07/08/2026
श्री हरिवंश 🌹
आनंद वह नहीं जो केवल इंद्रियों को सुख दे.
आनंद वह आंतरिक अवस्था है, जो बिना किसी बाहरी कारण के भी हृदय में बनी रहती है.
आनंद किसी वस्तु में नहीं,
आनंद किसी व्यक्ति में नहीं।
आनंद उस हृदय में खिलता है,
जो स्वयं को श्री किशोरी जी के चरणों में समर्पित कर देता है।