14/08/2026
🇮🇳 हिंदुस्तान — हमारी सदियों पुरानी सरज़मीं 🇮🇳
हिंदुस्तान सिर्फ़ एक ज़मीन का नाम नहीं, बल्कि सदियों से चली आ रही तहज़ीब, मोहब्बत, भाईचारे और रूहानी विरासत का नाम है।
इस सरज़मीं पर सबसे पहले ख़्वाजा ग़रीब नवाज़ हज़रत ख़्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती अजमेरी रहमतुल्लाहि अलैह ने अपने फ़ैज़ और मोहब्बत से दिलों को रोशन किया। इसके बाद इस मुल्क की सरज़मीं ने सरकार-ए-सबीर पाक, आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा ख़ान फ़ाज़िले बरेलवी, सरकार मुफ़्ती-ए-आज़म हिंद, सरकार ताजुश्शरिया जैसे अज़ीम बुज़ुर्गों और उलमा को देखा, जिनकी इल्मी और रूहानी ख़िदमात का असर आज भी लाखों दिलों पर है।
मुसलमान इस मुल्क में सदियों से रहते आए हैं और हिंदुस्तान की तहज़ीब, इल्म, संस्कृति और समाज में अपना योगदान देते आए हैं। इसलिए हिंदुस्तान मुसलमानों का भी अपना वतन है, अपनी सरज़मीं है और अपनी रूहानी विरासत का हिस्सा है।
और आज भी अल्हम्दुलिल्लाह, हज़ूर क़ाइदे मिल्लत हज़रत अल्लामा मुफ़्ती असजद रज़ा ख़ान क़ादरी साहब क़िब्ला, जानशीने ताजुश्शरिया, अपनी इल्मी, दीऩी और क़ौमी ज़िम्मेदारियों के ज़रिए हिंदुस्तान के मुसलमानों की रहनुमाई और क़ियादत फ़रमा रहे हैं।
हम इस मुल्क को अपना वतन मानते हैं, इसकी अमन-ओ-सलामती चाहते हैं और इसकी तरक़्क़ी में अपना किरदार अदा करना अपना फ़र्ज़ समझते हैं।
🇮🇳 सारे जहाँ से अच्छा, हिंदुस्तान हमारा। 🇮🇳