31/12/2025
भारतीय इतिहास में 30 दिसंबर एक अत्यंत महत्वपूर्ण तारीख है।
इसी दिन 30 दिसंबर 1943 को, 1857 के बाद पहली बार भारत ने ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन से अपनी एक भूमि वापस हासिल की।
Subhas Chandra Bose ने 21 अक्टूबर 1943 को सिंगापुर में Azad Hind Government और भारतीय राष्ट्रीय सेना के गठन की घोषणा की थी। जापान वह एकमात्र देश था जिसने आज़ाद हिंद सरकार को मान्यता दी और उसी के कब्ज़े में अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह था।
नेताजी का स्पष्ट तर्क था—
चूंकि अंडमान भारत का हिस्सा हैऔर आज़ाद हिंद सरकार भारत की निर्वासित सरकार है, इसलिए द्वीपसमूह का नियंत्रण आज़ाद हिंद सरकार को सौंपा जाना चाहिए।
6 नवंबर 1943 को ग्रेटर ईस्ट एशिया सम्मेलन में जापान के प्रधानमंत्री जनरल तोजो ने अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह आज़ाद हिंद सरकार को सौंपने की घोषणा की।
29 दिसंबर 1943 को नेताजी पोर्ट ब्लेयर पहुँचे और 30 दिसंबर 1943 को एक विशाल जनसभा में तिरंगा फहराया गया और पहली बार स्वतंत्र भारत की धरती पर राष्ट्रगान गूंजा।
नेताजी ने इस ऐतिहासिक क्षण को अपने जीवन का अविस्मरणीय अनुभव बताया— जब उन्होंने रॉस द्वीप पर पूर्व ब्रिटिश मुख्य आयुक्त के आवास पर तिरंगे को लहराते देखा।
यह घटना केवल ध्वजारोहण नहीं थी, बल्कि भारत के स्वाभिमान, संघर्ष और संकल्प की वापसी थी।
[Netaji Subhas Chandra Bose, Azad Hind Government, Indian Nationa lArmy, Andaman And Nicobar, Port Blair]