Yadav Samaj Sewa Sanstha Mira-Bhayander

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"श्री कृष्णा की भक्ति में समर्पित, इस पेज पर पाएँ श्री कृष्ण के जीवन और शिक्षाओं से जुड़ी पोस्टें।"हमारा उद्देश्य श्री कृष्ण की शिक्षाओं को साझा करना और उनके प्रेम से सभी को प्रेरित करना है।"

30/05/2026

Ayodhya dham 🙏🙏🙏 🥰

30/05/2026

Maaa bete ka pyar 😊🥰

15/05/2026

Jay shree ram

15/05/2026

Chalo ayodhya dham 😊🥰🙏

15/05/2026

shiv shankar bhagwan ki jay

Jay Shree Krishna 🙏💫🌟Good Night
14/06/2025

Jay Shree Krishna 🙏💫🌟
Good Night

**योगमाया और मोह** हिंदू दर्शन में गहरे आध्यात्मिक अर्थ रखते हैं। ये दोनों ही **भगवान की दिव्य शक्ति** हैं, लेकिन इनका प...
14/06/2025

**योगमाया और मोह** हिंदू दर्शन में गहरे आध्यात्मिक अर्थ रखते हैं। ये दोनों ही **भगवान की दिव्य शक्ति** हैं, लेकिन इनका प्रभाव अलग-अलग होता है।

# # # **योगमाया** – दिव्य शक्ति
योगमाया को **भगवान की आध्यात्मिक शक्ति** माना जाता है, जो भक्तों को **परम सत्य** की ओर ले जाती है। यह **माया का शुद्ध रूप** है, जो केवल भगवान की लीला को प्रकट करने के लिए कार्य करती है। श्रीकृष्ण ने गीता में कहा है कि वे अपनी **योगमाया** से आच्छादित रहते हैं, जिससे केवल सच्चे भक्त ही उन्हें पहचान सकते हैं[43dcd9a7-70db-4a1f-b0ae-981daa162054](https://www.dharmsansar.com/2025/03/yogmaya.html?citationMarker=43dcd9a7-70db-4a1f-b0ae-981daa162054 "1").

- **योगमाया का कार्य** – यह भक्तों को भगवान की ओर आकर्षित करती है और उन्हें **भक्ति, ज्ञान और मोक्ष** की ओर ले जाती है।
- **श्रीकृष्ण के अवतार में योगमाया** – जब श्रीकृष्ण जन्म लेने वाले थे, तब योगमाया ने **देवकी के गर्भ से बलराम को रोहिणी के गर्भ में स्थानांतरित किया**। इसके अलावा, जब कंस ने यशोदा के गर्भ से जन्मी कन्या को मारने की कोशिश की, तो वह योगमाया ही थीं, जिन्होंने आकाश में जाकर कंस को चेतावनी दी[43dcd9a7-70db-4a1f-b0ae-981daa162054](https://m.bharatdiscovery.org/india/%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%97%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%BE?citationMarker=43dcd9a7-70db-4a1f-b0ae-981daa162054 "2").

# # # **मोह** – भौतिक भ्रम
मोह **भौतिक जगत का आकर्षण** है, जो जीव को **संसार में बांधकर रखता है**। यह **अज्ञान और अहंकार** से उत्पन्न होता है और व्यक्ति को **सच्चे ज्ञान से दूर** करता है।

- **मोह का प्रभाव** – मोह के कारण व्यक्ति **सांसारिक सुख-दुख में उलझा रहता है** और भगवान को पहचान नहीं पाता।
- **मोह से मुक्ति** – श्रीकृष्ण गीता में कहते हैं कि **जो व्यक्ति भक्ति और ज्ञान के मार्ग पर चलता है, वह मोह से मुक्त हो जाता है** और परम सत्य को प्राप्त करता है।

# # # **योगमाया और मोह का अंतर**
| **योगमाया** | **मोह** |
|------------|--------|
| भगवान की दिव्य शक्ति | भौतिक भ्रम |
| भक्तों को भगवान की ओर ले जाती है | जीव को संसार में बांधकर रखती है |
| मोक्ष और ज्ञान प्रदान करती है | अज्ञान और अहंकार बढ़ाती है |
| श्रीकृष्ण की लीला को प्रकट करती है | व्यक्ति को सांसारिक सुख-दुख में उलझाती है |

**निष्कर्ष:** योगमाया **सत्य और भक्ति** की ओर ले जाती है, जबकि मोह **भौतिक जगत के आकर्षण** में उलझाकर रखता है। जो व्यक्ति **भगवान की शरण** में जाता है, वह योगमाया के प्रभाव में आकर **मोक्ष प्राप्त करता है** और मोह से मुक्त हो जाता है।

आप इस विषय को [यहाँ](https://www.dharmsansar.com/2025/03/yogmaya.html) और [यहाँ](https://m.bharatdiscovery.org/india/%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%97%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%BE) विस्तार से पढ़ सकते हैं! 😊✨

धर्म संसार - भारत का पहला धार्मिक ब्लॉग

14/06/2025

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भगवद गीता के **सातवें अध्याय** को **ज्ञान-विज्ञान योग** कहा जाता है। इस अध्याय में भगवान श्रीकृष्ण **भौतिक और आध्यात्मिक...
14/06/2025

भगवद गीता के **सातवें अध्याय** को **ज्ञान-विज्ञान योग** कहा जाता है। इस अध्याय में भगवान श्रीकृष्ण **भौतिक और आध्यात्मिक ज्ञान** का विस्तार से वर्णन करते हैं और बताते हैं कि **संपूर्ण सृष्टि उन्हीं से उत्पन्न होती है और उन्हीं में विलीन होती है** 🙏💫🔥

भगवद गीता सातवाँ अध्याय ज्ञानविज्ञानयोग , Bhagavad Gita Seventh Chapter Gyanvigyan Yoga

भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं में से एक अत्यंत प्रेरणादायक कथा है **सुदामा और कृष्ण की मित्रता**।सुदामा और कृष्ण बचपन के मि...
14/06/2025

भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं में से एक अत्यंत प्रेरणादायक कथा है **सुदामा और कृष्ण की मित्रता**।

सुदामा और कृष्ण बचपन के मित्र थे। सुदामा अत्यंत निर्धन थे, जबकि कृष्ण द्वारका के राजा बन चुके थे। एक दिन, सुदामा अपनी पत्नी के आग्रह पर कृष्ण से मिलने द्वारका पहुंचे। उनके पास कृष्ण को देने के लिए कुछ भी नहीं था, सिवाय **मुट्ठी भर चिउड़े (पोहा)**। जब वे महल पहुंचे, कृष्ण ने उन्हें बड़े प्रेम से गले लगाया और उनके चरण धोए। सुदामा ने संकोचवश अपने चिउड़े छिपा लिए, लेकिन कृष्ण ने प्रेमपूर्वक उन्हें ले लिया और बड़े आनंद से खाए।

सुदामा बिना कुछ मांगे ही लौट आए, लेकिन जब वे अपने घर पहुंचे, तो देखा कि उनकी झोपड़ी एक सुंदर महल में बदल चुकी थी। यह कृष्ण की कृपा थी—उन्होंने अपने मित्र की **निस्वार्थ भक्ति और प्रेम** को पहचानकर उसे धन-वैभव प्रदान किया।

यह कथा हमें सिखाती है कि **सच्ची मित्रता में कोई स्वार्थ नहीं होता** और भगवान अपने भक्तों की भावनाओं को ही स्वीकार करते हैं, न कि बाहरी दिखावे

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