seema didi-narmada seva

seema didi-narmada seva नर्मदा परिक्रमा सेवा , आश्रम देखरेख , नर्मदा पथ मार्गदर्शिका की लेखिका, नर्मदा अन्नक्षेत्र सेवा

सभी मैया भक्तों को नर्मदे हर मेरी मां की कही हुई बात हम दोनों बहने हमेशा याद रखते हैं कि लोगों की परवाह छोड़कर वह करो जि...
04/02/2026

सभी मैया भक्तों को नर्मदे हर
मेरी मां की कही हुई बात हम दोनों बहने हमेशा याद रखते हैं कि लोगों की परवाह छोड़कर वह करो जिसे करने में तुम्हें खुशी मिलती है प्रसिद्धि की इच्छा किए बगैर अपनी रुचि के कार्य को तन्मयता से करते रहो इससे मिलने वाला आनंद ही तुम्हारी वास्तविक उपलब्धि है ।
नर्मदा से अधिक प्रिय कुछ भी नहीं है मुझे । 24 घंटे मन उसी में रमा रहता है । नर्मदा की परिक्रमा करने वाले परिक्रमावासी भी मुझे बहुत प्रिय है । उनके लिए मुझे कुछ करना बहुत अच्छा लगता है लेकिन मैं उतना ही कर पाती हूं जितनी मेरी चादर है ।
नर्मदा मैया ने मेरा पहचान का दायरा इतना विशाल करके दिया है की मेरी चादर कभी-कभी बड़ी हो जाती है ।
नर्मदा खंड के हर आश्रम में शौचालय और महिलाओं के लिए स्नान गृह होना चाहिए ऐसा मेरा हमेशा से ही मत था और यह समय के अनुसार आवश्यक भी है ।
मेरे इस विचार को सपोर्ट किया था नर्मदा संवर्धन परिवार ने और हम सभी ने मिलकर कार्य किया और चार आश्रमों में दो शौचालय और एक स्नान गृह का निर्माण कर लिया । मेरे गांव उत्तर तट वृंदावन ढाबा , बिलगढा अमर दास जी महाराज उत्तर तट , रिछावर नरसिंहपुर जिला दक्षिण तट , हरई पंचम लाल यादव उत्तर तट ।
मैंने इन सभी की पोस्ट बनाकर फेसबुक पर पोस्ट की थी । इस पोस्ट को पढ़कर मुंबई डोंबिवली के एक परिक्रमावासी दिलीप जोशी जी का मुझे फोन आया और उन्होंने मुझसे इस कार्य के बारे में जानकारी ली । इसे बनाने में कितना खर्च आता है , कैसे इस कार्य को किया जाता है । उन्होंने पूछा और मैंने बताया । दिलीप जोशी जी सपत्नी परिक्रमा कर चुके हैं इसलिए वे आश्रमों की परिस्थितियों से अच्छी तरह परिचित थे ।उन्हें मुझसे बात करके बड़ी संतुष्टि हुई और उन्होंने मुझसे पूछा की क्या कोई ऐसा आश्रम है जहां शौचालय की आवश्यकता हो तो वहां पर हम इस निर्माण कार्य में आपकी सहायता करना चाहते हैं ।
मैंने उन्हें दो-तीन आश्रमों के नाम बताएं जहां पर हमें शौचालय निर्माण का कार्य करना है । इसमें एक आश्रम था मंडला जिले का फड़की संगम , लक्ष्मण बाबा का आश्रम जो बहुत ही सुंदर स्थान पर है मैया के किनारे लेकिन भौगोलिक स्थिति बहुत ही कठिन । गांव में अभी तक सड़क नहीं बनी है । क्योंकि बड़ी-बड़ी चट्टानें बड़े-बड़े पत्थर होने से सड़क बनाना अति दुष्कर कार्य है इसलिए शायद सरकार ने वहां पर रुचि नहीं ली कभी ।
लक्ष्मण बाबा कई वर्षों से मुझसे जुड़े हैं और अन्न क्षेत्र के लिए कुछ लोगों की मदद से मैं वहां का संचालन करती रहती हूं । 1 वर्ष पहले वहां पर गद्दे और कंबल की व्यवस्था भी की थी ।
दिलीप जोशी जी मुंबई डोंबिवली की रहने वाले हैं और वहीं के तिलक नगर विद्या मंदिर स्कूल से पढ़े हैं । 1974 के एसएससी बैच के उनके मित्र मंडल से उन्होंने इस कार्य के लिए मदद मांगी और सभी ने अपनी इच्छा अनुसार सहयोग दिया और एक बड़ी रकम एकत्र हो गई ।
और आश्रम में शौचालय बनने की तैयारी प्रारंभ हो गई । निवास नाम के छोटे से शहर में एक नर्मदा भक्त राजेश रजक जी मेरे परिचित थे उन्होंने इस का सामान खरीदने में हमारी मदद की । लेकिन कोई भी ट्रैक्टर और टेंपो गांव में जाने के लिए तैयार नहीं था। पत्थरों के कारण ट्रैक्टर पलट सकता था इसलिए बहुत दूर से सामान को मजदूरों द्वारा आश्रम तक पहुंचाया गया । बड़ी कठिन परिस्थितियों में निर्माण हो गया और इसका उपयोग भी प्रारंभ हो गया है ।
मैं दिलीप जोशी जी और उनके सभी मित्रों का सादर अभिनंदन करती हूं जिन्होंने हमें मदद की और आगे भी मदद का आश्वासन दिया । नर्मदा मैया से प्रार्थना है आप सभी स्वस्थ रहें , आनंदित रहें और इस तरह के नेक कार्य आप लोगों के हाथ से होता रहे ।
आप सभी के स्वस्थ जीवन की मंगल कामना के साथ सीमा वीरेंद्र का नर्मदे हर

स्नेह , आशीर्वाद और दुआओं की ताकत को कभी कम मत आंकिए  ....यह वह खामोश ऊर्जा है जो आपके असंभव कार्यों को संभव बनाने की सब...
01/02/2026

स्नेह , आशीर्वाद और दुआओं की ताकत को कभी कम मत आंकिए ....
यह वह खामोश ऊर्जा है जो आपके असंभव कार्यों को संभव बनाने की सबसे बड़ी शक्ति है......।
अन्न क्षेत्र समाप्त हुआ और 2026 के लिए मार्गदर्शिका पर काम प्रारंभ हो गया ।
बहुत मेहनत करती हूं और ढेर सारा आशीर्वाद , स्नेह पाती हूं नर्मदा खंड के लोगों का , आश्रमों का , परिक्रमावासियों का ।
रेवा मैया यह कृपा जीवन पर्यंत बनाए रखना बस यही भाव है ।
हर नर्मदे हर

नर्मदे हर 2026 का अन्न क्षेत्र समाप्त कर मुंबई वापस आ गई हूं। लेकिन मन अभी भी जबलपुर से दूर  चल रहे परिक्रमावासियों के स...
22/01/2026

नर्मदे हर 2026 का अन्न क्षेत्र समाप्त कर मुंबई वापस आ गई हूं। लेकिन मन अभी भी जबलपुर से दूर चल रहे परिक्रमावासियों के साथ रह गया है । काश उन सभी से भी मिलने का मौका मिलता । उनकी भी सेवा करने का मौका मिलता । नर्मदे हर का जय घाेष अभी भी कानों में गूंज रहा है जो आते जाते परिक्रमावासी बोल रहे थे ।
बहुत ही गहमा गहमी थी इस बार बहुत ज्यादा ही संख्या में परिक्रमा वासी चल रहे थे इसलिए बातचीत का मौका लोगों से बहुत कम मिल पाया मुझे । पूरा समय भोजन , दवाइयां देने में , टोपी मोजा देने में निकल गया ।
लेकिन सभी के पास पीडीएफ देखकर बहुत खुशी महसूस हो रही थी । लेकिन कुछ को शिकायत भी थी कि आपकी पुस्तक हमने सब जगह ढूंढी कहीं नहीं मिली ।
भोजन करने के बाद सब के मुख मंडल पर जो तृप्ति का भाव था वह मेरे लिए अतुलनीय था ।
मेरे लिए सेवा पूजा का सर्वोच्च रूप और सर्वोत्तम तपस्या है ।

देनहार कोउ ओर है भेजत सो दिन रैन ।लोग भरम हम पर धरैंयाते नीचे नैन ।।संस्कारधानी जबलपुर में पैदल चलने वाले सभी परिक्रमावा...
17/12/2025

देनहार कोउ ओर है
भेजत सो दिन रैन ।
लोग भरम हम पर धरैं
याते नीचे नैन ।।
संस्कारधानी जबलपुर में पैदल चलने वाले सभी परिक्रमावासियों का स्वागत है ।

21/09/2025

एक आश्रम की आत्मकथा
मैं एक आश्रम हूं , वह भी नर्मदा खंड का आश्रम । पुण्य सलिला , मेकलसुता , शिव तनया , करुणामयी , कलिकाल पाप - ताप- संताप हरणी , जगत जननी राजराजेश्वरी मां नर्मदा के किनारे खड़ा हूं । जिनके दर्शन मात्र से पाप कट जाते हैं , उस मैया के आठों पहर दर्शन करते हुए अपने भाग्य पर इठलाता रहता हूं ।
आश्रम , शब्द श्रम से बना है । आश्रम अर्थात धार्मिक परिश्रम करते करते विश्रांति का स्थान । प्राचीन समय से ही मेरा बहुत महत्व रहा है । प्राचीन मनीषियों ने मेरा बहुत ही सम्मान किया है । परिक्रमा , आश्रम व्यवस्था के बिना कठिन है । मेरे अनुसार परिक्रमा अर्थात ज्ञान एवं विज्ञान , लौकिक एवं परलौकिक , कर्म एवं धर्म तथा भोग और त्याग का अद्भुत समन्वय । परिक्रमा करते हुए अपना आध्यात्मिक विकास करके मोक्ष की ओर अग्रसर होना है ।
मैं ऋषि-मुनियों के निवास स्थान से भी जाना जाता हूं । नर्मदा खंड में सातों कल्पों में देवी , देवता , गंधर्व , ऋषि मुनि सभी ने तपस्या की है और सभी ने अपनी कुटिया बनाई होगी । आज भी संत महात्माओं ने स्थान - स्थान पर आश्रम खड़े किए हैं , आप लोगों की सेवा के लिए । मुझे भी एक महात्मा जी ने बनवाया है , यह सोच कर कि वे अपनी साधना भी करेंगे और परिक्रमा वासियों की सेवा भी करेंगे । महात्मा जी बड़े प्रेम से आने वाले हर भक्तों की सेवा करते हैं । उनका मानना है कि भक्त के साथ मैया आश्रम में आती है और वह मैया की सेवा करते हैं । नित्य प्रतिदिन अलग-अलग परिक्रमावासियों को देखता हूं , सबकी पूजा-पाठ देखता हूं और हर्षित होता रहता हूं । मैया के प्रति अगाध श्रद्धा देखता हूं तो नतमस्तक हो जाता हूं । मैया की उनके ऊपर होने वाली विशेष कृपा के किस्से सुनना तो जैसे हररोज की मेरी दिनचर्या हो गई है । पहले तो मुझे आश्चर्य होता था , लेकिन अब तो गदगद होता रहता हूं , यह सोच कर कि मैया की लीला अपरंपार है ।
" नर्मदे हर " कहते हुए परिक्रमावासी आते हैं और मेरे से अपनी पीठ सटा कर बैठ जाते हैं । उस समय मेरा एक-एक कण नर्मदामय हो जाता है । आपस में बात करें या भोजन करें या विश्राम करें हर वक्त," हे नर्मदा मैया " से प्रारंभ होकर ," जैसी मैया की इच्छा " पर बात समाप्त होती है । बारह महीने चलने वाला यह क्रम मेरे गर्व को पोषित करता है । मेरी छत पर बैठ परिक्रमा वासी मैया की असीम सौंदर्य से अपनी आंखों को शांति प्रदान करता है ।उसका जल तो मानो अमृत है जिसके पान से असाधारण बीमारियां भी दूर हो जाती हैं ऐसा परिक्रमा वासी आपस में बात करते हैं और मैया के बखान करते हैं । मैं भी कान लगाकर उनकी बात सुनता हूं । एक संत तो बता रहे थे कि मैया के किनारे बैठकर साधना करो तो मोक्ष प्राप्ति होनी ही है । सारे तीर्थ इस में समाए हुए हैं । इनकी परिक्रमा करना तो स्वर्ग में भ्रमण करने के समान है ।
लेकिन कुछ वर्षों से मैं परिक्रमा और परिक्रमा वासियों में कुछ अंतर महसूस कर रहा हूं । परिक्रमा में पर्यटन ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कर ली है । जब मैं नया नया बना था तो देखता था कि महात्मा जी सबको सदाव्रत देते थे और अपनी साधना में तल्लीन रहते थे । लेकिन अब महात्मा जी सब की व्यवस्था करने में ही व्यस्त रहते हैं । इस कारण वे कभी कभी नाराज भी हो जाते हैं । कुछ वर्षों से बहुत अधिक संख्या में परिक्रमा वासियों के आगमन के कारण हमेशा भक्ति में लीन और आनंदित रहने वाले मेरे महात्मा जी अब चिंता में लीन रहते हैं । परिक्रमा वासियों के भोजन के लिए सीधा सामग्री की चिंता उन्हें लगी रहती है । मेरी व्यवस्था बनाए रखने के लिए और मेरे रखरखाव के लिए महात्मा जी को मदद मिलती रहती थी लेकिन यात्रियों की संख्या बढ़ने से यह मदद कम होने लगी । महात्मा जी अब मैया से हमेशा यही प्रार्थना करते रहते हैं कि उनकी लाज रखना , सबके लिए व्यवस्था हो जाए यह कृपा बनाए रखना ।
मैं जब परिक्रमावासियों के मुंह से दूसरे आश्रमों की व्यवस्थाओं पर टीका टिप्पणी सुनता हूं तो बहुत निराश हो जाता हूं । आश्रम , आश्रम होते हैं होटल नहीं । भोजन को लेकर वाद विवाद करते हैं परिक्रमावासी । पहले परिक्रमा वासी अपने हाथ से भोजन बनाकर खाते थे लेकिन आजकल मैं देख रहा हूं सबको बना बनाया भोजन चाहिए । आराम करने चाहिए क्योंकि तीस किलोमीटर चल के आ रहे हैं । मुझे बहुत क्रोध आता है । क्या आप महात्मा जी के लिए परिक्रमा कर रहे हैं ? या मैया के लिए परिक्रमा कर रहे हैं ? आप तो अपना जीवन सुधारने के लिए , मोक्ष प्राप्ति करने के लिए परिक्रमा कर रहे हैं ना ? तो फिर आप में संतुष्टि का भाव क्यों नहीं है ?
आप ही बताएं आश्रम मदद और दान से ही चलते हैं तो परिक्रमा वासियों की संख्या बढ़ी लेकिन दानदाताओं की संख्या क्यों नहीं बढ़ी ? परिक्रमा समाप्त कर घर जाने के बाद आपने मदद क्यों नहीं भेजी ? घर जाकर आप लोगों को बड़े-बड़े अनुभव सुनाते हैं कि हमें यह खाने की इच्छा हुई या हमें कुछ वस्तु चाहिए थी तो मैया ने हमें तुरंत उपलब्ध करवाई , लेकिन जिनके द्वारा उपलब्ध हुईं उनकी याद आपको क्यों नहीं आई ? नर्मदा खंड का हर आश्रम आपकी सहायता करता है तो आप क्यों पीछे रह गए सहायता करने में ?
महात्मा जी को बिजली का बिल भरने की चिंता , तेल मसाले लाने की चिंता , गैस सिलेंडर , लकड़ी खरीदने की चिंता रहती है , इन सब के लिए हमें आर्थिक मदद की आवश्यकता रहती है । मैं एक आश्रम आपसे करबद्ध निवेदन करता हूं कि हमें जीवित रखें , हमारी मदद करें जिससे हम आपके परिवार और गांव से आने वाले परिक्रमावासियों को आश्रय दे सकें ।
मैं और नर्मदा खंड के कई आश्रम आपके सहयोग की राह देख रहे हैं । हमें निराश ना करें नर्मदे हर !!!

सीमा वीरेंद्र का नर्मदे हर
यह निबंध जुलाई2023 में मैंने लिखा था और इसे लोगों ने बहुत ही पसंद किया मध्यप्रदेश सरकार के हिंदी विभाग भोपाल के एक सेमिनार में इसको पढ़ा भी गया । आज इसे फिर से पोस्ट कर रही हूं स्थिति आश्रमों की वही की वही बनी है ।
आप लोगों से नम्र विनती है हमें मदद करें आश्रमों के लिए छोटी-छोटी सुविधा जुटाने में हमारी मदद करें । मेरा नंबर 9821154745
9321388672
( कृपया इसे दूसरे ग्रुपों में फॉरवर्ड करें पर कॉपी पेस्ट कर लिखने की प्रेरणा देने वाली नर्मदा मैया का अपमान ना करें )

18/09/2025

सभी मैया भक्तों को मेरा नर्मदे हर । सितंबर महीना प्रारंभ होते ही लोगों के फोन और व्हाट्सएप पर मैसेज आना प्रारंभ हो गए पुस्तक के लिए । सभी को जवाब दे रही हूं लेकिन फेसबुक पर भी इसलिए लिख रही हूं जिससे अधिकांश लोगों तक यह बात पहुंच सके ।
आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद मुझे पर इतना विश्वास बनाए रखने के लिए और मैं पूरी मेहनत कर रही हूं आप सभी के विश्वास को बनाए रखने के लिए । कुछ निजी कार्य में 3 महीने से बहुत व्यस्त थी अब फिर से नए आश्रमों की लिस्ट पर काम करना प्रारंभ कर दिया है और बहुत जल्द नया पीडीएफ तैयार हो जाएगा आप सभी के लिए ।
3 वर्ष हो चुके हैं पुस्तक को । हर वर्ष पुस्तक को सही तरीके से अपडेट करती जा रही हूं और आप सभी के अमूल्य सुझाव को भी ध्यान में रखकर काम कर रही हूं । पुस्तक का पीडीएफ बनाना और छपवाना कठिन प्रक्रिया तो है लेकिन इससे ज्यादा कठिन प्रक्रिया पुस्तक पैक करना और पोस्ट ऑफिस की लाइन में घंटों लगना । पोस्ट होने के बाद एक-एक व्यक्ति को व्हाट्सएप पर ट्रैकिंग नंबर भेजना था । लेकिन मैंने 3 साल तक यह काम किया और अभी भी करने तैयार हूं लेकिन पोस्ट वालों ने अपने बहुत सारे नियमों में परिवर्तन किया है 1 सितंबर से । ज्ञान पोस्ट को बंद कर दिया है जिसके द्वारा पुस्तक कम कीमत में आप तक पहुंचती थी ।अब नए नियम अनुसार पुस्तक सिर्फ स्पीड पोस्ट से भेज सकते हैं।अब एक पुस्तक का₹50 कीमत ले रहे हैं । छपाई ₹30 के आसपास और ₹50 पोस्ट का ₹80 में शायद आप तक पुस्तक पहुंचेगी ।
इसलिए मैंने विचार किया की आपको पीडीएफ दे दूं आप अपने शहर में उसका प्रिंट आउट निकाल सकते हैं । आजकल फोटो मशीन हर छोटे बड़े शहरों में मिल जाती है इसलिए आपको कोई परेशानी नहीं होगी और पीडीएफ निशुल्क है आपको उसका कोई शुल्क नहीं देना है ।
पीएफ तैयार होते ही फेसबुक पर सूचना दे दूंगी और बहुत सारे व्हाट्सएप ग्रुप द्वारा यह पीडीएफ हम बहुत लोगों तक पहुंचा सकेंगे ।
इसके अलावा भी आपको कोई परेशानी हो तो आप मुझे 9821154745 और9321388672 पर फोन कर सकते हैं । आपकी जो मदद मुझसे हो सकेगी उसके लिए मैं अवश्य प्रयास करूंगी ।
आप सभी के स्वस्थ जीवन की मंगल कामना के साथ सीमा वीरेंद्र का नर्मदे हर ।

सभी नर्मदा मैया भक्तों को और सभी परिक्रमा वासियों को मेरा सादर प्रणाम । चातुर्मास प्रारंभ हो चुका है आप सभी परिक्रमा करक...
17/07/2025

सभी नर्मदा मैया भक्तों को और सभी परिक्रमा वासियों को मेरा सादर प्रणाम । चातुर्मास प्रारंभ हो चुका है आप सभी परिक्रमा करके वापस अपने अपने घर कुशल मंगल पहुंच गये है। नर्मदा मैया से बिछोह आप सभी को बहुत साल रहा होगा । मन भाग भाग कर किसी किनारे पर पहुंच रहा होगा , जोर से नर्मदे हर बोलने का मन हो रहा होगा , बाबाजी आओ चाय पीलो सुनने को कान तरस रहे होंगे , रात में नींद नहीं आती है क्योंकि अब थकान नहीं होती , कितना सब छूट जाता है नर्मदा खंड में ।
नर्मदा खंड में सुविधाओं का अभाव है फिर भी आत्मीयता इतनी है कि उसके आगे सब गौण हो जाता है । वहां के आश्रम , वहां के लोग भुले नहीं भुलाये जाते होंगे ।
क्यों ना हम ऐसा कुछ करें कि हमारा उनका एक रिश्ता हमेशा के लिए बन जाए । उन्होंने तो आपके लिए बहुत किया अब बारी है आपकी कुछ करने की नर्मदा खंड को । हमारी मदद करें , हमारी जिम्मेदारी है आपकी दी हुई मदद नर्मदा खंड तक पहुंचाने की ।
नर्मदा निधि , मेरी कल्पना का मूर्त स्वरूप । नर्मदा खंड के हर आश्रम में शौचालय और महिलाओं के लिए स्नानगृह होना चाहिए ऐसा मेरा हमेशा से ही मत था और यह समय के अनुसार आवश्यक भी है ।गुडवारा स्थित मेरे छोटे से आश्रम में यह दोनों व्यवस्थाएं हैं । आश्रम में साफ सफाई को लेकर मेरा विशेष आग्रह रहता है इसलिए परिक्रमावासी बहुत ही प्रसन्न होते हैं आश्रम में आकर । इससे मेरा संकल्प और भी दृढ़ हो गया ।
समय के साथ प्रकृति में भी परिवर्तन हो रहा है और प्रकृति को संभालने के लिए , स्वच्छ रखने के लिए हमें भी अपनी कुछ परंपराओं में परिवर्तन लाना है ।
आश्रम छोटे बड़े बन जाते हैं लेकिन शौचालय निर्माण कोई नहीं सोचता । उसके पीछे भी कुछ कारण है जो मुझे आश्रमों से बातचीत के दौरान समझ में आए ।
सबसे पहला कारण परिक्रमावासियों का सफाई रखने में असहयोग । पानी की व्यवस्था होते हुए भी गंदगी बनाए रखते हैं इसलिए महंत लोग शौचालय के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं होते हैं क्योंकि उनका कहना है हम साधक लोगों के लिए आश्रम खोलकर बैठे हैं । गंदगी मचाने वालों के लिए नहीं ।
वे लोग बिल्कुल सही है । गांव के लोग अभी भी शौचालय होते हुए भी सफाई नहीं रखते हैं क्योंकि शौचालय की सफाई करना छोटे लोगों का काम मानते हैं । गांव में घर से थोड़ी दूर शौचालय होते हैं या बाहर होते हैं जो चतुर्थ वर्ग के लोग आकर साफ करते हैं । बड़े बूढ़े तो अभी भी खेतों में चले जाते हैं इसलिए उन्हें फ्लश करने की आदत ही नहीं होती है । लोग शौच उपरांत पानी डालने की समझ ही नहीं रखते हैं ।
उनसे उल्ट शहरों में रहने वाले व्यक्तियों को अपने घर के शौचालय साफ करने की आदत होती हैं ।
मैं जबलपुर से लेकर अमरकंटक तक के कई आश्रमों से निरंतर संपर्क में रहती हूं और बातचीत करती हूं इस मुद्दे को लेकर । कई आश्रम वालों से गांव के लोग भी नाराज रहते हैं क्योंकि परिक्रमा वासी शौचालय नहीं होने के कारण आसपास गंदगी करते हैं । अब कुछ आश्रमों को राजी किया है आश्रम में शौचालय निर्माण के लिए ।
नर्मदा निधि को खड़ा करने के लिए हाथ बढ़ाया है नर्मदा संवर्धन परिवार नामक एक समूह ने जो हमेशा से मेरा सहयोगी रहा है । मेरे प्रतिदिन ₹10 एकत्र करने के विचार को इस परिवार के सभी सदस्यों ने झटपट अमल में लिया और मुझे प्रोत्साहन दिया इस कार्य को करने के लिए ।
नर्मदा निधि को बनाने में एक परिक्रमा वासी का भी हाथ है , जिनके सुझाव को हमने अमल किया और नर्मदा निधि द्वारा शौचालय का सपना साकार हो गया ।
मैं हमेशा से ही काम करने में विश्वास करती हूं । बड़ी बड़ी बातें फेसबुक पर करने में मुझे बिल्कुल भी रुचि नहीं हैं । आज तक मैंने जो किया है उसी की फेसबुक पर चर्चा की है इसलिए लोगों ने मेरे पर विश्वास जताया है । लोग अच्छे से जानते हैं की दीदी को मदद की है तो उससे क्या काम होता है फोटो सहित उन्हें भेजा जाता है देखने के लिए । मैंने नर्मदा खंड के लिए हाथ फैलाए हैं और लोगों ने मदद भी की है चाहे ओंकारेश्वर में आई बाढ़ हो , मंडला डिंडोरी क्षेत्र के लिए कंबल और गद्दी की व्यवस्था हो , राशन की व्यवस्था , सोलर लाइट , पानी की व्यवस्था । कुछ काम कर लिए और बहुत काम करने बाकी है।
अब चर्चा करते हैं नर्मदा निधि किस तरह से काम करती है । नर्मदा निधि में प्रतिदिन ₹10 और महीने का ₹300 रु की राशि के साथ सदस्य बनाते हैं । नर्मदा संवर्धन परिवार के एडमिन सुभाष जोशी , अश्विनी , मानसी सामंत , जागृति , मनीष और मैं । सुभाष जोशी आर्थिक लेनदेन संभालते हैं । मेरा काम आश्रमों से बातचीत करके उन्हें शौचालय के लिए तैयार करना और उसके निर्माण की प्रक्रिया को बनाना । हम लोग दुकान वालों से सीधा संपर्क करके उनसे बिल बनवाते हैं उसे ग्रुप में भेजते हैं । सभी सदस्यों को देखने के लिए और सीधा दुकान वाले के खाते में पेमेंट करते हैं और इसका सीधा स्क्रीनशॉट ग्रुप में भेजते हैं । इससे पूरी पारदर्शिता बनी रहती है ।
मार्च महीने से प्रारंभ हुई नर्मदा निधि संकलन के सहयोग से सबसे पहला प्रोजेक्ट जबलपुर के पास मेरेगांव में वृंदावन ढाबा में 3 शौचालय का
निर्माण करके उपयोग के लिए खोल दिया गया है ।
दूसरा प्रोजेक्ट मंडला के पास बिलगढा रैयत में अमर दास जी महाराज के आश्रम में महिलाओं के लिए स्नानगृह और दो शौचालय का निर्माण हो गया है भारी वर्षा के कारण टाइल्स लगने का काम बाकी रह गया है
। अमरकंटक के पास हरई गांव में शौचालय का काम चल रहा है भारी वर्षा के कारण वह काम अभी रूका हुआ है । इसके अलावा छोटे-मोटे कई काम चल रहे हैं आश्रमों के , जिन्हें मेरे और दूसरे सहयोगीयों द्वारा मदद दी जाती है । आने वाले वर्षों में मैया की कृपा से और आप सभी के सहयोग से बहुत से काम करना है । इसलिए आप सभी से हाथ जोड़कर विनती है की नर्मदा निधि के द्वारा हमें शौचालय निर्माण और आश्रमों में कार्य करने के लिए सहयोग प्रदान करें।
नर्मदा निधि के संचालक
सुभाष जोशी पुणे से हैं
8484025571
मैं सीमा चौधरी
98211 54745 सहयोग के लिए हमारे फोन नंबर दिए हैं आप संपर्क कर सकते हैं ।
आप सभी के स्वस्थ जीवन की मंगलमय शुभकामनाओं के साथ सीमा वीरेंद्र का नर्मदे हर

नर्मदा निधि , मेरी  कल्पना का मूर्त स्वरूप । नर्मदा खंड के हर आश्रम में शौचालय और महिलाओं के लिए स्नानगृह होना चाहिए ऐसा...
01/06/2025

नर्मदा निधि , मेरी कल्पना का मूर्त स्वरूप । नर्मदा खंड के हर आश्रम में शौचालय और महिलाओं के लिए स्नानगृह होना चाहिए ऐसा मेरा हमेशा से ही मत था और यह समय के अनुसार आवश्यक भी है ।गुडवारा स्थित मेरे छोटे से आश्रम में यह दोनों व्यवस्थाएं हैं । आश्रम में साफ सफाई को लेकर मेरा विशेष आग्रह रहता है इसलिए परिक्रमावासी बहुत ही प्रसन्न होते हैं आश्रम में आकर । इससे मेरा संकल्प और भी दृढ़ हो गया ।
समय के साथ प्रकृति में भी परिवर्तन हो रहा है और प्रकृति को संभालने के लिए , स्वच्छ रखने के लिए हमें भी अपनी कुछ परंपराओं में परिवर्तन लाना है ।
आश्रम छोटे बड़े बन जाते हैं लेकिन शौचालय निर्माण कोई नहीं सोचता । उसके पीछे भी कुछ कारण है जो मुझे आश्रमों से बातचीत के दौरान समझ में आए ।
सबसे पहला कारण परिक्रमावासियों का सफाई रखने में असहयोग । पानी की व्यवस्था होते हुए भी गंदगी बनाए रखते हैं इसलिए महंत लोग शौचालय के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं होते हैं क्योंकि उनका कहना है हम साधक लोगों के लिए आश्रम खोलकर बैठे हैं । गंदगी मचाने वालों के लिए नहीं ।
वे लोग बिल्कुल सही है । गांव के लोग अभी भी शौचालय होते हुए भी सफाई नहीं रखते हैं क्योंकि शौचालय की सफाई करना छोटे लोगों का काम मानते हैं । गांव में घर से थोड़ी दूर शौचालय होते हैं या बाहर होते हैं जो चतुर्थ वर्ग के लोग आकर साफ करते हैं । बड़े बूढ़े तो अभी भी खेतों में चले जाते हैं इसलिए उन्हें फ्लश करने की आदत ही नहीं होती है । लोग शौच उपरांत पानी डालने की समझ ही नहीं रखते हैं ।
उनसे उल्ट शहरों में रहने वाले व्यक्तियों को अपने घर के शौचालय साफ करने की आदत होती हैं ।
मैं जबलपुर से लेकर अमरकंटक तक के कई आश्रमों से निरंतर संपर्क में रहती हूं और बातचीत करती हूं इस मुद्दे को लेकर । कई आश्रम वालों से गांव के लोग भी नाराज रहते हैं क्योंकि परिक्रमा वासी शौचालय नहीं होने के कारण आसपास गंदगी करते हैं । अब कुछ आश्रमों को राजी किया है आश्रम में शौचालय निर्माण के लिए ।
नर्मदा निधि को खड़ा करने के लिए हाथ बढ़ाया है नर्मदा संवर्धन परिवार नामक एक समूह ने जो हमेशा से मेरा सहयोगी रहा है । मेरे प्रतिदिन ₹10 एकत्र करने के विचार को इस परिवार के सभी सदस्यों ने झटपट अमल में लिया और मुझे प्रोत्साहन दिया इस कार्य को करने के लिए ।
नर्मदा निधि को बनाने में एक परिक्रमा वासी का भी हाथ है , जिनके सुझाव को हमने अमल किया और नर्मदा निधि द्वारा शौचालय का सपना साकार हो गया ।
मैं हमेशा से ही काम करने में विश्वास करती हूं । बड़ी बड़ी बातें फेसबुक पर करने में मुझे बिल्कुल भी रुचि नहीं हैं । आज तक मैंने जो किया है उसी की फेसबुक पर चर्चा की है इसलिए लोगों ने मेरे पर विश्वास जताया है । लोग अच्छे से जानते हैं की दीदी को मदद की है तो उससे क्या काम होता है फोटो सहित उन्हें भेजा जाता है देखने के लिए । मैंने नर्मदा खंड के लिए हाथ भी फैलाए हैं और लोगों ने मदद भी की है चाहे ओंकारेश्वर में आई बाढ़ हो , मंडला डिंडोरी क्षेत्र के लिए कंबल और गद्दी की व्यवस्था हो , राशन की व्यवस्था , सोलर लाइट , पानी की व्यवस्था । कुछ काम कर लिए और बहुत काम करने बाकी है।
अब चर्चा करते हैं नर्मदा निधि किस तरह से काम करती है । नर्मदा निधि में प्रतिदिन ₹10 और महीने का ₹300 रु की राशि के साथ सदस्य बनाते हैं । नर्मदा संवर्धन परिवार के एडमिन सुभाष जोशी , अश्विनी , मानसी सामंत , जागृति , मनीष और मैं । सुभाष जोशी आर्थिक लेनदेन संभालते हैं । मेरा काम आश्रमों से बातचीत करके उन्हें शौचालय के लिए तैयार करना और उसके निर्माण की प्रक्रिया को बनाना । हम लोग दुकान वालों से सीधा संपर्क करके उनसे बिल बनवाते हैं उसे ग्रुप में भेजते हैं । सभी सदस्यों को देखने के लिए और सीधा दुकान वाले के खाते में पेमेंट करते हैं और इसका सीधा स्क्रीनशॉट ग्रुप में भेजते हैं । इससे पूरी पारदर्शिता बनी रहती है ।
मार्च महीने से प्रारंभ हुई नर्मदा निधि संकलन के सहयोग से सबसे पहला प्रोजेक्ट जबलपुर के पास मेरेगांव में वृंदावन ढाबा में 3 शौचालय
निर्माण ।
दूसरा प्रोजेक्ट मंडला के पास बिलगढा रैयत में अमर दास जी महाराज के आश्रम में महिलाओं के लिए स्नानगृह और दो शौचालय का निर्माण
दोनों स्थान पर काम चल रहा है । गांव होने के कारण सभी स्थानों पर समय लग रहा है पर वह दिन भी दूर नहीं है जब शौचालय का निर्माण पूरा हो ही जाएगा ।
इसके अलावा छोटे-मोटे कई काम चल रहे हैं आश्रमों के , जिन्हें मेरे और दूसरे सहयोगीयों द्वारा मदद दी जाती है । आने वाले वर्षों में मैया की कृपा से और आप सभी के सहयोग से बहुत से काम करना है । इसलिए आप सभी से हाथ जोड़कर विनती है की नर्मदा निधि के द्वारा हमें शौचालय निर्माण और आश्रमों में सहयोग प्रदान करें।
आप सभी के स्वस्थ जीवन की मंगलमय शुभकामनाओं के साथ सीमा वीरेंद्र का नर्मदे हर

09/05/2025

कृष्ण का सुदर्शन चक्र चल रहा है..
शिव का तीसरा नेत्र खुल रहा है .....

हे शिव पुत्री, हे जग जननी, रण भूमि में हमारे सैनिकों की भुजाओं में अपना बल और सामर्थ्य भर दो..
गर्जना कर चलती हुई तुम्हारी चाल ,
रास्ते में आने वाले सभी को विध्वंस करने वाली तुम्हारी शक्ति ।
तुम्हारी यह शक्ति हमारे सैनिकों में भर दो....

हिंद का मान और हमारी आन दोनो तेरे हाथ है मैया ....
दुशमन दल को विध्वंस कर दो , उसे तोड़ डालो , फोड़ डालो जैसे तुम बड़ी चट्टानों को कंकर में बदल देती हो ....
जैसे तुम हर परिक्रमा वासी पर अपनी नजर रखती हो उनका ध्यान रखती हो , उसे भूखा प्यास नहीं रखती हो वैसे ही इस भारत खंड के प्रत्येक सैनिक पर अपनी नजर रखना उसकी रक्षा करना , उसका ध्यान रखना ....

मैं भी एक मां हूं और आप तो 130 करोड लोगों की भोली भाली मैया हो , लेकिन मैं आज आपसे जगदंबा का रूप धारण करने के लिए प्रार्थना कर रही हूं 🙏🙏🙏🙏🙏🙏

हम सभी की प्रार्थना को स्वीकार करना मैया 🙏🙏🙏🙏🙏🙏

आज सीमा वीरेंद्र का हे रेवा मैया आपको नर्मदे हर 🙏🙏🙏🙏🙏

जीवन जीना और जीवन जीते हुए इसे सार्थक बनाना दोनों में अंतर हैं । संसार में हम सभी जीवन तो जी रहे हैं परंतु हमारा जीवन सा...
31/03/2025

जीवन जीना और जीवन जीते हुए इसे सार्थक बनाना दोनों में अंतर हैं । संसार में हम सभी जीवन तो जी रहे हैं परंतु हमारा जीवन सार्थक और सफल इसमें ही है कि जहां तक हो सके अपने शरीर से , धन से , विवेक विचार से , वाणी से ऐसे कर्म किए जाएं जिनसे दूसरों की भलाई हो , किसी का अहित न हो । इन्हीं कर्मों से भगवान भी प्रसन्न होते हैं और यही जीवन की सार्थकता है ।
शशिकांत सिंग तोमर ,42 वर्षीय सज्जन , दयालु और परोपकारी , नर्मदा मैया के सेवक । शहपुरा - भीटोनी मार्ग जिला जबलपुर के निवासी । जिन्हें दिन-रात परिक्रमावासियों के बालभोग ,भोजन और विश्राम की चिंता हैं इसलिए तोमर जी और उनकी पत्नी सुबह से पोहा बनाने की तैयारी में लग जाते हैं । पोहा बनाकर डब्बे में पैक करते हैं और मोटरसाइकिल लेकर एक परिचित की दुकान से रोज सुबह गरम जलेबी पैक करवाते हैं । इसके साथ ही इनकी रोज की दिनचर्या प्रारंभ हो जाती है 10 से 15 किलोमीटर के दायरे में चलने वाले परिक्रमावासियों को जहां मिल जाए वही बिठाकर पोहा , गरम जलेबी खिलाते हैं । साथ ही यह भी बताते हैं कि आगे उनके भोजन और विश्राम की व्यवस्था कहां है । निस्वार्थ सेवा का एक सुंदर उदाहरण है शशिकांतसिंग तोमर ।
आज से कुछ वर्ष पूर्व शशिकांतजी कुछ भी नहीं जानते थे परिक्रमा के बारे में और आज भी कुछ खास जानकारी नहीं रखते हैं । लेकिन उनके द्वारा बाल भोग पाने वाला हर परिक्रमावासी उन्हें जानता है । उत्तर तट के हाईवे पर परिक्रमा वासियों को बालभोग कराते हैं , मैया के तट पर भी चले जाते हैं । तट से चलने वाले परिक्रमावासीयों को भी बालभोग करवाते हैं । अगर उन्हें कोई परिक्रमावासी दक्षिण तट पर लौटते समय याद करता है तो सामने दक्षिण तट पर भी चले जाते हैं बाल भोग और भोजन लेकर ।
व्यवसाय से धरतीपुत्र किसान है। अपने खेत पर जाने से पहले मैया की सेवा करते हैं । 2019 के लॉकडाउन में उन्होंने उस मार्ग से चलने वाले परिक्रमा वासियों को दिन-रात बालभोग और भोजन कराया । पत्नी और बच्चे भी उनके साथ शामिल हो गए इस सेवा कार्य में । इसके बाद तो जैसे सेवा की धुन सवार हो गई और आज तक वह यही कार्य बड़े उत्साह और प्रेम से बिना थके कर रहे हैं । संघ के सिपाही है, संघ के नियमों का कड़ाई से पालन भी करते हैं ।
21 दिन मेरा अन्नक्षेत्र चलता है तो भोजन के लिए मेरा पता परिक्रमावासीयो को बताते हैं और मुझे भी खबर करते हैं की दीदी इतने परिक्रमवासी आ रहे हैं आपके पास । बुजुर्ग परिक्रमावासीयों का सामान भी मोटरसाइकिल पर रखकर मेरे यहां रख जाते हैं । कभी-कभी मेरे लिए भी गरम जलेबी लेकर आते हैं और बड़े प्रेम से खिलाकर जाते हैं ।
शशिकांत जी छोटे भाई के समान है इसलिए हमेशा कहते रहते हैं दीदी आप आदेश करो बस । नर्मदा परिक्रमा को लेकर कई प्रश्न भी पूछते हैं और बड़े भोलेपन से कहते भी हैं कि आपसे जुड़े हैं ना दीदी धीरे-धीरे परिक्रमा के बारे में सब जान जाएंगे । परिक्रमावासियों के हाथ में मार्गदर्शीका पुस्तक देखकर बड़े गर्व से बताते हैं कि यह हमारी दीदी है और जिनके पास पुस्तक नहीं रहती है उन्हें पीडीएफ दे देते हैं ।
मार्च आखिर से गर्मी प्रारंभ हो जाती है । मेरे एक बहुत ही अच्छे सहयोगी हर वर्ष हमें गर्मियों का श्रेष्ठ भोजन सत्तू और धूप से बचाव के लिए गमछे की मदद करते हैं जिन्हें हम परिक्रमा वासियों को बांटते है
हमारे जबलपुर क्षेत्र में।
इस वर्ष यह जिम्मेदारी मैंने तोमर जी को सौंप दी है और वह प्रेम से हर परिक्रमावासी तक इसे पहुंचा रहे हैं ।
रात के समय भी परिक्रमवासी जहां रुकते हैं कभी कभार वहां पहुंच जाते हैं और भी जो सेवा बन सकती है वह करते हैं ।
1 महीने पहले दो परिक्रमावासियों से इसी क्षेत्र में नशा करके तीन युवकों ने मोबाइल और पैसे छुड़ा लिए थे ।जब मुझे इसके बारे में पता चला और मैंने यह खबर तोमर जी को और जबलपुर में रहने वाले पुलिस डिपार्टमेंट के हमारे सहयोगियों को दी । हम सभी ने इस केस में बहुत मेहनत की और तोमर जी को ही सबसे पहले इन युवकों के बारे में पता चला और उन्हीं की बदौलत 8 दिन के अंदर उन आरोपियों को पकड़ लिया गया और पैसे , मोबाइल बरामद कर लिए ।
शशिकांत सिंग तोमर उन लोगों के लिए प्रेरणा स्रोत हैं। जो सेवा तो करना चाहते हैं पर जिनके पास आश्रम नहीं है या जिन्हें प्रश्न रहता है कि हम क्या सेवा करें और कैसे करें । शशिकांत जैसे दयालु सेवकों के कारण ही परिक्रमा वासियों को सेवा मिलती है ।
नर्मदा खंड इन्हीं सेवाधारियों पर गर्व करता है जिनके कारण परिक्रमावसियों का श्रद्धा और विश्वास बना रहता है । जिनके कारण घर जाने के बाद में हर परिक्रमावासी यह विश्वास पूर्वक कहता है कि मैया किसी को भूखा नहीं रखती है । शशिकांत सिंग तोमर जी जैसे सेवाधारीयों को नर्मदा खंड की तरफ से सादर प्रणाम है ।
आप सभी के स्वास्थ्य जीवन की मंगल कामना के साथ
सीमा वीरेंद्र का
नर्मदे हर 🙏

नर्मदे हर , सभी मैया भक्तों को । बहुत व्यस्तता वाला समय रहता हैअन्न क्षेत्र का । 15 दिन पहले से तैयारी और 15 दिन बाद तक ...
17/02/2025

नर्मदे हर , सभी मैया भक्तों को । बहुत व्यस्तता वाला समय रहता हैअन्न क्षेत्र का । 15 दिन पहले से तैयारी और 15 दिन बाद तक समेटने में समय निकल जाता है । व्हाट्सएप पर बहुत संदेश थे कि दीदी अन्न क्षेत्र के अनुभव के बारे में कुछ बताये । सभी को बड़ी उत्सुकता है जानने की ।
अन्नक्षेत्र तो माई की कृपा से हमेशा की तरह बहुत ही आत्मसंतोष और ऊर्जा दे जाता है । मैया की कृपा से परिक्रमावासियों के साथ-साथ स्थानिक लोगों से भी बहुत सहयोग मिलता है वह मेरे लिए किसी पुरस्कार मिलने के समान है । 10 वर्ष हो गए लेकिन आज तक कोई भी खराब अनुभव नहीं हुआ है ।
लेकिन एक बात अवश्य कहूंगी इस बार महाकुंभ का आकर्षण परिक्रमा वासियों को भी खींच कर ले गया । उन्हें परिक्रमा से विमुख कर गया और नियमों की तो धज्जियां उड़ा दी । जिन्हें पहले से कुंभ की जानकारी थी , उन्होंने तो दशहरे से ही परिक्रमा प्रारंभ कर दी और दौड़ लगाते हुए कुछ वाहनों में बैठते हुए येन केन प्रकारेण परिक्रमा पूरी करके कुंभ में भागे थे । परिक्रमावासियों का इस तरह का पलायन मन को अखर गया । कुछ लोगों के पास तो बाकायदा नक्शा गांव के नाम सहित बना हुआ था की किस तरह से वाहन में बैठ बैठ के अमरकंटक और फिर वहां से ओम्कारेश्वर पहुंचना है । कुछ लोगों तो जबलपुर तक चल कर आए फिर वहां से आठ लोगों ने मिलकर एक किराए की गाड़ी लेकर प्रयागराज गए दो-चार दिन मेले में घूम वापस जबलपुर आकर फिर से परिक्रमा प्रारंभ कर दी । कुछ परिक्रमा वासी तो मुझसे ही मदद मांग रहे थे कि हम अपना झोला आपके पास रख कर जाते हैं और वापस लौट कर यहीं से परिक्रमा प्रारंभ कर देंगे । सोशल मीडिया के प्रचार ने परिक्रमा वासियों के दिल दिमाग को भी बदल दिया था । मोक्ष दायिनी को छोड़कर एक डुबकी लगाकर मोक्ष प्राप्ति की इच्छा कर रहे थे । कुछ जो पैदल ही चल रहे थे वह दौड़ लगा रहे थे ज्यादा से ज्यादा शॉर्टकट अपना रहे थे और किसी भी तरह से ओंकारेश्वर पहुंचकर महाशिवरात्रि से पहले प्रयागराज में स्नान के लिए पहुंचाना चाह रहे थे ।आगे जैसी मैया की इच्छा ।
अन्न क्षेत्र में आने वाले सभी परिक्रमावासी बहुत ही प्रेम से मिलते हैं और एक परिवार की तरह हो जाते हैं मेरे साथ । कुछ परिक्रमा वासियों की तो परिक्रमा पूर्ण भी हो रही है और वह मुझे फोन करके बताते हैं और मार्गदर्शिका के लिए धन्यवाद देते हैं । कुछ परिक्रमा वासी गुडवारा के हमारे छोटे से आश्रम पहुंचकर भी प्रसन्न हो जाते हैं और वहां से फोन करते हैं कि हम यहां पर भी रुके हैं ।मुझे हमेशा ही परिक्रमावासियों से इतना प्रेम मिला है , इतना सम्मान मिला है जिसकी कोई सीमा नहीं है । इसके साथ-साथ आप सभी को भी धन्यवाद देना है कि कहीं ना कहीं इस यात्रा में आपकी शुभकामनाएं , आपका आशीर्वाद भी मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण रहा हैं ।
जिंदगी आपको देती नहीं लौटाती है । मेहनत आपका इनपुट है और सफलता आउटपुट है अगर आउटपुट अच्छा चाहते हैं तो इनपुट में कोई कमी मत करिए ।
मैं हमेशा इस वाक्य के साथ जीना चाहती हूं कि मैंने जो भी कार्य करने का संकल्प लिया उसमें मैंने अपनी तरफ से कोई कसर नहीं छोड़ी । चाहे वह सेवा का क्षेत्र हो या आश्रमों को मदद पहुंचाने का हो या मार्गदर्शीका बनाने का , मैया के आशीर्वाद से अपने संकल्पों को पूरा करके ही दम लिया है ।
मार्गदर्शिका को परिक्रमा वासियों ने इतना सराहा है की मुझे यह समझ में आया की सफलता किसी की मोहताज नहीं होती बस आपके जुनून और मेहनत की भूखी होती है । मार्गदर्शिका के लिए मैं सभी उन सभी परिक्रमावासियों , आश्रम , सेवाधारियों को हृदय से धन्यवाद देती हूं जिन्होंने इसे वर्तमान की सबसे सफलतम मार्गदर्शिका बनाने में मेरी साहायता की है और आशा नहीं अपितु विश्वास है कि आगे भी आप सभी मेरा मार्गदर्शन करते रहेंगे । इस वर्ष सितंबर के महीने में ही इस पुस्तक को अपडेट करके निशुल्क पीडीएफ आप तक पहुंचाने का मेरा प्रयास रहेगा ।
क्योंकि 4000 पुस्तक छपवाना और इन्हें पैकिंग करना और फिर पोस्ट करना बहुत ही मेहनत का काम था और इसमें मुझे समय भी बहुत लगता था । लेकिन परिवार के सहयोग से यह कार्य भी तीन वर्ष कर लिया । पुस्तकों ने 3 साल में मुझे बहुत कड़वे अनुभव दिए हैं । लेकिन उन्हें भूलना ही अच्छा है । इस वर्ष 99% आश्रम इस मार्गदर्शिका में जुड़ जायेंगे। मैं मैया की अपार कृपा से अनुग्रहित हूं ।
मैया का आशीर्वाद मेरे साथ साथ आप सभी पर भी बना रहे ,
आप सभी के स्वस्थ जीवन की कामना के साथ सीमा वीरेंद्र का नर्मदे हर 🙏

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