आर्यावर्त

आर्यावर्त ये देश महान है इस देश की संस्कृति महान ?
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कानून के तराजू में ये कैसा न्याय है ?
10/08/2026

कानून के तराजू में ये कैसा न्याय है ?

4000 करोड़ की मूवी का बजट उस जादू का मुक़ाबला नहीं कर सकता जो 1987 में हमनें इन तीरों में से देखा था
01/08/2026

4000 करोड़ की मूवी का बजट उस जादू का मुक़ाबला नहीं कर सकता जो 1987 में हमनें इन तीरों में से देखा था

सत्ता का अहंकार===========गांधीनगर (गुजरात) में जब आसाराम बापू के समर्थक शांतिपूर्ण ढंग से जिला कलेक्टर को ज्ञापन देकर अ...
22/07/2026

सत्ता का अहंकार
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गांधीनगर (गुजरात) में जब आसाराम बापू के समर्थक शांतिपूर्ण ढंग से जिला कलेक्टर को ज्ञापन देकर अपनी बात रखने जा रहे थे कि किस तरह मीडिया में अनर्गल और तथ्यहीन खबरें चलाकर बापू को बदनाम किया जा रहा है तथा उनके आश्रमों को बदनाम करने के लिए मनगढ़ंत कहानियाँ दिखाई जा रही हैं।

तब मोदी और अमित शाह के सहयोग से संदेश न्यूज़ के गुंडों के साथ मिलकर उस रैली में पुलिस पर पत्थर मारा जाता है। इसके बाद पुलिस द्वारा लाठीचार्ज कर दिया जाता है और पहले से तैयार पुलिस आँसू गैस के गोले छोड़ती है। पूरी मीडिया दिखाती है कि आसाराम बापू के गुंडों ने पुलिस पर पत्थराव किया।

उसके बाद हजारों पुलिसकर्मी और मीडिया आसाराम बापू के आश्रम पर टूट पड़ते हैं।

आश्रम से एक-एक व्यक्ति को पकड़-पकड़कर बेरहमी से मारा जाता है, गालियाँ दी जाती हैं और बालों से घसीटते हुए जेल में डालकर उन पर कई धाराएँ लगा दी जाती हैं।

तब सोशल मीडिया नहीं था। मीडिया ने जो दिखाया, लोगों ने उसे ही सच माना।

लेकिन दिल्ली के जंतर-मंतर पर लाखों छात्र, जो NEET पेपर लीक को लेकर प्रोटेस्ट करने उतरे थे, उनके साथ भी कुछ ऐसा ही करने की तैयारी थी। गाड़ियों में पत्थर भरकर लाए गए थे। पुलिस स्वयं खड़ी गाड़ियों के शीशे तोड़ती दिखी और पत्थर मारते हुए भी नज़र आई।

कहा जा रहा है कि यह राजनीतिक विरोधियों द्वारा किया जा रहा प्रोटेस्ट है। लेफ्ट, खालिस्तानी और हिंदू-विरोधी लोग इसे चला रहे हैं।

इसमें छात्रों के नाम पर राजनीतिक रोटियाँ सेकी जा रही हैं।

इसमें कोई शक नहीं है कि हिंदू-विरोधी और राजनीतिक विरोधी लोग पूरी तरह सक्रिय होकर इस प्रोटेस्ट में काम कर रहे हैं।

फिर भी लोग इस प्रोटेस्ट को सपोर्ट क्यों कर रहे हैं?..

क्योंकि सत्ता में बैठे लोग जब गूँगे-बहरे हो जाएँ, तो आंदोलन ही एक रास्ता बचता है, बहरों को अपनी बात सुनाने के लिए।

जो काम साधारण-सी बातचीत करके छात्रों को दिलासा देकर आसानी से सुलझाया जा सकता था, उसे इतना गंभीर और उग्र बनाने का जिम्मेदार क्या खुद मोदी सरकार नहीं है?

मोदी सरकार को लगता है कि जैसे आसाराम बापू के करोड़ों समर्थकों के साथ किया गया, वैसे ही सबके साथ आसानी से किया जा सकता है। पर ये भूल गए कि वे साधु-संत नहीं हैं, जो सब कुछ सहकर माफ कर दें। वे छात्र हैं और उनके पीछे जो लोग खड़े हैं, वे भी राजनीति से जुड़े हैं।

खुद को राजनीति का चाणक्य कहलाने वाले शकुनि अमित शाह के पासे भी इस बार उल्टे पड़ गए। सोचा था कि हिंदू-विरोधी और दंगाई बताकर प्रोटेस्ट को कमजोर करके पुलिस के दम पर खत्म कर देंगे, पर लाखों छात्र जो इस प्रोटेस्ट से जुड़ रहे थे, वे सब भी तो हिंदू परिवारों से ही आते थे। क्या उनको ये सब समझ नहीं आ रहा था?

इस प्रोटेस्ट से जुड़ना छात्रों की मजबूरी ही नहीं, उनके मन की पीड़ा भी थी। नहीं तो कोई भी छात्र इतना मूर्ख नहीं कि ₹1000–₹2000 के लिए किसी राजनीतिक व्यक्ति के कहने पर पुलिस की लाठियाँ-डंडे खाए और अपना करियर दाँव पर लगा दे।

अब पुलिस छात्रों को मारे या छात्र पुलिस को मारें, इसमें हानि देश की ही है और देश के दुश्मनों को सुनहरा मौका, जो मोदी सरकार ने खुद थाली में सजाकर दिया है।

लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति यही है कि सरकार जनता की बात सुने और जनता अपनी बात शांतिपूर्ण तरीके से रख सके। जब संवाद की जगह अहंकार ले लेता है, तब असंतोष बढ़ता है।

इतिहास गवाह है कि सत्ता स्थायी नहीं होती। चाहे वह किसी भी पार्टी या व्यक्ति की हो, जनता का विश्वास ही उसकी सबसे बड़ी ताकत होता है।

लेकिन कहते हैं न...

"जब नाश मनुज पर छाता है, पहले विवेक मर जाता है।"

और BJP के लोगों ने अपने ही समर्थकों के साथ विश्वासघात करने में आज तक कोई कसर नहीं छोड़ी है।

• पहले POCSO Act की आड़ में निर्दोष आसाराम बापू को दोषी बनाकर उनके करोड़ों समर्थकों के साथ विश्वासघात किया।

• "बटोगे तो कटोगे" बोलकर UGC लाकर स्वर्ण समाज के बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया।

• राम मंदिर में चोरी कर हिंदुओं की आस्था पर डाका डाला गया।

• गौ-रक्षा के नाम पर सत्ता में आकर गौमांस कारोबारियों से चंदे लेने का धंधा बना लिया।

• साधु-संतों के रक्षक दिखाया जाता है, लेकिन उन्हीं के साथ धोखा किया जाता है।

आज देश भर में लोग BJP और मोदी सरकार के विरोध में केवल इस कारण नहीं खड़े हुए हैं कि सिर्फ NEET पेपर लीक हो रहे हैं, बल्कि उन हिंदू-विरोधी नीतियों और विश्वासघातों के कारण भी, जिन्हें तुमने अपने पैरों तले कुचलकर आगे बढ़ने की सोची है। खुद विचार करना, भाजपा वालों।

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20/07/2026

No. 296
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जिस भारतीय जनता पार्टी (BJP) में बैठे सांसद, विधायक और मंत्री बलात्कार के आरोपी हों, और पूरी पार्टी उनके बचाव में काम करती रही हो। यहाँ तक कि बृजभूषण पर POCSO के केस और दिल्ली धरने के समय अमित शाह खुद मामले को शांत करने के लिए बैठक तक करते हैं।

पर यही भारतीय जनता पार्टी (BJP), मोदी और अमित शाह के इशारे पर, निर्दोष आसाराम बापू को दोषी बनाने के लिए छेड़छाड़ के लगे आरोप को बलात्कार बताकर मीडिया में प्रचारित करती है। फिर बापू को सजा देने के लिए कानून बदला जाता है। उनके स्वास्थ्य और जीवन के साथ खिलवाड़ करने के बाद भी उन्हें जमानत न मिले, इसके लिए सुप्रीम कोर्ट में अपने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को उतारा जाता है।

किस मुँह से ये BJP वाले खुद को हिंदूवादी कहते हैं, जो स्वयं संस्कृति रक्षक संतों के भक्षक बने बैठे हैं?

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20/07/2026

No. 297
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2014 के पहले राजीव भाई दीक्षित और आसाराम बापू स्वदेशी आंदोलन व घरवापसी के दो प्रमुख चेहरे थे। उन्हें कैसे गायब कर दिया गया?

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राजीव दीक्षित की रहस्यमय तरीके से मृत्यु हो जाती है। आसाराम बापू को बलात्कार के आरोप लगाकर जेल में डाल दिया जाता है और आजीवन कारावास की सजा हो जाती है, जबकि आरोपकर्ता लड़की की मेडिकल रिपोर्ट और FIR में रेप का कोई जिक्र तक नहीं होता। तो फिर 90 वर्ष की उम्र में आसाराम बापू को आजीवन कारावास की सजा कैसे हो गई?

चलिए जानते हैं विस्तार से...

2012 में आसाराम बापू को किस तरह जेल में डालना है, उसकी पूरी स्क्रिप्ट कांग्रेस की सोनिया गांधी द्वारा तैयार करा दी गई थी।

POCSO Act कानून के तहत आसाराम बापू को फँसाकर जेल में डालने की पूरी तैयारी हो चुकी थी। इस कानून को लागू करने के लिए 2012 में निर्भया केस को मुद्दा बनाया जाता है। लगातार मीडिया ट्रायल के चलते देशभर में माहौल गर्म हो जाता है और कांग्रेस 20 दिसंबर 2012 को POCSO Act कानून लेकर आती है।

इस कानून का पहला शिकार आसाराम बापू को बनाया जाता है। 20 अगस्त 2013 को बापू पर जोधपुर की घटना बताकर दिल्ली के कमला मार्केट थाने में रात 2 बजे POCSO Act के तहत FIR दर्ज की जाती है और 31 अगस्त 2013 को इंदौर आश्रम से गिरफ्तार कर जोधपुर जेल में डाल दिया जाता है।

लड़की की मेडिकल रिपोर्ट और FIR में बलात्कार का कोई जिक्र ही नहीं होता। आरोप छेड़छाड़ का लगाया जाता है।

2014 में कांग्रेस बुरी तरह हारती है और BJP 280 सीटों के साथ सत्ता में आ जाती है। नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बनाए जाते हैं।

5 वर्षों तक बिना एक दिन की जमानत दिए जेल में रखकर केस चलाया जाता है।

कांग्रेस के बनाए गए POCSO कानून के आधार पर आगे आसाराम बापू को सजा दी जाती, तो 3 से 4 वर्ष की सजा होती। इसलिए नरेंद्र मोदी और अमित शाह द्वारा कानून ही बदल दिया जाता है।

और इस बदलाव के लिए आसिफा कठुआ रेप केस को मुद्दा बनाया जाता है। घटना जनवरी में होती है। 16 अप्रैल 2018 से मीडिया इसे उछालना शुरू करता है, आसाराम बापू केस के निर्णय के एक सप्ताह पहले ही।

22 अप्रैल 2018 को POCSO Act में संशोधन कर दिया जाता है। 3 से 4 वर्ष की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया जाता है।

22 अप्रैल 2018 को संशोधन के बाद, 25 अप्रैल 2018 को, दो दिन बाद, आसाराम बापू को उम्रकैद की सजा दे दी जाती है। न मेडिकल रिपोर्ट में रेप का जिक्र, न FIR में, न कोई चश्मदीद गवाह, फिर भी आसाराम बापू को बलात्कार का आरोपी बना दिया जाता है।

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अब सवाल यह उठता है कि BJP ने ऐसा क्यों? क्योंकि BJP तो हिंदूवादी पार्टी है!

2014 तक कांग्रेस के हिंदू-विरोधी रवैये, भ्रष्टाचार और घोटालों के चलते उसकी नीतियों का खुलकर विरोध शुरू हो चुका था। ईसाई मिशनरियों तथा मल्टीनेशनल कंपनियों को यह समझ में आ गया था कि कांग्रेस अगर सत्ता में वापस आ भी जाए, तो भी उनका धंधा अब घाटे में ही जाएगा।

क्योंकि आसाराम बापू और राजीव दीक्षित अमेरिका और यूरोप जैसे बड़े देशों के लिए संकट बनते जा रहे थे और भारत में उनकी लोकप्रियता तथा जनविश्वास लगातार बढ़ता जा रहा था।

इसलिए अब सत्ता में एक ऐसे चेहरे की जरूरत थी, जो दिखे हिंदुत्व का कट्टर समर्थक, लेकिन काम ईसाई मिशनरियों और मल्टीनेशनल कंपनियों के इशारों पर करता रहे।

और इस काम के लिए नरेंद्र मोदी और अमित शाह को विदेशी एजेंट के रूप में लाया जाता है।

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20/07/2026

No. 299
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भारत विश्वगुरु की जो बड़ी-बड़ी बातें चुनावी मंचों से की जाती हैं, क्या वे सिर्फ खोखली बातें होती हैं, बस मोदी जी की?

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किसी भी देश का सच्चा विकास उसकी शिक्षा व्यवस्था तय करती है कि वह देश कितना आगे जाएगा।

आज हर देश अपनी शिक्षा व्यवस्था पर काम कर रहा है, क्योंकि जिस देश की शिक्षा व्यवस्था ठीक नहीं होती, उस देश की संस्कृति कभी सुरक्षित नहीं रह सकती।

भारत की गुरुकुल शिक्षा पद्धति जब तक जीवित थी, तब तक सारी दुनिया हमारे आगे नतमस्तक थी। इसीलिए योजनाबद्ध तरीके से भारत की गुरुकुल शिक्षा समाप्त की गई।

• भारत में चल रहे गुरुकुलों को जलाया गया, लूटा गया और तोड़ा गया।

• नालंदा विश्वविद्यालय, तक्षशिला विश्वविद्यालय, विक्रमशिला विश्वविद्यालय, उज्जयिनी का गुरुकुल, काशी, मथुरा, पुरी आदि के गुरुकुलों को लूटा और तोड़ा गया। कहीं चर्च बने, तो कहीं मस्जिदें बना दी गईं।

• गुरुकुलों के आचार्यों का सिर काटकर उनकी हत्या की गई, उनका अपमान किया गया और उन्हें प्रताड़ित किया गया।

• संस्कृत और भारतीय ज्ञान-परंपरा पर प्रतिबंध लगाए गए।

• गुरुकुल शिक्षा को "पिछड़ा" और "अंधविश्वासी" कहकर बदनाम किया गया।

• अंग्रेजी शिक्षा को बढ़ावा देकर मानसिक गुलामी थोपी गई।

• गुरुकुलों की भूमि जब्त कर वहाँ चर्च, स्कूल और सरकारी संस्थान बनाए गए।

• भारतीय ग्रंथों को नष्ट किया गया, लाखों पांडुलिपियाँ जला दी गईं।

इस देश की शिक्षा व्यवस्था को नष्ट करने के लिए मुगलों और अंग्रेजों ने पूरी शक्ति लगा दी। पर इस देश की शिक्षा व्यवस्था को सबसे अधिक बर्बाद किया अंग्रेजों के मैकॉले ने, जिसका उद्देश्य साफ था।

थॉमस बैबिंगटन मैकॉले की सोच थी कि इस देश में ऐसी एक नस्ल तैयार की जाए, जो खून से तो भारतीय हो, लेकिन सोच, भाषा, धर्म और संस्कृति से अंग्रेज हो।

2 फ़रवरी 1835 को लिखे गए अपने प्रसिद्ध दस्तावेज़ "Minute on Indian Education" में उसने यह बात लिखी थी।

उस समय मैकॉले भारत की Governor-General's Council का सदस्य था।

यह दस्तावेज़ उसने तत्कालीन गवर्नर-जनरल लॉर्ड विलियम बेंटिंक और परिषद के समक्ष भारत की शिक्षा नीति पर अपनी सिफारिश के रूप में प्रस्तुत किया था।

इसी दस्तावेज़ के आधार पर अंग्रेज़ी माध्यम की शिक्षा को बढ़ावा दिया गया और भारत भर में कॉन्वेंट स्कूल सीधे मैकॉले की नीति पर चलने शुरू हुए। आज भारत भर में ईसाई संस्थाओं (Catholic, Protestant, CSI, CNI आदि) द्वारा संचालित स्कूलों की संख्या लगभग 25,000–30,000 के बीच मानी जाती है।

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• 2014 में मोदी जी के प्रधानमंत्री बनने पर इस देश को उम्मीद थी कि अब भारत की शिक्षा व्यवस्था पर काम होगा, फिर से गुरुकुलों की शुरुआत होगी और भारत विश्वगुरु की ओर आगे बढ़ेगा।

• लेकिन मोदी जी का "भारत विश्वगुरु" का भाषण चुनावी मंचों पर जनता के वोटों के लिए दिखावा और ढोंग के अलावा कुछ नहीं निकला।

• उल्टा मोदी जी ने सत्ता में ईसाई समर्थन पाने के लिए 80 हजार से अधिक सरकारी स्कूलों को भी बंद करके लोगों को कॉन्वेंट स्कूलों की ओर धकेल दिया।

• शिक्षा और स्वास्थ्य को लेकर जो लूट मेडिकल माफिया और कॉन्वेंट स्कूलों ने मचा रखी है, उस पर बोलने की भी हिम्मत किसी में नहीं है।

• राजीव दीक्षित ने शिक्षा और स्वास्थ्य को निःशुल्क बनाने के लिए गुरुकुलों पर काम शुरू ही किया था कि उन्हें जान से मार दिया जाता है।

https://www.facebook.com/share/v/1EPaN1UiWv/

• संत आसाराम बापू, जिन्होंने लुप्त हो चुकी भारत की गुरुकुल परंपरा को फिर से शुरू कर 50 से अधिक आधुनिक गुरुकुलों की स्थापना की।

https://www.facebook.com/share/v/1F67b2Y9a5/

• आसाराम बापू को रास्ते से हटाने और गुरुकुलों को बंद करने के लिए 2008 से काम शुरू हो गया था। पहले उनके गुरुकुल के 2 बच्चों की हत्या कर उन्हें काला जादू और तांत्रिक बताकर बदनाम किया गया, लेकिन इसमें सफलता नहीं मिली।

https://www.facebook.com/share/v/1GBz9hGoBD/

इसलिए 2013 में उनके ही गुरुकुल की एक लड़की द्वारा उन पर बलात्कार के झूठे आरोप लगवाकर उन्हें जेल में डाला जाता है और आजीवन कारावास की सजा दे दी जाती है।

और इस काम में मोदी जी और अमित शाह का पूरा समर्थन ईसाई मिशनरियों को मिलता है।

• 2014 से लेकर अब तक मोदी जी का कोई एक ऐसा काम सोचकर देखिए, जिससे आपको लगे कि हाँ, हम इस कार्य से विश्वगुरु की ओर जा रहे हैं।

https://youtube.com/shorts/rJGiCmsxJQg?si=AzyjUCYt7nBkzx2K

मोदी जी ने 2014 के बाद से सिर्फ विदेशी दौरे करके विदेशी कंपनियों को भारत में स्थापित करने का काम किया है।

भारत की सरकारी चीजों को विदेशी प्राइवेट सेक्टर की तरफ धकेला है।

जो काम कांग्रेस को नाकों चने चबाकर करना पड़ता, वह काम मोदी जी हिंदुत्व का चोला पहनकर बड़ी आसानी से कर गए।

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16/07/2026

No. 298
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मोदी जी ने न्यूज़ीलैंड में भाषण देते हुए "Beef" कहा था या "Wheat"?

अगर "Beef" नहीं, "Wheat" कहा गया था, तो क्या इससे यह तथ्य बदल जाता है कि भारत आज भी दुनिया के सबसे बड़े बीफ निर्यातक देशों में गिना जाता है?

2014 से पहले मोदी जी द्वारा ही कहा गया था कि कांग्रेस के बढ़ते बीफ निर्यात को देखकर "आत्मा जलती है" और "मन रोता है"। तो फिर सत्ता में आते ही उसी बीफ निर्यात से आपका मन क्यों नहीं रो रहा? आपकी आत्मा इतनी शीतल कैसे हो गई है?

• मोदी जी, आपके सत्ता में आने के बाद क्या बदला?

• क्या भारत की बीफ रैंकिंग में कोई बड़ा बदलाव आया?

• क्या कांग्रेस और BJP की नीतियों में इस मुद्दे पर कोई स्पष्ट अंतर दिखाई दिया?

• या सत्ता में आते ही BJP सरकार विदेशी फंडिंग पर चलने लगी है?

• चुनावी बॉन्ड के सार्वजनिक रिकॉर्ड के अनुसार 2024–25 में मांस निर्यात क्षेत्र से जुड़ी एक विदेशी कंपनी ने BJP को ₹30 करोड़ का योगदान दिया (जबकि पिछले वर्ष यह राशि लगभग ₹2 करोड़ थी)। तो क्या यह अब चंदे और धंधे का खेल चल रहा है?

• चुनाव के समय गाय को माता बोलने वाली BJP सरकार चुनाव के बाद गौ माता से अपना नाता क्यों तोड़ लेती है?

• क्या यही कारण है कि मोदी जी को गौ-रक्षकों में गुंडे नज़र आते हैं?

• क्या यही कारण है कि मध्यप्रदेश की BJP सरकार 14 गौ-रक्षकों को आजीवन कारावास की सजा दिलवा देती है?

• 5000 से अधिक कत्लखानों में ले जाई जा रही गायों को बचाकर, बिना किसी चंदे और अनुदान के, उनके लिए देशभर में 1000 से अधिक गौशालाएँ बनाने वाले आसाराम बापू थे, जो आज आजीवन कारावास की सजा के चलते जेल में हैं।

https://www.facebook.com/share/v/18pEo3crRH/

https://youtube.com/playlist?list=PLbBmiOH-57U7L72Q_PfkuXJjeQ7z2tWbx&si=nk7Xhtn-AbG07cZW

• राजीव दीक्षित, जो गौ-रक्षा पर खुलकर बोला करते थे, उनके साथ क्या हुआ?

https://youtu.be/01Q7MoyXkI0?si=AKIX710HZxFA2aK5

जो भी गौ-रक्षा या संस्कृति रक्षा के लिए आगे आते हैं, उनकी रहस्यमय तरीके से मृत्यु हो जाती है या आसाराम बापू की तरह उन्हें झूठे आरोपों में फँसाकर उनका अस्तित्व ही समाप्त कर दिया जाता है। आसाराम बापू, जिन्होंने अपना पूरा जीवन देश के युवाओं को संयमी और चरित्रवान बनाने में लगाया, उन्हें ही बलात्कार का आरोपी बनाकर आजीवन कारावास में धकेल दिया जाता है।

आखिर कब तक मोदी सरकार विदेशी कंपनियों के एजेंट बनकर हिंदुओं की भावनाओं से खेलती रहेगी?

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11/07/2026

BJP ने हिंदुओं को बैसाखी पर ला दिया है हम है तो हिन्दू है नहीं तो नहीं।

एक तरफ़ भारत 2036 ओलंपिक की मेजबानी की तैयारी कर रहा है। लेकिन क्या हमने कभी सोचा है कि जिन खिलाड़ियों ने देश का नाम अंत...
04/07/2026

एक तरफ़ भारत 2036 ओलंपिक की मेजबानी की तैयारी कर रहा है। लेकिन क्या हमने कभी सोचा है कि जिन खिलाड़ियों ने देश का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया, आज उनकी स्थिति क्या है?

नीरज चोपड़ा, अभिनव बिंद्रा, पी.वी. सिंधु और साइना नेहवाल जैसे खिलाड़ियों को पदक जीतने के बाद सम्मान मिला। लेकिन सवाल यह है कि चैंपियन बनने से पहले उन्हें तैयार करने के लिए सरकार और खेल व्यवस्था ने कितना सहयोग दिया?

रिपोर्टों में ऐसे कई खिलाड़ियों का भी उल्लेख मिलता है, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन किया, लेकिन बाद में आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। तेजस्विन शंकर ने चीन में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीता, फिर भी उन्हें अपेक्षित पहचान नहीं मिली। यमुना कुमार पासवान के बारे में बताया जाता है कि देश का प्रतिनिधित्व करने के लिए उन्हें व्यक्तिगत ऋण लेना पड़ा। सीधा साहू के बारे में कहा गया कि वादों के बावजूद उन्हें घोषित सहायता नहीं मिली। पैरा एथलीट पुष्पा मीणा के संबंध में भी यह कहा गया कि अंतरराष्ट्रीय पदक जीतने के बाद भी उन्हें पर्याप्त आर्थिक सहयोग नहीं मिला। कमल कुमार, दीपक कुमार और दिनेश कुमार जैसे खिलाड़ियों के बारे में भी ऐसी रिपोर्टें सामने आईं कि उन्हें आजीविका चलाने के लिए अन्य छोटे-छोटे कार्य करने पड़े।

यदि हमारे अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों की स्थिति को लेकर इतने प्रश्न उठ रहे हैं, तो फिर एक बड़ा सवाल यह भी है—

क्या केवल ओलंपिक का आयोजन करना ही पर्याप्त है, या पहले खिलाड़ियों के भविष्य, प्रशिक्षण और सम्मान को मजबूत करना अधिक आवश्यक है?

इसी बीच अहमदाबाद स्थित संत श्री आशारामजी आश्रम की भूमि को लेकर भी विवाद सामने आया है। आश्रम प्रबंधन का कहना है कि उनके पास भूमि से संबंधित सभी वैध दस्तावेज उपलब्ध हैं। सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता कीर्ति आहूजा ने भी एक वीडियो में यही बात कही है कि आश्रम के पास भूमि से संबंधित सभी वैधानिक दस्तावेज उपलब्ध हैं।

कुछ रिपोर्टों में दावा किया जा रहा है कि 2036 ओलंपिक की तैयारियों के लिए इस भूमि की आवश्यकता हो सकती है। यदि ऐसा है, तो प्रश्न उठता है कि क्या ऐसे आश्रम को प्रभावित करना उचित होगा, जहाँ से 450 आश्रम, 18 हजार बाल संस्कार केंद्र, सैकड़ों गुरुकुल, माता-पिता पूजन, तुलसी पूजन तथा अनेक सामाजिक और सांस्कृतिक सेवा कार्य संचालित होने का दावा किया जाता है?

क्या विकास और आस्था के बीच ऐसा संतुलित समाधान नहीं निकाला जा सकता, जिसमें खिलाड़ियों का भविष्य भी मजबूत हो और करोड़ों लोगों की आस्था तथा सेवा कार्यों से जुड़े संस्थान भी सुरक्षित रहें?

03/07/2026

No. 289
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2008 से शुरू हुआ खेल—आज हर हिन्दू संगठन तक पहुँच गया?

जब संत आसाराम बापू के समर्थक यह कहते रहे कि संत आसाराम बापू को झूठे आरोपों में फँसाकर बदनाम किया गया, तब बहुत से लोग चुप रहे।

कई लोगों ने कहा—“हमें क्या लेना-देना?” लेकिन आज सवाल बड़ा है।

क्या देश के धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक संगठनों की स्वतंत्र आवाज़ें धीरे-धीरे खत्म की जा रही हैं?

पहले हर संगठन और संस्था का विश्वास जीतकर उसमें अपने लोगों को शामिल करना, फिर उस संस्था के प्रमुख व्यक्ति को किसी न किसी विवाद में फँसा देना या रहस्यमय तरीके से उसकी मृत्यु हो जाना—क्या यह सब केवल संयोग है, या एक सोचा-समझा षड्यंत्र?

आज जितने भी बड़े संगठन या संस्थाएँ हैं, उनमें ज़्यादातर लोग BJP के बताए जाते हैं। चाहे वह RSS हो, विश्व हिन्दू परिषद हो या बजरंग दल। दिखने के लिए तो हिन्दू हितैषी हैं, पर काम BJP के हितों को देखकर ही करते हैं।

बजरंग दल के दारा सिंह को उम्रकैद, संत आसाराम बापू को लगभग 90 वर्ष की आयु में उम्रकैद, अशोक सिंघल जी की रहस्यमय मृत्यु, कमलेश तिवारी की हत्या, तथा प्रवीण तोगड़िया को जान से मारने की कथित साजिश—हालाँकि वे बच गए और बाद में उन्हें विश्व हिन्दू परिषद से बाहर कर दिया गया।

https://x.com/i/status/1679145252589043712

https://x.com/i/status/2025861608380186658

करणी सेना के सुखदेव सिंह गोगामेड़ी, महिपाल सिंह मकराना, विनय सिंह सहित 15 से 20 लोगों की हत्या हो जाती है।

रामदेव बाबा, जो कभी देशहित, महँगाई, काले धन और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर खुलकर बोलते थे, आज एक शब्द तक नहीं बोलना चाहते।

क्योंकि सबको इस बात का पता है कि इस देश की सबसे बड़ी संस्थाओं में से एक, 10 करोड़ समर्थकों वाले संत आसाराम बापू को यदि झूठे आरोपों में फँसाकर निर्दोष होते हुए भी जेल में रखा जा सकता है, तो हमारा क्या हाल होगा।

जब संत आसाराम बापू को जेल में डालकर यह सब हो रहा था, तब अधिकांश लोग यह कहकर किनारा कर रहे थे कि “हमें इससे क्या, जो हो रहा है वह आसाराम बापू के साथ हो रहा है।” लेकिन उसी का परिणाम है कि आज हर संस्था और संगठन राजनीति की चपेट में आता जा रहा है।

राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी, शिवराज सिंह जैसे नेता, जो कभी आसाराम बापू के सत्संगों में जाकर पार्टी के लिए उनके भक्तों को रिझाते थे, बापू के साथ हो रहे कथित अन्याय को देखकर भी अपने पद और कुर्सी को बचाने में लगे रहे। आज पार्टी में उनकी स्थिति क्या है, यह किसी से छिपा नहीं है।

जो हिन्दू समाज कांग्रेस की नीतियों और विधर्मियों के अत्याचारों के विरुद्ध संघर्ष कर रहा था, उसके उन नेताओं को, जो किसी पार्टी के नहीं बल्कि हिन्दुत्व के लिए कार्य करते थे, समाप्त करके मोदी और अमित शाह ने BJP की बैसाखी पर निर्भर बना दिया कि “हम हैं तो तुम खड़े हो, नहीं तो BJP की बैसाखी हटते ही तुम ज़मीन पर आ जाओगे।”

विपक्षी दल, जिन्होंने यह सोचकर चुप्पी साध ली कि आसाराम बापू से उनका कोई लेना-देना नहीं है, आज स्वयं ऐसी परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं जहाँ उनके निर्वाचित नेता भी दल बदलकर BJP में शामिल हो रहे हैं।

मोदी और अमित शाह की चाल बिल्कुल शकुनि के पासे की तरह फेंकी जा रही है। चुनाव कोई भी जीते, लेकिन सत्ता में आएगी तो BJP।

और इस काम में ईसाई मिशनरियों का मोदी और अमित शाह को पूरा समर्थन है, क्योंकि जो काम कांग्रेस के समय हिन्दुओं के विरोध के कारण कठिन था, वही काम मोदी और अमित शाह के हिन्दुत्व के नकाब के पीछे आसानी से किया जा रहा है।

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