Ram Bhakt Mandali I.I.T Powai

Ram Bhakt Mandali I.I.T Powai जिनकी रही भावना जैसी, प्रभु मूरत देखि ?

Ram Bhakt Mandali
A Bunch of People Who Loves to Devote There Little Time In Bhajan and Bhakti,
Believes and Follows The Ramcharitmanas and Bhagwatgita
We Believes That Following Granth Bhagwatgita and Ramcharitmanas Brings The Peace and Prosperity Whether it is For Individual,Family,Society,or It is whole World
It's Teach The Humanism and The Life Of Living
"There is No Religion it's Only Humanism"
Live your Life, Do What You Want
But Don't Differentiate !!

14/03/2016

संकट मोचन तू कहलाये
राम बिना तुझे कुछ न भाये
तेरा द्वार् जो भी खट् काये
बिन् कुछ पाये घर नही जाये

दुर्बल् को बलवान बनाये
हर संकट पल मे टल जाये
तेरा गान करे जो कोयी
उसे न कोयी विपदा होयी

हर मुष्किल आसान तु कर् दे
भक्तजनों के दुःख तू हर ले
मन के अंधियारों को मिटा के
भवसागर से पार करादे

सच्चिदानंद हे प्रिय हनुमान
दूर करो मेरा अज्ञान
थका बहुत जीवन चक्कर से
कृपा निधान दो निर्वाण |

|| जय श्री राम ||
|| जय बजरंग बली ||

मैं महाकाल हूँ....विभत्स हूँ .. विभोर हूँ ... मैं ज़िंदगी में चूर हूँ ... घनघोर अँधेरा ओढ़ के मैं जन जीवन से दूर हूँ .. ...
07/03/2016

मैं महाकाल हूँ....

विभत्स हूँ .. विभोर हूँ ... मैं ज़िंदगी में चूर हूँ ... घनघोर अँधेरा ओढ़ के मैं जन जीवन से दूर हूँ .. शमशान में हूँ नाचता .. मैं मृत्यु का ग़ुरूर हूँ .. साम दाम तुम्हीं रखो .. मैं दंड में सम्पूर्ण हूँ .. चीर आया चरम मैं .. मार आया मैं को मैं .. मैं मैं नहीं मैं भय नहीं .. जो तू सोचता हैं वो ये हैं नहीं ..काल का कपाल हूँ .. मूल की चिंघाड़ हूँ .. मैं आग हूँ मैं राख हूँ .. मैं पवित्र रोष हूँ .. मुझमें कोई छल नहीं .. तेरा कोई कल नहीं .. मैं पंख हूँ मैं श्वास हूँ .. मैं ही हाड़ माँस हूँ .. मैं नग्न हूँ मैं मग्न हूँ .. एकांत में उजाड़ में .. मौत के ही गर्भ में हूँ .. ज़िंदगी के पास हूँ .. अंधकार का आकार हूँ .. प्रकाश का प्रकार हूँ .. मैं कल नहीं मैं काल नहीं .. वैकुण्ठ या पाताल नहीं .. मैं मोक्ष का ही सार हूँ .. मैं पवित्र रोष हूँ .. मैं अघोर हूँ ..॥॥॥

ॐ नम: शिवायः

राम गुलाम तु ही हनुमान गोसाँई सुसाँई सदा अनुकूलो ।पाल्यो हौं बाल ज्यों आखर दू पितु मातु सों मंगल मोद समूलो ॥बाँह की बेदन...
23/02/2016

राम गुलाम तु ही हनुमान गोसाँई सुसाँई सदा अनुकूलो ।
पाल्यो हौं बाल ज्यों आखर दू पितु मातु सों मंगल मोद समूलो ॥
बाँह की बेदन बाँह पगार पुकारत आरत आनँद भूलो ।
श्री रघुबीर निवारिये पीर रहौं दरबार परो लटि लूलो

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I. I. T
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