05/06/2021
99 अस्माए हुस्ना और इन के फ़ज़ाइल #01
हर विर्द के अव्वल व आखिर एक बार दुरुद शरीफ पढ़ लीजिये, फाएदा ज़ाहिर न होने की सूरत में शिकवा करने के बजाए अपनी कोताहियो की शामत तसव्वुर कीजिये और अल्लाह عزوجل की मस्लहत पर नज़र रखिये।
يَااَللّٰهُ (या अल्लाहु)
जो हर नमाज़ के बाद 100 बार पढ़े ان شاء الله उसका बातिन कुशादा हो जाएगा।
📚 मदनी पंजसुरह, 246
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