27/08/2026
“सत्गुरूचरण सेवूं
सदा सत्गुरूचरण सेवूं
तनु मन धन अर्पूनी गुरूपदी
आत्मस्वरूप पाहूं
मुक्तिललना भोगुनी नित्य
सत्गुरूगुण गाऊं
दत्तपदरजी लोळलोळुनी
प्रेमामृते न्हाऊं”
(श्रीपंत महाराज, बाळेकुंद्री)
ॐ श्री स्वामी समर्थ