्त्वपूर्ण है। जब मार्ग अस्पष्ट हो जाए, तब अधीर होकर दिशा बदलने के बजाय ठहरो, अपने चित्त को देखो और विवेक के साथ आगे बढ़ो। अंधकार को अपने ऊपर हावी मत होने दो, लेकिन उससे भागो भी मत। धैर्य, श्रद्धा और सजगता के साथ साधना करते रहो।”
ॐ तत्सत्। 🙏

06/10/2026
05/10/2026

Heartiest greetings to all Shakya sects and Ta***ic groups on the beginning of Sharadiya Navratri. You may be surprised to know that while you celebrate the festival of worshipping Durga, the most powerful form of Goddess Bhagwati, on the first day of Navratri, Ashwin Pratipada, in monasteries, Shaktipeeths, and Ta***ic centres, the rituals begin on Krishna Navami, the ninth day of the dark fortnight of Bhadrapada.

सभी शाक्य संप्रदाय और तांत्रिक समूहों को शारदीय नवरात्रि की शुरूआत की हार्दिक शुभेच्छा। आप सभी को जानकर हैरानी होगी के भगवती के सब से शक्तिशाली स्वरूप "दुर्गा" की आराधना का पर्व आप भले नवरात्रि के प्रथम दिवस आश्विन प्रतिपदा से मनाते हो, लेकिन मठों, शक्तिपीठों और तांत्रिक पीठों में अनुष्ठान की शुरुआत कृष्ण नवमी यानी भाद्रपद कृष्ण पक्ष की नवमी से ही शुरू हो जाती है।

❤️ ❤️

02/10/2026

सभी योनियां मां कामाख्या में मोक्ष की स्थिरता, कैवल्य की शांति प्राप्त करने आती है। बलि की प्रचंड आवाज में भी अंत तो परम शांति का ही है। आज भगवती कामाख्या के प्रांगण में यह जीव देवी गर्भ की प्रदक्षिणा करते दिखा।

01/10/2026

Shri Bhagwati Tara (Shaktipeeth Tarapith, Bengal) has three main forms. One is Shri Tara who is the presiding deity of the Shaktipeeth, the second is Shri Ugratara, and the third is Shri Ekjata. These three forms of Shri Tara represent the Shaktipeeth Tara where the pupil of Goddess Sati's eye fell. The second is "Shri Ugratara" who is the presiding deity of Ta***ic rituals. And the third is "Ekajata" who is the presiding deity of supreme knowledge. Jai Maa Tara.

**ra

01/10/2026

The worship of Sri Bhagwati Tara, the mother of all knowledge, as the mother form of Neel Saraswati, is mentioned in the Ta***ic practice of Sri Ganesha. This upcoming Navratri, the Goddess will be worshipped at the Ganapati Math.
**ra ❤️ ❤️

महाकाल मैं शिखर के सामने पड़ी खंडित गणेश प्रतिमा यह इल्तुतमिश द्वारा हमले के बाद की है जिन्होंने यह किया उनकी पीढ़ियाँ ब...
25/09/2026

महाकाल मैं शिखर के सामने पड़ी खंडित गणेश प्रतिमा यह इल्तुतमिश द्वारा हमले के बाद की है जिन्होंने यह किया उनकी पीढ़ियाँ बर्बाद हो गई लेकिन उनका यश गान सालों तक किया गया इसका शिलालेख महाकाल मैं लगा था

Address

Mumbai
401105

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Shri Ganpati Math posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Shortcuts

Share