01/03/2026
إِنَّا لِلَّهِ وَإِنَّآ إِلَيْهِ رَٰجِعُونَ
मरने से पहले अपनी औलाद और आने वाली नस्लों को ज़रूर बताना कि हमने वो दौर देखा है जब 86 साल का एक बूज़ुर्ग मुजाहिद तन्हा इस्लाम की जंग लड़ रहा था, जबकि पूरी दुनिया और कई इस्लामी मुल्क ख़ामोशी और बे-हिसी की नींद में डूबे हुए थे।
इस उम्र में भी वह साबित-क़दम रहा न थका, न झुका, बल्कि हक़ की आवाज़ बुलंद करता रहा। यह तारीख़ का ऐसा बाब है जिसे आने वाली नस्लें हैरत और फ़ख़्र के साथ पढ़ेंगी।
अल्लाह मरहूम को मग़फिरत फरमाए और ईरान को इस जंग में फ़तह नसीब करे।